পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উত্তম ক্রয়-বিক্রয়ের ফযীলত

৭৮২. রিফা’আহ বিন রাফি’ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জিজ্ঞাসিত হয়েছিলেন- ’কোন প্রকারের জীবিকা উত্তম?’ উত্তরে তিনি বললেন— নিজ হাতের কামাই এবং সৎ ব্যবসায়। -হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

عَنْ رِفَاعَةَ بْنِ رَافِعٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - سُئِلَ: أَيُّ الْكَسْبِ أَطْيَبُ? قَالَ: «عَمَلُ الرَّجُلِ بِيَدِهِ, وَكُلُّ بَيْعٍ مَبْرُورٍ». رَوَاهُ الْبَزَّارُ، وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه البزار (2/ 83 / كشف الأستار)، الحاكم (2/ 10) قلت: وقد اختُلف في إسناده، وأيضًا اختلف في وصله وإرساله، فرجّح بعضهم الإرسال. قلت: ولكن للحديث شواهد منها ما رواه الطبراني في «الأوسط» (1944 / مجمع) من حديث ابن عمر بسند لا بأس به

عن رفاعة بن رافع - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - سىل: اي الكسب اطيب? قال: «عمل الرجل بيده, وكل بيع مبرور». رواه البزار، وصححه الحاكم - صحيح. رواه البزار (2/ 83 / كشف الاستار)، الحاكم (2/ 10) قلت: وقد اختلف في اسناده، وايضا اختلف في وصله وارساله، فرجح بعضهم الارسال. قلت: ولكن للحديث شواهد منها ما رواه الطبراني في «الاوسط» (1944 / مجمع) من حديث ابن عمر بسند لا باس به

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - যে সমস্ত ক্ৰয়-বিক্রয় নিষেধ করা হয়েছে

৭৮৩. জাবির ইবনু ’আবদুল্লাহ (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, তিনি আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে মক্কাহ বিজয়ের বছর মক্কাহয় অবস্থানকালে বলতে শুনেছেন : আল্লাহ তা’আলা ও তাঁর রসূল হারাম করে দিয়েছেন মদ, মৃতপ্রাণী, শূকর ও মূর্তি ক্রয় বিক্রয়। তাঁকে জিজ্ঞেস করা হলো, হে আল্লাহর রসূল! মৃত জন্তুর চর্বি সম্পর্কে আপনি কী বলেন? তা দিয়ে তো নৌকায় প্রলেপ দেয়া হয় এবং চামড়া তৈলাক্ত করা হয়। আর লোকে তা প্ৰদীপ জ্বালিয়ে থাকে। তিনি বললেন, না, সেটিও হারাম। তারপর আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন, আল্লাহ তা’আলা ইয়াহুদীদের ধ্বংস করুন। আল্লাহ যখন তাদের জন্য মৃত জিনিসের চর্বি হারাম করে দেন, তখন তারা তা সংগ্রহ করে, তা বিক্রি করে তার মূল্য ভক্ষণ করে।[1]


ক্রেতা এবং বিক্রেতার মতবিরোধের বিধান

৭৮৩-১. ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছিঃ ক্রেতা ও বিক্রেতার মধ্যে মতবিরোধের সময় যদি কোন সাক্ষ্য প্রমাণ না থাকে সেক্ষেত্রে বিক্রেতার কথাই গ্রহণযোগ্য হবে নতুবা তারা চুক্তি বাতিল করবে। —হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[2]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا: أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ عَامَ الْفَتْحِ, وَهُوَ بِمَكَّةَ: إِنَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ حَرَّمَ بَيْعَ الْخَمْرِ, وَالْمَيْتَةِ, وَالْخِنْزِيرِ, وَالْأَصْنَامِ
فَقِيلَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، أَرَأَيْتَ شُحُومَ الْمَيْتَةِ, فَإِنَّهُ تُطْلَى بِهَا السُّفُنُ, وَتُدْهَنُ بِهَا الْجُلُودُ, وَيَسْتَصْبِحُ بِهَا النَّاسُ فَقَالَ: «لَا، هُوَ حَرَامٌ» , ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عِنْدَ ذَلِكَ: «قَاتَلَ اللَّهُ الْيَهُودَ, إِنَّ اللَّهَ لَمَّا حَرَّمَ عَلَيْهِمْ شُحُومَهَا جَمَلُوهُ, ثُمَّ بَاعُوهُ, فَأَكَلُوا ثَمَنَهُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2236)، ومسلم (1581)، وجملوه، أذابوه

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما: انه سمع رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول عام الفتح, وهو بمكة: ان الله ورسوله حرم بيع الخمر, والميتة, والخنزير, والاصنام فقيل: يا رسول الله، ارايت شحوم الميتة, فانه تطلى بها السفن, وتدهن بها الجلود, ويستصبح بها الناس فقال: «لا، هو حرام» , ثم قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عند ذلك: «قاتل الله اليهود, ان الله لما حرم عليهم شحومها جملوه, ثم باعوه, فاكلوا ثمنه». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2236)، ومسلم (1581)، وجملوه، اذابوه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - নিকৃষ্ট উপাৰ্জনসমূহ

৭৮৪. আবূ মাস’উদ আনসারী (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নিষেধ করেছেন কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারের বিনিময় এবং গণকের পারিশ্রমিক (গ্রহণ করতে)।[1]

وَعَنْ أَبِي مَسْعُودٍ - رضي الله عنه: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ ثَمَنِ الْكَلْبِ, وَمَهْرِ الْبَغِيِّ, وَحُلْوَانِ الْكَاهِنِ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2237)، ومسلم (1567) قلت: وفي الحديث تحريم ثلاثة أشياء: الأول: تحريم ثمن الكلب، وهو عامّ يشمل كل كلب، كما هو قول مالك، والشافعي. الثاني: تحريم مهر البغيّ، وهو ما تأخذه الزانية على الزنا. الثالث: تحريم حُلْوان الكاهن، وهو ما يأخذه الكاهن على كهانته، وهو حرام بالإجماع لما فيه من أخذ العِوض على أمر باطل، وفي معناه التنجيم، والضرب بالحصى، وغير ذلك مما يتعاطاه العرّافون من استطلاع الغيب

وعن ابي مسعود - رضي الله عنه: ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - نهى عن ثمن الكلب, ومهر البغي, وحلوان الكاهن. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2237)، ومسلم (1567) قلت: وفي الحديث تحريم ثلاثة اشياء: الاول: تحريم ثمن الكلب، وهو عام يشمل كل كلب، كما هو قول مالك، والشافعي. الثاني: تحريم مهر البغي، وهو ما تاخذه الزانية على الزنا. الثالث: تحريم حلوان الكاهن، وهو ما ياخذه الكاهن على كهانته، وهو حرام بالاجماع لما فيه من اخذ العوض على امر باطل، وفي معناه التنجيم، والضرب بالحصى، وغير ذلك مما يتعاطاه العرافون من استطلاع الغيب

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - বিক্রিত দ্রব্য থেকে সুবিধা পাওয়ার জন্য শর্তারোপ করার বিধান

৭৮৫. জাবির ইবনু ’আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত— তিনি একটা উটের উপর উপবিষ্ট ছিলেন। উটটি অচল হয়ে যাওয়াতে তাকে ছেড়ে দেয়ার ইরাদা করলেন; তিনি বলেন, তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাথে আমার সাক্ষাৎ হলে তিনি আমার জন্য দু’আ করলেন, আর উটটিকে প্রহার করলেন, তারপর থেকে উটটি এমন গতিতে চলতে লাগল। যা ইতিপূর্বে আর চলেনি। তারপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে বললেন- তুমি একে আমার নিকট এক উকিয়াহর বিনিময়ে বিক্রি কর। আমি বললাম, না। অতঃপর দ্বিতীয়বার তিনি বললেন, এটা আমার কাছে বিক্রি কর। ফলে আমি ঐট তাঁর নিকট এক উকিয়াহর মূল্যে বিক্রি করে দিলাম এবং বাড়ি পর্যন্ত তার উপর চড়ে যাবার শর্ত করে নিলাম। যখন বাড়ি পৌছালাম তখন উটটি নিয়ে তাঁর নিকটে এলাম। ফলে সেটির নগদ মূল্য তিনি দিয়ে দিলেন। তারপর ফিরে আসছি। এমন সময় তিনি আমার পেছনে লোক পাঠালেন এবং আমাকে বললেন- তুমি কি মনে করছ যে, আমি তোমার উটটি কম মূল্য দিয়ে নিতে চাচ্ছি- তুমি তোমার উট ও দিরহামগুলো নাও, এ (সবাই) তোমার জন্য। -এ (শব্দের) ধারাবাহিকতা মুসলিমের।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا: أَنَّهُ كَانَ [يَسِيرُ] عَلَى جَمَلٍ لَهُ أَعْيَا. فَأَرَادَ أَنْ يُسَيِّبَهُ. قَالَ: فَلَحِقَنِي النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - فَدَعَا لِي, وَضَرَبَهُ، فَسَارَ سَيْرًا لَمْ يَسِرْ مِثْلَهُ, قَالَ: «بِعْنِيهِ بِوُقِيَّةٍ» قُلْتُ: لَا. ثُمَّ قَالَ: «بِعْنِيهِ» فَبِعْتُهُ بِوُقِيَّةٍ, وَاشْتَرَطْتُ حُمْلَانَهُ إِلَى أَهْلِي, فَلَمَّا بَلَغْتُ أَتَيْتُهُ بِالْجَمَلِ, فَنَقَدَنِي ثَمَنَهُ, ثُمَّ رَجَعْتُ فَأَرْسَلَ فِي أَثَرِي. فَقَالَ: «أَتُرَانِي مَاكَسْتُكَ لِآخُذَ جَمَلَكَ خُذْ جَمَلَكَ وَدَرَاهِمَكَ فَهُوَ لَكَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَهَذَا السِّيَاقُ لِمُسْلِمٍ

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صحيح. رواه البخاري (2861) مطوّلًا، وفي غير هذا الموطن مختصرًا. ورواه مسلم (3/ 1221 / رقم 109)

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما: انه كان [يسير] على جمل له اعيا. فاراد ان يسيبه. قال: فلحقني النبي - صلى الله عليه وسلم - فدعا لي, وضربه، فسار سيرا لم يسر مثله, قال: «بعنيه بوقية» قلت: لا. ثم قال: «بعنيه» فبعته بوقية, واشترطت حملانه الى اهلي, فلما بلغت اتيته بالجمل, فنقدني ثمنه, ثم رجعت فارسل في اثري. فقال: «اتراني ماكستك لاخذ جملك خذ جملك ودراهمك فهو لك». متفق عليه, وهذا السياق لمسلم - صحيح. رواه البخاري (2861) مطولا، وفي غير هذا الموطن مختصرا. ورواه مسلم (3/ 1221 / رقم 109)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - “মুদাব্বার” গোলাম বিক্রির বিধান

৭৮৬. জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কোন এক সাহাবী তাঁর একমাত্র দাসকে মুদাব্বের করে মুক্ত করার ব্যবস্থা করেন। সেটি ছাড়া তার আর কোন সম্পদ ছিল না। ফলে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দাসটিকে নিয়ে ডেকে আনালেন ও বিক্রি করে দিলেন।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: أَعْتَقَ رَجُلٌ مِنَّا عَبْدًا لَهُ عَنْ دُبُرٍ لَمْ يَكُنْ لَهُ مَالٌ غَيْرُهُ. فَدَعَا بِهِ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - فَبَاعَهُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2141)، وأقرب ألفاظ البخاري للفظ الذي ذكره الحافظ فهو برقم (2534) و (7186) وأما لفظ مسلم (997) عن جابر قال: أعتق رجل من بني عُذْرة عبدًا له عن دُبُر. فبلغ ذلك رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فقال: «ألك مال غيره؟» فقال: لا. فقال: «من يشتريه مني»؟ فاشتراه نُعيم بن عبد الله العدوي بثمانمائة درهم، فجاء بها رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فدفعها إليه. ثم قال: «ابدأ بنفسك، فتصدق عليها، فإن فضَل شيء فلأهلك، فإن فضل عن أهلك شيء فلذي قرابتك، فإن فضل عن ذي قرابتك شيء، فهكذا. وهكذا» يقول: فبين يديك، وعن يمينك، وعن شمالك قلت: وقوله: «عن دُبُر»: أي: علق عتقه بموته، كأن يقول: أنت حر بعد وفاتي

وعنه قال: اعتق رجل منا عبدا له عن دبر لم يكن له مال غيره. فدعا به النبي - صلى الله عليه وسلم - فباعه. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2141)، واقرب الفاظ البخاري للفظ الذي ذكره الحافظ فهو برقم (2534) و (7186) واما لفظ مسلم (997) عن جابر قال: اعتق رجل من بني عذرة عبدا له عن دبر. فبلغ ذلك رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فقال: «الك مال غيره؟» فقال: لا. فقال: «من يشتريه مني»؟ فاشتراه نعيم بن عبد الله العدوي بثمانماىة درهم، فجاء بها رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فدفعها اليه. ثم قال: «ابدا بنفسك، فتصدق عليها، فان فضل شيء فلاهلك، فان فضل عن اهلك شيء فلذي قرابتك، فان فضل عن ذي قرابتك شيء، فهكذا. وهكذا» يقول: فبين يديك، وعن يمينك، وعن شمالك قلت: وقوله: «عن دبر»: اي: علق عتقه بموته، كان يقول: انت حر بعد وفاتي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ইঁদুর পড়ে যাওয়া ঘিয়ের বিধান

৭৮৭. নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর স্ত্রী মাইমুনাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, ঘি-এর মধ্যে পড়ে ইঁদুর মারা যাওয়া সম্বন্ধে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বললেন, ইঁদুরটিকে উঠিয়ে ফেলে তার চারপাশের ঘি ফেলে দিয়ে তা খাও। -আহমাদ ও নাসায়ী বৃদ্ধি করেছেন: “জমে যাওয়া ঘি-এর জন্য (এরূপ ব্যবস্থা)”।[1]

وَعَنْ مَيْمُونَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ - صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ, وَرَضِيَ عَنْهَا -; أَنَّ فَأْرَةً وَقَعَتْ فِي سَمْنٍ, فَمَاتَتْ فِيهِ, فَسُئِلَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - عَنْهَا. فَقَالَ: «أَلْقُوهَا وَمَا حَوْلَهَا, وَكُلُوهُ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ
وَزَادَ أَحْمَدُ. وَالنَّسَائِيُّ: فِي سَمْنٍ جَامِدٍ

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صحيح. رواه البخاري (5540)
رواه النسائي (7/ 178)، وأحمد (6/ 330)

وعن ميمونة زوج النبي - صلى الله عليه وسلم, ورضي عنها -; ان فارة وقعت في سمن, فماتت فيه, فسىل النبي - صلى الله عليه وسلم - عنها. فقال: «القوها وما حولها, وكلوه». رواه البخاري وزاد احمد. والنساىي: في سمن جامد - صحيح. رواه البخاري (5540) رواه النساىي (7/ 178)، واحمد (6/ 330)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ মাইমূনাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ইঁদুর পড়ে যাওয়া ঘিয়ের বিধান

৭৮৮. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- যদি জমা ঘি-এর মধ্যে ইঁদুর পড়ে তাহলে ইঁদুরটি ও তার আশেপাশের ঘি ফেলে দাও, আর যদি ঘি তরল হয় তাহলে (ঘি নেয়ার জন্য) এগিয়ো না। (তা সম্পূর্ণ গ্রহণের অনুপযোগী)। -বুখারী ও আবূ হাতিম এ হাদীসের রাবীর উপর অহমের হুকুম জারী করেছেন (তার স্মৃতিশক্তি ছিল দুর্বল)।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا وَقَعَتِ الْفَأْرَةُ فِي السَّمْنِ, فَإِنْ كَانَ جَامِدًا فَأَلْقُوهَا وَمَا حَوْلَهَا, وَإِنْ كَانَ مَايِعًا فَلَا تَقْرَبُوهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَقَدْ حَكَمَ عَلَيْهِ الْبُخَارِيُّ وَأَبُو حَاتِمٍ بِالْوَهْمِ

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رواه أحمد (2/ 232 و 233 و 265 و 490)، وأبو داود (3842) من طريق معمر، عن الزهري، عن ابن المسيب، عن أبي هريرة به. والقول في الحديث ما قاله البخاري وأبو حاتم، فأما قول البخاري، فقد قال الترمذي في «السنن» (4/ 226): «هذا خطأ. أخطأ فيه معمر». وقال أبو حاتم فيما نقله عنه ابنه في «العِلل» (2/ 12 / 1507): وهم

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اذا وقعت الفارة في السمن, فان كان جامدا فالقوها وما حولها, وان كان مايعا فلا تقربوه». رواه احمد, وابو داود, وقد حكم عليه البخاري وابو حاتم بالوهم - رواه احمد (2/ 232 و 233 و 265 و 490)، وابو داود (3842) من طريق معمر، عن الزهري، عن ابن المسيب، عن ابي هريرة به. والقول في الحديث ما قاله البخاري وابو حاتم، فاما قول البخاري، فقد قال الترمذي في «السنن» (4/ 226): «هذا خطا. اخطا فيه معمر». وقال ابو حاتم فيما نقله عنه ابنه في «العلل» (2/ 12 / 1507): وهم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - কুকুর এবং বিড়াল ক্ৰয় বিক্রয়ের বিধান

৭৮৯. আবূ যুবাইর (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি জাবির (রাঃ)-কে বিড়াল ও কুকুরের মূল্য (এর বৈধাবৈধ) সম্বন্ধে জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর কারণে ধমক দিয়েছেন। --নাসায়ীতে রয়েছে শিকারী কুকুরের মূল্য ব্যতীত। অর্থাৎ শিকারী কুকুরের মূল্য বৈধ।[1]

وَعَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ قَالَ: سَأَلْتُ جَابِرًا عَنْ ثَمَنِ السِّنَّوْرِ وَالْكَلْبِ فَقَالَ: زَجَرَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ ذَلِكَ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ
وَالنَّسَائِيُّ وَزَادَ: إِلَّا كَلْبَ صَيْدٍ

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صحيح. رواه مسلم (1569)
رواه النسائي (7/ 190 و 309) وقال في الموطن الأول: «ليس بصحيح» وقال في الثاني: منكر

وعن ابي الزبير قال: سالت جابرا عن ثمن السنور والكلب فقال: زجر النبي - صلى الله عليه وسلم - عن ذلك. رواه مسلم والنساىي وزاد: الا كلب صيد - صحيح. رواه مسلم (1569) رواه النساىي (7/ 190 و 309) وقال في الموطن الاول: «ليس بصحيح» وقال في الثاني: منكر

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবুয্ যুবায়র (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - শরীয়ত সম্মত সকল শর্তের বৈধতা এবং এছাড়া অন্য সকল শর্ত বাতিল বলে গন্য হওয়া

৭৯০. ’আয়িশা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, বারীরাহ (রাঃ) আমার কাছে এসে বলল, আমি আমার মালিক পক্ষের সাথে নয় উকিয়া দেয়ার শর্তে মুকাতাবা[1] করেছি- প্রতি বছর যা হতে এক উকিয়া করে দিতে হবে। আপনি (এ ব্যাপারে)। আমাকে সাহায্য করুন। আমি বললাম, যদি তোমার মালিক পক্ষ পছন্দ করে যে, আমি তাদের একবারেই তা পরিশোধ করব এবং তোমার ওয়ালা-এর অধিকার আমার হবে, তবে আমি তা করব। তখন বারীরাহ (রাঃ) তার মালিকদের নিকট গিয়ে তা বলল। তারা তাতে অস্বীকৃতি জানাল। বারীরাহ (রাঃ) তাদের নিকট হতে (আমার কাছে) এল। আর তখন আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সেখানে উপস্থিত ছিলেন। সে বলল, আমি (আপনার) সে কথা তাদের কাছে পেশ করেছিলাম। কিন্তু তারা নিজেদের জন্য ওয়ালার অধিকার সংরক্ষণ ছাড়া রায়ী হয়নি।

নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তা শুনলেন, ’আয়িশা (রাঃ) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে তা সবিস্তারে জানালেন। তিনি বললেন, তুমি তাকে নিয়ে নাও এবং তাদের জন্য ওয়ালার শর্ত মেনে নাও। কেননা, ওয়ালা এর হক তারই, যে আযাদ করে। ’আয়িশা (রাঃ) তাই করলেন। এরপর আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জনসমক্ষে দাঁড়িয়ে আল্লাহর হামদ ও সানা বর্ণনা করলেন। তারপর বললেন, লোকদের কী হলো যে, তারা আল্লাহর বিধান বহির্ভূত শর্তারোপ করে। আল্লাহর বিধানে যে শর্তের উল্লেখ নেই, তা বাতিল বলে গণ্য, একশত শর্ত করলেও না। আল্লাহর ফায়সালাই সঠিক, আল্লাহর শর্তই সুদৃঢ়। ওয়ালার হাক্ব তো তারই, যে মুক্ত করে। শব্দ বিন্যাস বুখারীর। মুসলিমে আছে- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আয়িশা (রাঃ)-কে বললেন, তাকে কিনে নাও, তাদের জন্য অলা-র শর্ত কর।[2]

وَعَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- قَالَتْ: جَاءَتْنِي بَرِيرَةُ, فَقَالَتْ: كَاتَبْتُ أَهْلِي عَلَى تِسْعٍ أُوَاقٍ, فِي كُلِّ عَامٍ أُوقِيَّةٌ, فَأَعِينِينِي. فَقُلْتُ: إِنْ أَحَبَّ أَهْلُكِ أَنْ أَعُدَّهَا لَهُمْ وَيَكُونَ وَلَاؤُكِ لِي فَعَلْتُ, فَذَهَبَتْ بَرِيرَةُ إِلَى أَهْلِهَا. فَقَالَتْ لَهُمْ; فَأَبَوْا عَلَيْهَا, فَجَاءَتْ مِنْ عِنْدِهِمْ, وَرَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - جَالِسٌ. فَقَالَتْ: إِنِّي قَدْ عَرَضْتُ ذَلِكَ عَلَيْهِمْ فَأَبَوْا إِلَّا أَنْ يَكُونَ الْوَلَاءُ لَهُمْ, فَسَمِعَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - فَأَخْبَرَتْ عَائِشَةُ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم -. فَقَالَ: «خُذِيهَا وَاشْتَرِطِي لَهُمُ الْوَلَاءَ, فَإِنَّمَا الْوَلَاءُ لِمَنْ أَعْتَقَ» فَفَعَلَتْ عَائِشَةُ, ثُمَّ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فِي النَّاسِ [خَطِيبًا] , فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ. ثُمَّ قَالَ: «أَمَّا بَعْدُ, مَا بَالُ رِجَالٍ يَشْتَرِطُونَ شُرُوطًا لَيْسَتْ فِي كِتَابِ اللَّهِ - عز وجل - مَا كَانَ مِنْ شَرْطٍ لَيْسَ فِي كِتَابِ اللَّهِ فَهُوَ بَاطِلٌ, وَإِنْ كَانَ مِائَةَ شَرْطٍ, قَضَاءُ اللَّهِ أَحَقُّ, وَشَرْطُ اللَّهِ أَوْثَقُ, وَإِنَّمَا الْوَلَاءُ لِمَنْ أَعْتَقَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ
وَعِنْدَ مُسْلِمٍ فَقَالَ: اشْتَرِيهَا وَأَعْتِقِيهَا وَاشْتَرِطِي لَهُمُ الْوَلَاءَ

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صحيح. رواه البخاري (2168)، ومسلم (1504)

وعن عاىشة -رضي الله عنها- قالت: جاءتني بريرة, فقالت: كاتبت اهلي على تسع اواق, في كل عام اوقية, فاعينيني. فقلت: ان احب اهلك ان اعدها لهم ويكون ولاوك لي فعلت, فذهبت بريرة الى اهلها. فقالت لهم; فابوا عليها, فجاءت من عندهم, ورسول الله - صلى الله عليه وسلم - جالس. فقالت: اني قد عرضت ذلك عليهم فابوا الا ان يكون الولاء لهم, فسمع النبي - صلى الله عليه وسلم - فاخبرت عاىشة النبي - صلى الله عليه وسلم -. فقال: «خذيها واشترطي لهم الولاء, فانما الولاء لمن اعتق» ففعلت عاىشة, ثم قام رسول الله - صلى الله عليه وسلم - في الناس [خطيبا] , فحمد الله واثنى عليه. ثم قال: «اما بعد, ما بال رجال يشترطون شروطا ليست في كتاب الله - عز وجل - ما كان من شرط ليس في كتاب الله فهو باطل, وان كان ماىة شرط, قضاء الله احق, وشرط الله اوثق, وانما الولاء لمن اعتق». متفق عليه, واللفظ للبخاري وعند مسلم فقال: اشتريها واعتقيها واشترطي لهم الولاء - صحيح. رواه البخاري (2168)، ومسلم (1504)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উম্মুল আলাদ (যে দাসীর গর্ভে মনিবের সন্তান জন্মগ্রহন করেছে তার) বিক্রয়ের বিধান

৭৯১. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, উমার (রাঃ) জননী দাসী বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন, তিনি বলেছেন, বিক্রি করা যাবে না, হেবা (দান) করা যাবে না, ওয়ারিস হিসেবেও কেউ তাকে অধিগ্রহণ করতে পারবে না। তার মালিক যতদিন চাইবে ততদিন তার দ্বারা ফায়দা উঠাবে। মালিকের মৃত্যুর পর সে স্বাধীন হয়ে যাবে। —বাইহাকী বলেছেন- এ হাদীসের কিছু বর্ণনাকারী, অহম বা অনিশ্চয়তার ভিত্তিতে ’মারফূ’ বৰ্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: نَهَى عُمَرُ عَنْ بَيْعِ أُمَّهَاتِ الْأَوْلَادِ، فَقَالَ: لَا تُبَاعُ, وَلَا تُوهَبُ, وَلَا تُورَثُ, لِيَسْتَمْتِعْ بِهَا مَا بَدَا لَهُ، فَإِذَا مَاتَ فَهِيَ حُرَّةٌ. رَوَاهُ مَالِكٌ, وَالْبَيْهَقِيُّ, وَقَالَ: رَفَعَهُ بَعْضُ الرُّوَاةِ, فَوَهِمَ

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صحيح موقوفًا. رواه مالك في «الموطأ» (2/ 776 / 6)، والبيهقي في «الكبرى» (10/ 342 - 343) وقال البيهقي: «وغلط فيه بعض الرواة» فرفعه إلى النبي -صلى الله عليه وسلم-، وهو وَهْم لا يحل ذِكره

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما - قال: نهى عمر عن بيع امهات الاولاد، فقال: لا تباع, ولا توهب, ولا تورث, ليستمتع بها ما بدا له، فاذا مات فهي حرة. رواه مالك, والبيهقي, وقال: رفعه بعض الرواة, فوهم - صحيح موقوفا. رواه مالك في «الموطا» (2/ 776 / 6)، والبيهقي في «الكبرى» (10/ 342 - 343) وقال البيهقي: «وغلط فيه بعض الرواة» فرفعه الى النبي -صلى الله عليه وسلم-، وهو وهم لا يحل ذكره

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উম্মুল আলাদ (যে দাসীর গর্ভে মনিবের সন্তান জন্মগ্রহন করেছে তার) বিক্রয়ের বিধান

৭৯২. জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমরা জননী দাসী বিক্রি করে দিতাম। আর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদের মধ্যে জীবিত ছিলেন, এ বিষয়টিকে আমরা দোষ হিসেবে দেখতাম না। -ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: كُنَّا نَبِيعُ سَرَارِيَنَا, أُمَّهَاتِ الْأَوْلَادِ, وَالنَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - حَيٌّ, لَا نَرَى بِذَلِكَ بَأْسًا. رَوَاهُ النَّسَائِيُّ, وَابْنُ مَاجَهْ وَالدَّارَقُطْنِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه النسائي في «الكبرى» (3/ 199)، وابن ماجه (2517)، والدارقطني (4/ 135 / 37) وابن حبان (1215) قلت: وفي رواية أخرى لحديث جابر قال: بِعنا أمهات الأولاد على عهد رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، وأبي بكر، فلما كان عمر نهانا، فانتهينا

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: كنا نبيع سرارينا, امهات الاولاد, والنبي - صلى الله عليه وسلم - حي, لا نرى بذلك باسا. رواه النساىي, وابن ماجه والدارقطني, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه النساىي في «الكبرى» (3/ 199)، وابن ماجه (2517)، والدارقطني (4/ 135 / 37) وابن حبان (1215) قلت: وفي رواية اخرى لحديث جابر قال: بعنا امهات الاولاد على عهد رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، وابي بكر، فلما كان عمر نهانا، فانتهينا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উদ্ধৃত পানি বিক্রয় করা এবং মাদী জন্তুর উপর নর উঠানোর মজুরী গ্ৰহণ করা নিষেধ

৭৯৩। জাবির বিন আবদুল্লাহ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উদ্ধৃত্ত পানি বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।

(মুসলিমের) অন্য বর্ণনায় আছে- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নরকে মাদীর উপর (গর্ভসঞ্চারের উদ্দেশ্যে যৌন মিলন ঘটানোর ব্যবস্থা বিক্রি করতে) উঠাতে নিষেধ করেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: نَهَى النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ بَيْعِ فَضْلِ الْمَاءِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ
وَزَادَ فِي رِوَايَةٍ: وَعَنْ بَيْعِ ضِرَابِ الْجَمَلِ

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صحيح. رواه مسلم (1565)
صحيح مسلم (1565) (35) وتمامها: «وعن بيع الماء والأرض لتحرث، فعن ذلك نهى النبي -صلى الله عليه وسلم

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما- قال: نهى النبي - صلى الله عليه وسلم - عن بيع فضل الماء. رواه مسلم وزاد في رواية: وعن بيع ضراب الجمل - صحيح. رواه مسلم (1565) صحيح مسلم (1565) (35) وتمامها: «وعن بيع الماء والارض لتحرث، فعن ذلك نهى النبي -صلى الله عليه وسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উদ্ধৃত পানি বিক্রয় করা এবং মাদী জন্তুর উপর নর উঠানোর মজুরী গ্ৰহণ করা নিষেধ

৭৯৪. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পশুকে পাল দেয়া বাবদ বিনিময় নিতে নিষেধ করেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ عَسْبِ الْفَحْلِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2284) وعَسْب: بفتح فسكون. وهو ثمن ماء الفحل، وقيل: أُجرة الجماع. قاله الحافظ

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما- قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن عسب الفحل. رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2284) وعسب: بفتح فسكون. وهو ثمن ماء الفحل، وقيل: اجرة الجماع. قاله الحافظ

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - যে সমস্ত ব্যবসা নিষিদ্ধ

৭৯৫. ’আবদুল্লাহ ইবনু ’উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নিষেধ করেছেন গৰ্ভস্থত বাচ্চার গর্ভের প্রসবের মেয়াদের উপর বিক্রি করতে। এটি জাহিলিয়াতের যুগে প্রচলিত এক ধরনের বিক্রি ব্যবস্থা। কেউ এ শর্তে উটনী ক্রয় করত যে, এই উটনীটি প্রসব করবে। পরে ঐ শাবক। তার গৰ্ভ প্রসব করার পর তার মূল্য পরিশোধ করা হবে। —শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]

وَعَنْهُ; - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ حَبَلِ الْحَبَلَةِ, وَكَانَ بَيْعًا يَتَبَايَعُهُ أَهْلُ الْجَاهِلِيَّةِ: كَانَ الرَّجُلُ يَبْتَاعُ الْجَزُورَ إِلَى أَنْ تُنْتَجَ النَّاقَةُ, ثُمَّ تُنْتَجُ الَّتِي فِي بَطْنِهَا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

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صحيح. رواه البخاري (2143)، ومسلم (1514) قلت: ولمسلم صدر الحديث مثل لفظ البخاري، وأما باقيه فلفظه عنده: كان أهل الجاهلية يتبايعون لحم الجَزور إلى حبَل الحبَلة. وحبَل الحبَلة أن تُنْتَج الناقة، ثم تحمل التي نُتِجَت. فنهاهم رسول الله -صلى الله عليه وسلم- عن ذلك

وعنه; - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع حبل الحبلة, وكان بيعا يتبايعه اهل الجاهلية: كان الرجل يبتاع الجزور الى ان تنتج الناقة, ثم تنتج التي في بطنها. متفق عليه, واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (2143)، ومسلم (1514) قلت: ولمسلم صدر الحديث مثل لفظ البخاري، واما باقيه فلفظه عنده: كان اهل الجاهلية يتبايعون لحم الجزور الى حبل الحبلة. وحبل الحبلة ان تنتج الناقة، ثم تحمل التي نتجت. فنهاهم رسول الله -صلى الله عليه وسلم- عن ذلك

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ওয়ালা এর বিক্রয় এবং তা হেবা করা নিষেধ

৭৯৬. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’অলা’-এর বিক্রয় ও হেব্বা (দান)-কে নিষিদ্ধ করেছেন।[1]

وَعَنْهُ- أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ الْوَلَاءِ, وَعَنْ هِبَتِهِ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (6756)، ومسلم (1506)

وعنه- ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع الولاء, وعن هبته. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (6756)، ومسلم (1506)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ধোঁকা দিয়ে বিক্রি করা নিষেধ

৭৯৭. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নিষিদ্ধ করেছেন, কেনাবেচায় পাথর নিক্ষেপ প্ৰথা আর প্রতারণামূলক যাবতীয় ব্যবসায়।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ بَيْعِ الْحَصَاةِ, وَعَنْ بَيْعِ الْغَرَرِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1513)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن بيع الحصاة, وعن بيع الغرر. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1513)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - খাদ্য বস্তু হাতে আসার পূর্বেই মৌখিকভাবে বিক্রি করা নিষেধ

৭৯৮. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি খাদ্যবস্তু ক্রয় করলো, সে যেন তা না মেপে বিক্রি না করে।[1]

وَعَنْهُ: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنِ اشْتَرَى طَعَامًا فَلَا يَبِعْهُ حَتَّى يَكْتَالَهُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1528)

وعنه: ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «من اشترى طعاما فلا يبعه حتى يكتاله». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1528)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - এক জিনিস বিক্রির মধ্যে দুই জিনিস বিক্রি করার বিধান

৭৯৯. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম একই বিক্রয়ের মধ্যে দু’টি বিক্রয় সাব্যস্ত করাকে নিষিদ্ধ করেছেন। -তিরমিযী ও ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।

আবূ দাউদে আছে- যে ব্যক্তি একই বিক্রয়ের মধ্যে একাধিক বিক্রয় করতে চায় তার জন্য বিক্রয়টি কম-বেশী হবে—যা সুদ বলে গণ্য।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ بَيْعَتَيْنِ فِي بَيْعَةٍ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ
وَلِأَبِي دَاوُدَ: «مَنْ بَاعَ بَيْعَتَيْنِ فِي بَيْعَةٍ فَلَهُ أَوَكَسُهُمَا, أَوْ الرِّبَا

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حسن. رواه أحمد (2/ 432 و 475 و 503)، والنسائي (7/ 295 - 296)، والترمذي (1231)، وابن حبان (1109 موارد) عن طريق محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، به. وقال الترمذي: حديث حسن صحيح

رواه أبو داود (3460)

وعنه قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن بيعتين في بيعة. رواه احمد, والنساىي, وصححه الترمذي, وابن حبان ولابي داود: «من باع بيعتين في بيعة فله اوكسهما, او الربا - حسن. رواه احمد (2/ 432 و 475 و 503)، والنساىي (7/ 295 - 296)، والترمذي (1231)، وابن حبان (1109 موارد) عن طريق محمد بن عمرو، عن ابي سلمة، عن ابي هريرة، به. وقال الترمذي: حديث حسن صحيح رواه ابو داود (3460)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ক্রয় বিক্রয়ের কতিপয় মাসআলা

৮০০. ’আমর বিন শু’আইব (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে, তিনি তাঁর দাদা (রাঃ) হতে বর্ণনা করে বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- ’সালাফ ও বিক্রয় বৈধ নয়’। ’একই বিক্রয়ে দু’টি শর্ত বৈধ নয়’। ’যাতে কোন জিম্মাদারী নেই তাতে কোন লাভ নেই’। যা তোমার দখলে নেই তা বিক্রয়যোগ্যও নয়। -তিরমিযী, ইবনু খুযাইমাহ ও হাকিম সহীহ বলেছেন।[1]

ইমাম হাকিম উলূমুল হাদীস গ্রন্থে উপরোক্ত সাহাবী থেকেই ইমাম আবূ হানীফা (র.)-এর একটি বর্ণন উদ্ধৃত করেন, তাতে রয়েছে। রাসূলুল্লাহ্ শর্তারোপ করে বিক্রি করা নিষেধ করেছেন। ইমাম তাবারানীও তাঁর আওসাত গ্রন্থে একই সানাদে এ হাদীসটি বর্ণনা করেছেন, যা গরীব।[2]

وَعَنْ عَمْرِوِ بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَحِلُّ سَلَفٌ وَبَيْعٌ وَلَا شَرْطَانِ فِي بَيْعٍ, وَلَا رِبْحُ مَا لَمْ يُضْمَنْ, وَلَا بَيْعُ مَا لَيْسَ عِنْدَكَ». رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ خُزَيْمَةَ, وَالْحَاكِمُ

وَأَخْرَجَهُ فِي «عُلُومِ الْحَدِيثِ» مِنْ رِوَايَةِ أَبِي حَنِيفَةَ, عَنْ عَمْرٍو الْمَذْكُورِ بِلَفْظِ
نَهَى عَنْ بَيْعٍ وَشَرْطٍ» وَمِنْ هَذَا الْوَجْهِ أَخْرَجَهُ الطَّبَرَانِيُّ فِي «الْأَوْسَطِ» وَهُوَ غَرِيبٌ


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حسن. رواه أبو داود (3504)، والنسائي (7/ 288)، والترمذي (1234)، وابن ماجه (2188)، وأحمد (2/ 174 و 179 و 205) والحاكم (2/ 17) قوله: «سلف وبيع» قال ابن الأثير في «النهاية» (2/ 390): «هو مثل أن يقول: بعتك هذا العبد بألف على أن تسلفني ألفًا في متاع، أو على أن تقرضني ألفًا؛ لأنه إنما يُقرضه ليُحابيه في الثمن، فيدخل في حد الجهالة؛ ولأن كل قرض جر منفعة فهو رِبا؛ ولأن في العقد شرطًا لا يصح». قوله: «ولا شرطان في بيع» قال ابن الأثير (2/ 459): «هو كقولك: بعتك هذا الثوب نقدًا بدينار، ونسيئة بدينارين، وهو كالبيعتين في بيعة». قوله: «ولا ربح ما لم يضمن»: قال ابن الأثير (2/ 182): «هو أن يبيعه سلعة قد اشتراها ولم يكن قبضها بربح، فلا يصح البيع، ولا يحل الربح؛ لأنها في ضمان البائع الأول، وليست من ضمان الثاني، فربحها وخسارتها للأول». قوله: «وبيع ما ليس عندك»: قال الخطابي في «المعالم»: «يريد بيع العين دون بيع الصفة، ألا ترى أنه أجاز السلَم إلى الآجال، وهو بيع ما ليس عند البائع في الحال؟، وإنما نهى عن بيع ما ليس عند البائع من قبل الغرر، وذلك مثل أن يبيع عبد الآبق، أو جمله الشارد

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع, ولا ربح ما لم يضمن, ولا بيع ما ليس عندك». رواه الخمسة, وصححه الترمذي, وابن خزيمة, والحاكم واخرجه في «علوم الحديث» من رواية ابي حنيفة, عن عمرو المذكور بلفظ نهى عن بيع وشرط» ومن هذا الوجه اخرجه الطبراني في «الاوسط» وهو غريب - حسن. رواه ابو داود (3504)، والنساىي (7/ 288)، والترمذي (1234)، وابن ماجه (2188)، واحمد (2/ 174 و 179 و 205) والحاكم (2/ 17) قوله: «سلف وبيع» قال ابن الاثير في «النهاية» (2/ 390): «هو مثل ان يقول: بعتك هذا العبد بالف على ان تسلفني الفا في متاع، او على ان تقرضني الفا؛ لانه انما يقرضه ليحابيه في الثمن، فيدخل في حد الجهالة؛ ولان كل قرض جر منفعة فهو ربا؛ ولان في العقد شرطا لا يصح». قوله: «ولا شرطان في بيع» قال ابن الاثير (2/ 459): «هو كقولك: بعتك هذا الثوب نقدا بدينار، ونسيىة بدينارين، وهو كالبيعتين في بيعة». قوله: «ولا ربح ما لم يضمن»: قال ابن الاثير (2/ 182): «هو ان يبيعه سلعة قد اشتراها ولم يكن قبضها بربح، فلا يصح البيع، ولا يحل الربح؛ لانها في ضمان الباىع الاول، وليست من ضمان الثاني، فربحها وخسارتها للاول». قوله: «وبيع ما ليس عندك»: قال الخطابي في «المعالم»: «يريد بيع العين دون بيع الصفة، الا ترى انه اجاز السلم الى الاجال، وهو بيع ما ليس عند الباىع في الحال؟، وانما نهى عن بيع ما ليس عند الباىع من قبل الغرر، وذلك مثل ان يبيع عبد الابق، او جمله الشارد

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - “উরবুন” নামক বিক্রির বিধান

৮০১. আমার বিন শু’আইবের সূত্রে উক্ত রাবী হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ (দুঃ) ’উরবান’* নামক ক্ৰয়-বিক্রয় নিষেধ করেছেন। বর্ণনাকারী ইমাম মালিক; তিনি বলেন, হাদীসটি ’আমর বিন শু’আইব এর সূত্রে পৌছেছে।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ بَيْعِ الْعُرْبَانِ. رَوَاهُ مَالِكٌ, قَالَ: بَلَغَنِي عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, بِهِ

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ضعيف. رواه مالك في «الموطأ» (2/ 609 / 1) عن الثقة عنده، عن عمرو به. ورواه أبو داود وابن ماجه من طريق مالك قال: بلغني عن عمرو بن شعيب، به. قلت: وسبب ضعفه جهالة الواسطة بين مالك وعمرو بن شعيب. والعُرْبان ويقال: عَرَبُون وعُرْبُون قال ابن الأثير في «النهاية»: قيل: «سمي بذلك؛ لأن فيه إعرابًا لعقد البيع، أي: إصلاحًا وإزالة فساد، لئلا يملكه غيره باشترائه». وقد فسر الإمام مالك في «الموطأ» فقال: «وذلك فيما نرى -والله أعلم- أن يشتري الرجل العبد أو الوليدة، أو يَتَكَارى الدابة، ثم يقول للذي اشترى منه أو تَكَارى منه: أعطيك دينارًا أو درهمًا أو أكثر من ذلك أو أقل على أني إن أخذت السلعة أو ركبت ما تكاريت منك فالذي أعطيتك هو من ثمن السلعة أو من كراء الدابة، وإن تركت ابتياع السلعة أو كراء الدابة فما أعطيتك، فهو لك باطل بغير شيء

وعنه قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن بيع العربان. رواه مالك, قال: بلغني عن عمرو بن شعيب, به - ضعيف. رواه مالك في «الموطا» (2/ 609 / 1) عن الثقة عنده، عن عمرو به. ورواه ابو داود وابن ماجه من طريق مالك قال: بلغني عن عمرو بن شعيب، به. قلت: وسبب ضعفه جهالة الواسطة بين مالك وعمرو بن شعيب. والعربان ويقال: عربون وعربون قال ابن الاثير في «النهاية»: قيل: «سمي بذلك؛ لان فيه اعرابا لعقد البيع، اي: اصلاحا وازالة فساد، لىلا يملكه غيره باشتراىه». وقد فسر الامام مالك في «الموطا» فقال: «وذلك فيما نرى -والله اعلم- ان يشتري الرجل العبد او الوليدة، او يتكارى الدابة، ثم يقول للذي اشترى منه او تكارى منه: اعطيك دينارا او درهما او اكثر من ذلك او اقل على اني ان اخذت السلعة او ركبت ما تكاريت منك فالذي اعطيتك هو من ثمن السلعة او من كراء الدابة، وان تركت ابتياع السلعة او كراء الدابة فما اعطيتك، فهو لك باطل بغير شيء

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - পন্য হাতে আসার পূর্বেই বিক্রি করা নিষেধ

৮০২. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি বাজারে জয়তুনের তেল ক্রয় করলাম। ক্রয় পাকাপাকি হবার পর একজন লোক আমার কাছে এসে আমাকে তাতে একটা ভাল লাভ দিতে চাইলো। আমিও তার হাতে হাত মেরে বিক্রয় পাকাপাকি করতে চাইলাম। হঠাৎ করে কোন লোক পেছন থেকে আমার হাত ধরে নিল। আমি পেছনে চেয়ে দেখলাম।— তিনি যায়দ বিন সাবেত (রাঃ)। তিনি বললেন, যেখানে ক্রয় করবেন ঐ স্থানে বিক্রয় করবেন না-যতক্ষণ না আপনার স্থানে নিয়ে না যান। অবশ্য রসূলুল্লাহ (১) ক্রয় করার স্থানে পণ্য বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন-যতক্ষণ না তা ক্রেতা তার ডেরায় বা স্থানে নিয়ে না যায়। -শব্দ বিন্যাস আবূ দাউদের। ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: ابْتَعْتُ زَيْتًا فِي السُّوقِ, فَلَمَّا اسْتَوْجَبْتُهُ لَقِيَنِي رَجُلٌ فَأَعْطَانِي بِهِ رِبْحًا حَسَنًا، فَأَرَدْتُ أَنْ أَضْرِبَ عَلَى يَدِ الرَّجُلِ، فَأَخَذَ رَجُلٌ مِنْ خَلْفِي بِذِرَاعِي، فَالْتَفَتُّ, فَإِذَا هُوَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ, فَقَالَ: لَا تَبِعْهُ حَيْثُ ابْتَعْتَهُ حَتَّى تَحُوزَهُ إِلَى رَحْلِكَ; فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى أَنْ تُبَاعَ السِّلَعُ حَيْثُ تُبْتَاعُ, حَتَّى يَحُوزَهَا التُّجَّارُ إِلَى رِحَالِهِمْ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ وَاللَّفْظُ لَهُ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ وَالْحَاكِمُ

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حسن. رواه أحمد (5/ 191)، وأبو داود (3499)، وابن حبان (1120 موارد)، والحاكم (2/ 40)

وعن ابن عمر رضي الله عنهما قال: ابتعت زيتا في السوق, فلما استوجبته لقيني رجل فاعطاني به ربحا حسنا، فاردت ان اضرب على يد الرجل، فاخذ رجل من خلفي بذراعي، فالتفت, فاذا هو زيد بن ثابت, فقال: لا تبعه حيث ابتعته حتى تحوزه الى رحلك; فان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - نهى ان تباع السلع حيث تبتاع, حتى يحوزها التجار الى رحالهم. رواه احمد, وابو داود واللفظ له, وصححه ابن حبان والحاكم - حسن. رواه احمد (5/ 191)، وابو داود (3499)، وابن حبان (1120 موارد)، والحاكم (2/ 40)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - স্বর্ণমুদ্রার বদলে রৌপ্যমুদ্রা দিয়ে ক্ৰয়-বিক্রয় করা নিষেধ

৮০৩. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! অবশ্য আমি ’বাকী’ (নামক স্থানে) উট বিক্রয় করে থাকি; দীনারের বিনিময়ে বিক্রয়ের কথা বলে দিরহাম নিয়ে থাকি- আর দিরহামের বিনিময়ের কথা বলে দীনার নিয়ে থাকি। এটার পরিবর্তে এগুলো আর এগুলোর পরিবর্তে এটা। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, ঐ দিনের বাজার দরে নিলে তাতে দোষ নেই। তাহলে যেন একে অপর থেকে আলাদা হয়ে যাবার পূর্বেই তোমাদের মধ্যের (লেন-দেনের) আর কিছু বাকী না থাকে। — হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنِّي أَبِيعُ بِالْبَقِيعِ, فَأَبِيعُ بِالدَّنَانِيرِ وَآخُذُ الدَّرَاهِمَ, وَأَبِيعُ بِالدَّرَاهِمِ وَآخُذُ الدَّنَانِيرَ, آخُذُ هَذَا مِنْ هَذِهِ وَأُعْطِي هَذَهِ مِنْ هَذِا? فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا بَأْسَ أَنْ تَأْخُذَهَا بِسِعْرِ يَوْمِهَا مَا لَمْ تَتَفَرَّقَا وَبَيْنَكُمَا شَيْءٌ». رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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ضعيف مرفوعًا. رواه أحمد (2/ 33 و 83 - 84 و 139)، وأبو داود (3354 و 3355)، والنسائي (7/ 81 - 83)، والترمذي (1242)، وابن ماجه (2262)، والحاكم (2/ 44)، من طريق سِماك بن حرب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر، به. قلت: وعِلَّته سِماك بن حرب، فهو كما قال الحافظ في «التقريب»: صدوق، وروايته عن عكرمة خاصة مضطربة، وقد تغيّر بأخرة، فكان ربما يلقن. ولذلك قال الترمذي: «هذا حديث لا نعرفه مرفوعًا، إلا من حديث سماك بن حرب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر. وروى داود بن أبي هند هذا الحديث عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر موقوفًا». وقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 26): «روى البيهقي من طريق أبي داود الطيالسي قال: سئل شعبة عن حديث سماك هذا؟ فقال شعبة: سمعت أيوب، عن نافع، عن ابن عمر، ولم يرفعه، وحدثنا قتادة، عن سعيد بن المسيب، عن ابن عمر، ولم يرفعه. وحدثنا يحيى بن أبي إسحاق، عن سالم، عن ابن عمر، ولم يرفعه. ورفعه لنا سماك، وأنا أفرقه

وعنه قال: قلت: يا رسول الله! اني ابيع بالبقيع, فابيع بالدنانير واخذ الدراهم, وابيع بالدراهم واخذ الدنانير, اخذ هذا من هذه واعطي هذه من هذا? فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا باس ان تاخذها بسعر يومها ما لم تتفرقا وبينكما شيء». رواه الخمسة, وصححه الحاكم - ضعيف مرفوعا. رواه احمد (2/ 33 و 83 - 84 و 139)، وابو داود (3354 و 3355)، والنساىي (7/ 81 - 83)، والترمذي (1242)، وابن ماجه (2262)، والحاكم (2/ 44)، من طريق سماك بن حرب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر، به. قلت: وعلته سماك بن حرب، فهو كما قال الحافظ في «التقريب»: صدوق، وروايته عن عكرمة خاصة مضطربة، وقد تغير باخرة، فكان ربما يلقن. ولذلك قال الترمذي: «هذا حديث لا نعرفه مرفوعا، الا من حديث سماك بن حرب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر. وروى داود بن ابي هند هذا الحديث عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر موقوفا». وقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 26): «روى البيهقي من طريق ابي داود الطيالسي قال: سىل شعبة عن حديث سماك هذا؟ فقال شعبة: سمعت ايوب، عن نافع، عن ابن عمر، ولم يرفعه، وحدثنا قتادة، عن سعيد بن المسيب، عن ابن عمر، ولم يرفعه. وحدثنا يحيى بن ابي اسحاق، عن سالم، عن ابن عمر، ولم يرفعه. ورفعه لنا سماك، وانا افرقه

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ধোঁকা দেওয়া নিষেধ

৮০৪. ইবনু উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নাজশ বা ধোঁকা দিয়ে দাম বাড়ানোর কাজকে নিষিদ্ধ করেছেন।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: نَهَى - صلى الله عليه وسلم - عَنِ النَّجْشِ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2142)، ومسلم (1516) والنجْش: الزيادة في ثمن السلعة ممن لا يريد شرائها؛ ليغرّ بذلك غيره

وعنه قال: نهى - صلى الله عليه وسلم - عن النجش. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2142)، ومسلم (1516) والنجش: الزيادة في ثمن السلعة ممن لا يريد شراىها؛ ليغر بذلك غيره

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - কতিপয় লেনদেন নিষেধ

৮০৫. জাবির (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মুহাকালাহ (ওজন করা গমের বিনিময়ে জমির কোন শস্য বিক্রয় করা) মুযাবানাহ (গাছে লাগানো ফলকে শুকনো ফলের বিনিময়ে বিক্রয় করা); মুখাবারাহ (অর্থাৎ জমির অনির্দিষ্ট কিছু অংশ ভাড়া দেয়া) এবং সুনইয়াই (কোন বস্তুর সওদার সমষ্টি থেকে কিছু অংশ পৃথকীকরণকে) নিষিদ্ধ করেছেন- তবে তা নিশ্চিতভাবে জানা থাকলে দোষ নেই। তিরমিযী একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ الْمُحَاقَلَةِ, وَالْمُزَابَنَةِ, وَالْمُخَابَرَةِ, وَعَنْ الثُّنْيَا, إِلَّا أَنْ تُعْلَمَ - رَوَاهُ الْخَمْسَةُ إِلَّا اِبْنَ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ

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صحيح. رواه أبو داود (3405)، والنسائي (7/ 37 - 38)، والترمذي (1290)، وقال الترمذي: حديث حسن صحيح

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما-; - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن المحاقلة, والمزابنة, والمخابرة, وعن الثنيا, الا ان تعلم - رواه الخمسة الا ابن ماجه, وصححه الترمذي - صحيح. رواه ابو داود (3405)، والنساىي (7/ 37 - 38)، والترمذي (1290)، وقال الترمذي: حديث حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - কতিপয় লেনদেন নিষেধ

৮০৬. আনাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মুহাকালাহ; মুখাযারাহ (ব্যবহাররোপযোগী হয়নি এমন কাঁচা ফল বিক্রয় করা), মুলামাসাহ (বিক্রয়ের কাপড় না দেখেই হাত দিয়ে ছুয়ে বিক্রয় পাকা করা), মুনাবাযাহ (পণ্যদ্রব্য যেমন কাপড়কে ক্রেতা বিক্রেতা একে অপরের উপর নিক্ষেপ দ্বারা বিক্রয় পাকা করা) ও মুযাবানাহ (অর্থাৎ গাছে ফল থাকা অবস্থায় তা শুকনো ফলের বিনিময়ে বিক্রি করা)-এর বেচা-কেনা নিষিদ্ধ করেছেন।[1]

وَعَنْ أَنَسٍ - رضي الله عنه - قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنِ الْمُحَاقَلَةِ, وَالْمُخَاضَرَةِ, وَالْمُلَامَسَةِ, وَالْمُنَابَذَةِ, وَالْمُزَابَنَةِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2207) المُخَاضَرة: أي بيع الثمار والحبوب قبل أن يَبْدُو صلاحها

وعن انس - رضي الله عنه - قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن المحاقلة, والمخاضرة, والملامسة, والمنابذة, والمزابنة. رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2207) المخاضرة: اي بيع الثمار والحبوب قبل ان يبدو صلاحها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - বহিরাগত বিক্রেতার সঙ্গে সাক্ষাত করা এবং গ্রামবাসীর পক্ষে শহরবাসীর বিক্রয় করা নিষিদ্ধ

৮০৭. ত্বাউস থেকে বর্ণিত, তিনি ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেন, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমরা পণ্যবাহী কাফেলার সাথে (শহরে প্রবেশের পূর্বে সস্তায় পণ্য খরিদের উদ্দেশে) সাক্ষাৎ করবে না এবং শহরবাসী যেন গ্রামবাসীর পক্ষে বিক্রয় না করে। রাবী তাউস (রহ.) বলেন, আমি ইবনু ’আব্বাস (রাঃ)-কে জিজ্ঞেস করলাম, শহরবাসী যেন গ্রামবাসীর পক্ষে বিক্রয় না করে, তাঁর এ কথার অর্থ কী? তিনি বললেন, তার হয়ে যেন সে প্রতারণামূলক দালালী না করে। আব্বাসকে জিজ্ঞেস করলে তিনি বলেন, শহরে লোক গ্ৰাম্য লোকের (ক্রয়-বিক্রয়ে) যেন দালালী না করে। —শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]

وَعَنْ طَاوُسٍ, عَنِ اِبْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا تَلَقَّوْا الرُّكْبَانَ, وَلَا يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ». قُلْتُ لِابْنِ عَبَّاسٍ: مَا قَوْلُهُ: «وَلَا يَبِيعُ حَاضِرٌ لِبَادٍ?» قَالَ: لَا يَكُونُ لَهُ سِمْسَارًا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

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صحيح. رواه البخاري (2158)، ومسلم (1521)

وعن طاوس, عن ابن عباس -رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا تلقوا الركبان, ولا يبيع حاضر لباد». قلت لابن عباس: ما قوله: «ولا يبيع حاضر لباد?» قال: لا يكون له سمسارا. متفق عليه واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (2158)، ومسلم (1521)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ তাঊস (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - বহিরাগত বিক্রেতার সঙ্গে সাক্ষাত করা এবং গ্রামবাসীর পক্ষে শহরবাসীর বিক্রয় করা নিষিদ্ধ

৮০৮. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, পণ্য আমদানীকারীদের সাথে পথে গিয়ে ক্রয় করবে না; এভাবে ক্রয় করলে বিক্রেতা মোকামে পৌছে ঐ ক্রয় বাতিল করার অধিকারী হবে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا تَلَقَّوا الْجَلَبَ، فَمَنْ تُلُقِّيَ فَاشْتُرِيَ مِنْهُ, فَإِذَا أَتَى سَيِّدُهُ السُّوقَ فَهُوَ بِالْخِيَارِ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1519) والجلب: هو ما يجلب للبيع و «سيده «هو مالك المجلوب، ومعناه إذا جاء صاحب المتاع إلى السوق، وعرف السعر، فله الخيار في الاسترداد

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا تلقوا الجلب، فمن تلقي فاشتري منه, فاذا اتى سيده السوق فهو بالخيار». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1519) والجلب: هو ما يجلب للبيع و «سيده «هو مالك المجلوب، ومعناه اذا جاء صاحب المتاع الى السوق، وعرف السعر، فله الخيار في الاسترداد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - কোন ভাইয়ের বিক্রয়ের উপর বিক্রয় করা (কমমূল্যে বিক্রয় করার প্রস্তাব দেয়া) এবং কোন ভাইয়ের ক্রয়ের উপর ক্রয় করা (বেশী দাম দিয়ে ক্রয় করার প্রস্তাব দেওয়া) নিষিদ্ধ

৮০৯. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম গ্রামবাসীর পক্ষে শহরবাসী কর্তৃক বিক্রয় করা হতে নিষেধ করেছেন এবং তোমরা প্রতারণামূলক দালালী করবে না। কোন ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের ক্রয়-বিক্রয়ের উপর ক্ৰয়-বিক্রয় না করে।[1] কেউ যেন তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের উপর প্রস্তাব না দেয়। কোন মহিলা যেন তার বোনের (সতীনের) তালাকের দাবী না করে, যাতে সে তার পাত্রে যা কিছু আছে, তা নিজেই নিয়ে নেয়। (অর্থাৎ বর্তমান স্ত্রীর হক নষ্ট করে নিজে তা ভোগ করার জন্য) —মুসলিম শরীফে আরো আছে- কোন মুসলিম ভাইয়ের ক্রয় করার দরের উপরে দর করবে না।[2]

وَعَنْهُ قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ يَبِيعَ حَاضِرٌ لِبَادٍ, «وَلَا تَنَاجَشُوا, وَلَا يَبِيعُ الرَّجُلُ عَلَى بَيْعِ أَخِيهِ, وَلَا يَخْطُبُ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ, وَلَا تُسْأَلُ الْمَرْأَةُ طَلَاقَ أُخْتِهَا لِتَكْفَأَ مَا فِي إِنَائِهَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِمُسْلِمٍ: «لَا يَسُمِ الْمُسْلِمُ عَلَى سَوْمِ الْمُسْلِمِ

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صحيح. رواه البخاري (2140)، ومسلم (1515)، واللفظ للبخاري
مسلم (1515) (9) إلا أن الذي فيه: «على سوم أخيه» بدل: على سوم المسلم

وعنه قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان يبيع حاضر لباد, «ولا تناجشوا, ولا يبيع الرجل على بيع اخيه, ولا يخطب على خطبة اخيه, ولا تسال المراة طلاق اختها لتكفا ما في اناىها». متفق عليه ولمسلم: «لا يسم المسلم على سوم المسلم - صحيح. رواه البخاري (2140)، ومسلم (1515)، واللفظ للبخاري مسلم (1515) (9) الا ان الذي فيه: «على سوم اخيه» بدل: على سوم المسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - দাস-দাসীদের বিক্রির ক্ষেত্রে এদের আত্নীয়স্বজনের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটানো (অর্থাৎ একজনকে এক জায়গায় আর অন্যজনকে আরেক জায়গায় বিক্রি করা) নিষেধ

৮১০. আবূ আইউব আল-আনসারী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি, যে ব্যক্তি দাসী বিক্রয়কালে মাতা-পুত্রের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটায় পরকালে তার প্রিয়জনের থেকে আল্লাহ তাকে পৃথক করে দেবেন। —আহমাদ, তিরমিযী ও হাকিম হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন। কিন্তু তার সানাদ সম্বন্ধে বিরূপ বক্তব্য রয়েছে; এ হাদীসটির একটা শাহেদ বা সমর্থক রয়েছে।[1]

وَعَنْ أَبِي أَيُّوبَ الْأَنْصَارِيِّ - رضي الله عنه -[قَالَ]: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ: «مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ وَالِدَةٍ وَوَلَدِهَا, فَرَّقَ اللَّهُ بَيْنَهُ وَبَيْنَ أَحِبَّتِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَالْحَاكِمُ, وَلَكِنْ فِي إِسْنَادِهِ مَقَالٌ وَلَهُ شَاهِدٌ

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حسن. رواه أحمد (5/ 412) 413)، والترمذي (1283)، والحاكم (2/ 55)، من طريق حيي بن عبد الله المُعافري، عن أبي عبد الرحمن الحبلي قال: كنا في البحر، وعلينا عبد الله بن قيس الفزاري، ومعنا أبو أيوب الأنصاري، فمر بصاحب المقاسم، وقد أقام السبي، فإذا امرأة تبكي. فقال: ما شأن هذه؟ قالوا: فرقوا بينها وبين ولدها. قال: فأخذ بيد ولدها حتى وضعه في يدها، فانطلق صاحب المقاسم إلى عبد الله بن قيس فأخبره، فأرسل إلى أبي أيوب، فقال: ما حملك على ما صنعت؟ قال: سمعت رسول الله -صلى الله عليه وسلم: فذكر الحديث، وهذه القصة لأحمد دونهم. قلت: والمقال الذي في سنده من أجل حيي بن عبد الله، ولكنه ليس به بأس -إن شاء الله- كما قال ابن معين وغيره

وعن ابي ايوب الانصاري - رضي الله عنه -[قال]: سمعت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول: «من فرق بين والدة وولدها, فرق الله بينه وبين احبته يوم القيامة». رواه احمد, وصححه الترمذي, والحاكم, ولكن في اسناده مقال وله شاهد - حسن. رواه احمد (5/ 412) 413)، والترمذي (1283)، والحاكم (2/ 55)، من طريق حيي بن عبد الله المعافري، عن ابي عبد الرحمن الحبلي قال: كنا في البحر، وعلينا عبد الله بن قيس الفزاري، ومعنا ابو ايوب الانصاري، فمر بصاحب المقاسم، وقد اقام السبي، فاذا امراة تبكي. فقال: ما شان هذه؟ قالوا: فرقوا بينها وبين ولدها. قال: فاخذ بيد ولدها حتى وضعه في يدها، فانطلق صاحب المقاسم الى عبد الله بن قيس فاخبره، فارسل الى ابي ايوب، فقال: ما حملك على ما صنعت؟ قال: سمعت رسول الله -صلى الله عليه وسلم: فذكر الحديث، وهذه القصة لاحمد دونهم. قلت: والمقال الذي في سنده من اجل حيي بن عبد الله، ولكنه ليس به باس -ان شاء الله- كما قال ابن معين وغيره

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - দাস-দাসীদের বিক্রির ক্ষেত্রে এদের আত্নীয়স্বজনের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটানো (অর্থাৎ একজনকে এক জায়গায় আর অন্যজনকে আরেক জায়গায় বিক্রি করা) নিষেধ

৮১১. ’আলী ইবনু আবী তালিব (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে দু’টি দাসভাইকে বিক্রয়ের আদেশ দিয়েছিলেন। আমি তাদেরকে পৃথকভাবে বিক্রি করে দিয়েছিলাম। অতঃপর আমি এ কথা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জানালে তিনি বললেন, তাদেরকে পেলে ফেরত আনবে এবং তুমি তাদেরকে একত্রে বিক্রয় করবে। (অর্থ তারা দুইভাই যেন একত্রে বাস করতে পারে।) -এটির সকল বর্ণনাকারী নির্ভরযোগ্য; ইবনু খুযাইমাহ, ইবনু জারূদ, ইবনু হিব্বান, হাকিম, তাবারানী ও ইবনু কাত্তান এটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ - رضي الله عنه - قَالَ: أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ أَبِيعَ غُلَامَيْنِ أَخَوَيْنِ, فَبِعْتُهُمَا, فَفَرَّقْتُ بَيْنَهُمَا، فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: «أَدْرِكْهُمَا, فَارْتَجِعْهُمَا, وَلَا تَبِعْهُمَا إِلَّا جَمِيعًا». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ, وَقَدْ صَحَّحَهُ ابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ, وَالطَّبَرَانِيُّ, وَابْنُ الْقَطَّانِ

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صحيح. رواه أحمد (760)، وابن الجارود (575)، والحاكم (2/ 125)

وعن علي بن ابي طالب - رضي الله عنه - قال: امرني رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان ابيع غلامين اخوين, فبعتهما, ففرقت بينهما، فذكرت ذلك للنبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: «ادركهما, فارتجعهما, ولا تبعهما الا جميعا». رواه احمد, ورجاله ثقات, وقد صححه ابن خزيمة, وابن الجارود, وابن حبان, والحاكم, والطبراني, وابن القطان - صحيح. رواه احمد (760)، وابن الجارود (575)، والحاكم (2/ 125)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - দ্রব্যমূল্য বৃদ্ধি করার বিধান

৮১২. আনাস ইবনু মালেক (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে একবার জিনিসপত্রের দাম বেড়ে গেলো। লোকজন বললো, হে আল্লাহর রাসূল! জিনিসপত্রের দাম বেড়ে গেছে। অতএব আপনি আমাদের জন্য মূল্য বেঁধে দিন। তিনি বলেন: নিশ্চয় আল্লাহ মূল্য নিয়ন্ত্রণকারী, সংকোচনকারী, সম্প্রসারণকারী এবং রিযিক দানকারী। আমি আমার রবের সাথে এমন অবস্থায় সাক্ষাৎ করতে চাই যে, কেউ যেন আমার বিরুদ্ধে রক্তের ও সম্পদের কোনরূপ অভিযোগ উত্থাপন করতে না পারে। -ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه - قَالَ: غَلَا السِّعْرُ بِالْمَدِينَةِ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ النَّاسُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! غَلَا السِّعْرُ, فَسَعِّرْ لَنَا, فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمُسَعِّرُ, الْقَابِضُ, الْبَاسِطُ, الرَّازِقُ, وَإِنِّي لَأَرْجُو أَنْ أَلْقَى اللَّهَ تَعَالَى-, وَلَيْسَ أَحَدٌ مِنْكُمْ يَطْلُبُنِي بِمَظْلِمَةٍ فِي دَمٍ وَلَا مَالٍ». رَوَاهُ الْخَمْسَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه أحمد (3/ 156)، وأبو داود (3451)، والترمذي (1314)، وابن ماجه (2200)، وابن حبان (4914) وقال الترمذي: «حسن صحيح». وقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 14): «إسناده على شرط مسلم». وهو كما قال

وعن انس بن مالك - رضي الله عنه - قال: غلا السعر بالمدينة على عهد رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فقال الناس: يا رسول الله! غلا السعر, فسعر لنا, فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان الله هو المسعر, القابض, الباسط, الرازق, واني لارجو ان القى الله تعالى-, وليس احد منكم يطلبني بمظلمة في دم ولا مال». رواه الخمسة الا النساىي, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه احمد (3/ 156)، وابو داود (3451)، والترمذي (1314)، وابن ماجه (2200)، وابن حبان (4914) وقال الترمذي: «حسن صحيح». وقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 14): «اسناده على شرط مسلم». وهو كما قال

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - (খাদ্য দ্রব্য) গুদামজাত করার বিধান

৮১৩. মা’মার বিন আবদিল্লাহ (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেছেনঃ খাদ্যদ্রব্য গুদামজাত কেবল (সমাজ বিরোধী) পাপী লোকেরাই করে থাকে।[1]

وَعَنْ مَعْمَرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - رضي الله عنه - عَنْ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا يَحْتَكِرُ إِلَّا خَاطِئٌ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ


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صحيح. رواه مسلم (1605) (130)، وفي لفظ آخر له: ومن احتكر فهو خاطئ

وعن معمر بن عبد الله - رضي الله عنه - عن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا يحتكر الا خاطى». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1605) (130)، وفي لفظ اخر له: ومن احتكر فهو خاطى

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উট, গরু, ছাগলের দুধ আটকিয়ে রেখে বিক্রয় করা নিষেধ

৮১৪. আবূ হুরাইরা (রাঃ) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন যে, তোমরা উটনী ও বকরীর দুধ (স্তন্যে) আটকিয়ে রেখ না। যে ব্যক্তি এরূপ পশু ক্রয় করে, সে দুধ দোহনের পরে দু’টি অধিকারের যেটি তার পক্ষে ভাল মনে করবে তাই করতে পারবে। যদি সে ইচ্ছা করে তবে ক্রয়কৃত পশুটি রেখে দিবে। আর যদি ইচ্ছা করে তবে তা ফেরত দিবে এবং এর সাথে এক সা পরিমাণ খেজুর দিবে।

মুসলিমে রয়েছে: ক্রেতা ৩ দিন পর্যন্ত ফেরতের সুযোগ পাবে। অন্য হাদীসে, মুআল্লাকরূপে বুখারীতেও আছে- এক সা’ খাদ্য দ্রব্য দেবে, গম দিলে হবে না, ইমাম বুখারী বলেছেন- এক্ষেত্রে খেজুরের কথা অধিক উল্লেখ রয়েছে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا تَصُرُّوا الْإِبِلَ وَالْغَنَمَ, فَمَنِ ابْتَاعَهَا بَعْدُ فَإِنَّهُ بِخَيْرِ النَّظَرَيْنِ بَعْدَ أَنْ يَحْلُبَهَا, إِنْ شَاءَ أَمْسَكَهَا, وَإِنْ شَاءَ رَدَّهَا وَصَاعًا مِنْ تَمْرٍ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ. (1)
وَلِمُسْلِمٍ: «فَهُوَ بِالْخِيَارِ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ
وَفِي رِوَايَةٍ: لَهُ, عَلَّقَهَا - الْبُخَارِيُّ: «رَدَّ مَعَهَا صَاعًا مِنْ طَعَامٍ, لَا سَمْرَاءَ». قَالَ الْبُخَارِيُّ: وَالتَّمْرُ أَكْثَرُ

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صحيح. رواه البخاري (2148)، ومسلم (1524)، واللفظ للبخاري
مسلم (1524) (24)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا تصروا الابل والغنم, فمن ابتاعها بعد فانه بخير النظرين بعد ان يحلبها, ان شاء امسكها, وان شاء ردها وصاعا من تمر». متفق عليه. (1) ولمسلم: «فهو بالخيار ثلاثة ايام وفي رواية: له, علقها - البخاري: «رد معها صاعا من طعام, لا سمراء». قال البخاري: والتمر اكثر - صحيح. رواه البخاري (2148)، ومسلم (1524)، واللفظ للبخاري مسلم (1524) (24)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - উট, গরু, ছাগলের দুধ আটকিয়ে রেখে বিক্রয় করা নিষেধ

৮১৫. ’আবদুল্লাহ ইবনু মাস’উদ (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, যে ব্যক্তি (স্তন্যে) দুধ আটকিয়ে রাখা বকরী ক্রয় করে তা ফেরত দিতে চায়, সে যেন এর সঙ্গে এক সা’ পরিমাণ খেজুরও দেয়। বুখারী (রহঃ) ইসমাইলী বৰ্ণনা অতিরিক্ত করেছেন যে, খেজুর হতে এক সা’ বা আড়াই কেজি মালিককে দিবে।[1]

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: مَنِ اشْتَرَى شَاةً مَحَفَّلَةً, فَرَدَّهَا, فَلْيَرُدَّ مَعَهَا صَاعًا. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ
وَزَادَ الْإِسْمَاعِيلِيُّ: مِنْ تَمْرٍ

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صحيح، وهو موقوف. رواه البخاري (2149)

وعن ابن مسعود - رضي الله عنه - قال: من اشترى شاة محفلة, فردها, فليرد معها صاعا. رواه البخاري وزاد الاسماعيلي: من تمر - صحيح، وهو موقوف. رواه البخاري (2149)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - প্রতারনা, ঠগবাজি করা নিষেধ

৮১৬. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম একটা ’খাদ্য-স্তুপের’ পাশ দিয়ে যেতে গিয়ে তার হাত তাতে প্রবেশ করালেন। ফলে তাঁর আঙ্গুলে কিছু ভিজা অনুভূত হল। তারপর তিনি বললেন, হে খাদ্য বিক্রেতা, এ আবার কি? লোকটি বললেন হে আল্লাহর রাসূল, ওতে বৃষ্টি পেয়েছে। তিনি বললেন, ’কেন তুমি ঐ ভেজা অংশটাকে উপরে রাখলে না— তাহলে লোকে তা দেখতে পেত। যে ধোকাবাজী করে (কেনা-বেচা করে) সে আমাদের নীতিতে নয়।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - مَرَّ عَلَى صُبْرَةِ طَعَامٍ, فَأَدْخَلَ يَدَهُ فِيهَا, فَنَالَتْ أَصَابِعُهُ بَلَلًا, فَقَالَ: «مَا هَذَا يَا صَاحِبَ الطَّعَامِ» قَالَ: أَصَابَتْهُ السَّمَاءُ يَا رَسُولَ اللَّهِ. فَقَالَ: «أَفَلَا جَعَلْتَهُ فَوْقَ الطَّعَامِ; كَيْ يَرَاهُ النَّاسُ? مَنْ غَشَّ فَلَيْسَ مِنِّي». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (102) والصبرة: الكومة المجتمعة من الطعام

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - مر على صبرة طعام, فادخل يده فيها, فنالت اصابعه بللا, فقال: «ما هذا يا صاحب الطعام» قال: اصابته السماء يا رسول الله. فقال: «افلا جعلته فوق الطعام; كي يراه الناس? من غش فليس مني». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (102) والصبرة: الكومة المجتمعة من الطعام

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - মদ তৈরীকারকদের নিকট আঙ্গুর বিক্রি করার ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা

৮১৭. আবদুল্লাহ বিন বুরাইদাহ হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা বুরাইদাহ (রাঃ) হতে বর্ণনা করেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- আঙ্গুর পাড়বার মৌসুমে বিক্রয় না করে যে ব্যক্তি মদ তৈরিকারকদের নিকটে বিক্রয় করার জন্য আঙ্গুরকে গোলাজাত করে রাখে তাহলে সে জেনে-বুঝেই বলপূর্বক জাহান্নামে প্রবেশ করে। তাবারানীর আল-আওসাত নামক কিতাবে উত্তম সানাদে বর্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ, عَنْ أَبِيهِ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ حَبَسَ الْعِنَبَ أَيَّامَ الْقِطَافِ, حَتَّى يَبِيعَهُ مِمَّنْ يَتَّخِذُهُ خَمْرًا, فَقَدَ تَقَحَّمَ النَّارَ عَلَى بَصِيرَةٍ». رَوَاهُ الطَّبَرَانِيُّ فِي «الْأَوْسَطِ» بِإِسْنَادٍ حَسَنٍ

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موضوع. رواه الطبراني في «الأوسط» كما في «مجمع البحرين» (1984) وقال أبو حاتم في «العلل» (1/ 389 / 1165): «حديث كذب باطل». وقال ابن حبان في «المجروحين» (1/ 236) «حديث منكر». وقال الذهبي في «الميزان»: «خبر موضوع». وقد ارتضى الحافظ هذا الكلام في «اللسان» ولم يعقّب عليه (2/ 316) ولذلك قال شيخنا العلامة محدّث العصر - حفظه الله المولى تعالى - في «الضعيفة»: «لقد أخطأ الحافظ بن حجر في هذا الحديث خطأً فاحشًا، فسكت عليه في «التلخيص»، وقال في «بلوغ المرام»: رواه الطبراني في «الأوسط» بإسناد حسن

وعن عبد الله بن بريدة, عن ابيه - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «من حبس العنب ايام القطاف, حتى يبيعه ممن يتخذه خمرا, فقد تقحم النار على بصيرة». رواه الطبراني في «الاوسط» باسناد حسن - موضوع. رواه الطبراني في «الاوسط» كما في «مجمع البحرين» (1984) وقال ابو حاتم في «العلل» (1/ 389 / 1165): «حديث كذب باطل». وقال ابن حبان في «المجروحين» (1/ 236) «حديث منكر». وقال الذهبي في «الميزان»: «خبر موضوع». وقد ارتضى الحافظ هذا الكلام في «اللسان» ولم يعقب عليه (2/ 316) ولذلك قال شيخنا العلامة محدث العصر - حفظه الله المولى تعالى - في «الضعيفة»: «لقد اخطا الحافظ بن حجر في هذا الحديث خطا فاحشا، فسكت عليه في «التلخيص»، وقال في «بلوغ المرام»: رواه الطبراني في «الاوسط» باسناد حسن

হাদিসের মানঃ জাল (Fake)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - জিম্মাদার ব্যক্তি লভ্যাংশের হকদার

৮১৮. ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন— (দাস-দাসী বা পশু বা অন্য কিছুর হতে) লভ্যাংশের অধিকার জিম্মাদারী পাবে। (কেননা, ক্ষয়-ক্ষতির দায়-দায়িত্ব তারই)।

—বুখারী ও আবূ দাউদ (রহঃ) একে যয়ীফ বলেছেন; তিরমিযী, ইবনু খুযাইমাহ, ইবনু জারূদ, ইবনু হিব্বান, হাকিম ও ইবনু কাত্তান হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الخَرَاجُ بِالضَّمَانِ». رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, وَضَعَّفَهُ الْبُخَارِيُّ, وَأَبُو دَاوُدَ وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ, وَابْنُ الْقَطَّانِ

-

حسن. رواه أبو داود (3508)، والنسائي (7/ 254)، والترمذي (1285 و 1286)، وابن ماجه (2442)، وأحمد (6/ 49 و 161 و 208 و 237)، وابن الجارود (627)، وابن حبان (1125)، والحاكم (2/ 15) وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح غريب». قلت: وله طرق فصلت الكلام عليها في الأصل

وعن عاىشة -رضي الله عنها- قالت: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الخراج بالضمان». رواه الخمسة, وضعفه البخاري, وابو داود وصححه الترمذي, وابن خزيمة, وابن الجارود, وابن حبان, والحاكم, وابن القطان - حسن. رواه ابو داود (3508)، والنساىي (7/ 254)، والترمذي (1285 و 1286)، وابن ماجه (2442)، واحمد (6/ 49 و 161 و 208 و 237)، وابن الجارود (627)، وابن حبان (1125)، والحاكم (2/ 15) وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح غريب». قلت: وله طرق فصلت الكلام عليها في الاصل

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - লভ্যাংশ খরচ করার বিধান

৮১৯. উরওয়া আল-বারিকী (রাঃ) থেকে বর্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর জন্য একটা কুরবানীর জন্তু বা ছাগল কেনার উদ্দেশে তাকে একটি দীনার দেন। তিনি তাঁর জন্য দু’টি ছাগল কিনে এর একটি এক দীনারে বিক্রয় করে একটি দীনার ও একটি ছাগল নিয়ে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট উপস্থিত হন। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার জন্য বরকতের দোয়া করেন। রাবী বলেন, এরপর তিনি মাটি কিনলে তাতেও লাভবান হতেন। -বুখারী অন্য হাদীসের আনুসঙ্গিকরুপে হাদীসটি তাখরাজ করেছেন। তবে তার শব্দ ব্যবহার করেননি।[1]

وَعَنْ عُرْوَةَ الْبَارِقِيِّ - رضي الله عنه: أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَعْطَاهُ دِينَارًا يَشْتَرِي بِهِ أُضْحِيَّةً, أَوْ شَاةً, فَاشْتَرَى شَاتَيْنِ, فَبَاعَ إِحْدَاهُمَا بِدِينَارٍ, فَأَتَاهُ بِشَاةٍ وَدِينَارٍ, فَدَعَا لَهُ بِالْبَرَكَةِ فِي بَيْعِهِ, فَكَانَ لَوِ اشْتَرَى تُرَابًا لَرَبِحَ فِيهِ. رَوَاهُ الْخَمْسَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ
وَقَدْ أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ ضِمْنَ حَدِيثٍ, وَلَمْ يَسُقْ لَفْظَهُ

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صحيح. رواه أبو داود (3384)، والترمذي (1258)، وابن ماجه (2402)، وأحمد (4/ 375)

وعن عروة البارقي - رضي الله عنه: ان النبي - صلى الله عليه وسلم - اعطاه دينارا يشتري به اضحية, او شاة, فاشترى شاتين, فباع احداهما بدينار, فاتاه بشاة ودينار, فدعا له بالبركة في بيعه, فكان لو اشترى ترابا لربح فيه. رواه الخمسة الا النساىي وقد اخرجه البخاري ضمن حديث, ولم يسق لفظه - صحيح. رواه ابو داود (3384)، والترمذي (1258)، وابن ماجه (2402)، واحمد (4/ 375)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ উরওয়াহ বারিকী (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - লভ্যাংশ খরচ করার বিধান

৮২০. তিরমিযী এর পৃষ্ঠপোষকরূপে হাকিম বিন হিযামের একটি হাদীস বর্ণনা করেছেন।[1]

وَأَوْرَدَ التِّرْمِذِيُّ لَهُ شَاهِدًا: مِنْ حَدِيثِ حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ

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ضعيف. رواه الترمذي (1257)، وأبو داود (3386) وسنده ضعيف

واورد الترمذي له شاهدا: من حديث حكيم بن حزام - ضعيف. رواه الترمذي (1257)، وابو داود (3386) وسنده ضعيف

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ধোঁকা দিয়ে বিক্রি করার কতিপয় মাসআলা

৮২১. আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম গবাদি পশুর গৰ্ভস্থ বাচ্চা প্রসবের পূর্বে, পশুর স্তনের দুধ পরিমাণ না করে, পলাতক গোলাম, গানীমাতের মাল বণ্টনের পূর্বে, দান-খয়রাত হস্তগত করার পূর্বে এবং ডুবুরীর বাজির ভিত্তিতে ক্রয়-বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন।

—ইবনু মাজাহ, বাযযার ও দারাকুতনী দুর্বল সানাদে।[1]

وَعَنِ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه: أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ شِرَاءِ مَا فِي بُطُونِ الْأَنْعَامِ حَتَّى تَضَعَ, وَعَنْ بَيْعِ مَا فِي ضُرُوعِهَا, وَعَنْ شِرَاءِ الْعَبْدِ وَهُوَ آبِقٌ, وَعَنْ شِرَاءِ الْمَغَانِمِ حَتَّى تُقْسَمَ, وَعَنْ شِرَاءِ الصَّدَقَاتِ حَتَّى تُقْبَضَ, وَعَنْ ضَرْبَةِ الْغَائِصِ. رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ, وَالْبَزَّارُ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

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ضعيف. رواه ابن ماجه (2196)، والدارقطني (3/ 44 / 15)

وعن ابي سعيد الخدري - رضي الله عنه: ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن شراء ما في بطون الانعام حتى تضع, وعن بيع ما في ضروعها, وعن شراء العبد وهو ابق, وعن شراء المغانم حتى تقسم, وعن شراء الصدقات حتى تقبض, وعن ضربة الغاىص. رواه ابن ماجه, والبزار, والدارقطني باسناد ضعيف - ضعيف. رواه ابن ماجه (2196)، والدارقطني (3/ 44 / 15)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ধোঁকা দিয়ে বিক্রি করার কতিপয় মাসআলা

৮২২. ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, মাছ পানিতে থাকা অবস্থায় ক্রয় করবে না- কেননা এটা একটা ধোঁকা বিশেষ। —আহমাদ এর সানাদকে মাওকুফ হওয়া সঠিক বলে ইঙ্গিত করেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا تَشْتَرُوا السَّمَكَ فِي الْمَاءِ; فَإِنَّهُ غَرَرٌ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَشَارَ إِلَى أَنَّ الصَّوَابَ وَقْفُهُ

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ضعيف. رواه أحمد (3676)

وعن ابن مسعود - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا تشتروا السمك في الماء; فانه غرر». رواه احمد, واشار الى ان الصواب وقفه - ضعيف. رواه احمد (3676)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ধোঁকা দিয়ে বিক্রি করার আরও কতিপয় মাসআলা

৮২৩. ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খাওয়ার উপযোগী না হওয়া পর্যন্ত ফল বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন এবং পশম পশুর শরীরে থাকা অবস্থায় এবং দুধ ওলানে থাকাকালীন বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। -তাবারানীর আল-আওসাত, দারাকুতনী, আবূ দাউদ-ইকরামার মারাসিলে এটি বর্ণনা করেছেন, আর এটা (মুরসাল হওয়াটা) অগ্রগণ্য; আবূ দাউদ এটাকে ইবনু আব্বাস (রাঃ) থেকে শক্তিশালী সানাদে মওকুফরূপেও বৰ্ণনা করেছেন। আর ইমাম বাইহাকী (রহঃ) তা প্রাধান্য দিয়েছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ تُبَاعَ ثَمَرَةٌ حَتَّى تُطْعَمَ, وَلَا يُبَاعَ صُوفٌ عَلَى ظَهْرٍ, وَلَا لَبَنٌ فِي ضَرْعٍ. رَوَاهُ الطَّبَرَانِيُّ فِي «الْأَوْسَطِ» وَالدَّارَقُطْنِيُّ. (1)
وَأَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ فِي «الْمَرَاسِيلِ» لِعِكْرِمَةَ, وَهُوَ الرَّاجِحُ
وَأَخْرَجَهُ أَيْضًا مَوْقُوفًا عَلَى ابْنِ عَبَّاسٍ بِإِسْنَادٍ قَوِيٍّ, وَرَجَّحَهُ الْبَيْهَقِيُّ

-

رواه الطبراني في «الأوسط» كما في «مجمع البحرين» (2000)، وفي «الكبير» (11935)، والدارقطني (3/ 14 - 15)

وعن ابن عباس -رضي الله عنهما- قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان تباع ثمرة حتى تطعم, ولا يباع صوف على ظهر, ولا لبن في ضرع. رواه الطبراني في «الاوسط» والدارقطني. (1) واخرجه ابو داود في «المراسيل» لعكرمة, وهو الراجح واخرجه ايضا موقوفا على ابن عباس باسناد قوي, ورجحه البيهقي - رواه الطبراني في «الاوسط» كما في «مجمع البحرين» (2000)، وفي «الكبير» (11935)، والدارقطني (3/ 14 - 15)

হাদিসের মানঃ মুরসাল
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১. ক্রয় বিক্রয়ের শর্তাবলী ও তার নিষিদ্ধ বিষয় - ধোঁকা দিয়ে বিক্রি করার আরও কতিপয় মাসআলা

৮২৪. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মাযামীন (পশুর পেটের বাচ্চা) ও মালাকীহ নরের পিঠের বীর্য (নসল সূত্র) বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। বাযযার, এর সানাদ দুর্বল।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ الْمَضَامِينِ, وَالْمَلَاقِيحِ. رَوَاهُ الْبَزَّارُ, وَفِي إِسْنَادِهِ ضَعْفٌ

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ضعيف. رواه البزار (1267 زوائد) والزيادة من «أ»، وتحرف فيها: «ضعف» إلى ضعيف

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه، ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع المضامين, والملاقيح. رواه البزار, وفي اسناده ضعف - ضعيف. رواه البزار (1267 زواىد) والزيادة من «ا»، وتحرف فيها: «ضعف» الى ضعيف

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২. ক্ৰয়ের ঠিক রাখা, না রাখার স্বাধীনতা - ক্ৰয়-বিক্রয়ের মালামাল ফেরত প্ৰদানকারী ব্যক্তিকে সুযোগ দেয়া মুস্তাহাব

৮২৫. আবূ হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যে ব্যক্তি কোন মুসলিমের (বা অনুতপ্ত ব্যক্তির অনুরোধে) চুক্তি ভঙ্গের সুযোগ দিলো, আল্লাহ তার ত্রুটি-বিচ্যুতি মাফ করবেন। —ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ أَقَالَ مُسْلِمًا بَيْعَتَهُ, أَقَالَهُ اللَّهُ عَثْرَتَهُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (3460)، وابن ماجه (2199)، وابن حبان (7/ 243)، والحاكم (2/ 45)

عن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «من اقال مسلما بيعته, اقاله الله عثرته». رواه ابو داود, وابن ماجه, وصححه ابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه ابو داود (3460)، وابن ماجه (2199)، وابن حبان (7/ 243)، والحاكم (2/ 45)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২. ক্ৰয়ের ঠিক রাখা, না রাখার স্বাধীনতা - ক্রেতা এবং বিক্রেতার বেচা কেনার স্থান পরিত্যাগ করা পর্যন্ত সাওদা বাতিল করার অধিকার থাকা

৮২৬. ইবনু ’উমার (রাঃ) সূত্রে আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, যখন দু’ ব্যক্তি ক্রয়-বিক্রয় করে, তখন তাদের উভয়ে যতক্ষণ বিচ্ছিন্ন না হবে অথবা একে অপরকে ইখতিয়ার প্রদান না করবে, ততক্ষণ তাদের উভয়ের ইখতিয়ার থাকবে। এভাবে তারা উভয়ে যদি ক্রয়-বিক্রয় করে তবে তা সাব্যস্ত হয়ে যাবে। আর যদি তারা উভয়ে ক্রয়-বিক্রয়ের পর বিচ্ছিন্ন হয়ে যায় এবং তাদের কেউ যদি তা পরিত্যাগ না করে তবে ক্ৰয়-বিক্রয় সাব্যস্ত হয়ে যাবে। -শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-, عَنْ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِذَا تَبَايَعَ الرَّجُلَانِ, فَكُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا بِالْخِيَارِ مَا لَمْ يَتَفَرَّقَا وَكَانَا جَمِيعًا, أَوْ يُخَيِّرُ أَحَدُهُمَا الْآخَرَ, فَإِنْ خَيَّرَ أَحَدُهُمَا الْآخَرَ فَتَبَايَعَا عَلَى ذَلِكَ فَقَدَ وَجَبَ الْبَيْعُ, وَإِنْ تَفَرَّقَا بَعْدَ أَنْ تَبَايَعَا, وَلَمْ يَتْرُكْ وَاحِدٌ مِنْهُمَا الْبَيْعَ فَقَدْ وَجَبَ الْبَيْعُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

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صحيح. رواه البخاري (2112)، ومسلم (1531) (44)

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما-, عن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «اذا تبايع الرجلان, فكل واحد منهما بالخيار ما لم يتفرقا وكانا جميعا, او يخير احدهما الاخر, فان خير احدهما الاخر فتبايعا على ذلك فقد وجب البيع, وان تفرقا بعد ان تبايعا, ولم يترك واحد منهما البيع فقد وجب البيع». متفق عليه, واللفظ لمسلم - صحيح. رواه البخاري (2112)، ومسلم (1531) (44)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২. ক্ৰয়ের ঠিক রাখা, না রাখার স্বাধীনতা - চুক্তিভঙ্গের শঙ্কায় ক্রেতা-বিক্রেতার স্থান ত্যাগ করা নিষেধ

৮২৭. ’আমর বিন শু’আইব হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা থেকে, তিনি তাঁর দাদা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন-বিক্রেতা ও ক্রেতা উভয় বেচাকেনার স্থান ছেড়ে যাবার পূর্ব পর্যন্ত (ক্রয়-বিক্রয় বাতিল করার) অধিকারী থাকবে। এ সুযোগ থাকবে তাদের জন্য—যারা খেয়ার বা অধিকার দেয়ার চুক্তিতে ক্ৰয়-বিক্রয় করবে। ক্ৰয়-বিক্রয় প্রত্যাহার করবে এ ভয়ে অন্যকে ছেড়ে চলে যাওয়া হালাল বা বৈধ হবে না।

আর অন্য বর্ণনায় আছে-’এ অধিকার তাদের উভয়ের স্থান ত্যাগ না করা পর্যন্ত।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «الْبَائِعُ وَالْمُبْتَاعُ بِالْخِيَارِ حَتَّى يَتَفَرَّقَا, إِلَّا أَنْ تَكُونَ صَفْقَةَ (1) خِيَارٍ, وَلَا يَحِلُّ لَهُ أَنْ يُفَارِقَهُ خَشْيَةَ أَنْ يَسْتَقِيلَهُ». رَوَاهُ الْخَمْسَةُ إِلَّا ابْنَ مَاجَهْ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ, وَابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ
وَفِي رِوَايَةٍ: حَتَّى يَتَفَرَّقَا مِنْ مَكَانِهِمَا

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حسن. رواه أبو داود (3456)، والنسائي (7/ 251 - 252)، والترمذي (1247)، وأحمد (3/ 183)، والدارقطني (3/ 50 / 207)، وابن الجارود (620)، كلهم من طريق عمرو بن شعيب، به. وقال الترمذي: هذا حديث حسن

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده; ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «الباىع والمبتاع بالخيار حتى يتفرقا, الا ان تكون صفقة (1) خيار, ولا يحل له ان يفارقه خشية ان يستقيله». رواه الخمسة الا ابن ماجه, والدارقطني, وابن خزيمة, وابن الجارود وفي رواية: حتى يتفرقا من مكانهما - حسن. رواه ابو داود (3456)، والنساىي (7/ 251 - 252)، والترمذي (1247)، واحمد (3/ 183)، والدارقطني (3/ 50 / 207)، وابن الجارود (620)، كلهم من طريق عمرو بن شعيب، به. وقال الترمذي: هذا حديث حسن

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২. ক্ৰয়ের ঠিক রাখা, না রাখার স্বাধীনতা - কেনা বেচায় প্ৰতারিত ব্যক্তির বিক্রয় বাতিল করার অধিকার থাকার বিধান

৮২৮. আব্দুল্লাহ ইবনু ’উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, এক সাহাবী নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট উল্লেখ করলেন যে, তাকে ক্রয়-বিক্রয়ে ধোঁকা দেয়া হয়। তখন তিনি বললেন, যখন তুমি ক্ৰয়-বিক্রয় করবে: তখন বলবে কোন প্রকার ধোঁকা নেই।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: ذَكَرَ رَجُلٌ لِلنَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - أَنَّهُ يُخْدَعُ فِي الْبُيُوعِ، فَقَالَ: «إِذَا بَايَعْتَ فَقُلْ: لَا خَلَابَةَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2117)، ومسلم (1533) وفي «الأصل»: «بعت» والمثبت من «أ» وهو الموافق لما في «الصحيحين». وزاد البخاري (2407): «فكان الرجل يقوله». وفي رواية مسلم: «فكان إذا بايع يقول: لا خيابة». قلت: والرجل هو: حبان بن منقذ الأنصاري، وكان يقول ذلك للثغة في لسانه، ففي رواية ابن الجارود (567): «عن ابن عمر -رضي الله عنهما-: أن حبان بن منقذ كان سُفِعَ في رأسه مأمومة، فثقّلت لسانه، وكان يُخدع» الحديث

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما- قال: ذكر رجل للنبي - صلى الله عليه وسلم - انه يخدع في البيوع، فقال: «اذا بايعت فقل: لا خلابة». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2117)، ومسلم (1533) وفي «الاصل»: «بعت» والمثبت من «ا» وهو الموافق لما في «الصحيحين». وزاد البخاري (2407): «فكان الرجل يقوله». وفي رواية مسلم: «فكان اذا بايع يقول: لا خيابة». قلت: والرجل هو: حبان بن منقذ الانصاري، وكان يقول ذلك للثغة في لسانه، ففي رواية ابن الجارود (567): «عن ابن عمر -رضي الله عنهما-: ان حبان بن منقذ كان سفع في راسه مامومة، فثقلت لسانه، وكان يخدع» الحديث

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - সুদের ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা এবং এর কঠিন শাস্তির প্রসঙ্গ

৮২৯. জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সুদগ্রহীতা, সুদদাতা, সুদ লেনদেনের লেখক ও সাক্ষীদ্বয়কে লানত করেছেন। আর তিনি তাদের সকলকে সমান (অপরাধী) বলেছেন।[1]

عَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: لَعَنَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - آكِلَ الرِّبَا, وَمُوكِلَهُ, وَكَاتِبَهُ, وَشَاهِدَيْهِ, وَقَالَ: «هُمْ سَوَاءٌ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1598)

عن جابر - رضي الله عنه - قال: لعن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - اكل الربا, وموكله, وكاتبه, وشاهديه, وقال: «هم سواء». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1598)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - সুদের ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা এবং এর কঠিন শাস্তির প্রসঙ্গ

৮৩০. বুখারীতেও আবূ জুহাইফাহ থেকে অনুরূপ বৰ্ণিত হয়েছে।[1]

وَلِلْبُخَارِيِّ نَحْوُهُ مِنْ حَدِيثِ أَبِي جُحَيْفَةَ

-

ومحل الشاهد منه قوله: ولعن آكل الربا وموكله .. رواه البخاري (5962)

وللبخاري نحوه من حديث ابي جحيفة - ومحل الشاهد منه قوله: ولعن اكل الربا وموكله .. رواه البخاري (5962)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ জুহাইফাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - সুদের ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা এবং এর কঠিন শাস্তির প্রসঙ্গ

৮৩১. ’আবদুল্লাহ বিন মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেছেন- সুদের তিয়াত্তরটি স্তর (প্রকারভেদ) রয়েছে। তার মধ্যে সর্বাপেক্ষা ছোটটি হচ্ছে- কোন ব্যক্তি তার মা বিবাহ করার ন্যায় আর কোন মুসলিম ভাই-এর সম্মান হানী করাও বড় ধরনের সুদের সমতুল্য (পাপ কাজ)। -ইবনু মাজাহ সংক্ষিপ্তভাবে; হাকিম পূর্ণভাবে বর্ণনা করে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «الرِّبَا ثَلَاثَةٌ وَسَبْعُونَ بَابًا، أَيْسَرُهَا مِثْلُ أَنْ يَنْكِحَ الرَّجُلُ أُمَّهُ, وَإِنَّ أَرْبَى الرِّبَا عِرْضُ الرَّجُلِ الْمُسْلِمِ» رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ مُخْتَصَرًا, وَالْحَاكِمُ بِتَمَامِهِ وَصَحَّحَهُ

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صحيح. روى ابن ماجه (2275)، الجملة الأولى منه فقط. ورواه الحاكم (2/ 37) وقال: «صحيح على شرط الشيخين «. قلت: وهو حديث صحيح، وإن أنكره بعضهم كالبيهقي؛ إذ شواهده كثيرة، وتفصيل ذلك في الأصل

وعن عبد الله بن مسعود - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «الربا ثلاثة وسبعون بابا، ايسرها مثل ان ينكح الرجل امه, وان اربى الربا عرض الرجل المسلم» رواه ابن ماجه مختصرا, والحاكم بتمامه وصححه - صحيح. روى ابن ماجه (2275)، الجملة الاولى منه فقط. ورواه الحاكم (2/ 37) وقال: «صحيح على شرط الشيخين «. قلت: وهو حديث صحيح، وان انكره بعضهم كالبيهقي؛ اذ شواهده كثيرة، وتفصيل ذلك في الاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - সুদী লেনদেনের প্রকার এবং পন্য বিনিময়ের পদ্ধতি

৮৩২. আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, সমান পরিমাণ ছাড়া তোমরা সোনার বদলে সোনা বিক্রি করবে না, একটি অপরটি হতে কম-বেশী করবে না।[1] সমান ছাড়া তোমরা রূপার বদলে রূপা বিক্রি করবে না ও একটি অপরটি হতে কম-বেশী করবে না। আর নগদ মুদ্রার বিনিময়ে বাকী মুদ্রা বিক্রি করবে না।[2]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: [ص: 245] «لَا تَبِيعُوا الذَّهَبَ بِالذَّهَبِ إِلَّا مِثْلًا بِمِثْلٍ, وَلَا تُشِفُّوا بَعْضَهَا عَلَى بَعْضٍ, وَلَا تَبِيعُوا الْوَرِقَ بِالْوَرِقِ إِلَّا مِثْلًا بِمِثْلٍ, وَلَا تُشِفُّوا بَعْضَهَا عَلَى بَعْضٍ, وَلَا تَبِيعُوا مِنْهَا غَائِبًا بِنَاجِزٍ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2177)، ومسلم (1584)

وعن ابي سعيد الخدري - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: [ص: 245] «لا تبيعوا الذهب بالذهب الا مثلا بمثل, ولا تشفوا بعضها على بعض, ولا تبيعوا الورق بالورق الا مثلا بمثل, ولا تشفوا بعضها على بعض, ولا تبيعوا منها غاىبا بناجز». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2177)، ومسلم (1584)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - সুদী লেনদেনের প্রকার এবং পন্য বিনিময়ের পদ্ধতি

৮৩৩. ’উবাদাহ বিন সামিত (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- সোনার দ্বারা সোনা, রূপার দ্বারা রূপা, গমের বদলে গম, যবের বদলে যাব, খেজুরের বদলে খেজুর ও লবণের বদলে লবণ লেনদেন (কম-বেশি না করে) একই রকমে সমপরিমাণে ও হাত বাঁ হাত অৰ্থাৎ নগদে বিক্রয় চলবে। যখন ঐ বস্তুগুলোর মধ্যে প্রকারভেদ থাকবে তখন নগদে তোমরা ইচ্ছানুযায়ী বিক্রয় কর।[1]

وَعَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الذَّهَبُ بِالذَّهَبِ, وَالْفِضَّةُ بِالْفِضَّةِ, وَالْبُرُّ بِالْبُرِّ, وَالشَّعِيرُ بِالشَّعِيرِ, وَالتَّمْرُ بِالتَّمْرِ, وَالْمِلْحُ بِالْمِلْحِ, مِثْلًا بِمِثْلٍ, سَوَاءً بِسَوَاءٍ, يَدًا بِيَدٍ, فَإِذَا اخْتَلَفَتْ هَذِهِ الْأَصْنَافُ فَبِيعُوا كَيْفَ شِئْتُمْ إِذَا كَانَ يَدًا بِيَدٍ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1587) (81)

وعن عبادة بن الصامت - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الذهب بالذهب, والفضة بالفضة, والبر بالبر, والشعير بالشعير, والتمر بالتمر, والملح بالملح, مثلا بمثل, سواء بسواء, يدا بيد, فاذا اختلفت هذه الاصناف فبيعوا كيف شىتم اذا كان يدا بيد». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1587) (81)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - সুদী লেনদেনের প্রকার এবং পন্য বিনিময়ের পদ্ধতি

৮৩৪. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- সোনার পরিবর্তে সোনার (লেনদেন) ওজনে সমানে সমানে হবে। আর রূপা, রূপার পরিবর্তে ওজনে বরাবর হতে হবে। যে ব্যক্তি এ সবের লেন দেনে বেশী দেবে বা বেশি নেবে তা সুদ বলে গণ্য হবে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الذَّهَبُ بِالذَّهَبِ وَزْنًا بِوَزْنٍ مِثْلًا بِمِثْلٍ، وَالْفِضَّةُ بِالْفِضَّةِ وَزْنًا بِوَزْنٍ مِثْلًا بِمِثْلٍ, فَمَنْ زَادَ أَوْ اسْتَزَادَ فَهُوَ رِبًا». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1588) (84)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الذهب بالذهب وزنا بوزن مثلا بمثل، والفضة بالفضة وزنا بوزن مثلا بمثل, فمن زاد او استزاد فهو ربا». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1588) (84)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - পরস্পর বিনিময়ে একই জাতীয় পণ্যে অতিরিক্ত গ্রহণ হারাম

৮৩৫. আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) ও আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এক ব্যক্তিকে খায়বারে তহসীলদার নিযুক্ত করেন। সে জানীব নামক (উত্তম) খেজুর নিয়ে উপস্থিত হলে আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জিজ্ঞেস করলেন, খায়বারের সব খেজুর কি এ রকমের? সে বলল, না, আল্লাহর কসম, হে আল্লাহর রসূল! এরূপ নয়, বরং আমরা দু সা’ এর পরিবর্তে এ ধরনের এক সা’ খেজুর নিয়ে থাকি এবং তিন সা’ এর পরিবর্তে এক দু’ সা’। তখন আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, এরূপ করবে না। বরং মিশ্ৰিত খেজুর দিরহামের বিনিময়ে বিক্রি করে দিরহাম দিয়ে জানীব খেজুর ক্রয় করবে এবং তিনি বললেন, ওজন করা হয় এমন বস্তুর লেনদেন এরূপভাবে হবে। মুসলিমে বর্ণিত রয়েছে, এভাবেই এর পরিমাপ করতে হবে।[1]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ, وَأَبِي هُرَيْرَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - اسْتَعْمَلَ رَجُلًا عَلَى خَيْبَرٍ, فَجَاءَهُ بِتَمْرٍ جَنِيبٍ, فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَكُلُّ تَمْرِ خَيْبَرَ هَكَذَا» فَقَالَ: لَا, وَاللَّهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ, إِنَّا لَنَأْخُذُ الصَّاعَ مِنْ هَذَا بِالصَّاعَيْنِ وَالثَّلَاثَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «لَا تَفْعَلْ، بِعِ الْجَمْعَ بِالدَّرَاهِمِ, ثُمَّ ابْتَعْ بِالدَّرَاهِمِ جَنِيبًا». وَقَالَ فِي الْمِيزَانِ مِثْلَ ذَلِكَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِمُسْلِمٍ: وَكَذَلِكَ الْمِيزَانُ

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صحيح. رواه البخاري (4/ 399 - 400 و 481)، ومسلم (1593) (95)

وعن ابي سعيد, وابي هريرة -رضي الله عنهما، ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - استعمل رجلا على خيبر, فجاءه بتمر جنيب, فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اكل تمر خيبر هكذا» فقال: لا, والله يا رسول الله, انا لناخذ الصاع من هذا بالصاعين والثلاثة فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «لا تفعل، بع الجمع بالدراهم, ثم ابتع بالدراهم جنيبا». وقال في الميزان مثل ذلك. متفق عليه ولمسلم: وكذلك الميزان - صحيح. رواه البخاري (4/ 399 - 400 و 481)، ومسلم (1593) (95)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - নির্দিষ্ট পরিমাণের বিনিময়ে অনির্দিষ্ট বস্তু লেনদেনের বিধান

৮৩৬. জাবির বিন ’আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নির্দিষ্ট পরিমাণ খেজুরের বদলে খেজুরের ঐরুপ স্তুপ বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন যার কোন পরিমাণ জানা নেই।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ بَيْعِ الصُّبْرَةِ مِنَ التَّمْرِ لا يُعْلَمُ مَكِيلُهَا بِالْكَيْلِ الْمُسَمَّى مِنَ التَّمْرِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1530)، والصبرة: الطعام المجتمع. والمراد النهي عن بيع الكومة من التمر المجهولة القدر، بالكيل المعين القدر من التمر

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما- قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن بيع الصبرة من التمر لا يعلم مكيلها بالكيل المسمى من التمر. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1530)، والصبرة: الطعام المجتمع. والمراد النهي عن بيع الكومة من التمر المجهولة القدر، بالكيل المعين القدر من التمر

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - খাদ্যের বিনিময়ে খাদ্য বিক্রির বিধান

৮৩৭. মামার বিন ’আবদিল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেনঃ আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি, খাদ্য বস্তুর বদলে-বরাবর, সমানে সমান লেনদেন হবে। সাহাবী বলেছেন- আমাদের তৎকালীন সাধারণ খাদ্য বস্তু ছিল যব।[1]

وَعَنْ مَعْمَرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - رضي الله عنه - قَالَ: إِنِّي كُنْتُ أَسْمَعُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ: «الطَّعَامُ بِالطَّعَامِ مِثْلًا بِمِثْلٍ»، وَكَانَ طَعَامُنَا يَوْمَئِذٍ الشَّعِير. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1592) من طريق أبي النظر؛ أن بُسر بن سعيد حدثه، عن معمر بن عبد الله؛ أنه أرسل غلامه بصاع قمح. فقال: بعه. ثم اشتر به شعيرًا. فذهب الغلام، فأخذ صاعًا وزيادة بعض صاع. فلما جاء معمر أخبره بذلك. فقال له معمر: لم فعلت ذلك؟ انطلق فرُدَّه، ولا تأخذَنَّ إلا مِثلًا بمثل، فإني كنت أسمع رسول الله -صلى الله عليه وسلم- يقول: … الحديث. وزاد: قيل له: فإنه ليس بمثله. قال: إني أخاف أن يضارع

وعن معمر بن عبد الله - رضي الله عنه - قال: اني كنت اسمع رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول: «الطعام بالطعام مثلا بمثل»، وكان طعامنا يومىذ الشعير. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1592) من طريق ابي النظر؛ ان بسر بن سعيد حدثه، عن معمر بن عبد الله؛ انه ارسل غلامه بصاع قمح. فقال: بعه. ثم اشتر به شعيرا. فذهب الغلام، فاخذ صاعا وزيادة بعض صاع. فلما جاء معمر اخبره بذلك. فقال له معمر: لم فعلت ذلك؟ انطلق فرده، ولا تاخذن الا مثلا بمثل، فاني كنت اسمع رسول الله -صلى الله عليه وسلم- يقول: … الحديث. وزاد: قيل له: فانه ليس بمثله. قال: اني اخاف ان يضارع

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - এক পণ্যের সাথে অন্য পণ্য মিলিত থাকাবস্থায় লেনদেনের বিধান

৮৩৮. ফুযালাহ বিন ’উবাইদ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, খায়বার বিজয়ের (ঐতিহাসিক) দিবসে আমি একখানা হার বারো দিনারের বদলে খরিদ করেছিলাম। তাতে সোনা ও ছোট দানা বা পুতি (মূল্যবান পাথর) ছিল। ঐগুলোকে আমি পৃথক করে খুলে ফেলায়[1] তাতে আমি বারো দিনারের অধিক (সোনা) পেলাম। এ সংবাদ আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে দিলাম। তিনি বললেন, এটিকে খোলার পূর্বে বিক্রয় করা যাবে না।[2]

وَعَنْ فَضَالَةَ بْنِ عُبَيْدٍ - رضي الله عنه - قَالَ: اشْتَرَيْتُ يَوْمَ خَيْبَرَ قِلَادَةً بِاثْنَيْ عَشَرَ دِينَارًا, فِيهَا ذَهَبٌ وَخَرَزٌ، فَفَصَلْتُهَا فَوَجَدْتُ فِيهَا أَكْثَرَ مِنِ اثْنَيْ عَشَرَ دِينَارًا, فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: «لَا تُبَاعُ حَتَّى تُفْصَلَ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1591) (90)

وعن فضالة بن عبيد - رضي الله عنه - قال: اشتريت يوم خيبر قلادة باثني عشر دينارا, فيها ذهب وخرز، ففصلتها فوجدت فيها اكثر من اثني عشر دينارا, فذكرت ذلك للنبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: «لا تباع حتى تفصل». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1591) (90)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - বাকীতে প্ৰাণীর বদলে প্ৰাণী বিক্রির বিধান

৮৩৯. সামুরাহ বিন জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম প্রাণীর বদলে প্রাণী বাকীতে বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। -তিরমিযী ও ইবনু জারূদ একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ - رضي الله عنه، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ الْحَيَوَانِ بِالْحَيَوَانِ نَسِيئَةً. رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ الْجَارُودِ

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صحيح بشواهده. رواه أبو داود (3356)، والنسائي (7/ 292)، والترمذي (1237)، وابن ماجه (2270)، وأحمد (5/ 12 و 19 و 22)، وابن الجارود (611) من طريق الحسن، عن سمرة، به. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». قلت: والحسن مدلس وقد عنعنه، إلا أن له شواهد - يصح بها الحديث - مذكورة «بالأصل

وعن سمرة بن جندب - رضي الله عنه، ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع الحيوان بالحيوان نسيىة. رواه الخمسة, وصححه الترمذي, وابن الجارود - صحيح بشواهده. رواه ابو داود (3356)، والنساىي (7/ 292)، والترمذي (1237)، وابن ماجه (2270)، واحمد (5/ 12 و 19 و 22)، وابن الجارود (611) من طريق الحسن، عن سمرة، به. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». قلت: والحسن مدلس وقد عنعنه، الا ان له شواهد - يصح بها الحديث - مذكورة «بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - বাকীতে প্ৰাণীর বদলে প্ৰাণী বিক্রির বিধান

৮৪০. ’আবদুল্লাহ বিন ’আমর (রাঃ) থেকেই বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে একটি সৈন্যদলের প্রস্তুতির জন্য নির্দেশ দিয়েছিলেন। কিন্তু তখন উট নিঃশেষিত, ফলে তিনি তাকে সাদাকাহর উটের উপর উট সংগ্রহের আদেশ দিলেন। বর্ণনাকারী (সাহাবী) বলছেন, আমি সাদাকার উট এলে একটি উটের বদলে দু’টি উট দেব বলে উট সংগ্ৰহ করতে লাগলাম। -এর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا; أَنَّ رَسُولَ - صلى الله عليه وسلم - أَمَرَهُ أَنْ يُجَهِّزَ جَيْشًا فَنَفِدَتِ الْإِبِلُ، فَأَمَرَهُ أَنْ يَأْخُذَ عَلَى قَلَائِصِ الصَّدَقَةِ. قَالَ: فَكُنْتُ آخُذُ الْبَعِيرَ بِالْبَعِيرَيْنِ إِلَى إِبِلِ الصَّدَقَةِ. رَوَاهُ الْحَاكِمُ وَالْبَيْهَقِيُّ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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حسن. رواه الحاكم (2/ 56 - 57)، والبيهقي (5/ 287 - 288) قلت: والحديث أُعِلَّ بما لا يقدح، وبيان ذلك «بالأصل»، ولكن يِجدر التنبيه هنا على أن الحديث رواه أبو داود وأحمد وهما بلا شك أعلى ممن ذكر الحافظ. وثانيًا: الحديث عند الحاكم من طريق يختلف عن طريقه عند البيهقي

وعن عبد الله بن عمرو -رضي الله عنهما; ان رسول - صلى الله عليه وسلم - امره ان يجهز جيشا فنفدت الابل، فامره ان ياخذ على قلاىص الصدقة. قال: فكنت اخذ البعير بالبعيرين الى ابل الصدقة. رواه الحاكم والبيهقي, ورجاله ثقات - حسن. رواه الحاكم (2/ 56 - 57)، والبيهقي (5/ 287 - 288) قلت: والحديث اعل بما لا يقدح، وبيان ذلك «بالاصل»، ولكن يجدر التنبيه هنا على ان الحديث رواه ابو داود واحمد وهما بلا شك اعلى ممن ذكر الحافظ. وثانيا: الحديث عند الحاكم من طريق يختلف عن طريقه عند البيهقي

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - ‘ঈনা’ ক্রয় বিক্রয়ের বিধান

৮৪১. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন- আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি, যখন তোমরা ’ঈনা (নির্দিষ্ট মেয়াদের মধ্যে পুনঃ মূল্য কম দিয়ে ক্রেতার নিকট হতে ঐ বস্তু ফেরত নিয়ে) কেনা-বেচা করবে আর গরুর লেজ ধরে নেবে এবং চাষবাসেই তৃপ্ত থাকবে আর আল্লাহর পথে জিহাদ (সংগ্রাম) করা বর্জন করবে তখন আল্লাহ্ তোমাদেরকে অবমাননার কবলে ফেলবেন আর তোমাদের দ্বীনে প্রত্যাবর্তন না করা পর্যন্ত তোমাদের উপর থেকে এটা অপসারিত করবেন না। -আবূ দাউদ নাফি’ কর্তৃক বর্ণিত। এর সানাদে ত্রুটি রয়েছেঃ আহমাদেও তদ্রুপ আতা কর্তৃক বর্ণিত; এর বর্ণনাকারী নির্ভরযোগ্য; ইবনু কাত্তান এটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا -[قَالَ]: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ: «إِذَا تَبَايَعْتُمْ بِالْعِينَةِ, وَأَخَذْتُمْ أَذْنَابَ الْبَقَرِ, وَرَضِيتُمْ بِالزَّرْعِ, وَتَرَكْتُمْ الْجِهَادَ, سَلَّطَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ ذُلًّا لَا يَنْزِعُهُ حَتَّى تَرْجِعُوا إِلَى دِينِكُمْ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ مِنْ رِوَايَةِ نَافِعٍ عَنْهُ, وَفِي إِسْنَادِهِ مَقَالٌ
وَلِأَحْمَدَ: نَحْوُهُ مِنْ رِوَايَةِ عَطَاءٍ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ وَصَحَّحَهُ ابْنُ الْقَطَّانِ

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صحيح بطرقه رواه أبو داود (3462)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما -[قال]: سمعت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول: «اذا تبايعتم بالعينة, واخذتم اذناب البقر, ورضيتم بالزرع, وتركتم الجهاد, سلط الله عليكم ذلا لا ينزعه حتى ترجعوا الى دينكم». رواه ابو داود من رواية نافع عنه, وفي اسناده مقال ولاحمد: نحوه من رواية عطاء, ورجاله ثقات وصححه ابن القطان - صحيح بطرقه رواه ابو داود (3462)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - কারও জন্য সুপারিশ করার বিনিময়ে হাদিয়া গ্ৰহণ করার বিধান

৮৪২. আবূ উমামাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি তার কোন ভায়ের জন্য সুপারিশ করল, অতঃপর তার জন্য হাদিয়া দিল তার পর সুপারিশকারী তা গ্রহণ করল, তাহলে সে সুদেরই এক বড় দরজায় উপনীত হল। -এর সানাদটি আলোচনা সাপেক্ষ।[1]

وَعَنْ أَبِي أُمَامَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ شَفَعَ لِأَخِيهِ شَفَاعَةً, فَأَهْدَى لَهُ هَدِيَّةً, فَقَبِلَهَا, فَقَدْ أَتَى بَابًا عَظِيمًا مِنْ أَبْوَابِ الرِّبَا». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَفِي إِسْنَادِهِ مَقَالٌ

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ضعيف. رواه أحمد (5/ 261)، وأبو داود (3541)

وعن ابي امامة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من شفع لاخيه شفاعة, فاهدى له هدية, فقبلها, فقد اتى بابا عظيما من ابواب الربا». رواه احمد, وابو داود, وفي اسناده مقال - ضعيف. رواه احمد (5/ 261)، وابو داود (3541)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - ঘুষের ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা

৮৪৩. ’আবদুল্লাহ বিন আমর বিন আস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ঘুষ দাতা ও ঘুষ গ্রহীতা উভয়কেই অভিসম্পাত করেছেন। -তিরমিযী একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِوٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: لَعَنَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - الرَّاشِي وَالْمُرْتَشِيَ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ وَصَحَّحَهُ

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صحيح. رواه أبو داود (3580)، والترمذي (1337) وقال الترمذي: حسن صحيح

وعن عبد الله بن عمرو -رضي الله عنهما- قال: لعن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - الراشي والمرتشي. رواه ابو داود, والترمذي وصححه - صحيح. رواه ابو داود (3580)، والترمذي (1337) وقال الترمذي: حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - ‘মুযাবানাহ’ নামক ক্ৰয়-বিক্রয় নিষেধ

৮৪৪. ইবনু ’উমার (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মুযাবানা নিষেধ করেছেন, আর তা হলো বাগানের ফল বিক্রয় করা। খেজুর হলে মেপে শুকনো খেজুরের বদলে, আঙ্গুর হলে মেপে কিসমিসের বদলে, আর ফসল হলে মেপে খাদ্যের বদলে বিক্রি করা। তিনি এসব বিক্রি নিষেধ করেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنِ الْمُزَابَنَةِ; أَنْ يَبِيعَ ثَمَرَ حَائِطِهِ إِنْ كَانَ نَخْلًا بِتَمْرٍ كَيْلًا, وَإِنْ كَانَ كَرْمًا أَنْ يَبِيعَهُ بِزَبِيبٍ كَيْلًا, وَإِنْ كَانَ زَرْعًا أَنْ يَبِيعَهُ بِكَيْلِ طَعَامٍ, نَهَى عَنْ ذَلِكَ كُلِّهُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2205)، ومسلم (1542) (76)

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما- قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن المزابنة; ان يبيع ثمر حاىطه ان كان نخلا بتمر كيلا, وان كان كرما ان يبيعه بزبيب كيلا, وان كان زرعا ان يبيعه بكيل طعام, نهى عن ذلك كله. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2205)، ومسلم (1542) (76)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - শুকনো খেজুরের বিনেময়ে তাজা খেজুর বিক্রি করার বিধান

৮৪৫. সা’দ বিন আবূ আক্কাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন- আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কে শুকনা খেজুরের সাথে তাজা খেজুরের বিনিময় সম্পর্কে জিজ্ঞেস করতে শুনেছি। তিনি জিজ্ঞেস করেন: তাজা খেজুর শুকালে কি কমে যায়? লোকজন বলেন, হাঁ। তিনি এ জাতীয় লেনদেন করতে নিষেধ করেন। -ইবনু মাদীনী, তিরমিযী, ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ - رضي الله عنه - قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - سُئِلَ عَنِ اشْتِرَاءِ الرُّطَبِ بِالتَّمْرِ. فَقَالَ: «أَيَنْقُصُ الرُّطَبُ إِذَا يَبِسَ» قَالُوا: نَعَمَ. فَنَهَى عَنْ ذَلِكَ. رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ الْمَدِينِيِّ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (3359)، والنسائي (7/ 268 - 269)، والترمذي (1225)، وابن ماجه (2264)، وأحمد (1/ 175)، وابن حبان (4982)، والحاكم (2/ 38)، من طريق مالك، عن عبد الله بن يزيد، أن زيدًا أبا عياش أخبره؛ أنه سأل سعد بن أبي وقاص، عن البيضاء بالسُّلت؟ فقال له سعد أيتهما أفضل قال: البيضاء، فنهاه عن ذلك، وقال سعد: سمعت رسول -صلى الله عليه وسلم - الحديث. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». قلت: وتابع مالكا على ذلك جماعة من الثقات؛ إلا أن يحيى بن أبي كثير تابعهم في الإسناد، وخالفهم في المتن؛ إذ رواه بلفظ: نهى رسول الله -صلى الله عليه وسلم- عن بيع الرطب بالتمر نسيئة، وهو شاذ بهذا اللفظ «نسيئة» كما حكم بذلك غير واحد، وبيانه بالأصل

وعن سعد بن ابي وقاص - رضي الله عنه - قال: سمعت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - سىل عن اشتراء الرطب بالتمر. فقال: «اينقص الرطب اذا يبس» قالوا: نعم. فنهى عن ذلك. رواه الخمسة, وصححه ابن المديني, والترمذي, وابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه ابو داود (3359)، والنساىي (7/ 268 - 269)، والترمذي (1225)، وابن ماجه (2264)، واحمد (1/ 175)، وابن حبان (4982)، والحاكم (2/ 38)، من طريق مالك، عن عبد الله بن يزيد، ان زيدا ابا عياش اخبره؛ انه سال سعد بن ابي وقاص، عن البيضاء بالسلت؟ فقال له سعد ايتهما افضل قال: البيضاء، فنهاه عن ذلك، وقال سعد: سمعت رسول -صلى الله عليه وسلم - الحديث. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». قلت: وتابع مالكا على ذلك جماعة من الثقات؛ الا ان يحيى بن ابي كثير تابعهم في الاسناد، وخالفهم في المتن؛ اذ رواه بلفظ: نهى رسول الله -صلى الله عليه وسلم- عن بيع الرطب بالتمر نسيىة، وهو شاذ بهذا اللفظ «نسيىة» كما حكم بذلك غير واحد، وبيانه بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৩. সুদ - ঋণের পরিবর্তে ঋণ বিক্রয় করা নিষেধ

৮৪৬. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কালয়ী দ্বারা কালায়ী অর্থাৎ ঋণের পরিবর্তে ঋণ বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। ইসহাক, বাযযার দুর্বল সানাদে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ الْكَالِئِ بِالْكَالِئِ, يَعْنِي: الدَّيْنِ بِالدَّيْنِ. رَوَاهُ إِسْحَاقُ, وَالْبَزَّارُ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

-

ضعيف. وهو في «كشف الأستار» (1280)، ورواه الدارقطني، والطحاوي، والحاكم، والبيهقي، وضعّفه جمع غَفير من أهل العلم، وذلك لتفرد موسى بن عبيدة الزبيدي، به. قال الحافظ في «التلخيص» (3/ 26): «قال أحمد بن حنبل: لا تحلّ عندي عنه الرواية، ولا أعرف هذا الحديث عن غيره، وقال أيضًا: ليس في هذا صحيح يصح، لكن إجماع الناس على أنه لا يجوز بيع دين بدين

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما-; - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع الكالى بالكالى, يعني: الدين بالدين. رواه اسحاق, والبزار باسناد ضعيف - ضعيف. وهو في «كشف الاستار» (1280)، ورواه الدارقطني، والطحاوي، والحاكم، والبيهقي، وضعفه جمع غفير من اهل العلم، وذلك لتفرد موسى بن عبيدة الزبيدي، به. قال الحافظ في «التلخيص» (3/ 26): «قال احمد بن حنبل: لا تحل عندي عنه الرواية، ولا اعرف هذا الحديث عن غيره، وقال ايضا: ليس في هذا صحيح يصح، لكن اجماع الناس على انه لا يجوز بيع دين بدين

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় - আরায়া’র বিধান

৮৪৭. যায়দ ইবনু সাবিত (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আরায়্যার ব্যাপারে অনুমতি দিয়েছেন যে, ওজনকৃত খেজুরের বিনিময়ে গাছের অনুমানকৃত খেজুর বিক্রি করা যেতে পারে।

মুসলিমে আছে- আরিয়া ক্রয়-বিক্রয়ে নবী (রহঃ) অনুমতি দিয়েছেন। বাড়ীওয়ালা শুকনো খেজুর দিয়ে গাছের তাজা খেজুর অনুমানের ভিত্তিতে নিবে এবং ঐ টাটুকা খেজুর খাবে।[1]

عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - رَخَّصَ فِي الْعَرَايَا: أَنْ تُبَاعَ بِخَرْصِهَا كَيْلًا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِمُسْلِمٍ: رَخَّصَ فِي الْعَرِيَّةِ يَأْخُذُهَا أَهْلُ الْبَيْتِ بِخَرْصِهَا تَمْرًا، يَأْكُلُونَهَا رُطَبًا

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صحيح. رواه البخاري (2192)، ومسلم (1539) (64)
مسلم (1539) (61)

عن زيد بن ثابت - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - رخص في العرايا: ان تباع بخرصها كيلا. متفق عليه ولمسلم: رخص في العرية ياخذها اهل البيت بخرصها تمرا، ياكلونها رطبا - صحيح. رواه البخاري (2192)، ومسلم (1539) (64) مسلم (1539) (61)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় - আরায়া’র বিধান

৮৪৮. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পাঁচ অসাকের কম পরিমাণ অথবা পাঁচ অসাক পরিমাণ (গাছের) তাজা খেজুর অনুমান করে শুকনো খেজুরের বিনিময়ে বিক্রয় করার অনুমতি দিয়েছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - رَخَّصَ فِي بَيْعِ الْعَرَايَا بِخَرْصِهَا, فِيمَا دُونَ خَمْسَةِ أَوْسُقٍ, أَوْ فِي خَمْسَةِ أَوْسُقٍ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2190)، ومسلم (1541)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه، ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - رخص في بيع العرايا بخرصها, فيما دون خمسة اوسق, او في خمسة اوسق. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2190)، ومسلم (1541)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
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পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় - গাছের ফল ব্যবহারের উপযোগী হওয়ার পূর্বেই বিক্রয় করা নিষেধ

৮৪৯. ’আবদুল্লাহ ইবনু ’উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম গাছের ফল ব্যবহার উপযোগী হওয়ার আগেই তা বিক্রি করতে ক্রেতা ও বিক্রেতাকে নিষেধ করেছেন।

অন্য বর্ণনায় আছে- সেলাহ (পুষ্ট) হবার অর্থ সম্বন্ধে জিজ্ঞাসিত হয়ে তিনি বলতেন, ’ফলের দুৰ্যোগকাল উত্তীর্ণ হওয়া’।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ بَيْعِ الثِّمَارِ حَتَّى يَبْدُوَ صَلَاحُهَا, نَهَى الْبَائِعَ وَالْمُبْتَاعَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ: وَكَانَ إِذَا سُئِلَ عَنْ صَلَاحِهَا? قَالَ: «حَتَّى تَذْهَبَ عَاهَتُهُ

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صحيح. رواه البخاري (2194)، ومسلم (3/ 1165 / رقم 1534)

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما- قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن بيع الثمار حتى يبدو صلاحها, نهى الباىع والمبتاع. متفق عليه وفي رواية: وكان اذا سىل عن صلاحها? قال: «حتى تذهب عاهته - صحيح. رواه البخاري (2194)، ومسلم (3/ 1165 / رقم 1534)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় - গাছের ফল ব্যবহারের উপযোগী হওয়ার পূর্বেই বিক্রয় করা নিষেধ

৮৫০. আনাস বিন মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম অবশ্য ফলে পরিপক্কতা আসার পূর্বে বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। ’পরিপক্কতা’র অবস্থা সম্বন্ধে জিজ্ঞাসিত হয়ে তিনি বলেছেন- ফলের রং যেন লালচে বা হলুদ হয়ে ওঠে। -শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]

وَعَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ الثِّمَارِ حَتَّى تُزْهَى. قِيلَ: وَمَا زَهْوُهَا? قَالَ: «تَحْمَارُّ وَتَصْفَارُّ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

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صحيح. رواه البخاري (1488)، ومسلم (1555)، وفي اللفظ الذي ساقه الحافظ، وتخصيصه بالبخاري نظر

وعن انس بن مالك - رضي الله عنه، ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع الثمار حتى تزهى. قيل: وما زهوها? قال: «تحمار وتصفار». متفق عليه, واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (1488)، ومسلم (1555)، وفي اللفظ الذي ساقه الحافظ، وتخصيصه بالبخاري نظر

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় - গাছের ফল ব্যবহারের উপযোগী হওয়ার পূর্বেই বিক্রয় করা নিষেধ

৮৫১. আনাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আঙ্গুরের ক্ষেত্রে কালচে রং না ধরা পর্যন্ত তা বিক্রয় করতে এবং শস্য দৃঢ় পুষ্ট হবার পূর্বে বিক্রয় করতে নিষেধ করেছেন। -ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ بَيْعِ الْعِنَبِ حَتَّى يَسْوَدَّ, وَعَنْ بَيْعِ الْحَبِّ حَتَّى يَشْتَدَّ. رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (3371)، والترمذي (1228)، وابن ماجه (2217)، وأحمد (3/ 221 و 250)، وابن حبان (4972)، والحاكم (2/ 19) وقال الحاكم: «صحيح على شرط مسلم» وهو كما قال

وعن انس بن مالك - رضي الله عنه، ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن بيع العنب حتى يسود, وعن بيع الحب حتى يشتد. رواه الخمسة, الا النساىي, وصححه ابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه ابو داود (3371)، والترمذي (1228)، وابن ماجه (2217)، واحمد (3/ 221 و 250)، وابن حبان (4972)، والحاكم (2/ 19) وقال الحاكم: «صحيح على شرط مسلم» وهو كما قال

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় -গাছের ফল বিক্রি করার পর যদি প্রাকৃতিক দূর্যোগে নষ্ট হয়ে যায়, তাহলে ক্ষতির পরিমানমত মূল্য বিক্রেতার ছেড়ে দেওয়ার আদেশ

৮৫২. জাবির বিন ’আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- যদি তুমি তোমার কোন (মুসলিম) ভাই-এর নিকটে ফল বিক্রয় কর তারপর তা কোন দুর্যোগে নষ্ট হয়ে যায় তাহলে তার নিকট থেকে কিছু (মূল্য বাবদ) গ্রহণ করা তোমার জন্য বৈধ হবে না। কারণ তোমার মুসলিম ভাইয়ের মাল (মূল্য) তুমি কিসের বিনিময়ে নেবে?

অন্য বর্ণনায় আছে- অবশ্য নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দুর্যোগে ক্ষতির পূরণ করতে বলেছেন। অর্থাৎ এ অবস্থায় ক্ষতির পরিমাণমত মূল্য না নিতে নির্দেশ দিয়েছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَوْ بِعْتَ مِنْ أَخِيكَ ثَمَرًا فَأَصَابَتْهُ جَائِحَةٌ, فَلَا يَحِلُّ لَكَ أَنْ تَأْخُذَ مِنْهُ شَيْئًا. بِمَ تَأْخُذُ مَالَ أَخِيكَ بِغَيْرِ حَقٍّ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ
وَفِي رِوَايَةٍ لَهُ: أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَمَرَ بِوَضْعِ الْجَوَائِحِ

-

صحيح. رواه مسلم (1554) (14)
مسلم (3/ 1191) الجائحة: الآفة تصيب الثمار فتتلفها

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لو بعت من اخيك ثمرا فاصابته جاىحة, فلا يحل لك ان تاخذ منه شيىا. بم تاخذ مال اخيك بغير حق». رواه مسلم وفي رواية له: ان النبي - صلى الله عليه وسلم - امر بوضع الجواىح - صحيح. رواه مسلم (1554) (14) مسلم (3/ 1191) الجاىحة: الافة تصيب الثمار فتتلفها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৪. বাই-‘আরায়ার অনুমতি, মূল বস্তু (গাছ) ও ফল বিক্রয় - খেজুর বাগান তা’বীর করার পর বিক্রি করার বিধান

৮৫৩. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন— যে ব্যক্তি খেজুর গাছ তা’বীর (ফুলের পরাগায়ণ) করার পর গাছ বিক্রয় করে, তার ফল বিক্রেতার। কিন্তু ক্রেতা শর্ত করলে তা তারই।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: مَنِ ابْتَاعَ نَخْلًا بَعْدَ أَنْ تُؤَبَّرَ, فَثَمَرَتُهَا لِلْبَائِعِ الَّذِي بَاعَهَا, إِلَّا أَنْ يَشْتَرِطَ الْمُبْتَاعُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2379)، ومسلم (1543) (80) وزادا: ومن ابتاع عبدًا وله مال فماله للذي باعه إلا أن يشترط المبتاع والتأبير: هو التشقيق والتلقيح

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما-, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: من ابتاع نخلا بعد ان توبر, فثمرتها للباىع الذي باعها, الا ان يشترط المبتاع. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2379)، ومسلم (1543) (80) وزادا: ومن ابتاع عبدا وله مال فماله للذي باعه الا ان يشترط المبتاع والتابير: هو التشقيق والتلقيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - অগ্রিম বেচা কেনার বৈধতা এবং এর শর্তসমুহের বর্ণনা

৮৫৪. ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, আল্লাহর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যখন মদীনায় আগমন করেন তখন লোকেরা এক বা দু’ বছরের বাকীতে খেজুর সলম (অগ্রিম বিক্রি পদ্ধতিতে) বেচা-কেনা করত। এতে তিনি বললেন, যে ব্যক্তি খেজুরে সলম করতে চায় সে যেন নির্দিষ্ট মাপে এবং নির্দিষ্ট ওজনে সলম করে। বুখারীতে ’ফলের’ স্থলে ’যে কোন বস্তুর’ কথা উল্লেখের রয়েছে।[1]

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَدِمَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - الْمَدِينَةَ, وَهُمْ يُسْلِفُونَ فِي الثِّمَارِ السَّنَةَ وَالسَّنَتَيْنِ, فَقَالَ: مَنْ أَسْلَفَ فِي تَمْرٍ فَلْيُسْلِفْ فِي كَيْلٍ مَعْلُومٍ, وَوَزْنٍ مَعْلُومٍ, إِلَى أَجَلٍ مَعْلُومٍ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِلْبُخَارِيِّ: مَنْ أَسْلَفَ فِي شَيْءٍ

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صحيح. رواه البخاري (2239)، ومسلم (1604)، واللفظ لمسلم

عن ابن عباس -رضي الله عنهما- قال: قدم النبي - صلى الله عليه وسلم - المدينة, وهم يسلفون في الثمار السنة والسنتين, فقال: من اسلف في تمر فليسلف في كيل معلوم, ووزن معلوم, الى اجل معلوم. متفق عليه وللبخاري: من اسلف في شيء - صحيح. رواه البخاري (2239)، ومسلم (1604)، واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - অগ্রিম বেচা কেনার বৈধতা এবং এর শর্তসমুহের বর্ণনা

৮৫৫. ’আবদুর রহমান বিন আবযা ও ’আবদুল্লাহ বিন আবী আওফা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তাঁরা বলেছেন, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সঙ্গে (জিহাদে) আমরা মালে গনীমত লাভ করতাম, আমাদের কাছে সিরিয়া হতে কৃষকগণ আসলে আমরা তাদের সঙ্গে গম, যব ও যায়তুনে সলম করতাম।

অন্য একটি বর্ণনায় আছে- এবং তেলে- নির্দিষ্ট মেয়াদে। তিনি [মুহাম্মাদ ইবনু আবূ মুজালিদ (রহ.)] বলেন, আমি জিজ্ঞেস করলাম, তাদের নিকট সে সময় ফসল মাওজুদ থাকত, কি থাকত না? তাঁরা উভয়ে বললেন, আমরা এ বিষয়ে তাদেরকে জিজ্ঞেস করিনি।[1]

وَعَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى، وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أَوْفَى -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَا: كُنَّا نُصِيبُ الْمَغَانِمَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَكَانَ يَأْتِينَا أَنْبَاطٌ مِنْ أَنْبَاطِ الشَّامِ, فَنُسْلِفُهُمْ فِي الْحِنْطَةِ وَالشَّعِيرِ وَالزَّبِيبِ.
وَفِي رِوَايَةٍ: وَالزَّيْتِ - إِلَى أَجَلٍ مُسَمًّى. قِيلَ: أَكَانَ لَهُمْ زَرْعٌ? قَالَا: مَا كُنَّا نَسْأَلُهُمْ عَنْ ذَلِكَ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (4/ 434 / رقم 2254 و 2255) وهذا السياق بلفظ الزيت، وأما رواية: «الزبيب» فهي: (4/ 431)

وعن عبد الرحمن بن ابزى، وعبد الله بن ابي اوفى -رضي الله عنهما- قالا: كنا نصيب المغانم مع رسول الله - صلى الله عليه وسلم - وكان ياتينا انباط من انباط الشام, فنسلفهم في الحنطة والشعير والزبيب. وفي رواية: والزيت - الى اجل مسمى. قيل: اكان لهم زرع? قالا: ما كنا نسالهم عن ذلك. رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (4/ 434 / رقم 2254 و 2255) وهذا السياق بلفظ الزيت، واما رواية: «الزبيب» فهي: (4/ 431)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - মানুষের সম্পদ নষ্ট করা অথবা ফেরত দেয়ার উদ্দেশ্যে গ্ৰহনকারীর প্রতিদান

৮৫৬. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি মানুষের মাল (ধার) নেয় পরিশোধ করার উদ্দেশে আল্লাহ তা’আলা তা আদায়ের ব্যবস্থা করে দেন। আর যে তা নেয় বিনষ্ট করার উদ্দেশ্যে আল্লাহ তা’আলা তাকে ধবংস করেন।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ أَخَذَ أَمْوَالَ النَّاسِ [ص: 252] يُرِيدُ أَدَاءَهَا, أَدَّى اللَّهُ عَنْهُ, وَمَنْ أَخَذَهَا (1) يُرِيدُ إِتْلَافَهَا, أَتْلَفَهُ اللَّهُ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2387)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من اخذ اموال الناس [ص: 252] يريد اداءها, ادى الله عنه, ومن اخذها (1) يريد اتلافها, اتلفه الله». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2387)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - পণ্য বিক্রয় করার বিধান

৮৫৭. ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! অমুক (ইয়াহুদী) লোকের কাপড় সিরিয়া থেকে এসেছে, আপনি যদি তার নিকট লোক পাঠান তাহলে দু’খানা কাপড় বাকীতে এ কথার উপর আনবেন যে, পরে সক্ষম হলে তার দাম দিয়ে দিবেন। ফলে তিনি তার কাছে লোক পাঠালেন। কিন্তু সে তা দিলনা। -এ হাদীসের রাবীগণ নির্ভরযোগ্য (সিকা)।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- قَالَتْ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ فُلَانًا قَدِمَ لَهُ بَزٌّ مِنَ الشَّامِ, فَلَوْ بَعَثْتَ إِلَيْهِ, فَأَخَذْتَ مِنْهُ ثَوْبَيْنِ بِنَسِيئَةٍ إِلَى مَيْسَرَةٍ? فَأَرْسَلَ إِلَيْهِ, فَامْتَنَعَ. أَخْرَجَهُ الْحَاكِمُ، وَالْبَيْهَقِيُّ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

-

صحيح. رواه الحاكم (2/ 23 - 24)، ولفظه: عن عائشة، قالت: كان على رسول الله -صلى الله عليه وسلم- بُرْدان قَطَرِيان غليظان خشنان. فقلت: يا رسول الله إن ثوبيك خشنان غليظان، وإنك ترشح فيهما يثقلان عليك، وإن فلانًا قدم له بَز من الشام، فلو بعثت إليه فأخذت منه ثوبين بنسيئة إلى ميسرة، فأرسل إليه رسول الله -صلى الله عليه وسلم-. فقال: قد علمت ما يريد محمد؛ يريد أن يذهب بثوبي، ويمطلني فيها، فأتى الرسول إلى النبي -صلى الله عليه وسلم- فأخبره فقال النبي -صلى الله عليه وسلم-: قد كذب. قد علموا أني أتقاهم لله، وآداهم للأمانة قلت: والحديث عند النسائي (7/ 294)، والترمذي (1213)، ولا أدري سبب عَزْو الحافظ الحديث للحاكم والبيهقي دونهما. ثم رأيته في «التلخيص» عزاه لهما

وعن عاىشة -رضي الله عنها- قالت: قلت: يا رسول الله! ان فلانا قدم له بز من الشام, فلو بعثت اليه, فاخذت منه ثوبين بنسيىة الى ميسرة? فارسل اليه, فامتنع. اخرجه الحاكم، والبيهقي, ورجاله ثقات - صحيح. رواه الحاكم (2/ 23 - 24)، ولفظه: عن عاىشة، قالت: كان على رسول الله -صلى الله عليه وسلم- بردان قطريان غليظان خشنان. فقلت: يا رسول الله ان ثوبيك خشنان غليظان، وانك ترشح فيهما يثقلان عليك، وان فلانا قدم له بز من الشام، فلو بعثت اليه فاخذت منه ثوبين بنسيىة الى ميسرة، فارسل اليه رسول الله -صلى الله عليه وسلم-. فقال: قد علمت ما يريد محمد؛ يريد ان يذهب بثوبي، ويمطلني فيها، فاتى الرسول الى النبي -صلى الله عليه وسلم- فاخبره فقال النبي -صلى الله عليه وسلم-: قد كذب. قد علموا اني اتقاهم لله، واداهم للامانة قلت: والحديث عند النساىي (7/ 294)، والترمذي (1213)، ولا ادري سبب عزو الحافظ الحديث للحاكم والبيهقي دونهما. ثم رايته في «التلخيص» عزاه لهما

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - বন্ধক রাখা জিনিসের বন্ধক গ্ৰহীতার উপকার নেয়ার বিধান

৮৫৮. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বাহনের পশু বন্ধক থাকলে তার খরচের পরিমাণে তাতে আরোহণ করা যাবে। তদ্রুপ দুধেল প্রাণী বন্ধক থাকলে তার খরচের পরিমাণে দুধ পান করা যাবে। (মোট কথা) আরোহণকারী এবং দুধ পানকারীকেই খরচ বহন করতে হবে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الظَّهْرُ يُرْكَبُ بِنَفَقَتِهِ إِذَا كَانَ مَرْهُونًا, وَلَبَنُ الدَّرِّ يُشْرَبُ بِنَفَقَتِهِ إِذَا كَانَ مَرْهُونًا, وَعَلَى الَّذِي يَرْكَبُ وَيَشْرَبُ النَّفَقَةُ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2512)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الظهر يركب بنفقته اذا كان مرهونا, ولبن الدر يشرب بنفقته اذا كان مرهونا, وعلى الذي يركب ويشرب النفقة». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2512)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - বন্ধকদাতা কর্জ আদায়ে অপারগতার কারণে বন্ধকগ্ৰহীতা বন্ধক রাখা জিনেসের হকদার হবে না

৮৫৯. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- বন্ধক রাখা বস্তু থেকে তাঁর মালিককে বঞ্চিত করা যাবে না। যা লাভ হবে তা তার এবং লোকসানও তাকেই নিতে হবে।

-হাদীসের রাবীগণ নির্ভরযোগ্য কিন্তু আবূ দাউদ ও অন্য মুহাদ্দিসের নিকটে এটা মুরসাল হাদীস বলে সংরক্ষিত।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ -صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا يَغْلَقُ الرَّهْنُ مِنْ صَاحِبِهِ الَّذِي رَهَنَهُ, لَهُ غُنْمُهُ, وَعَلَيْهِ غُرْمُهُ». رَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ, وَالْحَاكِمُ, وَرِجَالهُ ثِقَاتٌ. إِلَّا أَنَّ الْمَحْفُوظَ عِنْدَ أَبِي دَاوُدَ وَغَيْرِهِ إِرْسَالُهُ

-

ضعيف مرفوعًا. رواه الدارقطني (3/ 33)، والحاكم (2/ 51) مرفوعًا. ورواه مرسلًا أبو داود في «المراسيل» (187) وهو الصواب، كما ذهب إلى ذلك جماعة من أهل العلم

وعنه قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم: «لا يغلق الرهن من صاحبه الذي رهنه, له غنمه, وعليه غرمه». رواه الدارقطني, والحاكم, ورجاله ثقات. الا ان المحفوظ عند ابي داود وغيره ارساله - ضعيف مرفوعا. رواه الدارقطني (3/ 33)، والحاكم (2/ 51) مرفوعا. ورواه مرسلا ابو داود في «المراسيل» (187) وهو الصواب، كما ذهب الى ذلك جماعة من اهل العلم

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - কার্জ করা এবং তা পরিশোধের সময় অতিরিক্ত দেওয়া জায়েয

৮৬০. আবূ রাফি’ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এক ব্যক্তির নিকট থেকে একটা অল্প বয়সের উট[1] ধার নিয়েছিলেন। তারপর তাঁর নিকটে যাকাতের উট এসে গেলে তিনি আবূ রাফে’কে ঐ রূপ অল্প বয়সের একটি (বাকারাহ) উট দিয়ে দিতে আদেশ দিলেন। আবূ রাফে বললেন, আমি সপ্তম বছরে পদার্পণকারী রাবায়ী উত্তম উট ব্যতীত পাচ্ছি না।[2] নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তাকে ভাল উটাই দিয়ে দাও। কারণ লোকেদের মধ্যে অবশ্য ঐ ব্যক্তি উত্তম যিনি ঋণ পরিশোধে উত্তম। (মুসলিম)[3]

وَعَنْ أَبِي رَافِعٍ - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - اسْتَسْلَفَ مِنْ رَجُلٍ بَكْرًا فَقَدِمَتْ عَلَيْهِ إِبِلٌ مِنَ الصَّدَقَةِ, فَأَمَرَ أَبَا رَافِعٍ أَنْ يَقْضِيَ الرَّجُلَ بَكْرَهُ, فَقَالَ: لَا أَجِدُ إِلَّا خَيَارًا. قَالَ: «أَعْطِهِ إِيَّاهُ, فَإِنَّ خِيَارَ النَّاسِ أَحْسَنُهُمْ قَضَاءً». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1600)، وفي رواية له: فإن خير عباد الله

وعن ابي رافع - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - استسلف من رجل بكرا فقدمت عليه ابل من الصدقة, فامر ابا رافع ان يقضي الرجل بكره, فقال: لا اجد الا خيارا. قال: «اعطه اياه, فان خيار الناس احسنهم قضاء». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1600)، وفي رواية له: فان خير عباد الله

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ রাফি‘ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - ঋণে লাভ বা উপস্বত্ত লাভের বিধান

৮৬১. ’আলী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, লাভ বা উপস্বত্ত লাভের এরূপ সমস্ত ঋণই সুদে গণ্য হবে। হাদীসটিকে হারিস বিন আবূ উসামাহ বৰ্ণনা করেছেন; এর সানাদ সাকিত বা অগ্রহণযোগ্য বা বাতিল।[1]

وَعَنْ عَلِيٍّ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ -صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «كُلُّ قَرْضٍ جَرَّ مَنْفَعَةً, فَهُوَ رِبًا». رَوَاهُ الْحَارِثُ بْنُ أَبِي أُسَامَةَ, وَإِسْنَادُهُ سَاقِطٌ

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ضعيف جدا، ً وقد أفصح الحافظ في «التلخيص» (3/ 34) عن علته، فقال: في إسناده سوَّار بن مصعب، وهو متروك

وعن علي - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم: «كل قرض جر منفعة, فهو ربا». رواه الحارث بن ابي اسامة, واسناده ساقط - ضعيف جدا، وقد افصح الحافظ في «التلخيص» (3/ 34) عن علته، فقال: في اسناده سوار بن مصعب، وهو متروك

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - ঋণে লাভ বা উপস্বত্ত লাভের বিধান

৮৬২. ফুযালাহ বিন উবাইদ (রাঃ) থেকে, বাইহাকীতে দুর্বল সূত্রে এই হাদীসটির একটি শাহিদ (সমর্থক হাদীস) রয়েছে।[1]

وَلَهُ شَاهِدٌ ضَعِيفٌ عَنْ فَضَالَةَ بْنِ عُبَيْدٍ عِنْدَ الْبَيْهَقِيِّ

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رواه البيهقي (5/ 350) موقوفًا بلفظ: كل قرض جر منفعة، فهو وجه من وجوه الربا وهو ضعيف كما قال الحافظ

وله شاهد ضعيف عن فضالة بن عبيد عند البيهقي - رواه البيهقي (5/ 350) موقوفا بلفظ: كل قرض جر منفعة، فهو وجه من وجوه الربا وهو ضعيف كما قال الحافظ

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৫. সালম (অগ্রিম) ক্রয় বিক্রয়, ঋণ ও বন্ধক - ঋণে লাভ বা উপস্বত্ত লাভের বিধান

৮৬৩. এবং ’আবদুল্লাহ বিন সালাম (রাঃ) থেকে বুখারীতে একটা মাওকুফ হাদীস রয়েছে।[1]

وَآخَرُ مَوْقُوفٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلَامٍ عِنْدَ الْبُخَارِيِّ

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رواه البخاري (3814) وهو من طريق أبي بُردة قال: أتيت المدينة، فلقيت عبد الله بن سلام -رضي الله عنه-، فقال: ألا تجيء فأطعمك سويقًا وتمرًا، وتدخل في بيت؟ ثم قال: إنك في أرضٍ الرِّبا بها فاشٍ، إذا كان لك على رجل حق، فأهدى إليك حِمْل تِبْن، أو حِمْل شعير، أو حمل قَتٍّ، فإنه ربا. «تنبيه»: نفى صاحب «سبل السلام» وجود هذا الأثر في البخاري، وتبعه على ذلك كل من أخرج «البلوغ» إما تصريحًا وإما تلميحًا. مع أنه يوجد في موضعين من «الصحيح». وانظر الأصل

واخر موقوف عن عبد الله بن سلام عند البخاري - رواه البخاري (3814) وهو من طريق ابي بردة قال: اتيت المدينة، فلقيت عبد الله بن سلام -رضي الله عنه-، فقال: الا تجيء فاطعمك سويقا وتمرا، وتدخل في بيت؟ ثم قال: انك في ارض الربا بها فاش، اذا كان لك على رجل حق، فاهدى اليك حمل تبن، او حمل شعير، او حمل قت، فانه ربا. «تنبيه»: نفى صاحب «سبل السلام» وجود هذا الاثر في البخاري، وتبعه على ذلك كل من اخرج «البلوغ» اما تصريحا واما تلميحا. مع انه يوجد في موضعين من «الصحيح». وانظر الاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - নিঃস্ব ব্যক্তির নিকট ঋণদাতা তার মাল হুবহু পেয়ে গেলে তার বিধান

৮৬৪। আবূ বকর ইবনু ’আবদির রহমান কর্তৃক আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি, যখন কেউ তার মাল এমন লোকের কাছে পায়, যে নিঃসম্বল হয়ে গেছে, তবে অন্যের চেয়ে সে-ই তার বেশী হকদার।[1]

وَرَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَمَالِكٌ: مِنْ رِوَايَةِ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ مُرْسَلًا بِلَفْظِ: أَيُّمَا رَجُلٌ بَاعَ مَتَاعًا فَأَفْلَسَ الَّذِي ابْتَاعَهُ, وَلَمْ يَقْبِضِ الَّذِي بَاعَهُ مِنْ ثَمَنِهِ شَيْئًا, فَوَجَدَ مَتَاعَهُ بِعَيْنِهِ, فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ, وَإِنْ مَاتَ الْمُشْتَرِي فَصَاحِبُ الْمَتَاعِ أُسْوَةُ الْغُرَمَاءِ

وَوَصَلَهُ الْبَيْهَقِيُّ, وَضَعَّفَهُ تَبَعًا لِأَبِي دَاوُدَ

ইমাম আবূ দাউদ ও মালিক উক্ত আবূ বকর (রাঃ) থেকে মুরসালরূপে এরূপ শব্দযোগে বর্ণনা করেছেন ’কোন ব্যক্তি কোন বস্তু (বাকীতে) বিক্রয় করল, তারপর ক্রেতা অভাবগ্ৰস্ত হয়ে পড়লো, অথচ বিক্রেতা তার মূল্য বাবদ কিছুই গ্রহণ করেনি-যদি ঐ বিক্রিত বস্তুটি পূর্ববৎই থেকে থাকে তাহলে বিক্রেতাই ঐ বস্তুর অধিক হকদার হবে।

আর যদি ক্রেতা মরে গিয়ে থাকে তাহলে বিক্রেতা অন্যান্য মহাজ্জনদের সমপর্যায়ভুক্ত হবে।[2]

বাইহাকী একে মাওসূল বা অবিচ্ছিন্ন সানাদযুক্ত হাদীসরূপে বর্ণনা করেছেন ও আবূ দাউদের অভিমতের অনুকূলে হাদীসটিকে যঈফ বলেছেন।[3]

وَرَوَى أَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ: مِنْ رِوَايَةِ عُمَرَ بْنِ خَلْدَةَ قَالَ: أَتَيْنَا أَبَا هُرَيْرَةَ فِي صَاحِبٍ لَنَا قَدْ أَفْلَسَ, فَقَالَ: لَأَقْضِيَنَّ فِيكُمْ بِقَضَاءِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ أَفْلَسَ أَوْ مَاتَ فَوَجَدَ رَجُلٌ مَتَاعَهُ بِعَيْنِهِ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ. وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَضَعَّفَ أَبُو دَاوُدَ هَذِهِ الزِّيَادَةَ فِي ذِكْرِ الْمَوْتِ

আর ’উমার বিন খালদাহ কর্তৃক আবূ দাউদে ও ইবনু মাজাহতে বর্ণিত হয়েছে- আমরা আমাদের এক নিঃস্ব বন্ধুর ব্যাপারে আবূ হুরাইরা (রাঃ)-এর নিকটে আসলাম। তিনি বললেন, আমি এ ব্যাপারে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম -এর ফয়সালা অনুযায়ী ফয়সালা দেব। (তা হচ্ছে) যে ব্যক্তি বাকীতে কোন বস্তু ক্রয় করার পর নিঃস্ব হয়ে যায় অথবা মারা যায়, আর বিক্রেতা ব্যক্তি তার ঐ মাল ঠিকভাবে পেয়ে যায়, তাহলে সে ঐ বস্তুর সর্বাপেক্ষা অধিক হকদার হবে। হাকিম হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন। আর আবূ দাউদ একে যঈফ বলেছেন এবং অত্র হাদীসে মৃত্যুর উল্লেখ সংযোজিত অংশটুকুকেও তিনি যঈফ বলেছেন।[4]

عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ, عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه -[قَالَ]: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ: «مَنْ أَدْرَكَ مَالَهُ بِعَيْنِهِ عِنْدَ رَجُلٍ قَدْ أَفْلَسَ, فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ مِنْ غَيْرِهِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2402)، ومسلم (1559)

عن ابي بكر بن عبد الرحمن, عن ابي هريرة - رضي الله عنه -[قال]: سمعت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول: «من ادرك ماله بعينه عند رجل قد افلس, فهو احق به من غيره». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2402)، ومسلم (1559)

হাদিসের মানঃ সহিহ/যঈফ [মিশ্রিত]
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - সামৰ্থবান ব্যক্তির ঋণখেলাপি হওয়া হারাম এবং তার বিরুদ্ধে যা করা বৈধ

৮৬৫. ’আমর ইবনু শারীদ (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে বর্ণনা করেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, সামৰ্থ্যবান ধনী ব্যক্তির ঋণ পরিশোধে টালবাহানা করার অপরাধ তার সম্মানহানি ও শাস্তিপ্রাপ্তিকে বৈধ করে দেয়। -বুখারী হাদীসটিকে মু’আল্লাকরূপে বর্ণনা করেছেন; ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ الشَّرِيدِ, عَنْ أَبِيهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَيُّ الْوَاجِدِ يُحِلُّ عِرْضَهُ وَعُقُوبَتَهُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَعَلَّقَهُ الْبُخَارِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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حسن. رواه البخاري معلقًا (5/ 62)، ووصله أبو داود (3628)، والنسائي (7/ 316)، وأيضًا ابن ماجه (3627)، وابن حبان (1164) وقال الحافظ في «الفتح»: «إسناده حسن». و «الليّ»: المطل. و «الواجد»: الغنيّ. علق البخاري عن سفيان قوله: عرضه: يقول: مطلتني. وعقوبته: الحبس. قلت: ودليل الحبس في الشريعة حديث بَهْز بن حكيم، عن أبيه، عن جده، أن النبي -صلى الله عليه وسلم- حبس رجلًا في تهمة، ثم خلى عنه وهو حديث حسن، وقد خرجته في كتاب «الأقضية النبوية» لابن الطلَّاع -يسر الله نشره-

وعن عمرو بن الشريد, عن ابيه قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لي الواجد يحل عرضه وعقوبته». رواه ابو داود, والنساىي, وعلقه البخاري, وصححه ابن حبان - حسن. رواه البخاري معلقا (5/ 62)، ووصله ابو داود (3628)، والنساىي (7/ 316)، وايضا ابن ماجه (3627)، وابن حبان (1164) وقال الحافظ في «الفتح»: «اسناده حسن». و «اللي»: المطل. و «الواجد»: الغني. علق البخاري عن سفيان قوله: عرضه: يقول: مطلتني. وعقوبته: الحبس. قلت: ودليل الحبس في الشريعة حديث بهز بن حكيم، عن ابيه، عن جده، ان النبي -صلى الله عليه وسلم- حبس رجلا في تهمة، ثم خلى عنه وهو حديث حسن، وقد خرجته في كتاب «الاقضية النبوية» لابن الطلاع -يسر الله نشره-

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - নিঃস্ব ব্যক্তির সম্পদ বণ্টন এবং তাকে দান করা শরীয়তসম্মত

৮৬৬. আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে কোন ব্যক্তি ফল ক্রয় করে তাতে বিপদগ্ৰস্ত হয়ে পড়েন এবং তার ঋণের বােঝা বেড়ে যায়। ফলে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তোমরা তাকে সাদাকাহ (সাহায্য) প্ৰদান কর। লোকেরা তাকে সাদাকাহ বা সাহায্য করলো কিন্তু ঐ সাহায্যের পরিমাণ ঋণ সম্পূর্ণভাবে পরিশোধ করার মত হল না। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার পাওনাদারদেরকে বললেন, যা পাচ্ছ তা নাও, এর অধিক আর তোমাদের জন্য হবে না।[1]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: أُصِيبَ رَجُلٌ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم - فِي ثِمَارٍ ابْتَاعَهَا, فَكَثُرَ دَيْنُهُ, فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «تَصَدَّقُوا عَلَيْهِ»، فَتَصَدَّقَ النَّاسُ عَلَيْهِ, وَلَمْ يَبْلُغْ ذَلِكَ وَفَاءَ دَيْنِهِ, فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - لِغُرَمَائِهِ: «خُذُوا مَا وَجَدْتُمْ, وَلَيْسَ لَكُمْ إِلَّا ذَلِكَ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1556)

وعن ابي سعيد الخدري - رضي الله عنه - قال: اصيب رجل في عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم - في ثمار ابتاعها, فكثر دينه, فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «تصدقوا عليه»، فتصدق الناس عليه, ولم يبلغ ذلك وفاء دينه, فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - لغرماىه: «خذوا ما وجدتم, وليس لكم الا ذلك». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1556)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - নিঃস্ব ব্যক্তির মালিকানা হরণ শরীয়তসম্মত

৮৬৭. কা’ব বিন মালিক কর্তৃক তাঁর পিতা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, অবশ্য রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (তাঁর প্রিয় সাহাবী) মু’আযের মালের উপর ক্রোক আরোপ করেছিলেন, আর তাঁর ঋণ পরিশোধ হেতু তাঁর মাল বিক্রয় করে দিয়েছিলেন। দারাকুতনী, হাকিম একে সহীহ বলেছেন; আবূ দাউদ একে মুরসাল হাদীসররূপে বর্ণনা করেছেন এবং হাদীসটি মুরসাল হওয়াকে অগ্রগণ্য বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ, عَنْ أَبِيهِ; - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - حَجَرَ عَلَى مُعَاذٍ مَالَهُ, وَبَاعَهُ فِي دَيْنٍ كَانَ عَلَيْهِ. رَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَأَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ مُرْسَلًا, وَرُجِّحَ

-

ضعيف مرفوعًا. والصحيح فيه الإرسال كما رجح ذلك غير واحد، وقد تكلمت عليه مفصلًا في «الأقضية النبوية «لابن الطلاع

وعن ابن كعب بن مالك, عن ابيه; - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - حجر على معاذ ماله, وباعه في دين كان عليه. رواه الدارقطني, وصححه الحاكم, واخرجه ابو داود مرسلا, ورجح - ضعيف مرفوعا. والصحيح فيه الارسال كما رجح ذلك غير واحد، وقد تكلمت عليه مفصلا في «الاقضية النبوية «لابن الطلاع

হাদিসের মানঃ মুরসাল
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - নিঃস্ব ব্যক্তির মালিকানা হরণ শরীয়তসম্মত

৮৬৮. ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমার ১৪ বছর বয়সে ওহুদ যুদ্ধের সময় আমাকে যোদ্ধাদের মধ্যে শামিল করার জন্য রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর নিকটে হাজির করা হলে তিনি আমাকে অনুমতি দেননি। তারপর খন্দকের যুদ্ধের সময় ১৫ বছর বয়সে আমাকে তাঁর সম্মুখে পেশ করা হলে তিনি আমাকে এর অনুমতি প্ৰদান করেন।[1]

বাইহাকীতে আছে, আমাকে অনুমতি দেননি। আর আমাকে সাবালক মনে করেননি। ইবনু খুযাইমাহ হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[2]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: عُرِضْتُ عَلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - يَوْمَ أُحُدٍ, وَأَنَا ابْنُ أَرْبَعَ عَشْرَةَ سَنَةً, فَلَمْ يُجِزْنِي, وَعُرِضْتُ عَلَيْهِ يَوْمَ الْخَنْدَقِ, وَأَنَا ابْنُ خَمْسَ عَشْرَةَ سَنَةً, فَأَجَازَنِي. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبَيْهَقِيِّ: «فَلَمْ يُجِزْنِي, وَلَمْ يَرَنِي بَلَغْتُ». وَصَحَّحَهَا ابْنُ خُزَيْمَةَ

-

صحيح. رواه البخاري (2664)، ومسلم (1868)، وزادا: «قال نافع: فقدمت على عمر بن عبد العزيز - وهو يومئذ خليفة - فحدثته هذا الحديث. فقال: إن هذا لحدّ بين الصغير والكبير. فكتب لعماله أن يفرضوا لمن بلغ خمس عشرة». وزاد مسلم: «ومن كان دون ذلك فاجعلوه في العيال

صحيح بهذه الزيادة، وإن لم أجده في «سنن البيهقي» بهذه الزيادة. لكن رواه ابن حبان في «صحيحه» (4708) بهذه الزيادة وسنده صحيح. ثم رأيت الحافظ في «الفتح» (5/ 279) قال: «أخرجه عبد الرازق، عن ابن جريج ورواه أبو عَوانة وابن حبان في «صحيحيهما» من وجه آخر عن ابن جريج. أخبرني نافع - قال سمير: كذا قال والذي في ابن حبان: أخبرني عبيد الله بن عمر، عن نافع فذكر الحديث بلفظ: «ولم يرني بلغت». وهي زيادة صحيحة لا مطعن فيها؛ لجلالة ابن جريج، وتقدمه على غيره في حديث نافع، وقد صرح فيها بالتحديث، فانتقى ما يخشى من تدليسه

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما- قال: عرضت على النبي - صلى الله عليه وسلم - يوم احد, وانا ابن اربع عشرة سنة, فلم يجزني, وعرضت عليه يوم الخندق, وانا ابن خمس عشرة سنة, فاجازني. متفق عليه وفي رواية للبيهقي: «فلم يجزني, ولم يرني بلغت». وصححها ابن خزيمة - صحيح. رواه البخاري (2664)، ومسلم (1868)، وزادا: «قال نافع: فقدمت على عمر بن عبد العزيز - وهو يومىذ خليفة - فحدثته هذا الحديث. فقال: ان هذا لحد بين الصغير والكبير. فكتب لعماله ان يفرضوا لمن بلغ خمس عشرة». وزاد مسلم: «ومن كان دون ذلك فاجعلوه في العيال صحيح بهذه الزيادة، وان لم اجده في «سنن البيهقي» بهذه الزيادة. لكن رواه ابن حبان في «صحيحه» (4708) بهذه الزيادة وسنده صحيح. ثم رايت الحافظ في «الفتح» (5/ 279) قال: «اخرجه عبد الرازق، عن ابن جريج ورواه ابو عوانة وابن حبان في «صحيحيهما» من وجه اخر عن ابن جريج. اخبرني نافع - قال سمير: كذا قال والذي في ابن حبان: اخبرني عبيد الله بن عمر، عن نافع فذكر الحديث بلفظ: «ولم يرني بلغت». وهي زيادة صحيحة لا مطعن فيها؛ لجلالة ابن جريج، وتقدمه على غيره في حديث نافع، وقد صرح فيها بالتحديث، فانتقى ما يخشى من تدليسه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - গুপ্ত স্থানে লোম উঠার মাধ্যমে প্রাপ্ত বয়স্ক হওয়া

৮৬৯। আতিয়্যাহ কুরাযী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, বানু কুরাইযার (সামরিক শাস্তির) ঘটনাকালে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে আমাদেরকে হাজির করা হয়, তাতে যে সব যুবকের গুপ্ত স্থানের লোম উদগম হয়েছিল তাদেরকে (অপরাধী ধরে) হত্যা করা হল আর যাদের তা বের হয়নি তাদেরকে ছেড়ে দেয়া হল। আমার সে সময় তা বের হয়নি বলে আমাকে (নাবালেগ ধরে) ছেড়ে দেয়া হয়েছিল ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَطِيَّةَ الْقُرَظِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: عُرِضْنَا عَلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - يَوْمَ قُرَيْظَةَ، فَكَانَ مَنْ أَنْبَتَ قُتِلَ, وَمَنْ لَمْ يُنْبِتْ خُلِّيَ سَبِيلُهُ, فَكُنْتُ فِيمَنْ لَمْ يُنْبِتْ فَخُلِّيَ سَبِيلِي. رَوَاهُ الْخَمْسَةُ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ، وَالْحَاكِمُ

-

صحيح. رواه أبو داود (4404) و (4405)، والنسائي في «الكبرى» (5/ 185)، والترمذي (1584)، وابن ماجه (2541)، وأحمد (4/ 310)، وابن حبان (4760) والحاكم (2/ 123)، وفي غير موطن. وفي رواية للنسائي، وأبي داود، وابن حبان: كنت فيمن حكم فيه سعد، فجيء بي وأنا أرى أنه سيقتلني، فكشفوا عانتي فوجدوني لم أُنبت، فجعلوني في السَبْي وله ألفاظ أخرى، ذكرتها بطرقها في «الأصل». وقال الترمذي «هذا حديث حسن صحيح، والعمل على هذا عند بعض أهل العلم: أنهم يرون الإنبات بلوغًا إن لم يعرف احتلامه ولا سنه، وهو قول أحمد وإسحاق». وقال الحاكم: «صحيح على شرط الشيخين». فقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 42): وهو كما قال؛ إلا أنهما لم يخرجا لعطيّة، وما له إلا هذا الحديث الواحد

وعن عطية القرظي - رضي الله عنه - قال: عرضنا على النبي - صلى الله عليه وسلم - يوم قريظة، فكان من انبت قتل, ومن لم ينبت خلي سبيله, فكنت فيمن لم ينبت فخلي سبيلي. رواه الخمسة, وصححه ابن حبان، والحاكم - صحيح. رواه ابو داود (4404) و (4405)، والنساىي في «الكبرى» (5/ 185)، والترمذي (1584)، وابن ماجه (2541)، واحمد (4/ 310)، وابن حبان (4760) والحاكم (2/ 123)، وفي غير موطن. وفي رواية للنساىي، وابي داود، وابن حبان: كنت فيمن حكم فيه سعد، فجيء بي وانا ارى انه سيقتلني، فكشفوا عانتي فوجدوني لم انبت، فجعلوني في السبي وله الفاظ اخرى، ذكرتها بطرقها في «الاصل». وقال الترمذي «هذا حديث حسن صحيح، والعمل على هذا عند بعض اهل العلم: انهم يرون الانبات بلوغا ان لم يعرف احتلامه ولا سنه، وهو قول احمد واسحاق». وقال الحاكم: «صحيح على شرط الشيخين». فقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 42): وهو كما قال؛ الا انهما لم يخرجا لعطية، وما له الا هذا الحديث الواحد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - স্বামীর অনুমতি ব্যতিরেকে স্ত্রীর নিজের মাল হতে খরচ করার বিধান

৮৭০. ’আমর বিন শু’আইব হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে, তিনি তাঁর দাদা থেকে বর্ণনা করেছেন যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন মহিলার জন্য স্বামীর বিনা অনুমতিতে কোন দান করা বৈধ হবে না।

অন্য শব্দে আছে, কোন স্ত্রীলোকের জন্য তার মালের হস্তান্তর বা অন্যকে প্রদান করা বৈধ হবে না যদি তাঁর স্বামী তার ইজ্জত আবরুসহ জীবনযাপনের দায়িত্ব বহন করেন। --ইমাম হাকিম সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ; أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: لَا يَجُوزُ لِامْرَأَةٍ عَطِيَّةٌ إِلَّا بِإِذْنِ زَوْجِهَا
وَفِي لَفْظٍ: «لَا يَجُوزُ لِلْمَرْأَةِ أَمْرٌ فِي مَالِهَا, إِذَا مَلَكَ زَوْجُهَا عِصْمَتَهَا». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَصْحَابُ السُّنَنِ إِلَّا التِّرْمِذِيَّ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (2/ 179 و 184)، وأبو داود (3547)، والنسائي (5/ 65 - 66)، وابن ماجه (2388)، والحاكم (2/ 47) وهو وإن كان حسن الإسناد؛ إلا أنه صحيح لما له من شواهد، وقد ذكرتها في «الأصل» كما أشرت إلى الرويات ومخرجيها

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده; ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: لا يجوز لامراة عطية الا باذن زوجها وفي لفظ: «لا يجوز للمراة امر في مالها, اذا ملك زوجها عصمتها». رواه احمد, واصحاب السنن الا الترمذي, وصححه الحاكم - صحيح. رواه احمد (2/ 179 و 184)، وابو داود (3547)، والنساىي (5/ 65 - 66)، وابن ماجه (2388)، والحاكم (2/ 47) وهو وان كان حسن الاسناد؛ الا انه صحيح لما له من شواهد، وقد ذكرتها في «الاصل» كما اشرت الى الرويات ومخرجيها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৬. দেউলিয়া ও সম্পত্তির কর্তৃত্ব বিলোপ - কোন ব্যক্তির ক্ষতিগ্ৰস্ত হওয়া তিনজন সাক্ষী ব্যতীত গ্ৰহীত হবে না

৮৭১. কাবীসাহ বিন মুখারিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তিন শ্রেণীর লোক ব্যতীত কারও জন্য ভিক্ষা করা বৈধ নয়। ১. কোন ব্যক্তি কারও ঋণ পরিশোধের জিম্মাদারী নিয়েছে। তা আদায় দেয়া পর্যন্ত তার ভিক্ষা চাওয়া বৈধ- তারপর সে তা থেকে বিরত থাকবে। ২. কোন ব্যক্তির ধনসম্পদ কোন দুর্যোগহেতু ধ্বংসপ্রাপ্ত হয় তার জন্য- তার জীবন ধারনের সামৰ্থ্য অর্জন পর্যন্ত ভিক্ষা করা বৈধ হবে। ৩. ঐ ব্যক্তি যাকে দুর্ভিক্ষে পেয়েছে, অতঃপর তার অনাহার থাকার পক্ষে তার কওমের মধ্যে থেকে তিনজন জ্ঞানী লোক সাক্ষী দেন যে অমুক ব্যক্তিকে দুর্ভিক্ষে পেয়েছে, তার জন্য ভিক্ষা করা বৈধ হবে।[1]

وَعَنْ قَبِيصَةَ بْنِ مُخَارِقٍ [الْهِلَالِيِّ]- رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ الْمَسْأَلَةَ لَا تَحِلُّ إِلَّا لِأَحَدِ ثَلَاثَةٍ: رَجُلٍ تَحَمَّلَ حَمَالَةً فَحَلَّتْ لَهُ الْمَسْأَلَةُ حَتَّى يُصِيبَهَا ثُمَّ يُمْسِكَ، وَرَجُلٍ أَصَابَتْهُ جَائِحَةٌ اجْتَاحَتْ مَالَهُ, فَحَلَّتْ لَهُ الْمَسْأَلَةُ حَتَّى يُصِيبَ قِوَامًا مِنْ عَيْشٍ، وَرَجُلٍ أَصَابَتْهُ فَاقَةٌ حَتَّى يَقُولَ ثَلَاثَةٌ مِنْ ذَوِي الْحِجَى مِنْ قَوْمِهِ: لَقَدْ أَصَابَتْ فُلَانًا فَاقَةٌ, فَحَلَّتْ لَهُ الْمَسْأَلَةُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

صحيح

وعن قبيصة بن مخارق [الهلالي]- رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ان المسالة لا تحل الا لاحد ثلاثة: رجل تحمل حمالة فحلت له المسالة حتى يصيبها ثم يمسك، ورجل اصابته جاىحة اجتاحت ماله, فحلت له المسالة حتى يصيب قواما من عيش، ورجل اصابته فاقة حتى يقول ثلاثة من ذوي الحجى من قومه: لقد اصابت فلانا فاقة, فحلت له المسالة». رواه مسلم - صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৭. আপোষ মীমাংসা - শরীয়ত বিরোধী না হলে সন্ধি করা জায়েয

৮৭২. আমার বিন আওফ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- মুসলিমদের মধ্যে আপোষ-মীমাংসা করা বৈধ কাজ, তবে তার দ্বারা হালালকে হারাম ও হারামকে হালাল করা হলে তা অবৈধ হবে। মুসলিম ব্যক্তি স্বীয় শর্তাদি পালনেও বাধ্য, তবে ঐ শর্ত পালনে বাধ্য নয় যার দ্বারা হালাল বস্তুকে হারাম ও হারাম বস্তুকে হালাল করা হয়। -তিরমিযী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন। অন্যান্য মুহাদ্দিস মুনকার বলেছেন। কেননা এ হাদীসের রাবী ’কাসীর বিন ’আবদুল্লাহ বিন আমর বিন আওফ দুর্বল।[1] তিরমিযী সম্ভবতঃ সানাদের আধিক্যতা হেতু হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[2]

عَنْ عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ الْمُزَنِيِّ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «الصُّلْحُ جَائِزٌ بَيْنَ الْمُسْلِمِينَ, إِلَّا صُلْحًا حَرَّمَ حَلَالًا وَ أَحَلَّ حَرَامًا، وَالْمُسْلِمُونَ عَلَى شُرُوطِهِمْ, إِلَّا شَرْطًا حَرَّمَ حَلَالًا وَ أَحَلَّ حَرَامًا». رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ وَصَحَّحَهُ
وَأَنْكَرُوا عَلَيْهِ; لِأَنَّ رَاوِيَهُ كَثِيرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِوِ بْنِ عَوْفٍ ضَعِيفٌ
وَكَأَنَّهُ اعْتَبَرَهُ بِكَثْرَةِ طُرُقِهِ

عن عمرو بن عوف المزني - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «الصلح جاىز بين المسلمين, الا صلحا حرم حلالا و احل حراما، والمسلمون على شروطهم, الا شرطا حرم حلالا و احل حراما». رواه الترمذي وصححه وانكروا عليه; لان راويه كثير بن عبد الله بن عمرو بن عوف ضعيف وكانه اعتبره بكثرة طرقه

হাদিসের মানঃ তাহকীক অপেক্ষমাণ
বর্ণনাকারীঃ আমর ইবনু ‘আওফ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৭. আপোষ মীমাংসা - শরীয়ত বিরোধী না হলে সন্ধি করা জায়েয

৮৭৩. আবূ হুরাইরা (রাঃ) কর্তৃক বর্ণিত এই হাদীসটিকে ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন।[1]

وَقَدْ صَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ مِنْ حَدِيثِ أَبِي هُرَيْرَةَ

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حسن. رواه ابن حبان (1199)، ورواه ابن الجارود، والحاكم، ومن قبلهما رواه أبو داود (3594) وقال الحافظ في «التغليق» (3/ 281) حديث: المسلمون عند شروطهم رُوي من حديث أبي هريرة، وعمرو بن عوف، وأنس بن مالك، ورافع بن خَدِيج، وعبد الله بن عمر، وغيرهم، وكلها فيها مقال، لكن حديث أبي هريرة أمثلها

وقد صححه ابن حبان من حديث ابي هريرة - حسن. رواه ابن حبان (1199)، ورواه ابن الجارود، والحاكم، ومن قبلهما رواه ابو داود (3594) وقال الحافظ في «التغليق» (3/ 281) حديث: المسلمون عند شروطهم روي من حديث ابي هريرة، وعمرو بن عوف، وانس بن مالك، ورافع بن خديج، وعبد الله بن عمر، وغيرهم، وكلها فيها مقال، لكن حديث ابي هريرة امثلها

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৭. আপোষ মীমাংসা - মুসলিম প্রতিবেশী তার অপর প্রতিবেশী ভাইকে তার দেয়ালে কাঠ গাড়তে দিতে বাধা প্রদান করা নিষেধ

৮৭৪. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন প্রতিবেশী যেন তার প্রতিবেশীকে তার দেয়ালে খুঁটি পুঁততে নিষেধ না করে। তারপর আবূ হুরাইরা (রাঃ) বলেন, কী হল, আমি তোমাদেরকে এ হাদীস হতে উদাসীন দেখতে পাচ্ছি। আল্লাহর কসম, আমি সব সময় তোমাদেরকে এ হাদীস বলতে থাকব।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - «قَالَ: لَا يَمْنَعُ جَارٌ جَارَهُ أَنْ يَغْرِزَ خَشَبَةً فِي جِدَارِهِ». ثُمَّ يَقُولُ أَبُو هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - مَا لِي أَرَاكُمْ عَنْهَا مُعْرِضِينَ? وَاللَّهِ لَأَرْمِيَنَّ بِهَا بَيْنَ أَكْتَافِكُمْ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2463)، ومسلم (1609)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - «قال: لا يمنع جار جاره ان يغرز خشبة في جداره». ثم يقول ابو هريرة - رضي الله عنه - ما لي اراكم عنها معرضين? والله لارمين بها بين اكتافكم. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2463)، ومسلم (1609)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৭. আপোষ মীমাংসা - মুসলিম ভাইয়ের অসন্তুষ্ট মনে তার সামান্যতম সম্পদ নেওয়া নিষেধ

৮৭৫. আবূ হুমাইদ সাঈদী (রাঃ) কর্তৃক বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন লোক তার ভাই-এর অন্তরকে ব্যথিত করে তার লাঠি (সামান্য বস্তু) গ্রহণও বৈধ হবে না। —ইবনু হিব্বান ও হাকিম তাঁদের সহীহা এর মধ্যে।[1]

وَعَنْ أَبِي حُمَيْدٍ السَّاعِدِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَحِلُّ لِامْرِئٍ أَنْ يَأْخُذَ عَصَا أَخِيهِ بِغَيْرِ طِيبِ نَفْسٍ مِنْهُ». رَوَاهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ فِي «صَحِيحَيْهِمَا

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صحيح. رواه ابن حبان (1166)، وأما عزوه للحاكم فلعله وهْم من الحافظ. والله أعلم. وللحديث شواهد كثيرة مذكورة في الأصل

وعن ابي حميد الساعدي - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يحل لامرى ان ياخذ عصا اخيه بغير طيب نفس منه». رواه ابن حبان, والحاكم في «صحيحيهما - صحيح. رواه ابن حبان (1166)، واما عزوه للحاكم فلعله وهم من الحافظ. والله اعلم. وللحديث شواهد كثيرة مذكورة في الاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৮. অপর ব্যক্তির উপর ঋণ ন্যস্ত করা ও কোন বস্তুর যামীন হওয়া - হাওলার (অপর ব্যক্তির উপর কার্জ ন্যস্ত করা) বৈধতা এবং তা গ্রহণ করা

৮৭৬. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, ধনী ব্যক্তির ঋণ পরিশোধে গড়িমসি করা জুলুম। যখন তোমাদের কাউকে (তার জন্যে) কোন ধনী ব্যক্তির হাওয়ালা করা হয়, তখন সে যেন তা মেনে নেয়। আহমাদের অন্য বর্ণনায় আছেঃ হাওয়ালা করলে তা মেনে নেবে।[1]

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَطْلُ الْغَنِيِّ ظُلْمٌ, وَإِذَا أُتْبِعُ أَحَدُكُمْ عَلَى مَلِيٍّ فَلْيَتْبَعْ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةِ أَحْمَدَ: «فَلْيَحْتَلْ

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صحيح. رواه البخاري (2287)، ومسلم (1564)

عن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «مطل الغني ظلم, واذا اتبع احدكم على ملي فليتبع». متفق عليه وفي رواية احمد: «فليحتل - صحيح. رواه البخاري (2287)، ومسلم (1564)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৮. অপর ব্যক্তির উপর ঋণ ন্যস্ত করা ও কোন বস্তুর যামীন হওয়া - মৃত ব্যক্তির কর্জের জিম্মা নেওয়া জায়েয এবং তা পরিশোধ না করা পর্যন্ত মৃত ব্যক্তি (শাস্তি থেকে রেহাই পাবে না)

৮৭৭. জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমাদের কোন একজন সাহাবী ব্যক্তি ইনতিকাল করায় আমরা তাঁর গোসল দিলাম, খুশবু লাগালাম, কাফন পরালাম। তারপর তাঁর লাশ নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে হাজির করলাম। আমরা বললাম, তাঁর জানাযা পড়ান। তিনি দু-এক পা এগিয়ে আসলেন, অতঃপর বললেন, তাঁর কি কোন ঋণ রয়েছে? আমরা বললাম, দু’টি দীনার (ঋণ আছে)। এ কথা শুনে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ফিরে গেলেন। আর কাতাদাহ দীনার (স্বর্ণমুদ্রা) দু’টির ঋণ পরিশোধের জিম্মা নিলেন। তারপর আমরা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে এলাম, আবূ কাতাদাহ বললেন, আমার জিম্ময় ঐ দীনার দু’টি রইলো। তৎপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তাহলে ঋণ দাতার হক এবারে সাব্যস্ত হল এবং মৃতব্যক্তি ঋণ থেকে মুক্ত হল তো? আবূ কাতাদাহ উত্তরে বললেন, জি-হাঁ। তারপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মৃত সাহাবীর জানাযার সালাত আদায় করলেন। ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: تُوُفِّيَ رَجُلٌ مِنَّا, فَغَسَّلْنَاهُ, وَحَنَّطْنَاهُ, وَكَفَّنَّاهُ, ثُمَّ أَتَيْنَا بِهِ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَقُلْنَا: تُصَلِّي عَلَيْهِ? فَخَطَا خُطًى, ثُمَّ قَالَ: «أَعَلَيْهِ دَيْنٌ» قُلْنَا: دِينَارَانِ، فَانْصَرَفَ, فَتَحَمَّلَهُمَا أَبُو قَتَادَةَ، فَأَتَيْنَاهُ, فَقَالَ أَبُو قَتَادَةَ: الدِّينَارَانِ عَلَيَّ، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «أُحِقَّ الْغَرِيمُ وَبَرِئَ مِنْهُمَا الْمَيِّتُ?» قَالَ: نَعَمْ, فَصَلَّى عَلَيْهِ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (3/ 330)، وأبو داود (3343)، والنسائي (4/ 65 - 66)، وابن حبان (3064)، واللفظ لأحمد وسنده حسن، وأما الباقون فلهم لفظ آخر وسندهم على شرط الشيخين، وتفصيل ذلك بالأصل

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: توفي رجل منا, فغسلناه, وحنطناه, وكفناه, ثم اتينا به رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فقلنا: تصلي عليه? فخطا خطى, ثم قال: «اعليه دين» قلنا: ديناران، فانصرف, فتحملهما ابو قتادة، فاتيناه, فقال ابو قتادة: الديناران علي، فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «احق الغريم وبرى منهما الميت?» قال: نعم, فصلى عليه. رواه احمد, وابو داود, والنساىي, وصححه ابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه احمد (3/ 330)، وابو داود (3343)، والنساىي (4/ 65 - 66)، وابن حبان (3064)، واللفظ لاحمد وسنده حسن، واما الباقون فلهم لفظ اخر وسندهم على شرط الشيخين، وتفصيل ذلك بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৮. অপর ব্যক্তির উপর ঋণ ন্যস্ত করা ও কোন বস্তুর যামীন হওয়া - দরিদ্র মৃত ব্যক্তির ঋণের জিম্মা রাষ্ট্রীয় কোষাগারে নেওয়া জায়েয

৮৭৮. আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত যে, আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট যখন কোন ঋণী ব্যক্তির জানাযা উপস্থিত করা হত তখন তিনি জিজ্ঞেস করতেন, সে তার ঋণ পরিশোধের জন্য অতিরিক্ত মাল রেখে গেছে কি? যদি তাকে বলা হত যে, সে তার ঋণ পরিশোধের মতো মাল রেখে গেছে তখন তার জানাযার সালাত আদায় করতেন। নতুবা বলতেন, তোমরা তোমাদের সাথীর জানায আদায় করে নাও। পরবর্তীতে যখন আল্লাহ তাঁর বিজয়ের দ্বার উম্মুক্ত করে দেন, তখন তিনি বললেন, আমি মু’মিনদের জন্য তাদের নিজের চেয়েও অধিক নিকটবর্তী। তাই কোন মু’মিন ঋণ রেখে মারা গেলে সে ঋণ পরিশোধ করার দায়িত্ব আমার। আর যে ব্যক্তি সম্পদ রেখে যায়, সে সম্পদ তার উত্তরাধিকারীদের জন্য।[1]

বুখারীর অন্য এক বর্ণনায় আছে- যে মরে যাবে আর ঋণ পরিশোধের মত কিছু রেখে না যায়।[2]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - كَانَ يُؤْتَى بِالرَّجُلِ الْمُتَوَفَّى عَلَيْهِ الدَّيْنُ, فَيَسْأَلُ: «هَلْ تَرَكَ لِدَيْنِهِ مِنْ قَضَاءٍ?» فَإِنْ حُدِّثَ أَنَّهُ تَرَكَ وَفَاءً صَلَّى عَلَيْهِ, وَإِلَّا قَالَ: «صَلُّوا عَلَى صَاحِبِكُمْ» فَلَمَّا فَتَحَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْفُتُوحَ قَالَ: «أَنَا أَوْلَى بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنْفُسِهِمْ, فَمَنْ تُوُفِّيَ, وَعَلَيْهِ دَيْنٌ فَعَلَيَّ قَضَاؤُهُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: «فَمَنْ مَاتَ وَلَمْ يَتْرُكْ وَفَاءً

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صحيح. رواه البخاري (2398)، ومسلم (1619)، وزادا: ومن ترك مالًا فهو لورثته

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - كان يوتى بالرجل المتوفى عليه الدين, فيسال: «هل ترك لدينه من قضاء?» فان حدث انه ترك وفاء صلى عليه, والا قال: «صلوا على صاحبكم» فلما فتح الله عليه الفتوح قال: «انا اولى بالمومنين من انفسهم, فمن توفي, وعليه دين فعلي قضاوه». متفق عليه وفي رواية للبخاري: «فمن مات ولم يترك وفاء - صحيح. رواه البخاري (2398)، ومسلم (1619)، وزادا: ومن ترك مالا فهو لورثته

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৮. অপর ব্যক্তির উপর ঋণ ন্যস্ত করা ও কোন বস্তুর যামীন হওয়া - হাদ্দের ক্ষেত্রে জিম্মা নেওয়ার বিধান

৮৭৯. ’আমর বিন শু’আইব হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে, তিনি তাঁর দাদা হতে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেছেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, হদ-এর ব্যাপারে কোন জিম্মাদারী নেই। —বাইহাকী দুর্বল সানাদে।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا كَفَالَةَ فِي حَدٍّ». رَوَاهُ الْبَيْهَقِيُّ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

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منكر. رواه البيهقي (6/ 77) وقال: «إسناده ضعيف. تفرد به بقية، عن أبي محمد؛ عمر بن أبي عمر الكلاعي، وهو من مشايخ بقية المجهولين، ورواياته منكرة

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا كفالة في حد». رواه البيهقي باسناد ضعيف - منكر. رواه البيهقي (6/ 77) وقال: «اسناده ضعيف. تفرد به بقية، عن ابي محمد؛ عمر بن ابي عمر الكلاعي، وهو من مشايخ بقية المجهولين، ورواياته منكرة

হাদিসের মানঃ মুনকার (সহীহ হাদীসের বিপরীত)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - শরীকানা ব্যবসার ক্ষেত্রে উপদেশ সহকারে উৎসাহ প্ৰদাণ এবং এতে খিয়ানত না করা

৮৮০. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, মহান আল্লাহ বলেছেন- যতক্ষণ দু’জন শরীকদার ব্যবসায়ে একে অপরের সাথে খিয়ানত (বিশ্বাসঘাতকতা) না করে ততক্ষণ আমি তাদের তৃতীয় শরীক হিসাবে (তাদের সহযোগিতা করতে) থাকি। অতঃপর যখন খিয়ানত করে, তখন আমি তাদের মধ্য থেকে বেরিয়ে যাই (তারা আমাদের সহযোগিতা থেকে বঞ্চিত হয়)।-হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «قَالَ اللَّهُ: أَنَا ثَالِثُ الشَّرِيكَيْنِ مَا لَمْ يَخُنْ أَحَدُهُمَا صَاحِبَهُ, فَإِذَا خَانَ خَرَجْتُ مِنْ بَيْنِهِمَا». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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ضعيف. رواه أبو داود (3383)، والحاكم (2/ 52) وله علتان: جهالة أحد رواته، والاختلاف في وصله وإرساله

عن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «قال الله: انا ثالث الشريكين ما لم يخن احدهما صاحبه, فاذا خان خرجت من بينهما». رواه ابو داود, وصححه الحاكم - ضعيف. رواه ابو داود (3383)، والحاكم (2/ 52) وله علتان: جهالة احد رواته، والاختلاف في وصله وارساله

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - শরীকানা ব্যবসায় ইসলাম আসার পূর্বেও প্রচলিত ছিলো

৮৮১. সায়িব ইবনু ইয়ায়ীদ মাখযূমী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর সাথে ব্যবসায়ে শরীক ছিলেন তাঁর নবী হওয়ার পূর্বে। তারপর তিনি (মাখযুমী) মক্কাবিজয় দিবসে এলেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম স্বাগত জানিয়ে বললেন, ’মারহাবা স্বাগতম—হে আমার ভাই! আমার শেয়ারদার’।[1]

وَعَنْ السَّائِبِ [بْنِ يَزِيدَ] الْمَخْزُومِيِّ - أَنَّهُ كَانَ شَرِيكَ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَبْلَ الْبَعْثَةِ, فَجَاءَ يَوْمَ الْفَتْحِ, فَقَالَ: «مَرْحَبًا بِأَخِي وَشَرِيكِي». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَةَ

-

حسن. رواه أحمد (3/ 425)، واللفظ له. وأما عزوه بهذا اللفظ لأبي داود (4836)، وابن ماجه (2287) فليس بدقيق، وبيان ذلك في الأصل

وعن الساىب [بن يزيد] المخزومي - انه كان شريك النبي - صلى الله عليه وسلم - قبل البعثة, فجاء يوم الفتح, فقال: «مرحبا باخي وشريكي». رواه احمد, وابو داود, وابن ماجة - حسن. رواه احمد (3/ 425)، واللفظ له. واما عزوه بهذا اللفظ لابي داود (4836)، وابن ماجه (2287) فليس بدقيق، وبيان ذلك في الاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - একাধিক অংশীদার হওয়ার বিধান

৮৮২. আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, বদর যুদ্ধের দিন সাদ (রাঃ), আম্মার (রাঃ) ও আমি গানীমাতের মালের ব্যাপারে অংশীদার হই। (এই মর্মে যে, আমরা যা পাবো তা তিনজনে ভাগ করে নিবো)। হাদীসের শেষে আছে- সা’দ দু’জন বন্দী আনলেন, আমি ও আম্মার কিছুই আনতে পারলাম না।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: اشْتَرَكْتُ أَنَا وَعَمَّارٌ وَسَعْدٌ فِيمَا نُصِيبُ يَوْمَ بَدْرٍ ... الْحَدِيثَ. رَوَاهُ النَّسَائِيُّ وَغَيْرُهُ

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ضعيف. رواه النسائي (7/ 319)، وأبو داود (3388)، وابن ماجه (2288)، من طريق أبي عبيدة، عن أبيه عبد الله بن مسعود، به، وتمامه: «فلم أجيء أنا وعمار بشيء، وجاء سعيد بأسيرين». قلت: وسبب الضعف الانقطاع بين أبي عبيدة وأبيه

وعن عبد الله بن مسعود - رضي الله عنه - قال: اشتركت انا وعمار وسعد فيما نصيب يوم بدر ... الحديث. رواه النساىي وغيره - ضعيف. رواه النساىي (7/ 319)، وابو داود (3388)، وابن ماجه (2288)، من طريق ابي عبيدة، عن ابيه عبد الله بن مسعود، به، وتمامه: «فلم اجيء انا وعمار بشيء، وجاء سعيد باسيرين». قلت: وسبب الضعف الانقطاع بين ابي عبيدة وابيه

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - উকিল (ভারপ্রাপ্ত ব্যক্তি) নিয়োগ করার বৈধতা

৮৮৩. জাবির বিন আবদিল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি খাইবারে যাবার মনস্থ করি। তাই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে আসলাম। তিনি বললেন- যখন তুমি খাইবারে আমার উকিল বা প্রতিনিধির নিকটে গমন করবে তখন তুমি তার নিকট থেকে পনেরো ’অসক’ (খেজুর) নিয়ে নেবে। আবূ দাউদ সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- - قَالَ: أَرَدْتُ الْخُرُوجَ إِلَى خَيْبَرَ, فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: «إِذَا أَتَيْتَ وَكِيلِي بِخَيْبَرَ, فَخُذْ مِنْهُ خَمْسَةَ عَشَرَ وَسْقًا». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَصَحَّحَهُ

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ضعيف. رواه أبو داود (3632)، وفي سند محمد بن إسحاق وهو مدلس وقد عنعنه، ولا أجد مستنَدًا للحافظ في تحسينه للحديث في «التلخيص» (3/ 51)

وعن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما- - قال: اردت الخروج الى خيبر, فاتيت النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: «اذا اتيت وكيلي بخيبر, فخذ منه خمسة عشر وسقا». رواه ابو داود وصححه - ضعيف. رواه ابو داود (3632)، وفي سند محمد بن اسحاق وهو مدلس وقد عنعنه، ولا اجد مستندا للحافظ في تحسينه للحديث في «التلخيص» (3/ 51)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - দায়িত্বপ্রাপ্ত ব্যক্তির পক্ষে দায়িত্বভার অৰ্পনকারীর কল্যাণে মাল খরচের বিধান

৮৮৪. উরওয়াহ বারিকী (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে একটি দীনার দিয়ে তাঁর জন্য কুরবানীর জন্তু ক্রয় করতে পাঠিয়েছিলেন।

অন্য হাদীসের মধ্যে তিনি এ অংশটুকু বৰ্ণনা করেছেন যা পূর্বে বর্ণিত হয়েছে।[1]

وَعَنْ عُرْوَةَ الْبَارِقِيِّ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - بَعَثَ مَعَهُ بِدِينَارٍ يَشْتَرِي لَهُ أُضْحِيَّةً ... الْحَدِيثَ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ فِي أَثْنَاءِ حَدِيثٍ, وَقَدْ تَقَدَّمَ

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صحيح

وعن عروة البارقي - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - بعث معه بدينار يشتري له اضحية ... الحديث. رواه البخاري في اثناء حديث, وقد تقدم - صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ উরওয়াহ বারিকী (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - যাকাতদাতাদের কাছ থেকে যাকাত উসুল করার জন্য কোন ব্যক্তিকে নিয়োজিত করার বৈধতা

৮৮৫. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’ইমরান (রাঃ)-কে সাদাকা (যাকাত) আদায়ের জন্য নিয়োগ করেছিলেন। (হাদীসটির আরো অংশ রয়েছে)।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عُمَرَ عَلَى الصَّدَقَةِ ... الْحَدِيثَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (1468)، ومسلم (983)، واللفظ المذكور لمسلم، وليس في لفظ البخاري ذكر «عمر»، وتمام الحديث عندهما: «فقيل: منع ابن جميل وخالد بن الوليد، والعباس [بن عبد المطلب]- عم رسول الله -صلى الله عليه وسلم -. فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: ما ينقم ابن جميل إلا أنه كان فقيرًا فأغناه الله [ورسوله] وأما خالد فإنكم تظلمون خالدًا، قد احتبس أدراعه وأعتاده في سبيل الله. وأما العباس [بن عبد المطلب فعم رسول الله -صلى الله عليه وسلم-] فهي عليّ (رواية: عليه) [صدقة] ومثلها معها. [يا عمر! أما شعرت أن عم الرجل صِنْو أبيه]. والزيادات الأولى والثالثة والرابعة والخامسة والرواية للبخاري، والثانية والسادسة لمسلم

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: بعث رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عمر على الصدقة ... الحديث. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (1468)، ومسلم (983)، واللفظ المذكور لمسلم، وليس في لفظ البخاري ذكر «عمر»، وتمام الحديث عندهما: «فقيل: منع ابن جميل وخالد بن الوليد، والعباس [بن عبد المطلب]- عم رسول الله -صلى الله عليه وسلم -. فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: ما ينقم ابن جميل الا انه كان فقيرا فاغناه الله [ورسوله] واما خالد فانكم تظلمون خالدا، قد احتبس ادراعه واعتاده في سبيل الله. واما العباس [بن عبد المطلب فعم رسول الله -صلى الله عليه وسلم-] فهي علي (رواية: عليه) [صدقة] ومثلها معها. [يا عمر! اما شعرت ان عم الرجل صنو ابيه]. والزيادات الاولى والثالثة والرابعة والخامسة والرواية للبخاري، والثانية والسادسة لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - উট কুরবানী করার ক্ষেত্রে ভারপ্রাপ্ত ব্যক্তি নিয়োগ করা জায়েয

৮৮৬. জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তেষট্টিটি উট কুরবানী করলেন এবং ’আলী (রাঃ)-কে অবশিষ্টগুলি (৩৭টি) যাবাহ করার নির্দেশ দিলেন (এ হাদীসটি দীর্ঘ হাদীসের অংশবিশেষ)[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَحَرَ ثَلَاثًا وَسِتِّينَ, وَأَمَرَ عَلِيًّا أَنْ يَذْبَحَ الْبَاقِيَ ... الْحَدِيثَ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

صحيح. وقد تقدم برقم (742)

وعن جابر - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نحر ثلاثا وستين, وامر عليا ان يذبح الباقي ... الحديث. رواه مسلم - صحيح. وقد تقدم برقم (742)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ৯. যৌথ ব্যবসা ও উকিল নিযোগ করা - হাদ্দের ক্ষেত্রে উকিল নিয়োগ করার বৈধতা

৮৮৭. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, এক ব্যভিচারীর ঘটনায় নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছিলেন, হে উনাইস (ইবনু যিহাক আসলামী) সে মহিলার নিকট যাও। যদি সে (অপরাধ) স্বীকার করে তবে তাকে প্রস্তর নিক্ষেপে হত্যা করা। (দীর্ঘ হাদীসের অংশবিশেষ)।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - فِي قِصَّةِ الْعَسِيفِ. قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «وَاغْدُ يَا أُنَيْسُ عَلَى امْرَأَةِ هَذَا, فَإِنْ اعْتَرَفَتْ فَارْجُمْهَا ... » الْحَدِيثَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5/ 323 - 324 / فتح)، ومسلم (3/ 1324 - 1325)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - في قصة العسيف. قال النبي - صلى الله عليه وسلم: «واغد يا انيس على امراة هذا, فان اعترفت فارجمها ... » الحديث. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5/ 323 - 324 / فتح)، ومسلم (3/ 1324 - 1325)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১০. সকল বিষয়ে স্বীকারোক্তি প্ৰদান - সত্য কথা বলা আবশ্যক যদিও তা তিক্ত

৮৮৮. আবূ যার গিফারী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তুমি সত্য কথা বলবে। যদিও তা তিক্ত (অপ্রিয়) হয়। ইবনু হিব্বান, তিনি দীর্ঘ একটি হাদীস বর্ণনা করে সহীহ বলেছেন।[1]

عَنْ أَبِي ذَرٍّ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «قُلِ الْحَقَّ, وَلَوْ كَانَ مُرًّا». صَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ فِي حَدِيثٍ طَوِيلٍ

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صحيح. رواه ابن حبان (361 و 449)، وله طرق عن أبي ذر، وله شاهد أيضًا
وتمام الحديث: قَالَ «أَوْصَانِي خَلِيلِي رَسُولُ اللَّهِ - صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ - أَنْ أَنْظُرَ إلَى مَنْ هُوَ أَسْفَلَ مِنِّي، وَلَا أَنْظُرُ إلَى مَنْ هُوَ فَوْقِي، وَأَنْ أُحِبَّ الْمَسَاكِينَ، وَأَنْ أَدْنُوَ مِنْهُمْ، وَأَنْ أَصِلَ رَحِمِي وَإِنْ قَطَعُونِي وَجُفُونِي، وَأَنْ أَقُولَ الْحَقَّ وَلَوْ كَانَ مُرًّا، وَأَنْ لَا أَخَافَ فِي اللَّهِ لَوْمَةَ لَائِمٍ، وَأَنْ لَا أَسْأَلَ أَحَدًا شَيْئًا، وَأَنْ أَسْتَكْثِرَ مِنْ لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إلَّا بِاَللَّهِ فَإِنَّهَا مِنْ كُنُوزِ الْجَنَّةِ

عن ابي ذر - رضي الله عنه - قال: قال لي رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «قل الحق, ولو كان مرا». صححه ابن حبان في حديث طويل - صحيح. رواه ابن حبان (361 و 449)، وله طرق عن ابي ذر، وله شاهد ايضا وتمام الحديث: قال «اوصاني خليلي رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان انظر الى من هو اسفل مني، ولا انظر الى من هو فوقي، وان احب المساكين، وان ادنو منهم، وان اصل رحمي وان قطعوني وجفوني، وان اقول الحق ولو كان مرا، وان لا اخاف في الله لومة لاىم، وان لا اسال احدا شيىا، وان استكثر من لا حول ولا قوة الا بالله فانها من كنوز الجنة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১১. অপরের বস্তু থেকে সাময়িকভাবে উপকৃত হওয়া -অন্যের মালিকানাধীন সম্পদ ফিরিয়ে দেওয়া আবশ্যক

৮৮৯. সামুরাহ বিন জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, ধাররূপে গৃহীত বস্তু ফেরত না দেয়া পর্যন্ত গ্রহীতা (ক্ষয়-ক্ষতির) দায়ী থাকবে। -হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «عَلَى الْيَدِ مَا أَخَذَتْ حَتَّى تُؤَدِّيَهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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ضعيف. رواه أحمد (5/ 8 / و12 و13)، وأبو داود (3561)، والنسائي في «الكبرى» (3/ 411)، والترمذي (1266)، وابن ماجه (2400)، والحاكم (2/ 47) من طريق الحسن، عن سمرة، به. وزادوا إلا النسائي وابن ماجه. «ثم نسي الحسن فقال: هو أمينك لا ضمان عليه». وقال الترمذي: «هذا حديث حسن صحيح». وقال الحاكم: «صحيح على شرط البخاري». قلت: ولكن الحسن مدلس، وقد عنعنه، وليس البحث هنا بحث سماع الحسن من سمرة أم لا كما فعل ذلك صاحب السبل، ولكن البحث بحث التدليس. وقد قال الذهبي في «السير» (4/ 588) «قال قائل: إنما أعرض أهل الصحيح عن كثير مما يقول فيه الحسن: عن فلان. وإن كان مما قد ثبت لُقِيّه فيه لفلان المعيّن؛ لأن الحسن معروف بالتدليس، ويدلس عن الضعفاء، فيبقى في النفس من ذلك، فإننا وإن ثبتنا سماعه من سمرة، يجوز أن يكون لم يسمع فيه غالب النسخة التي عن سمرة. والله أعلم

عن سمرة بن جندب - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «على اليد ما اخذت حتى توديه». رواه احمد, والاربعة, وصححه الحاكم - ضعيف. رواه احمد (5/ 8 / و12 و13)، وابو داود (3561)، والنساىي في «الكبرى» (3/ 411)، والترمذي (1266)، وابن ماجه (2400)، والحاكم (2/ 47) من طريق الحسن، عن سمرة، به. وزادوا الا النساىي وابن ماجه. «ثم نسي الحسن فقال: هو امينك لا ضمان عليه». وقال الترمذي: «هذا حديث حسن صحيح». وقال الحاكم: «صحيح على شرط البخاري». قلت: ولكن الحسن مدلس، وقد عنعنه، وليس البحث هنا بحث سماع الحسن من سمرة ام لا كما فعل ذلك صاحب السبل، ولكن البحث بحث التدليس. وقد قال الذهبي في «السير» (4/ 588) «قال قاىل: انما اعرض اهل الصحيح عن كثير مما يقول فيه الحسن: عن فلان. وان كان مما قد ثبت لقيه فيه لفلان المعين؛ لان الحسن معروف بالتدليس، ويدلس عن الضعفاء، فيبقى في النفس من ذلك، فاننا وان ثبتنا سماعه من سمرة، يجوز ان يكون لم يسمع فيه غالب النسخة التي عن سمرة. والله اعلم

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১১. অপরের বস্তু থেকে সাময়িকভাবে উপকৃত হওয়া - আমানত ও ধার নেয়া বস্ত ফেরৎ দেয়া ওয়াজিব

৮৯০. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমার নিকটে আমানতরূপে রক্ষিত বস্তু আমানত দাতাকে ফেরত দাও। আর তোমার সাথে খেয়ানত করে এমন লোকের সাথেও তুমি বিশ্বাসঘাতকতা করবে না। -তিরমিযী একে হাসান বলেছেন আর হাকিম একে সহীহ বলেছেন। আর আবূ হাতিম রাযী একে মুনকার (দুর্বল হাদীস) বলেছেন। হাদীস শাস্ত্রের একদল হাফিয হাদীসটি বর্ণনা করেছেন, যা আরীয়ার অন্তর্ভুক্ত।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَدِّ الْأَمَانَةَ إِلَى مَنِ ائْتَمَنَكَ, وَلَا تَخُنْ مَنْ خَانَكَ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ وَحَسَّنَهُ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَاسْتَنْكَرَهُ أَبُو حَاتِمٍ الرَّازِيُّ

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صحيح. رواه أبو داود (3535)، والترمذي (1264)، بسند حسن، وقال الترمذي: «حسن غريب». قلت: وهو صحيح بشواهده ففي الباب، عن أنس، وأبي أمامة، وأبي بن كعب، وغيرهم

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اد الامانة الى من اىتمنك, ولا تخن من خانك». رواه ابو داود, والترمذي وحسنه, وصححه الحاكم, واستنكره ابو حاتم الرازي - صحيح. رواه ابو داود (3535)، والترمذي (1264)، بسند حسن، وقال الترمذي: «حسن غريب». قلت: وهو صحيح بشواهده ففي الباب، عن انس، وابي امامة، وابي بن كعب، وغيرهم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১১. অপরের বস্তু থেকে সাময়িকভাবে উপকৃত হওয়া - “আরিয়া”র যিম্মা নেওয়ার বিধান

৮৯১. ইয়া’লা বিন উমাইয়াহ হতে বর্ণিত, তিনি বলেছেন- রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছিলেন, যখন আমার দূতগণ (প্রেরিত লোকগণ) তোমার নিকটে আসবে তখন তুমি তাদেরকে ৩০টি বর্ম দিবে। আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! ওগুলো কি ক্ষতিপূরণের দায়িত্বমুক্ত সাময়িক ঋণ বিশেষ না পরিশোধ ধার মাত্র? তিনি বললেন, পরিশোধীয় ধার স্বরূপ। —ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ يَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا أَتَتْكَ رُسُلِي فَأَعْطِهِمْ ثَلَاثِينَ دِرْعًا»، قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! أَعَارِيَةٌ مَضْمُونَةٌ أَوْ عَارِيَةٌ مُؤَدَّاةٌ قَالَ: «بَلْ عَارِيَةٌ مُؤَدَّاةٌ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه أحمد (4/ 222)، وأبو داود (3566)، والنسائي في «الكبرى» (3/ 409)، وابن حبان (1173)

وعن يعلى بن امية - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اذا اتتك رسلي فاعطهم ثلاثين درعا»، قلت: يا رسول الله! اعارية مضمونة او عارية موداة قال: «بل عارية موداة». رواه احمد, وابو داود, والنساىي, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه احمد (4/ 222)، وابو داود (3566)، والنساىي في «الكبرى» (3/ 409)، وابن حبان (1173)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১১. অপরের বস্তু থেকে সাময়িকভাবে উপকৃত হওয়া - “আরিয়া”র যিম্মা নেওয়ার বিধান

৮৯২. সাফওয়ান বিন উমাইয়াহ থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর নিকট থেকে হুনাইন যুদ্ধের সময় কিছু বর্ম ধার নিয়েছিলেন, ফলে সাফওয়ান তাঁকে বললেন, হে মুহাম্মাদ! এটা জোরপূর্বক গ্ৰহণ করা হল? তিনি বললেন না, ক্ষতিপূরণ দায়যুক্ত ফেরত দেয়ার শর্তে নেয়া হলো। -হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - اسْتَعَارَ مِنْهُ دُرُوعًا يَوْمَ حُنَيْنٍ. فَقَالَ: أَغَصْبٌ يَا مُحَمَّدُ قَالَ: «بَلْ عَارِيَةٌ مَضْمُونَةٌ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

-

صحيح. رواه أحمد (3/ 401)، وأبو داود (3562)، والنسائي في «الكبرى» (3/ 410) وهو صحيح بطرقه وشواهده

وعن صفوان بن امية; - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - استعار منه دروعا يوم حنين. فقال: اغصب يا محمد قال: «بل عارية مضمونة». رواه ابو داود, والنساىي, وصححه الحاكم - صحيح. رواه احمد (3/ 401)، وابو داود (3562)، والنساىي في «الكبرى» (3/ 410) وهو صحيح بطرقه وشواهده

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১১. অপরের বস্তু থেকে সাময়িকভাবে উপকৃত হওয়া - “আরিয়া”র যিম্মা নেওয়ার বিধান

৮৯৩. ইমাম হাকিম এর একটি সমর্থক দুর্বল হাদীস ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন।[1]

وَأَخْرَجَ لَهُ شَاهِدًا ضَعِيفًا عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ

-

ضعيف جدًا. رواه الحاكم (2/ 47) وفي سنده «متروك» كما أن في متنه مخالفة أخرى

واخرج له شاهدا ضعيفا عن ابن عباس - ضعيف جدا. رواه الحاكم (2/ 47) وفي سنده «متروك» كما ان في متنه مخالفة اخرى

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১২. জোরপূর্বক অন্যায়ভাবে কিছু অধিকার করা - অন্যায়ভাবে এক বিঘৎ পরমাণ কারও জমি দখল করার গুনাহ

৮৯৪. সা’ঈদ ইবনু যায়দ (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- যে ব্যক্তি যুলম করে অন্যের এক বিঘাত যমীনও আত্মসাৎ করে, ক্বিয়ামাতের দিন সাত তবক যমীনের শিকল তার গলায় পরিয়ে দেয়া হবে।[1]

عَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-; أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ اقْتَطَعَ شِبْرًا مِنَ الْأَرْضِ ظُلْمًا طَوَّقَهُ اللَّهُ إِيَّاهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ مِنْ سَبْعِ أَرَضِينَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

-

صحيح. واه البخاري (3198)، ومسلم (1610)، واللفظ لمسلم

عن سعيد بن زيد -رضي الله عنهما-; ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «من اقتطع شبرا من الارض ظلما طوقه الله اياه يوم القيامة من سبع ارضين». متفق عليه - صحيح. واه البخاري (3198)، ومسلم (1610)، واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১২. জোরপূর্বক অন্যায়ভাবে কিছু অধিকার করা - অপরের বস্তু নষ্ট হলে তার বিধান

৮৯৫. আনাস (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, একদিন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার কোন এক সহধর্মিণীর কাছে ছিলেন। উম্মুল মু’মিনীনদের অপর একজন খাদিমের মারফত এক পাত্রে খাবার পাঠালেন। তিনি পাত্রটি ভেঙ্গে ফেললেন। তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তা জোড়া লাগিয়ে তাতে খাবার রাখলেন এবং (সাথীদেরকে) বললেন, তোমরা খাও এবং উক্ত খাদিমকে দিয়ে ভাল পেয়ালাটি (ভাঙ্গাটির বদলে) পাঠিয়ে দিলেন। আর ভাঙ্গা পেয়ালাটি রেখে দিলেন। তিরমিযী ’আয়িশা-কে ভঙ্গকারিণী বলে উল্লেখ করেছেন। আর তিনি বর্ধিত বর্ণনা করেছেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছিলেন, ’খাবার নষ্ট করলে (জরিমানা স্বরূপ) খাবার ও পাত্র নষ্ট করলে তার পরিবর্তে পাত্র। তিরমিযী একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَنَسٍ; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - كَانَ عِنْدَ بَعْضِ نِسَائِهِ، فَأَرْسَلَتْ إِحْدَى أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ مَعَ خَادِمٍ لَهَا بِقَصْعَةٍ فِيهَا طَعَامٌ، فَكَسَرَتِ الْقَصْعَة، فَضَمَّهَا, وَجَعَلَ فِيهَا الطَّعَامَ. وَقَالَ: «كُلُوا» وَدَفَعَ الْقَصْعَةَ الصَّحِيحَةَ لِلرَّسُولِ, وَحَبَسَ الْمَكْسُورَةَ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ
وَالتِّرْمِذِيُّ, وَسَمَّى الضَّارِبَةَ عَائِشَةَ, وَزَادَ: فَقَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «طَعَامٌ بِطَعَامٍ, وَإِنَاءٌ بِإِنَاءٍ». وَصَحَّحَهُ

-

صحيح. رواه البخاري (2481)
رواه البخاري (2481)
رواه الترمذي (1359)، وقال: حديث حسن صحيح

وعن انس; - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - كان عند بعض نساىه، فارسلت احدى امهات المومنين مع خادم لها بقصعة فيها طعام، فكسرت القصعة، فضمها, وجعل فيها الطعام. وقال: «كلوا» ودفع القصعة الصحيحة للرسول, وحبس المكسورة. رواه البخاري والترمذي, وسمى الضاربة عاىشة, وزاد: فقال النبي - صلى الله عليه وسلم: «طعام بطعام, واناء باناء». وصححه - صحيح. رواه البخاري (2481) رواه البخاري (2481) رواه الترمذي (1359)، وقال: حديث حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১২. জোরপূর্বক অন্যায়ভাবে কিছু অধিকার করা - অন্যের জমিতে চাষাবাদ করার বিধান

৮৯৬. রাফি’ বিন খাদীজ। (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- যে ব্যক্তি কোন সম্প্রদায়ের জমি তাদের অনুমতি ছাড়াই আবাদ করবে। সে তার জন্য কোন শস্য প্রাপ্য হবে না-কেবল সে খরচ পাবে। -তিরমিযী একে হাসান বলেছেন; বলা হয়ে থাকে, বুখারী একে যঈফ বলেছেন।[1]

وَعَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ زَرَعَ فِي أَرْضِ قَوْمٍ بِغَيْرِ إِذْنِهِمْ, فَلَيْسَ لَهُ مِنَ الزَّرْعِ شَيْءٌ, وَلَهُ نَفَقَتُهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَحَسَّنَهُ التِّرْمِذِيُّ
وَيُقَالُ: إِنَّ الْبُخَارِيَّ ضَعَّفَهُ

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صحيح بطرقه. رواه أحمد (3/ 465 و 4/ 141)، وأبو داود (3403)، والترمذي (1366) وقال الترمذي: حسن غريب

وعن رافع بن خديج - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «من زرع في ارض قوم بغير اذنهم, فليس له من الزرع شيء, وله نفقته». رواه احمد, والاربعة الا النساىي, وحسنه الترمذي ويقال: ان البخاري ضعفه - صحيح بطرقه. رواه احمد (3/ 465 و 4/ 141)، وابو داود (3403)، والترمذي (1366) وقال الترمذي: حسن غريب

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১২. জোরপূর্বক অন্যায়ভাবে কিছু অধিকার করা - অন্যের জমিতে খেজুর গাছ রোপন করার বিধান

৮৯৭. উরওয়াহ ইবনু যুবাইর (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কোন এক সাহাবী বলেছেন, অবশ্য দু’জন লোক নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সমীপে একখণ্ড জমির বিবাদ মীমাংসার জন্য বিচারপ্রার্থী হয়েছিল; তাদের এক জনের জমিতে অন্যজন খেজুর গাছ রোপণ করেছিল। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জমির মালিককে জমি প্রদান করেছিলেন, আর গাছ রোপণকারীকে গাছ উঠিয়ে নিতে হুকুম দিয়েছিলেন। তিনি বলেছিলেন, অত্যাচারী রোপণকারীর জন্য কোন হক (দাবী) সাব্যস্ত নয়। —আবূ দাউদ হাসান সানাদে।[1]

وَعَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ قَالَ: قَالَ رَجُلٌ مِنَ الصَّحَابَةِ; مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: إِنَّ رَجُلَيْنِ اخْتَصَمَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فِي أَرْضٍ, غَرَسَ أَحَدُهُمَا فِيهَا نَخْلًا, وَالْأَرْضُ لِلْآخَرِ, فَقَضَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - بِالْأَرْضِ لِصَاحِبِهَا, وَأَمَرَ صَاحِبَ النَّخْلِ أَنْ يُخْرِجَ نَخْلَهُ. وَقَالَ: «لَيْسَ لِعِرْقٍ ظَالِمٍ حَقٌّ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَإِسْنَادُهُ حَسَنٌ

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حديث صحيح. وهو في «سنن أبي داود» (3074) وفيه قوله صلى الله عليه وسلم: «من أحيا أرضًا ميتة فهي له» وهو صحيح، وسيذكره المصنف برقم (916) وانظر ما بعده

وعن عروة بن الزبير قال: قال رجل من الصحابة; من اصحاب رسول الله - صلى الله عليه وسلم: ان رجلين اختصما الى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - في ارض, غرس احدهما فيها نخلا, والارض للاخر, فقضى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - بالارض لصاحبها, وامر صاحب النخل ان يخرج نخله. وقال: «ليس لعرق ظالم حق». رواه ابو داود, واسناده حسن - حديث صحيح. وهو في «سنن ابي داود» (3074) وفيه قوله صلى الله عليه وسلم: «من احيا ارضا ميتة فهي له» وهو صحيح، وسيذكره المصنف برقم (916) وانظر ما بعده

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১২. জোরপূর্বক অন্যায়ভাবে কিছু অধিকার করা - অন্যের জমিতে খেজুর গাছ রোপন করার বিধান

৮৯৮. আসহাবে সুনানে সাঈদ বিন যায়দ থেকে উরওয়াহ কর্তৃক শেষাংশে বর্ণিত হয়েছে। এর মাউসূল ও মুরসাল (যুক্ত ও ছিন্ন সূত্র) এবং সাহাবী নির্দিষ্ট করার ব্যাপারে মতবিরোধ ঘটেছে।

وَآخِرُهُ عِنْدَ أَصْحَابِ السُّنَنِ مِنْ رِوَايَةِ عُرْوَةَ, عَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ
وَاخْتُلِفَ فِي وَصْلِهِ وَإِرْسَالِهِ, وَفِي تَعْيِين صَحَابِيِّهِ

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قلت: وهذا على ما فيه كما ذكر الحافظ إلا أنه أحد الشواهد الكثيرة للحديث السابق، وتفصيل القول فيها «بالأصل»، وقد قال في «الفتح» (5/ 19) بعد أن ساق هذه الشواهد: وفي أسانيدها مقال، لكن يتقوى بعضها ببعض

واخره عند اصحاب السنن من رواية عروة, عن سعيد بن زيد واختلف في وصله وارساله, وفي تعيين صحابيه - قلت: وهذا على ما فيه كما ذكر الحافظ الا انه احد الشواهد الكثيرة للحديث السابق، وتفصيل القول فيها «بالاصل»، وقد قال في «الفتح» (5/ 19) بعد ان ساق هذه الشواهد: وفي اسانيدها مقال، لكن يتقوى بعضها ببعض

হাদিসের মানঃ তাহকীক অপেক্ষমাণ
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১২. জোরপূর্বক অন্যায়ভাবে কিছু অধিকার করা - কারও সম্পদ, রক্ত (খুন) এবং সম্মানহানী করার ব্যাপারে কঠিনভাবে নিষেধাজ্ঞা

৮৯৯. আবূ বকরাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কুরবানী দিবসে মিনায় ভাষণ দানকালে বলেছেন, ’তোমাদের রক্ত, তোমাদের ধন-সম্পদ, তোমাদের সম্মান তোমাদের পরস্পরের জন্য হারাম, যেমন আজকের তোমাদের এ দিন, তোমাদের এ মাস, তোমাদের এ শহর মর্যাদাসম্পন্ন।[1]

وَعَنْ أَبِي بَكْرَةَ; - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: فِي خُطْبَتِهِ يَوْمَ النَّحْرِ بِمِنًى «إِنَّ دِمَاءَكُمْ وَأَمْوَالَكُمْ [وَأَعْرَاضَكُمْ] عَلَيْكُمْ حَرَامٌ, كَحُرْمَةِ يَوْمِكُمْ هَذَا، فِي بَلَدِكُمْ هَذَا، فِي شَهْرِكُمْ هَذَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (67)، ومسلم (1679)

وعن ابي بكرة; - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: في خطبته يوم النحر بمنى «ان دماءكم واموالكم [واعراضكم] عليكم حرام, كحرمة يومكم هذا، في بلدكم هذا، في شهركم هذا». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (67)، ومسلم (1679)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ বাকরা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৩. শুফ’আহ বা অগ্ৰে ক্ৰয়ের অধিকারের বিবরণ - শুফ’আহ শৱীয়তসম্মত এবং প্রতিবেশির শুফ’আহর বিধান

৯০০. জাবির ইবনু ’আবদুল্লাহ (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যে সব সম্পত্তির ভাগ-বাঁটোয়ারা হয়নি, তাতে শুফ’আহ এর ফয়সালা দিয়েছেন। যখন সীমানা নির্ধারিত হয়ে যায় এবং রাস্তাও পৃথক হয়ে যায়, তখন শুফ’আহ এর অধিকার থাকে না। -শব্দ বিন্যাস বুখারী থেকে গৃহীত।[1]

মুসলিমে আর একটি বর্ণনায় আছে- শুফ’আহ প্রত্যেক অংশ বিশিষ্ট বস্তুতে রয়েছে—তা জমি হোক, বাড়ি হোক বা প্রাচীরবেষ্টিত বাগ-বাগিচা হোক। এগুলি তার শরীকদারকে বিক্রয় করার প্রস্তাব না দিয়ে অন্যের কাছে বিক্রয় করা সঙ্গত নয়- (অন্য বর্ণনায় শরীকদারকে বিক্রয়ের প্রস্তাব না দেয়া পর্যন্ত বৈধ হবে না।)

তাহাবীর বর্ণনায় আছে- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সমস্ত বস্তুতেই ’শুফ’আহর বিধি জারী করেছিলেন। তাহাবীর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।

عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَضَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - بِالشُّفْعَةِ فِي كُلِّ مَا لَمْ يُقْسَمْ, فَإِذَا وَقَعَتِ الْحُدُودُ وَصُرِّفَتْ الطُّرُقُ فَلَا شُفْعَةَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ
وَفِي رِوَايَةِ مُسْلِمٍ: «الشُّفْعَةُ فِي كُلِّ شِرْكٍ: أَرْضٍ, أَوْ رَبْعٍ, أَوْ حَائِطٍ, لَا يَصْلُحُ أَنْ يَبِيعَ حَتَّى يَعْرِضَ عَلَى شَرِيكِهِ
وَفِي رِوَايَةِ الطَّحَاوِيِّ: قَضَى النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - بِالشُّفْعَةِ فِي كُلِّ شَيْءٍ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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صحيح. رواه البخاري (2257) وصرفت: بينت

عن جابر بن عبد الله -رضي الله عنهما- قال: قضى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - بالشفعة في كل ما لم يقسم, فاذا وقعت الحدود وصرفت الطرق فلا شفعة. متفق عليه, واللفظ للبخاري وفي رواية مسلم: «الشفعة في كل شرك: ارض, او ربع, او حاىط, لا يصلح ان يبيع حتى يعرض على شريكه وفي رواية الطحاوي: قضى النبي - صلى الله عليه وسلم - بالشفعة في كل شيء, ورجاله ثقات - صحيح. رواه البخاري (2257) وصرفت: بينت

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৩. শুফ’আহ বা অগ্ৰে ক্ৰয়ের অধিকারের বিবরণ - প্রতিবেশীর শুফ’আহর বিধান

৯০১. আবূ রাফি’ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, ঘরের প্রতিবেশী সর্বাপেক্ষা শুফ’আহর হকদার। -এর মধ্যে একটি ঘটনা রয়েছে।[1]

وَعَنْ أَبِي رَافِعٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الْجَارُ أَحَقُّ بِسَقَبِهِ». أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ, وَفِيهِ قِصَّةٌ

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صحيح. رواه البخاري (2258) من طريق عمرو بن الشريد قال: «وقفت على سعد بن أبي وقاص فجاء المِسْوَر بن مَخْرَمة فوضع يده على إحدى منكبيَّ، إذ جاء أبو رافع مولى النبي -صلى الله عليه وسلم- فقال: يا سعد ابتع مني بيتي في دارك. فقال سعد: والله ما أبتاعهما. فقال المسور: والله لتبتاعهما. فقال سعد: والله لا أزيدك على أربعة آلافٍ مُنَجَّمَة أو مقطعة. فقال أبو رافع: لقد أعطيت بها خمسمائة دينار، ولولا أني سمعت النبي -صلى الله عليه وسلم- يقول: الجار أحق بسقبه ما أعطيتكها بأربعة آلاف، وأنا أعطي بها خمسمائة دينار، فأعطاه إياه». والسقب: بالسين المهلة وأيضًا الصاد المهلة: القرب والملاصقة. ومنجمة أو مقطعة: المراد مؤجلة على أقساط معلومة

وعن ابي رافع - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الجار احق بسقبه». اخرجه البخاري, وفيه قصة - صحيح. رواه البخاري (2258) من طريق عمرو بن الشريد قال: «وقفت على سعد بن ابي وقاص فجاء المسور بن مخرمة فوضع يده على احدى منكبي، اذ جاء ابو رافع مولى النبي -صلى الله عليه وسلم- فقال: يا سعد ابتع مني بيتي في دارك. فقال سعد: والله ما ابتاعهما. فقال المسور: والله لتبتاعهما. فقال سعد: والله لا ازيدك على اربعة الاف منجمة او مقطعة. فقال ابو رافع: لقد اعطيت بها خمسماىة دينار، ولولا اني سمعت النبي -صلى الله عليه وسلم- يقول: الجار احق بسقبه ما اعطيتكها باربعة الاف، وانا اعطي بها خمسماىة دينار، فاعطاه اياه». والسقب: بالسين المهلة وايضا الصاد المهلة: القرب والملاصقة. ومنجمة او مقطعة: المراد موجلة على اقساط معلومة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ রাফি‘ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৩. শুফ’আহ বা অগ্ৰে ক্ৰয়ের অধিকারের বিবরণ - প্রতিবেশীর শুফ’আহর বিধান

৯০২. আনাস বিন মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ বাড়ির প্রতিবেশী বাড়ির বেশী হকদার। নাসায়ী, ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন। এর একটি দুর্বল দিক রয়েছে।[1]

وَعَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «جَارُ الدَّارِ أَحَقُّ بِالدَّارِ». رَوَاهُ النَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَلَهُ عِلَّةٌ

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رواه النسائي في «الكبرى» كما في «التحفة» (4/ 69) من طريق قتادة، عن الحسن، عن سمرة، ومن هذا الوجه رواه أبو داود (3517)، والترمذي (1368) وقال الترمذي: «حديث سمرة حديث حسن صحيح، وروى عيسى بن يونس، عن سعيد بن أبي عَرُوبة، عن قتادة، عن أنس، عن النبي -صلى الله عليه وسلم-. والصحيح عند أهل العلم حديث الحسن عن سمرة، ولا نعرف حديث قتادة، عن أنس إلا من حديث عيسى بن يونس». قلت: ومن الوجه الثاني رواه ابن حبان (1153) وإلى هذا الاختلاف يشير قول الحافظ: «وله علة». وخلاصة الكلام أن الحديث عند قتادة من وجهين: الأول: عن الحسن، عن سمرة، وهو الصواب عند أهل العلم. والثاني: عن أنس، به. وأيًّا كان الأمر فهو ضعيف من الوجهين؛ لعدم تصريح قتادة والحسن بالسماع؛ وكلاهما موصوف بالتدليس

وعن انس بن مالك - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «جار الدار احق بالدار». رواه النساىي, وصححه ابن حبان, وله علة - رواه النساىي في «الكبرى» كما في «التحفة» (4/ 69) من طريق قتادة، عن الحسن، عن سمرة، ومن هذا الوجه رواه ابو داود (3517)، والترمذي (1368) وقال الترمذي: «حديث سمرة حديث حسن صحيح، وروى عيسى بن يونس، عن سعيد بن ابي عروبة، عن قتادة، عن انس، عن النبي -صلى الله عليه وسلم-. والصحيح عند اهل العلم حديث الحسن عن سمرة، ولا نعرف حديث قتادة، عن انس الا من حديث عيسى بن يونس». قلت: ومن الوجه الثاني رواه ابن حبان (1153) والى هذا الاختلاف يشير قول الحافظ: «وله علة». وخلاصة الكلام ان الحديث عند قتادة من وجهين: الاول: عن الحسن، عن سمرة، وهو الصواب عند اهل العلم. والثاني: عن انس، به. وايا كان الامر فهو ضعيف من الوجهين؛ لعدم تصريح قتادة والحسن بالسماع؛ وكلاهما موصوف بالتدليس

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৩. শুফ’আহ বা অগ্ৰে ক্ৰয়ের অধিকারের বিবরণ - প্রতিবেশীর শুফ’আহর বিধান

৯০৩. জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, প্রতিবেশী অন্যের চেয়ে তার শুফ’আহর অধিক হকদার- যদি উভয়ের রাস্তা এক হয় তাহলে প্রতিবেশী অনুপস্থিত থাকলে তার জন্য (বিক্রয়কারী) প্রতিবেশীকে তার বাড়ি ফেরা পর্যন্ত অপেক্ষা করতে হবে (তাকে না জানিযে অন্যের কাছে বিক্রয় করতে পারবে না)। -এর সকল রাবী নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الْجَارُ أَحَقُّ بِشُفْعَةِ جَارِهِ, يُنْتَظَرُ بِهَا - وَإِنْ كَانَ غَائِبًا - إِذَا كَانَ طَرِيقُهُمَا وَاحِدًا». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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صحيح. رواه أحمد (3/ 303)، وأبو داود (3518)، والنسائي في «الكبرى» كما في «التحفة» (2/ 229)، والترمذي (1369)، وابن ماجه (2494) وقد أعلّ الحديث بما لا يقدح

وعن جابر قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الجار احق بشفعة جاره, ينتظر بها - وان كان غاىبا - اذا كان طريقهما واحدا». رواه احمد, والاربعة, ورجاله ثقات - صحيح. رواه احمد (3/ 303)، وابو داود (3518)، والنساىي في «الكبرى» كما في «التحفة» (2/ 229)، والترمذي (1369)، وابن ماجه (2494) وقد اعل الحديث بما لا يقدح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৩. শুফ’আহ বা অগ্ৰে ক্ৰয়ের অধিকারের বিবরণ - শুফ’আহর সময়

৯০৪. ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন– ’শুফআ’র হক উট বাঁধা রশি খুলে ফেলার অনুরূপ। -বাযযারে আরো আছে- অনুপস্থিত শরীকের জন্য শুফ’আহার হক কার্যকর নয়। -এ হাদীসের সানাদ য’ঈফ।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: الشُّفْعَةُ كَحَلِّ الْعِقَالِ. رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ وَالْبَزَّارُ, وَزَادَ: «وَلَا شُفْعَةَ لِغَائِبٍ». وَإِسْنَادُهُ ضَعِيفٌ

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ضعيف جدًا. رواه ابن ماجه (2500) وقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 56) إسناده ضعيف جدًا

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما-, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: الشفعة كحل العقال. رواه ابن ماجه والبزار, وزاد: «ولا شفعة لغاىب». واسناده ضعيف - ضعيف جدا. رواه ابن ماجه (2500) وقال الحافظ في «التلخيص» (3/ 56) اسناده ضعيف جدا

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লভ্যাংশের বিনিময়ে কারবার - ঋণ প্রদানে বরকত হয়

৯০৫. তিনটি জিনিসের মধ্যে বরকত রয়েছে: মেয়াদ নির্দিষ্ট করে ক্রয়-বিক্রয়, মুকারা যা ব্যবসা এবং পারিবারিক প্রয়োজনে গমে যব মিশানো, ব্যবসায়িক উদ্দেশ্যে নয়। —ইবনু মাজাহ দুর্বল সনদে।[1]


সম্পদের মালিক যৌথ ব্যবসায় কল্যাণমূলক যে কোন শর্ত করতে পারে

৯০৫-১. হাকিম বিন হিযাম (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি যৌথভাবে কারবার করার জন্য কোন ব্যক্তিকে কোন মাল দিলে এ শর্তগুলো আরোপ করতেনঃ জানোয়ার ও কাঁচা অস্থায়ী মালে আমার পুঁজি লাগবে না, আমার মাল সামুদ্রিক যানে চাপবে না, কোন প্লাবন ভূমিতে তা নিয়ে রাখবে না। যদি তুমি এরূপ কিছু কর তাহলে তুমি আমার মালের খেসারত দিতে বাধ্য থাকবে। —দারাকুতনী, এর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[2]

ইমাম মালিক মুআত্তায় বলেছেন- আলা বিন আবদুর রহমান বিন ইয়াকুব হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে, তিনি তার দাদা হতে বর্ণনা করেন যে, তিনি (ইয়াকুব) উসমান (রাঃ)-এর মাল নিয়ে উভয়ের মধ্যে লাভ বণ্টিত হবার শর্তে ব্যবসা করেছিলেন। -এই হাদীস মাওকুফ সূত্রে সহীহ।[3]

عَنْ صُهَيْبٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «ثَلَاثٌ فِيهِنَّ الْبَرَكَةُ: الْبَيْعُ إِلَى أَجَلٍ، وَالْمُقَارَضَةُ، وَخَلْطُ الْبُرِّ بِالشَّعِيرِ لِلْبَيْتِ, لَا لِلْبَيْعِ». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

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ضعيف. رواه ابن ماجه (2289)

عن صهيب - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «ثلاث فيهن البركة: البيع الى اجل، والمقارضة، وخلط البر بالشعير للبيت, لا للبيع». رواه ابن ماجه باسناد ضعيف - ضعيف. رواه ابن ماجه (2289)

হাদিসের মানঃ সহিহ/যঈফ [মিশ্রিত]
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - অংশ নির্ধারণ করে বর্গা দেয়া

৯০৬. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইহুদীদের সঙ্গে উৎপাদিত ফল কিংবা ফসলের অর্ধেক শর্তে খায়বারের জমি বৰ্গ দিয়েছিলেন।

উক্ত সহীহ দ্বয়ের অন্য বর্ণনায় আছে- তখন ইয়াহুদীরা আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কাছে অনুরোধ করল যেন তাদের সে স্থানে বহাল রাখা হয় এ শর্তে যে, তারা সেখানে চাষাবাদের দায়িত্ব পালন করবে; আর ফসলের অর্ধেক তাদের থাকবে। আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাদের বললেন, আমরা এ শর্তে তোমাদের এখানে বহাল থাকতে দিব যতদিন আমাদের ইচ্ছা। কাজেই তারা সেখানে বহাল রইল। অবশেষে ’উমার (রাঃ) তাদেরকে নির্বাসিত করে দেন।[1]

মুসলিমে আছে- উৎপন্ন ফল ও শস্যের অর্ধেকের বিনিময়ে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খায়বারের ইহুদীদেরকে সেখানকার খেজুর বাগান ও আবাদী জমি তাদের নিজ ব্যয়ে আবাদ করার দায়িত্ব অর্পণ করেছিলেন।

عَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَامَلَ أَهْلَ خَيْبَرَ بِشَطْرِ مَا يَخْرُجُ مِنْهَا مِنْ ثَمَرٍ, أَوْ زَرْعٍ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ لَهُمَا: فَسَأَلُوا أَنْ يُقِرَّهُمْ بِهَا عَلَى أَنْ يَكْفُوا عَمَلَهَا وَلَهُمْ نِصْفُ الثَّمَرِ, فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «نُقِرُّكُمْ بِهَا عَلَى ذَلِكَ مَا شِئْنَا» , فَقَرُّوا بِهَا, حَتَّى أَجْلَاهُمْ عُمَرُ
وَلِمُسْلِمٍ: أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - دَفَعَ إِلَى يَهُودِ خَيْبَرَ نَخْلَ خَيْبَرَ وَأَرْضَهَا عَلَى أَنْ يَعْتَمِلُوهَا مِنْ أَمْوَالِهِمْ, وَلَهُ شَطْرُ ثَمَرِهَا

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صحيح. رواه البخاري (2329)، ومسلم (1551) (1)
رواه البخاري (2338)، ومسلم (1551) (6) وزادا: إلى تيماء وأريحاء
رواه مسلم (1551) (5) ووقع في «أ»: «ولهم» بدل: «وله». وعند مسلم: «ولرسول الله -صلى الله عليه وسلم- شطر ثمرها». وأيضًا البخاري (2331) بنحوه

عن ابن عمر - رضي الله عنهما - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عامل اهل خيبر بشطر ما يخرج منها من ثمر, او زرع. متفق عليه وفي رواية لهما: فسالوا ان يقرهم بها على ان يكفوا عملها ولهم نصف الثمر, فقال لهم رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «نقركم بها على ذلك ما شىنا» , فقروا بها, حتى اجلاهم عمر ولمسلم: ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - دفع الى يهود خيبر نخل خيبر وارضها على ان يعتملوها من اموالهم, وله شطر ثمرها - صحيح. رواه البخاري (2329)، ومسلم (1551) (1) رواه البخاري (2338)، ومسلم (1551) (6) وزادا: الى تيماء واريحاء رواه مسلم (1551) (5) ووقع في «ا»: «ولهم» بدل: «وله». وعند مسلم: «ولرسول الله -صلى الله عليه وسلم- شطر ثمرها». وايضا البخاري (2331) بنحوه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - নির্দিষ্ট জিনিসের বিনিময়ে জমি কেরায়া ভাড়া করার বৈধতা

৯০৭. হানযালাহ বিন কাইস থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি রাফি’ বিন খাদীজ (রাঃ)-কে সোনা ও রৌপ্যের বিনিময়ে জমি ইজারায় (লাগানোর) বৈধতা সম্বন্ধে জিজ্ঞেস করলে তিনি (সাহাবী রাফি’) বললেন, এতে কোন দোষ নেই। লোকেরা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে পানি প্রবাহের স্থলে, নহর ও নালার পাড়ের আর কোন ক্ষেতের অংশ বিশেষের বিনিময়ে ঠিকার লেনদেন করত। এসবের কোনটি নষ্ট হয়ে যেত। আর কোনটি ঠিক থাকত এবং কোনটি ঠিক থাকত আর কোনটি নষ্ট হয়ে যেত, আর তখন এসব ঠিক ব্যতীত অন্য কোনরূপ ঠিক ছিল না। এই (অনিশ্চিত অবস্থার) ঠিকা সম্বন্ধেই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে ধমক দিয়েছেন।

কিন্তু এমন জ্ঞাত বস্তু যা নিশ্চিত ফলপ্রসূ ও জিম্মাদারীর যোগ্য তাতে ঠিকা দেয়ার ব্যবস্থায় কোন দোষ নেই।

অত্র কেতাবের সংকলক আসকালানী (রহঃ) বলেছেন- এ হাদীসটি বুখারী ও মুসলিমে বর্ণিত সাধারণভাবে জমি ঠিকা দেয়ার নিষেধাজ্ঞাসূচক সংক্ষিপ্ত হাদীসটির বিশ্লেষণ স্বরূপ।[1]

وَعَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ قَيْسٍ قَالَ: سَأَلْتُ رَافِعَ بْنَ خَدِيجٍ - رضي الله عنه - عَنْ كِرَاءِ الْأَرْضِ بِالذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ? فَقَالَ: لَا بَأْسَ بِهِ, إِنَّمَا كَانَ النَّاسُ يُؤَاجِرُونَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَلَى الْمَاذِيَانَاتِ, وَأَقْبَالِ الْجَدَاوِلِ, وَأَشْيَاءَ مِنَ الزَّرْعِ, فَيَهْلِكُ هَذَا وَيَسْلَمُ هَذَا, وَيَسْلَمُ هَذَا وَيَهْلِكُ هَذَا, وَلَمْ يَكُنْ لِلنَّاسِ كِرَاءٌ إِلَّا هَذَا, فَلِذَلِكَ زَجَرَ عَنْهُ, فَأَمَّا شَيْءٌ مَعْلُومٌ مَضْمُونٌ فَلَا بَأْسَ بِهِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ
وَفِيهِ بَيَانٌ لِمَا أُجْمِلَ فِي الْمُتَّفَقَ عَلَيْهِ مِنْ إِطْلَاقِ النَّهْيِ عَنْ كِرَاءِ الْأَرْضِ

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صحيح. رواه مسلم (1547) (116) (ج 3 ص 1183) والماذيانات: مسايل المياه، وقيل: ما ينبت حول السواقي. وأقبال الجداول: أوائل ورؤوس الأنهار الصغيرة

وعن حنظلة بن قيس قال: سالت رافع بن خديج - رضي الله عنه - عن كراء الارض بالذهب والفضة? فقال: لا باس به, انما كان الناس يواجرون على عهد رسول الله - صلى الله عليه وسلم - على الماذيانات, واقبال الجداول, واشياء من الزرع, فيهلك هذا ويسلم هذا, ويسلم هذا ويهلك هذا, ولم يكن للناس كراء الا هذا, فلذلك زجر عنه, فاما شيء معلوم مضمون فلا باس به. رواه مسلم وفيه بيان لما اجمل في المتفق عليه من اطلاق النهي عن كراء الارض - صحيح. رواه مسلم (1547) (116) (ج 3 ص 1183) والماذيانات: مسايل المياه، وقيل: ما ينبت حول السواقي. واقبال الجداول: اواىل ورووس الانهار الصغيرة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - নির্দিষ্ট জিনিসের বিনিময়ে জমি কেরায়া ভাড়া করার বৈধতা

৯০৮। সাবিত ইবনু যাহহাক (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উৎপন্ন বস্তুর মধ্যে অংশ ধার্য চাষ আবাদের ব্যবস্থাকে নিষিদ্ধ করেছেন এবং ঠিকা প্রদানের আদেশ দিয়েছেন।[1]

وَعَنْ ثَابِتِ بْنِ الضَّحَّاكِ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنِ الْمُزَارَعَةِ [وَأَمَرَ] بِالْمُؤَاجَرَةِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ أَيْضًا

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صحيح. رواه مسلم (1549) (119)

وعن ثابت بن الضحاك - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - نهى عن المزارعة [وامر] بالمواجرة. رواه مسلم ايضا - صحيح. رواه مسلم (1549) (119)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - শিঙ্গা লাগিয়ে মজুরী নেওয়ার বিধান

৯০৯। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শিঙ্গা লাগালেন এবং যে তাঁকে শিঙ্গা লাগিয়েছে, তাকে তিনি মজুরী দিলেন। যদি তা হারাম হতো। তবে তিনি তা দিতেন না।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-; أَنَّهُ قَالَ: احْتَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَأَعْطَى الَّذِي حَجَمَهُ أَجْرَهُ، وَلَوْ كَانَ حَرَامًا لَمْ يُعْطِهِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2103)

وعن ابن عباس -رضي الله عنهما-; انه قال: احتجم رسول الله - صلى الله عليه وسلم - واعطى الذي حجمه اجره، ولو كان حراما لم يعطه. رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2103)

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পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - শিঙ্গা লাগিয়ে মজুরী নেওয়ার বিধান

৯১০। রাফি’ বিন খাদীজ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, শিঙ্গা লাগানোর উপার্জন নোংরা বস্তু।[1]

وَعَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «كَسْبُ الْحَجَّامِ خَبِيثٌ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1568) (41) وهو بتمامه: ثمن الكلب خبيث، ومهر البَغِيّ خبيث، وكسْب الحَجَّام خبيث

وعن رافع بن خديج - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «كسب الحجام خبيث». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1568) (41) وهو بتمامه: ثمن الكلب خبيث، ومهر البغي خبيث، وكسب الحجام خبيث

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - কর্মচারীর মজুরী না দেয়ার বিধান

৯১১। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, আল্লাহ তা’আলা ঘোষণা করেছেন যে, কিয়ামতের দিবসে আমি নিজে তিন ব্যক্তির বিরুদ্ধে বাদী হবো। এক ব্যক্তি, যে আমার নামে ওয়াদা করে তা ভঙ্গ করল। আরেক ব্যক্তি, যে কোন আযাদ মানুষকে বিক্রি করে তার মূল্য ভোগ করল। আর এক ব্যক্তি, যে কোন মজুর নিয়োগ করে পুরো কাজ আদায় করে আর তার পারিশ্রমিক দেয় না।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «قَالَ اللَّهُ - عز وجل: ثَلَاثَةٌ أَنَا خَصْمُهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ: رَجُلٌ أَعْطَى بِي ثُمَّ غَدَرَ, وَرَجُلٌ بَاعَ حُرًّا, فَأَكَلَ ثَمَنَهُ، وَرَجُلٌ اسْتَأْجَرَ أَجِيرًا, فَاسْتَوْفَى مِنْهُ, وَلَمْ يُعْطِهِ أَجْرَهُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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حسن. رواه البخاري (2227)، وأما قول الحافظ: رواه مسلم فهو سهو منه -رحمه الله-. تنبيه: جاء في هامش «أ» ما يلي تعليقًا على قوله: «رواه مسلم». «كذا وقع في «الأصل»، وإنما هو في البخاري في البيوع، وفي ابن ماجه في الإجارة. قال سبط مؤلفه. من هامش الأصل

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «قال الله - عز وجل: ثلاثة انا خصمهم يوم القيامة: رجل اعطى بي ثم غدر, ورجل باع حرا, فاكل ثمنه، ورجل استاجر اجيرا, فاستوفى منه, ولم يعطه اجره». رواه مسلم - حسن. رواه البخاري (2227)، واما قول الحافظ: رواه مسلم فهو سهو منه -رحمه الله-. تنبيه: جاء في هامش «ا» ما يلي تعليقا على قوله: «رواه مسلم». «كذا وقع في «الاصل»، وانما هو في البخاري في البيوع، وفي ابن ماجه في الاجارة. قال سبط مولفه. من هامش الاصل

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - কুরআন শিখিয়ে বেতন নেওয়ার বিধান

৯১২। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমরা মজুরী গ্ৰহণ কর এমন সব বস্তুর মধ্যে কুরআনের বিনিময়ে পারিশ্রমিক গ্রহণ করা সর্বাপেক্ষা বেশী হকদার।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ أَحَقَّ مَا أَخَذْتُمْ عَلَيْهِ حَقًّا كِتَابُ اللَّهِ». أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (5737) من طريق ابن أبي ملكية، عن ابن عباس النبي أن نفرًا من أصحاب النبي -صلى الله عليه وسلم- مرُّوا بماء فيهم لديغ - أو سليم - فعرض لهم رجل من أهل الماء. فقال: هل فيكم من راق؟ إن في الماء رجلًا لديغًا أو سليمًا. فانطلق رجل منهم، فقرأ بفاتحة الكتاب على شاء، فَبَرَأَ، فجاء بالشاء إلى أصحابه، فكرهوا ذلك، وقالوا: أخذت على كتاب الله أجرًا، حتى قدموا المدينة فقالوا: يا رسول الله! أخذ على كتاب الله أجرًا؟ فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «إن أحق» الحديث

وعن ابن عباس - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ان احق ما اخذتم عليه حقا كتاب الله». اخرجه البخاري - صحيح. رواه البخاري (5737) من طريق ابن ابي ملكية، عن ابن عباس النبي ان نفرا من اصحاب النبي -صلى الله عليه وسلم- مروا بماء فيهم لديغ - او سليم - فعرض لهم رجل من اهل الماء. فقال: هل فيكم من راق؟ ان في الماء رجلا لديغا او سليما. فانطلق رجل منهم، فقرا بفاتحة الكتاب على شاء، فبرا، فجاء بالشاء الى اصحابه، فكرهوا ذلك، وقالوا: اخذت على كتاب الله اجرا، حتى قدموا المدينة فقالوا: يا رسول الله! اخذ على كتاب الله اجرا؟ فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «ان احق» الحديث

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - কর্মচারীর মজুরী দ্রুত দেওয়া আবশ্যক

৯১৩. ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, শ্রমিককে তার ঘাম শুকানোর পূর্বৈই মজুরী দিয়ে দাও।[1]

আবূ ইয়া’লা ও বাইহাকীতে আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে আর ত্বাবারানীতে জাবির (রাঃ) থেকে এ ব্যাপারে আরো হাদীস বর্ণিত হয়েছে, কিন্তু তার সবগুলোই য’ঈফ হাদীস।[2]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أُعْطُوا الْأَجِيرَ أَجْرَهُ قَبْلَ أَنْ يَجِفَّ عَرَقُهُ». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ

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حديث صحيح بشواهده. رواه ابن ماجه (2443) بسند ضعيف جدًا. قلت: وله شواهد من حديث أبي هريرة، وجابر بن عبد الله، وعطاء بن يَسَار. فأما حديث أبي هريرة: فرواه الطحاوي في «المشكل» (4/ 142)، والبيهقي (6/ 121) بسند حسن على أقل أحواله، وله طريق أخرى عند أبي يعلى (6682) وأما حديث جابر: فرواه الطبراني في «الصغير» (34) وسنده ضعيف. وأما مرسل عطاء: فرواه ابن زَنْجَوَيْه في «الأموال (2091) بسند حسن. تنبيه: جاء عقب هذا الحديث في «الأصل» قول الحافظ: «وفي الباب: عن أبي هريرة -رضي الله عنه- عند [أبي] يعلى والبيهقي. وجابر عند الطبراني، وكلها ضعاف». ثم ضرب عليه الناسخ. ولم يرد هذا الكلام في «أ» ولذلك حذفته

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اعطوا الاجير اجره قبل ان يجف عرقه». رواه ابن ماجه - حديث صحيح بشواهده. رواه ابن ماجه (2443) بسند ضعيف جدا. قلت: وله شواهد من حديث ابي هريرة، وجابر بن عبد الله، وعطاء بن يسار. فاما حديث ابي هريرة: فرواه الطحاوي في «المشكل» (4/ 142)، والبيهقي (6/ 121) بسند حسن على اقل احواله، وله طريق اخرى عند ابي يعلى (6682) واما حديث جابر: فرواه الطبراني في «الصغير» (34) وسنده ضعيف. واما مرسل عطاء: فرواه ابن زنجويه في «الاموال (2091) بسند حسن. تنبيه: جاء عقب هذا الحديث في «الاصل» قول الحافظ: «وفي الباب: عن ابي هريرة -رضي الله عنه- عند [ابي] يعلى والبيهقي. وجابر عند الطبراني، وكلها ضعاف». ثم ضرب عليه الناسخ. ولم يرد هذا الكلام في «ا» ولذلك حذفته

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৫. মাসাকাত বা বিনিময়ে তত্ত্বাবধান ও ইজারাহ বা ভাড়া বা ঠিকায় সম্পাদন - মজুরীর পরিমান জানা আবশ্যক

৯১৪। আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যে ব্যক্তি কোন শ্রমিককে কাজে লাগাবে সে যেন তার পারিশ্রমিক নির্ধারণ করে কাজে লাগায়। ’আবদুর রাযযাক (রহ.) এর সানাদ মুনকাতে, আর বাইহাকী আবূ হানীফাহ (রহঃ)-এর মাওসূল বা অবিচ্ছিন্ন সূত্রে বর্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ -صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَنِ اسْتَأْجَرَ أَجِيرًا, فَلْيُسَمِّ لَهُ أُجْرَتَهُ». رَوَاهُ عَبْدُ الرَّزَّاقِ وَفِيهِ انْقِطَاعٌ, وَوَصَلَهُ الْبَيْهَقِيُّ مِنْ طَرِيقِ أَبِي حَنِيفَةَ

-

ضعيف. رواه عبد الرازق في «المصنف» (8/ 235 / رقم 15023) قال: أخبرنا معمر والثوري، عن حماد، عن إبراهيم، عن أبي هريرة، وأبي سعيد الخدري - أو أحدهما - أن النبي -صلى الله عليه وسلم-، قال: فذكره. وهو منقطع كما قال الحافظ، فإبراهيم لم يسمع من أحد من الصحابة. ورواه أحمد (3/ 59 و 68 و 71) من طريق حماد، ولكن عن أبي سعيد وحده بلفظ: «نهى عن استئجار الأجير حتى يبين له أجره «وهو منقطع كسابقه. وأما البيهقي فرواه (6/ 120) من طريق ابن المبارك، عن أبي حنيفة، عن حماد، عن إبراهيم، عن الأسود، عن أبي هريرة، وأبو حنيفة ضعيف عند أئمة الجرح والتعديل، ولذلك قال البيهقي: «كذا رواه أبو حنيفة. وكذا في كتابي عن أبي هريرة». قلت: وخالف الإمام الجبل شعبة. فرواه النسائي (7/ 31) من طريق ابن المبارك، عن شعبة، عن حماد، عن إبراهيم، عن أبي سعيد، قال: إذا استأجرت أجيرًا، فأعلمه أجره وتابع شعبة على ذلك الثوري، فقال عبد الرازق في «المصنف» (15024) «قلت للثوري: أسمعت حمادًا يحدث عن إبراهيم، عن أبي سعيد؛ أن النبي -صلى الله عليه وسلم- قال: من استأجر أجيرًا، فليُسَمِّ له إجارته؟ قال: نعم. وحدث به مرة أخرى، فلم يبلغ به النبي -صلى الله عليه وسلم». وأبو حنيفة -رحمه الله- لا يوازن بواحد منهما -رحمهما الله-، فكيف بهما وقد اجتمعا. ثم رأيت ابن أبي حاتم نقل عن أبي زُرعة في «العلل» (1/ 376 / رقم 1118) قوله: «الصحيح موقوف على أبي سعيد «فالحمد لله على توفيقه. قلت: ولا يفهم من قوله: «الصحيح» «أن الإسناد صحيح كما ذهب إلى ذلك الشيخ شُعَيْب الأرناؤوط في تعليقه على «المراسيل» ص (168)، إذ كيف يفهم ذلك، بينما الإنقطاع لم ينتف من السند؟، وإنما المراد أن راوية من رواه موقوفًا - بغضّ النظر عن صحة السند أو ضعفه - أصح من رواية من رفعه، وفي بقية كلام أبي زُرعة ما يوضح ذلك، إذ علّل رأيه السابق بقوله: لأن الثوري أحفظ

وعن ابي سعيد الخدري - رضي الله عنه - ان النبي -صلى الله عليه وسلم قال: «من استاجر اجيرا, فليسم له اجرته». رواه عبد الرزاق وفيه انقطاع, ووصله البيهقي من طريق ابي حنيفة - ضعيف. رواه عبد الرازق في «المصنف» (8/ 235 / رقم 15023) قال: اخبرنا معمر والثوري، عن حماد، عن ابراهيم، عن ابي هريرة، وابي سعيد الخدري - او احدهما - ان النبي -صلى الله عليه وسلم-، قال: فذكره. وهو منقطع كما قال الحافظ، فابراهيم لم يسمع من احد من الصحابة. ورواه احمد (3/ 59 و 68 و 71) من طريق حماد، ولكن عن ابي سعيد وحده بلفظ: «نهى عن استىجار الاجير حتى يبين له اجره «وهو منقطع كسابقه. واما البيهقي فرواه (6/ 120) من طريق ابن المبارك، عن ابي حنيفة، عن حماد، عن ابراهيم، عن الاسود، عن ابي هريرة، وابو حنيفة ضعيف عند اىمة الجرح والتعديل، ولذلك قال البيهقي: «كذا رواه ابو حنيفة. وكذا في كتابي عن ابي هريرة». قلت: وخالف الامام الجبل شعبة. فرواه النساىي (7/ 31) من طريق ابن المبارك، عن شعبة، عن حماد، عن ابراهيم، عن ابي سعيد، قال: اذا استاجرت اجيرا، فاعلمه اجره وتابع شعبة على ذلك الثوري، فقال عبد الرازق في «المصنف» (15024) «قلت للثوري: اسمعت حمادا يحدث عن ابراهيم، عن ابي سعيد؛ ان النبي -صلى الله عليه وسلم- قال: من استاجر اجيرا، فليسم له اجارته؟ قال: نعم. وحدث به مرة اخرى، فلم يبلغ به النبي -صلى الله عليه وسلم». وابو حنيفة -رحمه الله- لا يوازن بواحد منهما -رحمهما الله-، فكيف بهما وقد اجتمعا. ثم رايت ابن ابي حاتم نقل عن ابي زرعة في «العلل» (1/ 376 / رقم 1118) قوله: «الصحيح موقوف على ابي سعيد «فالحمد لله على توفيقه. قلت: ولا يفهم من قوله: «الصحيح» «ان الاسناد صحيح كما ذهب الى ذلك الشيخ شعيب الارناووط في تعليقه على «المراسيل» ص (168)، اذ كيف يفهم ذلك، بينما الانقطاع لم ينتف من السند؟، وانما المراد ان راوية من رواه موقوفا - بغض النظر عن صحة السند او ضعفه - اصح من رواية من رفعه، وفي بقية كلام ابي زرعة ما يوضح ذلك، اذ علل رايه السابق بقوله: لان الثوري احفظ

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - যে ব্যক্তি পরিত্যক্ত মালিকবিহীন জমি আবাদ করবে ঐ জমির হাক্কদার সেই ব্যক্তি হবে

৯১৫। উরওয়াহ হতে বর্ণিত, তিনি ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি পরিত্যক্ত মালিকহীন জমি আবাদ করবে। ঐ জমির হকদার সে ব্যক্তিই হবে। উরওয়াহ বলেছেন, এরূপ ফয়সালাহ ’উমার (রাঃ) তাঁর খিলাফত আমলে করেছেন।[1]

عَنْ عُرْوَةَ, عَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا-; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ عَمَّرَ أَرْضًا لَيْسَتْ لِأَحَدٍ, فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا». قَالَ عُرْوَةُ: وَقَضَى بِهِ عُمَرُ فِي خِلَافَتِهِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2335) وليس عند البخاري لفظ: بها

عن عروة, عن عاىشة -رضي الله عنها-; ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من عمر ارضا ليست لاحد, فهو احق بها». قال عروة: وقضى به عمر في خلافته. رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2335) وليس عند البخاري لفظ: بها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ উরওয়াহ (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - যে ব্যক্তি পরিত্যক্ত মালিকবিহীন জমি আবাদ করবে ঐ জমির হাক্কদার সেই ব্যক্তি হবে

৯১৬। সাঈদ ইবনু যায়দ থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে কোন ব্যক্তি অনাবাদী মৃত জমিকে আবাদ করবে ঐ জমি তারই হবে। -তিরমিযী একে হাসান বলেছেন, আর তিনি বলেছেন, এটা মুরসালরূপে বৰ্ণিত হয়েছে।

বর্ণনাকারী ’সাহাবী’ নির্ণয়ের ব্যাপারে মতভেদ আছে- কেউ বলেছেন জাবির (রাঃ), কেউ বলেছেন ’আয়িশা (রাঃ), কেউ বলেছেন ’আবদুল্লাহ বিন ’উমার (রাঃ), তবে প্রথম মত জাবির (রাঃ) অধিক অগ্রগণ্য।[1]

وَعَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ أَحْيَا أَرْضًا مَيْتَةً فَهِيَ لَهُ». رَوَاهُ الثَّلَاثَةُ, وَحَسَّنَهُ التِّرْمِذِيُّ
وَقَالَ: رُوِيَ مُرْسَلًا. وَهُوَ كَمَا قَالَ, وَاخْتُلِفَ فِي صَحَابِيِّهِ, فَقِيلَ: جَابِرٌ, وَقِيلَ: عَائِشَةُ, وَقِيلَ: عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو, وَالرَّاجِحُ الْأَوَّلُ

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حديث صحيح

وعن سعيد بن زيد - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من احيا ارضا ميتة فهي له». رواه الثلاثة, وحسنه الترمذي وقال: روي مرسلا. وهو كما قال, واختلف في صحابيه, فقيل: جابر, وقيل: عاىشة, وقيل: عبد الله بن عمرو, والراجح الاول - حديث صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - চারণভূমি প্রসঙ্গে

৯১৭। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, সা’ব বিন জাসসামাহ আল-লাইসী (রাঃ) তাঁকে জানিয়েছিলেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, চারণভূমি সংরক্ষিত করা আল্লাহ ও তাঁর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ছাড়া আর কারো অধিকারে নেই।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ; أَنَّ الصَّعْبَ بْنَ جَثَّامَةَ - رضي الله عنه - أَخْبَرَهُ أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا حِمَى إِلَّا لِلَّهِ وَلِرَسُولِهِ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2370)

وعن ابن عباس; ان الصعب بن جثامة - رضي الله عنه - اخبره ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا حمى الا لله ولرسوله». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2370)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - চারণভূমি প্রসঙ্গে

৯১৮। ইবনু আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, উদ্দেশ্য প্রণোদিতভাবে বা উদ্দেশ্যহীনভাবে কাকেও কোন রকম কষ্ট দেয়া বৈধ নয়।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا ضَرَرَ وَلَا ضِرَارَ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَابْنُ مَاجَهْ

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حديث صحيح بطرقه وشواهده؛ إذ قد روي عن عدد كبير من الصحابة، وبطرق عدة، كما صححه جماعة من الحُفّاظ. وتفصيل ذلك بالأصل

وعن ابن عباس -رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا ضرر ولا ضرار». رواه احمد, وابن ماجه - حديث صحيح بطرقه وشواهده؛ اذ قد روي عن عدد كبير من الصحابة، وبطرق عدة، كما صححه جماعة من الحفاظ. وتفصيل ذلك بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - চারণভূমি প্রসঙ্গে

৯১৯। ইবনু মাজাহয় আবূ সাঈদ (রাঃ) কর্তৃকও অনুরূপ হাদীস বর্ণিত রয়েছে। আর হাদীসটি মুওয়াত্তায় রয়েছে মুরসালরূপে।[1]

وَلَهُ مِنْ حَدِيثِ أَبِي سَعِيدٍ مِثْلُهُ, وَهُوَ فِي الْمُوَطَّإِ مُرْسَلٌ

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الموطأ (2/ 745 / رقم 31)، وانظر ما قبله

وله من حديث ابي سعيد مثله, وهو في الموطا مرسل - الموطا (2/ 745 / رقم 31)، وانظر ما قبله

হাদিসের মানঃ মুরসাল
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - অনাবাদী জমি আবাদ করার প্রকার সমূহ

৯২০। সামুরাহ বিন জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন অনাবাদী জমিকে প্রাচীরবেষ্টিত করে নিবে ঐ স্থান তারই হবে। -ইবনু জারূদ হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ أَحَاطَ حَائِطًا عَلَى أَرْضٍ فَهِيَ لَهُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ الْجَارُودِ

-

حديث صحيح. بما له من شواهد كما تقد م رقم (897 و 898)، وإن رواه أبو داود (3077)، وابن الجارود (1015) بسند ضعيف

وعن سمرة بن جندب - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «من احاط حاىطا على ارض فهي له». رواه ابو داود, وصححه ابن الجارود - حديث صحيح. بما له من شواهد كما تقد م رقم (897 و 898)، وان رواه ابو داود (3077)، وابن الجارود (1015) بسند ضعيف

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - বিরানভূমিতে কূপ খননকারীর অধিকার

৯২১। ’আবদুল্লাহ ইবনু মুগাফফাল (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন কূপ খনন করবে। তার জন্য ঐ কূপের সংলগ্ন চল্লিশ হাত স্থান তার গৃহ পালিত পশুর অবস্থান ক্ষেত্ররূপে তার অধিকারভুক্ত হবে। —ইবনু মাজাহ দুর্বল সানাদে।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ حَفَرَ بِئْرًا فَلَهُ أَرْبَعُونَ ذِرَاعًا عَطَنًا لِمَاشِيَتِهِ». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

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حسن. رواه ابن ماجه (2486) وسنده ضعيف كما قال الحافظ، لكن يشهد له حديث أبي هريرة عند أحمد (2/ 494)، وله شاهد آخر مرسل في «مراسيل» أبي داود

وعن عبد الله بن مغفل - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من حفر بىرا فله اربعون ذراعا عطنا لماشيته». رواه ابن ماجه باسناد ضعيف - حسن. رواه ابن ماجه (2486) وسنده ضعيف كما قال الحافظ، لكن يشهد له حديث ابي هريرة عند احمد (2/ 494)، وله شاهد اخر مرسل في «مراسيل» ابي داود

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
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পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - জমি বরাদ্দ প্রসঙ্গ

৯২২. ’আলাকামাহ বিন ওয়ায়িল (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি পিতা (ওয়ায়েল) থেকে বর্ণনা করেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে হাযরামাওত নামক স্থানে কিছু জমি জায়গীরস্বরূপ দিয়েছিলেন। -ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ وَائِلٍ, عَنْ أَبِيهِ; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَقْطَعَهُ أَرْضًا بِحَضْرَمَوْتَ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

-

صحيح. رواه أبو داود (3058 و 3059)، والترمذي (1381) وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: لعله قال ذلك لوجود سماك بن حرب في إسناده، ولكنه تُوبِعَ عليه كما عند أبي داود وغيره

وعن علقمة بن واىل, عن ابيه; - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - اقطعه ارضا بحضرموت. رواه ابو داود, والترمذي, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه ابو داود (3058 و 3059)، والترمذي (1381) وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: لعله قال ذلك لوجود سماك بن حرب في اسناده، ولكنه توبع عليه كما عند ابي داود وغيره

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - জমি বরাদ্দ প্রসঙ্গ

৯২৩। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যুবায়ের (রাঃ)-এর জন্য তার ঘোড়ার দৌড়ানোর শেষ সীমা পর্যন্ত জমি দেয়ার জন্য বরাদ্দ করলেন। অতঃপর তিনি ঘোড়া দৌড়ালেন ও তা একস্থানে গিয়ে দাঁড়াল, তারপর তিনি তার চাবুকখানি নিক্ষেপ করলেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এবার বললেন, তাকে তার চাবুক নিক্ষিপ্ত হবার স্থান পর্যন্ত দিয়ে দাও।-এর সানাদে দুর্বলতা আছে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا -، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَقْطَعَ الزُّبَيْرَ حُضْرَ فَرَسِهِ, فَأَجْرَى الْفَرَسَ حَتَّى قَامَ, ثُمَّ رَمَى سَوْطَهُ. فَقَالَ: «أَعْطُوهُ حَيْثُ بَلَغَ السَّوْطُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَفِيهِ ضَعْفٌ

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ضعيف. رواه أبو داود (3072)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما -، ان النبي - صلى الله عليه وسلم - اقطع الزبير حضر فرسه, فاجرى الفرس حتى قام, ثم رمى سوطه. فقال: «اعطوه حيث بلغ السوط». رواه ابو داود وفيه ضعف - ضعيف. رواه ابو داود (3072)

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পরিচ্ছেদঃ ১৬. অনাবাদী জমির আবাদ - ঘাস, পানি এবং আগুনে মানুষের সমভাবে শরীক

৯২৪। একজন সাহাবী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর সঙ্গী হয়ে যুদ্ধ করেছিলাম। তখন তাঁকে বলতে শুনেছি, সমস্ত মানুষ তিনটি বস্তুতে সমভাবে অংশীদার-ঘাস, পানি ও আগুন।-এর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ رَجُلٍ مِنْ الصَّحَابَةِ - رضي الله عنه - قَالَ: غَزَوْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ: «النَّاسُ (1) شُرَكَاءُ فِي ثَلَاثٍ: فِي الْكَلَأِ، وَالْمَاءِ، وَالنَّارِ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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كذا في «الأصلين» وهو وهم من الحافظ -رحمه الله- فهذا اللفظ ليس عند أحمد، ولا عند أبي داود، وإنما عندهما بلفظ: «المسلمون»، ثم رأيته -رحمه الله- ساقه في «التلخيص» (3/ 65) بلفظ: «المسلمون» بعد أن عزاه لأحمد وأبي داود
(2) - صحيح. رواه أحمد (5/ 364)، وأبو داود (3477)

وعن رجل من الصحابة - رضي الله عنه - قال: غزوت مع رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فسمعته يقول: «الناس (1) شركاء في ثلاث: في الكلا، والماء، والنار». رواه احمد, وابو داود, ورجاله ثقات - كذا في «الاصلين» وهو وهم من الحافظ -رحمه الله- فهذا اللفظ ليس عند احمد، ولا عند ابي داود، وانما عندهما بلفظ: «المسلمون»، ثم رايته -رحمه الله- ساقه في «التلخيص» (3/ 65) بلفظ: «المسلمون» بعد ان عزاه لاحمد وابي داود (2) - صحيح. رواه احمد (5/ 364)، وابو داود (3477)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৭. ওয়াকফের বিবরণ - মৃত্যুর পরও মানুষের যে আমল অব্যাহত থাকে

৯২৫। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, মৃত্যুর পর মানুষের তিনটি ’আমল ব্যতীত সকল ’আমল বন্ধ হয়ে যায়। সাদাকাতুল জারিয়াহ, উপকারী ’ইলম বা বিদ্যা, সৎ সন্তান যে (পিতা-মাতার জন্য) দু’আ করে।[1]

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِذَا مَاتَ الْإِنْسَانُ انْقَطَعَ عَنْهُ عَمَلُهُ إِلَّا مِنْ ثَلَاثٍ: صَدَقَةٍ جَارِيَةٍ، أَوْ عِلْمٍ يُنْتَفَعُ بِهِ، أَوْ وَلَدٍ صَالَحٍ يَدْعُو لَهُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1631) «تنبيه»: وقع في النسخ المطبوعة من البلوغ: «إذا مات ابن آدم» ولم أجده بهذا اللفظ في أيّ كتاب من كتب السنة، وهو في «الأصلين» على الصواب

عن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «اذا مات الانسان انقطع عنه عمله الا من ثلاث: صدقة جارية، او علم ينتفع به، او ولد صالح يدعو له». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1631) «تنبيه»: وقع في النسخ المطبوعة من البلوغ: «اذا مات ابن ادم» ولم اجده بهذا اللفظ في اي كتاب من كتب السنة، وهو في «الاصلين» على الصواب

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৭. ওয়াকফের বিবরণ - ওয়াকফের শর্তসমূহ

৯২৬। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, ’উমার ইবনু খাত্তাব (রাঃ) খায়বারে কিছু জমি লাভ করেন। তিনি এ জমির ব্যাপারে পরামর্শের জন্য আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট এলেন এবং বললেন, ’হে আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম! আমি খায়বারে এমন উৎকৃষ্ট কিছু জমি লাভ করেছি যা ইতোপূর্বে আর কখনো পাইনি। (আপনি আমাকে এ ব্যাপারে কী আদেশ দেন?) আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, ’তুমি ইচ্ছা করলে জমির মূলস্বত্ত ওয়াকফে রাখতে এবং উৎপন্ন বস্তু সাদাকা করতে পার’। ইবনু ’উমার তিনি বলেন, ’উমার (রাঃ) এ শর্তে তা সাদাকা (ওয়াকফ) করেন যে, তা বিক্রি করা যাবে না, তা দান করা যাবে না এবং কেউ এর উত্তরাধিকারী হবে না’। তিনি সাদাকা করে দেন এর উৎপন্ন বস্তু অভাবগ্ৰস্ত, আত্মীয়-স্বজন, দাসমুক্তি, আল্লাহর রাস্তায়, মুসাফির ও মেহমানদের জন্য। (রাবী আরও বললেন) তার দায়িত্বশীল তা ন্যায়সঙ্গতভাবে খেলে দোষ নেই। বন্ধুকে খাওয়াতে পারবে[1] যদি সে নিজস্ব স্বার্থে মাল বৃদ্ধিকারী না হয়। -শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।

বুখারীর অন্য বর্ণনায় আছে, তার মূল বস্তুকে ওয়াকফ করে রাখ, বিক্রয় করা, হেবা করা চলবে না। বরং তার ফল খরচ করে দিতে হবে।[2]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: أَصَابَ عُمَرُ أَرْضًا بِخَيْبَرَ, فَأَتَى النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - يَسْتَأْمِرُهُ فِيهَا, فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنِّي أَصَبْتُ أَرْضًا بِخَيْبَرَ لَمْ أُصِبْ مَالًا قَطُّ هُوَ أَنْفَسُ عِنْدِي مِنْهُ قَالَ: «إِنْ شِئْتَ حَبَسْتَ أَصْلَهَا, وَتَصَدَّقْتَ بِهَا». قَالَ: فَتَصَدَّقَ بِهَا عُمَرُ, [غَيْرَ] أَنَّهُ لَا يُبَاعُ أَصْلُهَا, وَلَا يُورَثُ, وَلَا يُوهَبُ, فَتَصَدَّقَ بِهَا فِي الْفُقَرَاءِ, وَفِي الْقُرْبَى, وَفِي الرِّقَابِ, وَفِي سَبِيلِ اللَّهِ, وَابْنِ السَّبِيلِ, وَالضَّيْفِ, لَا جُنَاحَ عَلَى مَنْ وَلِيَهَا أَنْ يَأْكُلَ مِنْهَا بِالْمَعْرُوفِ, وَيُطْعِمَ صَدِيقًا - غَيْرَ مُتَمَوِّلٍ مَالًا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: تَصَدَّقْ بِأَصْلِهِ, لَا يُبَاعُ وَلَا يُوهَبُ, وَلَكِنْ يُنْفَقُ ثَمَرُهُ

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صحيح. رواه البخاري (2737)، ومسلم (1632) ولا أجد كبير فائدة لقول الحافظ: «واللفظ لمسلم». والله أعلم
(5) - البخاري برقم (2764)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما - قال: اصاب عمر ارضا بخيبر, فاتى النبي - صلى الله عليه وسلم - يستامره فيها, فقال: يا رسول الله! اني اصبت ارضا بخيبر لم اصب مالا قط هو انفس عندي منه قال: «ان شىت حبست اصلها, وتصدقت بها». قال: فتصدق بها عمر, [غير] انه لا يباع اصلها, ولا يورث, ولا يوهب, فتصدق بها في الفقراء, وفي القربى, وفي الرقاب, وفي سبيل الله, وابن السبيل, والضيف, لا جناح على من وليها ان ياكل منها بالمعروف, ويطعم صديقا - غير متمول مالا. متفق عليه, واللفظ لمسلم وفي رواية للبخاري: تصدق باصله, لا يباع ولا يوهب, ولكن ينفق ثمره - صحيح. رواه البخاري (2737)، ومسلم (1632) ولا اجد كبير فاىدة لقول الحافظ: «واللفظ لمسلم». والله اعلم (5) - البخاري برقم (2764)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৭. ওয়াকফের বিবরণ - ওয়াক্বফকৃত বস্তু স্থানান্তর করার বিধান

৯২৭। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’উমার (রাঃ)-কে যাকাত ওসুল করার জন্য পাঠিয়েছিলেন। (এটা দীর্ঘ হাদীসের অংশবিশেষ) (তাতে আছে) কিন্তু খালেদ বিন ওয়ালিদ স্বীয় বর্মগুলো ও অস্ত্ৰসমূহকে আল্লাহর পথে ব্যবহারের জন্য (জিহাদের জন্য) ওয়াকফ করে রেখেছিলেন।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عُمَرَ عَلَى الصَّدَقَةِ ... الْحَدِيثَ, وَفِيهِ
وَأَمَّا خَالِدٌ فَقَدِ احْتَبَسَ أَدْرَاعَهُ وَأَعْتَادَهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: بعث رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عمر على الصدقة ... الحديث, وفيه واما خالد فقد احتبس ادراعه واعتاده في سبيل الله. متفق عليه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - দান করার ক্ষেত্রে সন্তানদের মধ্যে তারতম্য করা নিষেধ

৯২৮। নু’মান ইবনু বাশীর (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, তার পিতা তাকে নিয়ে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট এলেন এবং বললেন, আমি আমার এই পুত্রকে একটি গোলাম দান করেছি। তখন তিনি জিজ্ঞেস করলেন, তোমার সব পুত্রকেই কি তুমি এরূপ দান করেছ। তিনি বললেন, না; তিনি বললেন, তবে তুমি তা ফিরিয়ে নাও।[1]

অন্য শব্দে এরূপ আছে- আমার পিতা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর দরবারে হাজির হলেন যাতে করে তাঁকে এ ব্যাপারে সাক্ষী করে নিতে পারেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বললেন, তোমার প্রত্যেক ছেলের জন্য কি এরূপ দান করেছ? সাহাবী বললেন, না, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, আল্লাহকে ভয় কর, তোমার সন্তানদের মধ্যে সমভাবে বণ্টন কর। ফলে আমার পিতা [বাশীর রাঃ] বাড়ি ফিরে এলেন ও ঐ দান ফেরত নিলেন।[2]

মুসলিমের অন্য একটি বর্ণনায় আছে- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম অসন্তুষ্ট হয়ে বললেন, তবে তুমি এর জন্য আমাকে ব্যতীত অন্যকে সাক্ষী করে রাখ। তারপর বললেন, তুমি কি পছন্দ কর যে, তোমার প্রতি তারা (পুত্ৰগণ) সমভাবে সদ্ব্যবহার করুক। সাহাবী বললেন, হাঁ, তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তাহলে তুমি এরূপ করো না।[3]

عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّ أَبَاهُ أَتَى بِهِ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: إِنِّي نَحَلْتُ ابْنِي هَذَا غُلَامًا كَانَ لِي، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَكُلُّ وَلَدِكَ نَحَلْتَهُ مِثْلَ هَذَا؟». فَقَالَ: لَا. فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: فَارْجِعْهُ

وَفِي لَفْظٍ: فَانْطَلَقَ أَبِي إِلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - لِيُشْهِدَهُ عَلَى صَدَقَتِي. فَقَالَ: «أَفَعَلْتَ هَذَا بِوَلَدِكَ كُلِّهِمْ؟». قَالَ: لَا. قَالَ: «اتَّقُوا اللَّهَ, وَاعْدِلُوا بَيْنَ أَوْلَادِكُمْ». فَرَجَعَ أَبِي, فَرَدَّ تِلْكَ الصَّدَقَةَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ قَالَ: «فَأَشْهِدْ عَلَى هَذَا غَيْرِي» ثُمَّ قَالَ: «أَيَسُرُّكَ أَنْ يَكُونُوا لَكَ فِي الْبِرِّ سَوَاءً؟» قَالَ: بَلَى. قَالَ: فَلَا إِذًا

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صحيح. وهذه الرواية للبخاري (2586)، ومسلم (1623) (9)

هذه الرواية للبخاري (2587)، ومسلم (1623) (13) والسياق لمسلم

مسلم برقم (1623) (17)

عن النعمان بن بشير - رضي الله عنهما - ان اباه اتى به رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فقال: اني نحلت ابني هذا غلاما كان لي، فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اكل ولدك نحلته مثل هذا؟». فقال: لا. فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: فارجعه وفي لفظ: فانطلق ابي الى النبي - صلى الله عليه وسلم - ليشهده على صدقتي. فقال: «افعلت هذا بولدك كلهم؟». قال: لا. قال: «اتقوا الله, واعدلوا بين اولادكم». فرجع ابي, فرد تلك الصدقة. متفق عليه وفي رواية لمسلم قال: «فاشهد على هذا غيري» ثم قال: «ايسرك ان يكونوا لك في البر سواء؟» قال: بلى. قال: فلا اذا - صحيح. وهذه الرواية للبخاري (2586)، ومسلم (1623) (9) هذه الرواية للبخاري (2587)، ومسلم (1623) (13) والسياق لمسلم مسلم برقم (1623) (17)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - দান করে ফিরিয়ে নেওয়া হারাম

৯২৯। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, দান করে তা ফেরত গ্রহণকারী ঐ কুকুরের মত, যে বমি করে। এরপর তার বমি খায়।

বুখারীর অন্য একটি বর্ণনায় আছে, খারাপ উপমা দেয়া আমাদের জন্য শোভনীয় নয়। তবু যে দান করে তা ফিরিয়ে নেয়, সে ঐ কুকুরের মতো, যে বমি করে তা আবার খায়।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «الْعَائِدُ فِي هِبَتِهِ كَالْكَلْبِ يَقِيءُ, ثُمَّ يَعُودُ فِي قَيْئِهِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: «لَيْسَ لَنَا مَثَلُ السَّوْءِ, الَّذِي يَعُودُ فِي هِبَتِهِ كَالْكَلْبِ يَرْجِعُ فِي قَيْئِهِ

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صحيح. رواه البخاري (2589)، ومسلم (1622) (8)

البخاري برقم (2622)

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما - قال: قال النبي - صلى الله عليه وسلم: «العاىد في هبته كالكلب يقيء, ثم يعود في قيىه». متفق عليه وفي رواية للبخاري: «ليس لنا مثل السوء, الذي يعود في هبته كالكلب يرجع في قيىه - صحيح. رواه البخاري (2589)، ومسلم (1622) (8) البخاري برقم (2622)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - ছেলেকে দান করা বস্তু পিতার ফিরিয়ে নেওয়া বৈধ

৯৩০। ইবনু ’উমার ও ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন মুসলিমের জন্য কিছু দান করার পর পুনরায় তা ফেরত নেয়া হালাল নয়। তবে পিতা তার পুত্রকে যা দান করে তা ফেরত নিতে পারে। -তিরমিযী, ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ، وَابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ-, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا يَحِلُّ لِرَجُلٍ مُسْلِمٍ أَنْ يُعْطِيَ الْعَطِيَّةَ, ثُمَّ يَرْجِعَ فِيهَا; إِلَّا الْوَالِدُ فِيمَا يُعْطِي وَلَدَهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (2 7 و 78)، وأبو داود (3539)، والنسائي (6/ 267 - 268)، والترمذي (2132)، وابن ماجه (2377)، وابن حبان (5101)، والحاكم (2/ 46) وزادوا جميعا إلا ابن ماجه: «ومثل الذي يعطي العطية، ثم يرجع فيها كمثل الكلب، حتى إذا شبع قاء، ثم عاد في قيئه». وقال الترمذي: هذا حديث حسن صحيح

وعن ابن عمر، وابن عباس - رضي الله عنهم-, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا يحل لرجل مسلم ان يعطي العطية, ثم يرجع فيها; الا الوالد فيما يعطي ولده». رواه احمد, والاربعة, وصححه الترمذي, وابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه احمد (2 7 و 78)، وابو داود (3539)، والنساىي (6/ 267 - 268)، والترمذي (2132)، وابن ماجه (2377)، وابن حبان (5101)، والحاكم (2/ 46) وزادوا جميعا الا ابن ماجه: «ومثل الذي يعطي العطية، ثم يرجع فيها كمثل الكلب، حتى اذا شبع قاء، ثم عاد في قيىه». وقال الترمذي: هذا حديث حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - উপঢৌকন গ্ৰহণ করা

৯৩১। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হাদীয়া (উপঢৌকন) গ্ৰহণ করতেন এবং তার প্রতিদানও দিতেন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- قَالَتْ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقْبَلُ الْهَدِيَّةَ, وَيُثِيبُ عَلَيْهَا. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (2585)

وعن عاىشة -رضي الله عنها- قالت: كان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقبل الهدية, ويثيب عليها. رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (2585)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - উপঢৌকন গ্ৰহণ করা

৯৩২। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে কোন এক ব্যক্তি একটি উট দান করেছিল। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার প্রতিদান দিয়ে বললেন, —তুমি কি সন্তুষ্ট হলে? সে বলল-না, তিনি তাকে আরো দিয়ে বললেন সন্তুষ্ট হলে? সে বলল, না। তিনি তাকে আরো দিয়ে বললেন, সন্তুষ্ট হলে? এবারে সে বলল, জী-হাঁ। —ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: وَهَبَ رَجُلٌ لِرَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - نَاقَةً، فَأَثَابَهُ عَلَيْهَا, فَقَالَ: «رَضِيتَ؟» قَالَ: لَا. فَزَادَهُ, فَقَالَ: «رَضِيتَ؟» قَالَ: لَا. فَزَادَهُ. قَالَ: «رَضِيتَ؟» قَالَ: نَعَمْ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه أحمد (2 95)، وابن حبان (1146 موارد) وزادا: «فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: لقد هممت أن لا أتَّهِب هبة من قرشي، أو أنصاري، أو ثقفي». قلت: وقوله: «أتَّهب» بالتاء المشددة، أي: أقبل الهدية، وأما سبب هَمِّ النبي -صلى الله عليه وسلم- بعدم قبول الهدية إلا من هؤلاء فهو كما يقول ابن الأثير (5/ 231): «لأنهم أصحاب مدن وقرى، وهم أعرف بمكارم الأخلاق؛ ولأن في أخلاق البادية جفاء، وذهابا عن المروءة، وطلبا للزيادة

وعن ابن عباس -رضي الله عنهما- قال: وهب رجل لرسول الله - صلى الله عليه وسلم - ناقة، فاثابه عليها, فقال: «رضيت؟» قال: لا. فزاده, فقال: «رضيت؟» قال: لا. فزاده. قال: «رضيت؟» قال: نعم. رواه احمد, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه احمد (2 95)، وابن حبان (1146 موارد) وزادا: «فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: لقد هممت ان لا اتهب هبة من قرشي، او انصاري، او ثقفي». قلت: وقوله: «اتهب» بالتاء المشددة، اي: اقبل الهدية، واما سبب هم النبي -صلى الله عليه وسلم- بعدم قبول الهدية الا من هولاء فهو كما يقول ابن الاثير (5/ 231): «لانهم اصحاب مدن وقرى، وهم اعرف بمكارم الاخلاق؛ ولان في اخلاق البادية جفاء، وذهابا عن المروءة، وطلبا للزيادة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - উমরা এবং রুকবা প্ৰসঙ্গ

৯৩৩। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, উমরী বা আজীবন দান তার জন্য সাব্যস্ত হবে যার জন্য তা হেবা করা হয়েছে।[1]

মুসলিমে আছে- তোমাদের মাল তোমাদের জন্য রাখ, তা নষ্ট করে ফেল না। যদি কেউ কাউকে জীবনতক দান করে তাহলে এ দান তার জীবন ও মরণতকই হবে, আর তার মৃত্যুর পর তার সন্তানগণেরও হবে।

অন্য শব্দে এরূপ এসেছে- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বৈধ বলেছেন ঐ উমরী দান যাতে হিবাকারী বলবে যে, এ দান তোমার জন্য ও তোমার সন্তানদের (ওয়ারিসদের) জন্যও। কিন্তু যদি বলে এ দান তোমার জীবনতক মাত্র। তাহলে ঐ দান সিদ্ধ না হয়ে মালিকেরই থেকে যাবে।[2]

আবূ দাউদে ও নাসায়ীতে আছে- তোমরা রুকবা ও উমরা করবে না। যে কিছু রুকবা বা উমরা করবে। তাহলে তা তার ওয়ারিসদের জন্যও হবে।[3]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الْعُمْرَى لِمَنْ وُهِبَتْ لَهُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِمُسْلِمٍ: أَمْسِكُوا عَلَيْكُمْ أَمْوَالَكُمْ وَلَا تُفْسِدُوهَا, فَإِنَّهُ مَنْ أَعْمَرَ عُمْرَى فَهِيَ لِلَّذِي أُعْمِرَهَا حَيًا وَمَيِّتًا، وَلِعَقِبِهِ
وَفِي لَفْظٍ: إِنَّمَا الْعُمْرَى الَّتِي أَجَازَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ يَقُولَ: هِيَ لَكَ وَلِعَقِبِكَ، فَأَمَّا إِذَا قَالَ: هِيَ لَكَ مَا عِشْتَ، فَإِنَّهَا تَرْجِعُ إِلَى صَاحِبِهَا
وَلِأَبِي دَاوُدَ وَالنَّسَائِيِّ: لَا تُرْقِبُوا, وَلَا تُعْمِرُوا، فَمَنْ أُرْقِبَ شَيْئًا أَوْ أُعْمِرَ شَيْئًا فَهُوَ لِوَرَثَتِهِ

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صحيح. رواه البخاري (2625)، ومسلم (1625) (25)، والسياق لمسلم، وأما البخاري فعن جابر قال: قضى النبي -صلى الله عليه وسلم- بالعمرى أنها لمن وُهِبَتْ له

رواه مسلم (1625) (26)

رواه مسلم (1625) (23) وزاد: قال معمر: وكان الزهري يفتي به

رواه أبو داود (3556)، والنسائي (6/ 273)

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «العمرى لمن وهبت له». متفق عليه ولمسلم: امسكوا عليكم اموالكم ولا تفسدوها, فانه من اعمر عمرى فهي للذي اعمرها حيا وميتا، ولعقبه وفي لفظ: انما العمرى التي اجاز رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان يقول: هي لك ولعقبك، فاما اذا قال: هي لك ما عشت، فانها ترجع الى صاحبها ولابي داود والنساىي: لا ترقبوا, ولا تعمروا، فمن ارقب شيىا او اعمر شيىا فهو لورثته - صحيح. رواه البخاري (2625)، ومسلم (1625) (25)، والسياق لمسلم، واما البخاري فعن جابر قال: قضى النبي -صلى الله عليه وسلم- بالعمرى انها لمن وهبت له رواه مسلم (1625) (26) رواه مسلم (1625) (23) وزاد: قال معمر: وكان الزهري يفتي به رواه ابو داود (3556)، والنساىي (6/ 273)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - সদকা দানকারীর স্বীয় সদকা গ্ৰহণ করা নিষেধ

৯৩৪। উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, এক লোককে আমি আমার একটি ঘোড়া আল্লাহর রাস্তায় আরোহণের জন্য দান করলাম। ঘোড়াটি যার নিকট ছিল, সে তার চরম অযত্ন করল। তাই সেটা আমি তার নিকট হতে কিনে নিতে চাইলাম। আমার ধারণা ছিল যে, সে তা কম দামে বিক্রি করবে। এ সম্পর্কে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে জিজ্ঞেস করলে তিনি বললেন, এক দিরহামের বিনিময়েও যদি সে তোমাকে তা দিতে রাজী হয় তবু তুমি তা ক্রয় কর না। (এটি একটি দীর্ঘ হাদীসের অংশ।)[1]

وَعَنْ عُمَرَ - رضي الله عنه - قَالَ: حَمَلْتُ عَلَى فَرَسٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ, فَأَضَاعَهُ صَاحِبُهُ, فَظَنَنْتُ أَنَّهُ بَائِعُهُ بِرُخْصٍ، فَسَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ ذَلِكَ. فَقَالَ: «لَا تَبْتَعْهُ, وَإِنْ أَعْطَاكَهُ بِدِرْهَمٍ …» الْحَدِيثَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2622)، ومسلم (1620) وزادا: فإن العائد في صدقته، كالكلب يعود في قيئه

وعن عمر - رضي الله عنه - قال: حملت على فرس في سبيل الله, فاضاعه صاحبه, فظننت انه باىعه برخص، فسالت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن ذلك. فقال: «لا تبتعه, وان اعطاكه بدرهم …» الحديث. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2622)، ومسلم (1620) وزادا: فان العاىد في صدقته، كالكلب يعود في قيىه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - হাদিয়া (উপহার) দেয়া মুস্তাহাব এবং এর প্রভাব

৯৩৫। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, অন্যকে হাদীয়া দাও। তাহলে আপোষে ভালবাসা সৃষ্টি করতে পারবে। বুখারী তাঁর আদাবুল মুফরাদে ও আবূ ইয়া’লা-উত্তম সানাদে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «تَهَادُوْا تَحَابُّوا». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ فِي «الأَدَبِ الْمُفْرَدِ» وَأَبُو يَعْلَى بِإِسْنَادٍ حَسَنٍ

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حسن. رواه البخاري في «الأدب المفرد» (594) وأبو يعلى في «المسند» (6148)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «تهادوا تحابوا». رواه البخاري في «الادب المفرد» وابو يعلى باسناد حسن - حسن. رواه البخاري في «الادب المفرد» (594) وابو يعلى في «المسند» (6148)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - হাদিয়া (উপহার) দেয়া মুস্তাহাব এবং এর প্রভাব

৯৩৬। আনাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন-আপোষে উপঢৌকন দিতে থাকো, কেননা উপঢৌকন দ্বারা মনের হিংসা-বিদ্বেষজনিত গ্লানি দূর হয়ে যায়। -বাযযার দুর্বল সানাদে।[1]

وَعَنْ أَنَسٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «تَهَادَوْا, فَإِنَّ الْهَدِيَّةَ تَسُلُّ السَّخِيمَةَ». رَوَاهُ الْبَزَّارُ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

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رواه البزار (1937)، وهو وإن كان ضعيف المسند فهو أحد شواهد الحديث السابق

وعن انس - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «تهادوا, فان الهدية تسل السخيمة». رواه البزار باسناد ضعيف - رواه البزار (1937)، وهو وان كان ضعيف المسند فهو احد شواهد الحديث السابق

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - হাদিয়া (উপহার) দেয়া মুস্তাহাব এবং এর প্রভাব

৯৩৭। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- হে মুসলিম নারীগণ! কোন মহিলা প্রতিবেশিনী যেন অপর মহিলা প্রতিবেশিনীর হাদিয়া তুচ্ছ মনে না করে, এমনকি তা ছাগলের সামান্য মাংসযুক্ত হাড় হলেও।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «يَا نِسَاءَ الْمُسْلِمَاتِ! لَا تَحْقِرَنَّ جَارَةٌ لِجَارَتِهَا وَلَوْ فِرْسِنَ شَاةٍ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح رواه البخاري (2566)، ومسلم (1030) و «فرسن»: قال الحافظ في «الفتح»: «بكسر الفاء والمهملة بينهما راء ساكنة وآخره نون، وهو: عُظَيْمٌ قليل اللحم، وهو للبعير موضع الحافر للفرس، ويطلق على الشاة مجازا، ونونه زائدة وقيل: أصلية، وأشير بذلك إلى المبالغة في إهداء الشيء اليسير وقبوله لا إلى حقيقة الفرسن؛ لأنه لم تَجْر العادة بإهدائه، أي: لا تمنع جارة من الهدية لجارتها الموجود عندها لاستقلاله، بل ينبغي أن تجود لها بما تيسر، وإن كان قليلًا فهو خير من العدم، وذكر الفرسن على سبيل المبالغة

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «يا نساء المسلمات! لا تحقرن جارة لجارتها ولو فرسن شاة». متفق عليه - صحيح رواه البخاري (2566)، ومسلم (1030) و «فرسن»: قال الحافظ في «الفتح»: «بكسر الفاء والمهملة بينهما راء ساكنة واخره نون، وهو: عظيم قليل اللحم، وهو للبعير موضع الحافر للفرس، ويطلق على الشاة مجازا، ونونه زاىدة وقيل: اصلية، واشير بذلك الى المبالغة في اهداء الشيء اليسير وقبوله لا الى حقيقة الفرسن؛ لانه لم تجر العادة باهداىه، اي: لا تمنع جارة من الهدية لجارتها الموجود عندها لاستقلاله، بل ينبغي ان تجود لها بما تيسر، وان كان قليلا فهو خير من العدم، وذكر الفرسن على سبيل المبالغة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৮. হিবা বা দান, উমরী বা আজীবন দান ও রুকবা দানের বিবরণ - সাওয়াবের আশায় দান করার বিধান

৯৩৮। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন হেবা বা দান করে সেই তার উপর বেশী হকদার, যতক্ষণ তার কোন বিনিময় প্রাপ্ত না হয়। -হাকিম একে সহীহ বলেছেন; মাহফূয় (সংরক্ষিত) সানাদ হিসেবে এটা ইবনু ’উমার হতে, উমার (রাঃ)-এর কথা বর্ণিত।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-, عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ وَهَبَ هِبَةً, فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا, مَا لَمْ يُثَبْ عَلَيْهَا». رَوَاهُ الْحَاكِمُ وَصَحَّحَهُ, وَالْمَحْفُوظُ مِنْ رِوَايَةِ ابْنِ عُمَرَ, عَنْ عُمَرَ قَوْلُهُ

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لا يصح رفعه. رواه الحاكم (2/ 52)، مرفوعا وقال: «هذا الحديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يخرجاه، إلا أن يكون الحمل فيه على شيخنا». قلت: وشيخه هو: إسحاق بن محمد بن خالد الهاشمي، قال الحافظ في «اللسان» (1/ 417): «الحمل فيه عليه بلا ريب، وهذا الكلام معروف من قول عمر غير مرفوع». وأما الموقوف، فرواه مالك في «الموطأ» (2/ 754 / 42) بسند صحيح، ولفظه: «من وهب هبة لصلة رحم، أو على وجه صدقة، فإنه لا يرجع فيها. ومن وهب هبة يرى أنه إنما أراد بها الثواب، فهو على هبته، يرجع فيها إذا لم يُرْضَ منها

وعن ابن عمر -رضي الله عنهما-, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من وهب هبة, فهو احق بها, ما لم يثب عليها». رواه الحاكم وصححه, والمحفوظ من رواية ابن عمر, عن عمر قوله - لا يصح رفعه. رواه الحاكم (2/ 52)، مرفوعا وقال: «هذا الحديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يخرجاه، الا ان يكون الحمل فيه على شيخنا». قلت: وشيخه هو: اسحاق بن محمد بن خالد الهاشمي، قال الحافظ في «اللسان» (1/ 417): «الحمل فيه عليه بلا ريب، وهذا الكلام معروف من قول عمر غير مرفوع». واما الموقوف، فرواه مالك في «الموطا» (2/ 754 / 42) بسند صحيح، ولفظه: «من وهب هبة لصلة رحم، او على وجه صدقة، فانه لا يرجع فيها. ومن وهب هبة يرى انه انما اراد بها الثواب، فهو على هبته، يرجع فيها اذا لم يرض منها

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৯. পড়ে থাকা বস্তুর বিধি নিয়ম - পড়ে থাকা সামান্য বস্তু নেওয়া জায়েয আর এটা পড়ে থাকা বস্তুর বিধানে ধর্তব্য নয়

৯৩৯। আনাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম রাস্তায় পড়ে থাকা খেজুরের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন, তখন তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, আমার যদি আশঙ্কা না হত যে এটি সাদাকার খেজুর তাহলে আমি এটা খেতাম।[1]

عَنْ أَنَسٍ - رضي الله عنه - قَالَ: مَرَّ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - بِتَمْرَةٍ فِي الطَّرِيقِ، فَقَالَ: «لَوْلَا أَنِّي أَخَافُ أَنْ تَكُونَ مِنَ الصَّدَقَةِ لَأَكَلْتُهَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2431)، ومسلم (1071) والسياق للبخاري

عن انس - رضي الله عنه - قال: مر النبي - صلى الله عليه وسلم - بتمرة في الطريق، فقال: «لولا اني اخاف ان تكون من الصدقة لاكلتها». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2431)، ومسلم (1071) والسياق للبخاري

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৯. পড়ে থাকা বস্তুর বিধি নিয়ম - কুড়িয়ে পাওয়া বস্তুর বিধানাবলী

৯৪০। যায়দ ইবনু খালিদ জুহানী (রাঃ) থেকে বৰ্ণিত। তিনি বলেছেন, কোন ব্যক্তি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর নিকটে এসে পতিত (হারানো) বস্তু সম্বন্ধে জিজ্ঞেস করলেন। তিনি বললেন, তুমি তার থলে ও বাঁধন চিনে রাখ তার পর তা এক বছর ধরে ঘোষণা দিতে থাকো, যদি মালিক এসে যায় ভাল, নচেৎ তুমি তাকে ব্যবহারে নিতে পারবে। লোকটি বলল: ’হারানো ছাগল পাওয়া গেলে?’ তিনি বললেন, ’সেটি তোমার হবে, নাহলে তোমার ভাইয়ের, না হলে বাঘের’। লোকটি বলল, হারানো উটের কি হবে? নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, ’উট নিয়ে তোমার কী হয়েছে? তার তো আছে পানির মশক ও শক্ত পা। পানির নিকট যেতে পারে এবং গাছ খেতে পারে। কাজেই তাকে ছেড়ে দাও, এমন সময়ের মধ্যে তার মালিক তাকে পেয়ে যাবে।[1]

وَعَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فَسَأَلَهُ عَنِ اللُّقَطَةِ فَقَالَ: «اعْرِفْ عِفَاصَهَا وَوِكَاءَهَا, ثُمَّ عَرِّفْهَا سَنَةً, فَإِنْ جَاءَ صَاحِبُهَا وَإِلَّا فَشَأْنُكَ بِهَا
قَالَ: فَضَالَّةُ الْغَنَمِ
قَالَ: هِيَ لَكَ, أَوْ لِأَخِيكَ, أَوْ لِلذِّئْبِ
قَالَ: فَضَالَّةُ الْإِبِلِ
قَالَ: مَا لَكَ وَلَهَا مَعَهَا سِقَاؤُهَا وَحِذَاؤُهَا, تَرِدُ الْمَاءَ, وَتَأْكُلُ الشَّجَرَ, حَتَّى يَلْقَاهَا رَبُّهَا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (91)، ومسلم (1722) و «عفاصها «بكسر المهملة، وتخفيف الفاء، الوعاء تكون فيه النفقة. و «وكاءها «: الخيط يشد به العفاص. و «سقاؤها «: جوفها. و «حذاؤها «: خُفُّها. وفي هذا تنبيه من النبي -صلى الله عليه وسلم- إلى أن الإبل غير محتاجة إلى الحفظ بما رَكَّبَ الله في طباعها من الجلادة على العطش وتناول الماء بغير تعب لطول عنقها، وقوتها على المشي

وعن زيد بن خالد الجهني - رضي الله عنه - قال: جاء رجل الى النبي - صلى الله عليه وسلم - فساله عن اللقطة فقال: «اعرف عفاصها ووكاءها, ثم عرفها سنة, فان جاء صاحبها والا فشانك بها قال: فضالة الغنم قال: هي لك, او لاخيك, او للذىب قال: فضالة الابل قال: ما لك ولها معها سقاوها وحذاوها, ترد الماء, وتاكل الشجر, حتى يلقاها ربها. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (91)، ومسلم (1722) و «عفاصها «بكسر المهملة، وتخفيف الفاء، الوعاء تكون فيه النفقة. و «وكاءها «: الخيط يشد به العفاص. و «سقاوها «: جوفها. و «حذاوها «: خفها. وفي هذا تنبيه من النبي -صلى الله عليه وسلم- الى ان الابل غير محتاجة الى الحفظ بما ركب الله في طباعها من الجلادة على العطش وتناول الماء بغير تعب لطول عنقها، وقوتها على المشي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৯. পড়ে থাকা বস্তুর বিধি নিয়ম - কুড়িয়ে পাওয়া বস্তুর বিধানাবলী

৯৪১। যায়দ বিন খালিদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি হারানো পশুকে আশ্রয় দেবে প্রচার না করা পর্যন্ত সে পথভ্রষ্ট (অন্যায়কারী) বলে গণ্য হবে।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ آوَى ضَالَّةً فَهُوَ ضَالٌّ, مَا لَمْ يُعَرِّفْهَا». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

وعنه قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «من اوى ضالة فهو ضال, ما لم يعرفها». رواه مسلم -

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৯. পড়ে থাকা বস্তুর বিধি নিয়ম - হারানো বস্তু পেলে কাউকে সাক্ষী করে রাখার বৈধতা

৯৪২। ইয়ায বিন হিমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন হারানো বস্তু পাবে সে যেন নির্ভরযোগ্য দু’জন ন্যায়পরায়ণ ব্যক্তিকে সাক্ষী করে রাখে এবং ঐ বস্তুর পাত্র ও তার বন্ধন (সঠিক পরিচয় লাভের নিদর্শনগুলো) তার স্বীয় অবস্থায় ঠিক রাখে, অতঃপর তাকে গোপন বা গায়েব করে না রাখে। তারপর যদি ঐ বস্তুর মালিক এসে যায় তাহলে সেই প্রকৃত হকদার হবে, অন্যথায় তা আল্লাহর মাল হিসেবে যাকে তিনি দেন তারই হবে। --ইবনু খুযাইমাহ, ইবনু জারূদ ও ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ وَجَدَ لُقَطَةً فَلْيُشْهِدْ ذَوَيْ عَدْلٍ, وَلْيَحْفَظْ عِفَاصَهَا وَوِكَاءَهَا, ثُمَّ لَا يَكْتُمْ, وَلَا يُغَيِّبْ, فَإِنْ جَاءَ رَبُّهَا فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا, وَإِلَّا فَهُوَ مَالُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَنْ يَشَاءُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا التِّرْمِذِيَّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ, وَابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه أحمد (4/ 261 - 262 و 266 - 267)، وأبو داود (1709)، والنسائي في «الكبرى «(3/ 418)، وابن ماجه (2505)، وابن حبان (1169 موارد)، وابن الجارود (671)

وعن عياض بن حمار - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «من وجد لقطة فليشهد ذوي عدل, وليحفظ عفاصها ووكاءها, ثم لا يكتم, ولا يغيب, فان جاء ربها فهو احق بها, والا فهو مال الله يوتيه من يشاء». رواه احمد, والاربعة الا الترمذي, وصححه ابن خزيمة, وابن الجارود, وابن حبان - صحيح. رواه احمد (4/ 261 - 262 و 266 - 267)، وابو داود (1709)، والنساىي في «الكبرى «(3/ 418)، وابن ماجه (2505)، وابن حبان (1169 موارد)، وابن الجارود (671)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৯. পড়ে থাকা বস্তুর বিধি নিয়ম - হজ্ব সম্পাদনকারীর পড়ে থাকা কোন বস্তু উঠানোর বিধান

৯৪৩। ’আবদুর রহমান বিন উসমান তাইমী (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হাজ্ব পালনকারীদের পড়ে থাকা কোন বস্তু উঠাতে নিষেধ করেছেন।[1]

وَعَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عُثْمَانَ التَّيْمِيِّ - رضي الله عنه، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - نَهَى عَنْ لُقَطَةِ الْحَاجِّ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1724)

وعن عبد الرحمن بن عثمان التيمي - رضي الله عنه، ان النبي - صلى الله عليه وسلم - نهى عن لقطة الحاج. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1724)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ১৯. পড়ে থাকা বস্তুর বিধি নিয়ম - চুক্তিতে আবদ্ধ ব্যক্তির পড়ে থাকা কোন মাল উঠানোর বিধান

৯৪৪। মিকদাদ বিন মা’দীকারিব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, সাবধান! তীক্ষ্ম বড় দাঁতধারী হিংস্র পশু, গৃহপালিত গাধা আর যিম্মীদের পড়ে থাকা কোন মাল তোমাদের জন্য হালাল নয়। তবে যদি যিম্মী মালিক সেটাকে নিস্প্রয়োজন মনে করে তাহলে তা কুড়িয়ে নেয়া যাবে।[1]

وَعَنْ الْمِقْدَامِ بْنِ مَعْدِي كَرِبَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَلَا لَا يَحِلُّ ذُو نَابٍ مِنَ السِّبَاعِ, وَلَا الْحِمَارُ الْأَهْلِيُّ, وَلَا اللُّقَطَةُ مِنْ مَالِ مُعَاهَدٍ, إِلَّا أَنْ يَسْتَغْنِيَ عَنْهَا». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ

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رواه أبو داود (3804)

وعن المقدام بن معدي كرب - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الا لا يحل ذو ناب من السباع, ولا الحمار الاهلي, ولا اللقطة من مال معاهد, الا ان يستغني عنها». رواه ابو داود - رواه ابو داود (3804)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - আসাবাদের পূর্বে আসহাবুল ফারায়েয মীরাস পাবে

৯৪৫। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, সুনির্দিষ্ট অংশের হকদারদের মীরাস পৌঁছে দাও। অতঃপর যা বাকী থাকবে তা (মৃতের) নিকটতম পুরুষের জন্য।[1]

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَلْحِقُوا الْفَرَائِضَ بِأَهْلِهَا, فَمَا بَقِيَ فَهُوَ لِأَوْلَى رَجُلٍ ذَكَرٍ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (6732)، ومسلم (1615)

عن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الحقوا الفراىض باهلها, فما بقي فهو لاولى رجل ذكر». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (6732)، ومسلم (1615)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - মুসলিম এবং কাফেরের মাঝে উত্তরাধিকার সূত্র নেই

৯৪৬। উসামাহ বিন যায়ীদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, মুসলিম কাফেরের উত্তরাধিকারী হয় না, আর কাফিরও মুসলিমের উত্তরাধিকারী হয় না।[1]

وَعَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا يَرِثُ الْمُسْلِمُ الْكَافِرَ, وَلَا يَرِثُ الْكَافِرُ الْمُسْلِمَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (6764)، ومسلم (1614) رواه البخاري (4283) بلفظ «المؤمن» بدل «المسلم» في الموضعين

وعن اسامة بن زيد - رضي الله عنهما- ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا يرث المسلم الكافر, ولا يرث الكافر المسلم». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (6764)، ومسلم (1614) رواه البخاري (4283) بلفظ «المومن» بدل «المسلم» في الموضعين

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - বোনেরা মেয়ের সাথে আসাবাহ হয়

৯৪৭। ইবনু মাস’উদ (রাঃ) হতে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ফয়সলা করেছেন, কন্যা পাবে অর্ধাংশ আর পৌত্রী পাবে ষষ্ঠাংশ। এভাবে দু’তৃতীয়াংশ পূর্ণ হবে। বাকী এক তৃতীয়াংশ পাবে বোন।[1]

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - فِي بِنْتٍ, وَبِنْتِ اِبْنٍ, وَأُخْتٍ - قَضَى النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «لِلِابْنَةِ النِّصْفَ, وَلِابْنَةِ الِابْنِ السُّدُسَ - تَكْمِلَةَ الثُّلُثَيْنِ- وَمَا بَقِيَ فَلِلْأُخْتِ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (6736) من طريق هزيل بن شرحبيل قال: سئل أبو موسى؛ عن ابنة. وابن ابن. وأخت؟ فقال: للابنة النصف. وللأخت النصف. وائت ابن مسعود فسيتابعني، فسئل ابن مسعود، وأخبر بقول أبي موسى؟ فقال: لقد ضللت إذًا وما أنا من المهتدين، أقضي فيها بما قضى النبي -صلى الله عليه وسلم-: … فذكره. وزاد: فأتينا أبا موسى، فأخبرناه بقول ابن مسعود. فقال: لا تسألوني ما دام هذا الحبر فيكم

وعن ابن مسعود - رضي الله عنه - في بنت, وبنت ابن, واخت - قضى النبي - صلى الله عليه وسلم: «للابنة النصف, ولابنة الابن السدس - تكملة الثلثين- وما بقي فللاخت». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (6736) من طريق هزيل بن شرحبيل قال: سىل ابو موسى؛ عن ابنة. وابن ابن. واخت؟ فقال: للابنة النصف. وللاخت النصف. واىت ابن مسعود فسيتابعني، فسىل ابن مسعود، واخبر بقول ابي موسى؟ فقال: لقد ضللت اذا وما انا من المهتدين، اقضي فيها بما قضى النبي -صلى الله عليه وسلم-: … فذكره. وزاد: فاتينا ابا موسى، فاخبرناه بقول ابن مسعود. فقال: لا تسالوني ما دام هذا الحبر فيكم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - দুই ভিন্ন ধর্মের লোকদের মাঝে উত্তরাধিকার সূত্র নেই

৯৪৮। ’আবদুল্লাহ বিন ’আমর (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, দু’টি ভিন্ন ধর্মাবলম্বী ব্যক্তিরা একে অপরের ওয়ারিস হবে না। -ইমাম হাকিম (রহঃ) উসামাহ (রাঃ)-এর বর্ণিত শব্দ বিন্যাসে এবং নাসায়ী (রহঃ) উসামাহ (রাঃ)-এর হাদীসকে অত্র (’আবদুল্লাহ-এর) হাদীসের শব্দে বর্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَتَوَارَثُ أَهْلُ مِلَّتَيْنِ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا التِّرْمِذِيَّ
وَأَخْرَجَهُ الْحَاكِمُ بِلَفْظِ أُسَامَةَ
وَرَوَى النَّسَائِيُّ حَدِيثَ أُسَامَةَ بِهَذَا اللَّفْظِ

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حسن. رواه أحمد (2/ 178 و 195)، وأبو داود (2911)، والنسائي في «الكبرى «(4/ 82)، وابن ماجه (2731) وزادوا جميعًا إلا ابن ماجه: «شتى «. وزاد ابن الجارود في روايته (967): «والمرأة ترث من دية زوجها وماله، وهو يرث من ديتها ومالها ما لم يقتل أحدهما صاحبه، فإن قتل أحدهما صاحبه لم يرث من ديته وماله شيئا، وإن قتل أحدهما صاحبه خطأ، ورث من ماله، ولم يرث من ديته». وسندها حسن أيضًا

وعن عبد الله بن عمرو - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يتوارث اهل ملتين». رواه احمد, والاربعة الا الترمذي واخرجه الحاكم بلفظ اسامة وروى النساىي حديث اسامة بهذا اللفظ - حسن. رواه احمد (2/ 178 و 195)، وابو داود (2911)، والنساىي في «الكبرى «(4/ 82)، وابن ماجه (2731) وزادوا جميعا الا ابن ماجه: «شتى «. وزاد ابن الجارود في روايته (967): «والمراة ترث من دية زوجها وماله، وهو يرث من ديتها ومالها ما لم يقتل احدهما صاحبه، فان قتل احدهما صاحبه لم يرث من ديته وماله شيىا، وان قتل احدهما صاحبه خطا، ورث من ماله، ولم يرث من ديته». وسندها حسن ايضا

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - দাদার মীরাছ (উত্তরাধিকার সূত্রে প্রাপ্ত সম্পদ)

৯৪৯। ’ইমরান বিন হুসাইন (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কোন লোক নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর নিকট এসে বললো, আমার ছেলের ছেলে নাতির মৃত্যু হয়েছে, তার মিরাস থেকে আমার জন্য কি হক রয়েছে? তিনি বললেন— এক ষষ্ঠাংশ। লোকটি ফিরে গেলে আবার তাকে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ডেকে বললেন, তোমার জন্য আর এক ষষ্ঠাংশ। লোকটি ফিরলে পুনরায় তাকে ডেকে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলে দিলেন এর পরবর্তী ষষ্ঠাংশ তোমার খাদ্যের জন্য (আসবাবরূপে) প্রাপ্ত। —তিরমিযী একে সহীহ বলেছেন, এটা ’ইমরান থেকে হাসান বাসরীর বর্ণনায় রয়েছে। এ সম্বন্ধে বলা হয়েছে- হাসান বাসরী ’ইমরান (রাঃ) থেকে শ্রবণ করেননি।[1]

وَعَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَينٍ قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: إِنَّ ابْنَ ابْنِي مَاتَ, فَمَا لِي مِنْ مِيرَاثِهِ فَقَالَ: «لَكَ السُّدُسُ» فَلَمَّا وَلَّى دَعَاهُ، فَقَالَ: «لَكَ سُدُسٌ آخَرُ» فَلَمَّا وَلَّى دَعَاهُ. فَقَالَ: «إِنَّ السُّدُسَ الْآخَرَ طُعْمَةٌ». رَوَاهُ أَحْمَدُ وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ

وَهُوَ مِنْ رِوَايَةِ الْحَسَنِ الْبَصْرِيِّ عَنْ عِمْرَانَ, وَقِيلَ: إِنَّهُ لَمْ يَسْمَعْ مِنْهُ


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ضعيف. رواه أحمد (4/ 428 - 429)، وأبو داود (2896)، والنسائي في «الكبرى» (4/ 73)، والترمذي (2099) من طريق قتادة، عن الحسن، عن عمران، به. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». قلت: كيف وقتادة والحسن مُدَلِّسان؟! وانظر التعليق التالي. «تنبيه»: عزو الحافظ الحديث للأربعة وَهْمٌ إذ لم يروه ابن ماجه
ممن جزم بعدم سماعه أبو حاتم، فقال في «الجرح والتعديل» (1/ 41): «لم يصح له السماع من جندب، ولا من معقل بن يسار، ولا عن عمران بن حصين، ولا من عقبة بن عامر، ولا من أبي هريرة

وعن عمران بن حصين قال: جاء رجل الى النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: ان ابن ابني مات, فما لي من ميراثه فقال: «لك السدس» فلما ولى دعاه، فقال: «لك سدس اخر» فلما ولى دعاه. فقال: «ان السدس الاخر طعمة». رواه احمد والاربعة, وصححه الترمذي وهو من رواية الحسن البصري عن عمران, وقيل: انه لم يسمع منه - ضعيف. رواه احمد (4/ 428 - 429)، وابو داود (2896)، والنساىي في «الكبرى» (4/ 73)، والترمذي (2099) من طريق قتادة، عن الحسن، عن عمران، به. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». قلت: كيف وقتادة والحسن مدلسان؟! وانظر التعليق التالي. «تنبيه»: عزو الحافظ الحديث للاربعة وهم اذ لم يروه ابن ماجه ممن جزم بعدم سماعه ابو حاتم، فقال في «الجرح والتعديل» (1/ 41): «لم يصح له السماع من جندب، ولا من معقل بن يسار، ولا عن عمران بن حصين، ولا من عقبة بن عامر، ولا من ابي هريرة

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - দাদীর মীরাছ

৯৫০। ইবনু বুরাইদাহ থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মৃতের মাতা না থাকার অবস্থায় সম্পত্তি থেকে দাদীর জন্য এক ষষ্ঠাংশ দিয়েছেন। -ইবনু হিব্বান, ইবনু খুযাইমাহ ও ইবনু জারূদ সহীহ বলেছেন আর ইবনু আদী হাদীসটিকে শক্তিশালী বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ, عَنْ أَبِيهِ; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - جَعَلَ لِلْجَدَّةِ السُّدُسَ, إِذَا لَمْ يَكُنْ دُونَهَا أُمٌّ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ, وَقَوَّاهُ ابْنُ عَدِيٍّ

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حسن. رواه أبو داود (2895)، والنسائي في «الكبرى» (4/ 73)، وابن الجارود (960)، وابن عدي في ط «الكامل» (4637) وفي سنده أبو المنيب؛ عبيد الله العتكي مختلف فيه. وقال ابن عدي: «ولأبي المنيب هذا أحاديث غير ما ذكرت، وهو عندي لا بأس به

وعن ابن بريدة, عن ابيه; ان النبي - صلى الله عليه وسلم - جعل للجدة السدس, اذا لم يكن دونها ام. رواه ابو داود, والنساىي, وصححه ابن خزيمة, وابن الجارود, وقواه ابن عدي - حسن. رواه ابو داود (2895)، والنساىي في «الكبرى» (4/ 73)، وابن الجارود (960)، وابن عدي في ط «الكامل» (4637) وفي سنده ابو المنيب؛ عبيد الله العتكي مختلف فيه. وقال ابن عدي: «ولابي المنيب هذا احاديث غير ما ذكرت، وهو عندي لا باس به

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - রক্ত সম্পর্কীয়দের মীরাছ

৯৫১। মিকদাদ ইবনু মা’দীকারিব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- যার কোন ওয়ারিস নেই, তার মামা তার ওয়ারিস হবে। -আবূ যুর’আতার রাযী হাসান বলেছেন এবং হাকিম ও ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ الْمِقْدَامِ بْنِ مَعْدِي كَرِبَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الْخَالُ وَارِثُ مَنْ لَا وَارِثَ لَهُ». أَخْرَجَهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ سِوَى التِّرْمِذِيِّ, وَحَسَّنَهُ أَبُو زُرْعَةَ الرَّازِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (4/ 131 و 133)، وأبو داود (2899 و 2900)، والنسائي في «الكبرى» (4/ 76 - 77)، وابن ماجه (2738)، وابن حبان (1225 و 1226)، والحاكم (4/ 344) ولفظه: «من ترك مالًا فلأهله، ومن ترك كلًا فإلى الله ورسوله. وربما قال: فإلينا. وأنا وارث من لا وارث له، أعقل له وأرثه، والخال وارث من لا وارث له، يعقل عنه ويرثه

وعن المقدام بن معدي كرب - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «الخال وارث من لا وارث له». اخرجه احمد, والاربعة سوى الترمذي, وحسنه ابو زرعة الرازي, وصححه ابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه احمد (4/ 131 و 133)، وابو داود (2899 و 2900)، والنساىي في «الكبرى» (4/ 76 - 77)، وابن ماجه (2738)، وابن حبان (1225 و 1226)، والحاكم (4/ 344) ولفظه: «من ترك مالا فلاهله، ومن ترك كلا فالى الله ورسوله. وربما قال: فالينا. وانا وارث من لا وارث له، اعقل له وارثه، والخال وارث من لا وارث له، يعقل عنه ويرثه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - রক্ত সম্পর্কীয়দের মীরাছ

৯৫২। আবূ উমামাহ ইবনু সাহল (রহঃ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, ’উমার (রাঃ) আবূ উবায়দাহ (রাঃ)-কে লিখে জানিয়েছিলেন যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যার কোন অভিভাবক নেই আল্লাহ ও তাঁর রাসূলই তার অভিভাবক এবং যার কোন ওয়ারিস নেই মামাই তার ওয়ারিস। -তিরমিযী একে হাসান বলেছেন এবং ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلٍ قَالَ: كَتَبَ مَعِي عُمَرُ إِلَى أَبِي عُبَيْدَةَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ-; أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «اللَّهُ وَرَسُولُهُ مَوْلَى مَنْ لَا مَوْلَى لَهُ, وَالْخَالُ وَارِثُ مَنْ لَا وَارِثَ لَهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ سِوَى أَبِي دَاوُدَ, وَحَسَّنَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه أحمد (1/ 28 و 46)، والنسائي في «الكبرى» (4/ 76)، والترمذي (2103)، وابن ماجه (2737)، وابن حبان (1227) وقال الترمذي: «حسن صحيح». قلت: حسن باعتبار سنده عندهم، صحيح بشاهده السابق، وله شاهد آخر عن عائشة رضي الله عنها

وعن ابي امامة بن سهل قال: كتب معي عمر الى ابي عبيدة - رضي الله عنهم-; ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «الله ورسوله مولى من لا مولى له, والخال وارث من لا وارث له». رواه احمد, والاربعة سوى ابي داود, وحسنه الترمذي, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه احمد (1/ 28 و 46)، والنساىي في «الكبرى» (4/ 76)، والترمذي (2103)، وابن ماجه (2737)، وابن حبان (1227) وقال الترمذي: «حسن صحيح». قلت: حسن باعتبار سنده عندهم، صحيح بشاهده السابق، وله شاهد اخر عن عاىشة رضي الله عنها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - বাচ্চার মীরাস

৯৫৩। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেছেন, ভূমিষ্ঠ সন্তান যদি শব্দ করে চীৎকার দেয় তাহলে তাকে ওয়ারিস বলে গণ্য করতে হবে। -ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِذَا اسْتَهَلَّ الْمَوْلُودُ وُرِّثَ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح بطرقه وشواهده. رواه الترمذي (1032)، وابن ماجه (2750) و (2751)، وابن حبان (1223) ولفظه: «إذا استهل الصبي، صلي عليه، وورث». وفي لفظ آخر: «لا يرث الصبي حتى يستهل صارخًا». قلت: وللحديث طريق وشواهد - يصح بها - مذكورة «بالأصل» لكن يجدر هنا التنبيه على أن: اللفظ الذي ذكره الحافظ ليس لفظ حديث جابر، وإنما هو لفظ حديث أبي هريرة. هذا أولًا. وثانيًا: حديث جابر لم يروه أبو داود، وإنما روى حديث أبي هريرة

وعن جابر - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «اذا استهل المولود ورث». رواه ابو داود, وصححه ابن حبان - صحيح بطرقه وشواهده. رواه الترمذي (1032)، وابن ماجه (2750) و (2751)، وابن حبان (1223) ولفظه: «اذا استهل الصبي، صلي عليه، وورث». وفي لفظ اخر: «لا يرث الصبي حتى يستهل صارخا». قلت: وللحديث طريق وشواهد - يصح بها - مذكورة «بالاصل» لكن يجدر هنا التنبيه على ان: اللفظ الذي ذكره الحافظ ليس لفظ حديث جابر، وانما هو لفظ حديث ابي هريرة. هذا اولا. وثانيا: حديث جابر لم يروه ابو داود، وانما روى حديث ابي هريرة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - হত্যাকারীকে উত্তরাধিকারী করার বিধান

৯৫৪। ’আমর বিন শু’আইব হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে, তিনি তাঁর দাদা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, হত্যাকারীর জন্য নিহত ব্যক্তির পরিত্যক্ত সম্পত্তিতে কোন অধিকার নেই। -হাদীসটিকে ইবনু ’আবদিল বার শক্তিশালী বলেছেন, নাসায়ী ইল্লাত বা ত্রুটিযুক্ত হাদীস বলেছেন, কিন্তু হাদীসটির ’আমার এর উপর মাওকুফ হওয়াটাই সঠিক।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَيْسَ لِلْقَاتِلِ مِنَ الْمِيرَاثِ شَيْءٌ». رَوَاهُ النَّسَائِيُّ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ, وَقَوَّاهُ ابْنُ عَبْدِ الْبَرِّ, وَأَعَلَّهُ النَّسَائِيُّ, وَالصَّوَابُ: وَقْفُهُ عَلَى عُمَرَ

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صححه شيخنا - حفظه الله - في «الإرواء رقم (1671)

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ليس للقاتل من الميراث شيء». رواه النساىي, والدارقطني, وقواه ابن عبد البر, واعله النساىي, والصواب: وقفه على عمر - صححه شيخنا - حفظه الله - في «الارواء رقم (1671)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - ওয়ালা সূত্রে উত্তরাধিকারী

৯৫৫৷ ’উমার বিন খাত্তাব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি, মৃতের পিতা ও পুত্র যা অধিকার করবে তা আসাবা সূত্রেই পাবে, সে যেই হোন না কেন। -ইবনুল মাদানী ও ইবনু ’আবদিল বার সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ - رضي الله عنه - قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم يَقُولُ: «مَا أَحْرَزَ الْوَالِدُ أَوْ الْوَلَدُ فَهُوَ لِعَصَبَتِهِ مَنْ كَانَ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ الْمَدِينِيِّ, وَابْنُ عَبْدِ الْبَرِّ

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حسن. رواه أبو داود (2917)، والنسائي في «الكبرى» (4/ 75)، وابن ماجه (2732) من طريق عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، قال: تزوج رئاب بن حذيفة بن سعيد بن سهم، أم وائل؛ بنت معمر الجمحية، فولدت له ثلاثة. فتوفيت أمهم، فورثها بنوها، رباعا وولاء مواليها. فخرج بهم عمرو بن العاص إلى الشام. فماتوا في طاعون عَمْواس، فورثهم عمرو، وكان عصبتهم. فلما رجع عمرو بن العاص، جاء بنو معمر يخاصمونه في ولاء أختهم، إلى عمر. فقال عمر: أقضي بينكم بما سمعت من رسول الله -صلى الله عليه وسلم-. سمعته يقول: … فذكره. وزاد: قال: فقضى لنا به، وكتب لنا به كتابا، فيه شهادة عبد الرحمن بن عوف، وزيد بن ثابت، وآخر. حتى إذا استخلف عبد الملك بن مروان، توفي مولًى لها. وترك ألفي دينار. فبلغني أن ذلك القضاء قد غُيِّر. فخاصموا إلى هشام بن إسماعيل، فرفَعَنا إلى عبد الملك، فأتيناه بكتاب عمر. فقال: إن كنت لأرى أن هذا من القضاء الذي لا يشك فيه، وما كنت أرى أن أمر أهل المدينة بلغ هذا؛ أن يشكوا في هذا القضاء. فقضى لنا فيه. فلم نزل فيه بعدُ. واقتصر النسائي على المرفوع فقط. وقال ابن القيم في «تهذيب السنن» (4/ 184): قال ابن عبد البر: هذا حديث حسن صحيح غريب

وعن عمر بن الخطاب - رضي الله عنه - قال: سمعت رسول الله - صلى الله عليه وسلم يقول: «ما احرز الوالد او الولد فهو لعصبته من كان». رواه ابو داود, والنساىي, وابن ماجه, وصححه ابن المديني, وابن عبد البر - حسن. رواه ابو داود (2917)، والنساىي في «الكبرى» (4/ 75)، وابن ماجه (2732) من طريق عمرو بن شعيب، عن ابيه، عن جده، قال: تزوج رىاب بن حذيفة بن سعيد بن سهم، ام واىل؛ بنت معمر الجمحية، فولدت له ثلاثة. فتوفيت امهم، فورثها بنوها، رباعا وولاء مواليها. فخرج بهم عمرو بن العاص الى الشام. فماتوا في طاعون عمواس، فورثهم عمرو، وكان عصبتهم. فلما رجع عمرو بن العاص، جاء بنو معمر يخاصمونه في ولاء اختهم، الى عمر. فقال عمر: اقضي بينكم بما سمعت من رسول الله -صلى الله عليه وسلم-. سمعته يقول: … فذكره. وزاد: قال: فقضى لنا به، وكتب لنا به كتابا، فيه شهادة عبد الرحمن بن عوف، وزيد بن ثابت، واخر. حتى اذا استخلف عبد الملك بن مروان، توفي مولى لها. وترك الفي دينار. فبلغني ان ذلك القضاء قد غير. فخاصموا الى هشام بن اسماعيل، فرفعنا الى عبد الملك، فاتيناه بكتاب عمر. فقال: ان كنت لارى ان هذا من القضاء الذي لا يشك فيه، وما كنت ارى ان امر اهل المدينة بلغ هذا؛ ان يشكوا في هذا القضاء. فقضى لنا فيه. فلم نزل فيه بعد. واقتصر النساىي على المرفوع فقط. وقال ابن القيم في «تهذيب السنن» (4/ 184): قال ابن عبد البر: هذا حديث حسن صحيح غريب

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - ওয়ালার বিধানাবলী

৯৫৬। ’আবদুল্লাহ ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, দাসমুক্ত করার দ্বারা ’ওয়ালা’[1] নামে যে সম্পর্ক মুক্তকারী মুনিব ও দাসের মধ্যে স্থাপিত হয় তা বংশীয় সম্পর্কের ন্যায় (স্থায়ী)। সেটি বিক্রয় হয় না ও দানও করা যায় না। হাকিম শাফি’ঈ (রহঃ)-এর সূত্রে তিনি মুহাম্মাদ বিন হাসান থেকে, তিনি আবূ ইউসুফ হতে বর্ণনা করেছেন। হাদীসটিকে ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন; ইমাম বাইহাকী ত্রুটিযুক্ত বা দুর্বল বলেছেন।[2]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «الْوَلَاءُ لُحْمَةٌ كَلُحْمَةِ النَّسَبِ, لَا يُبَاعُ, وَلَا يُوهَبُ». رَوَاهُ الْحَاكِمُ: مِنْ طَرِيقِ الشَّافِعِيِّ, عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْحَسَنِ, عَنْ أَبِي يُوسُفَ، وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَأَعَلَّهُ الْبَيْهَقِيُّ


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رواه الشافعي (1232)، وابن حبان (4929)، والحاكم (4/ 231)، والبيهقي (10/ 292)، وقد وقع في إسناده اضطراب واختلاف، فضلًا عن مخالفة المتن الصحيح المتقدم برقم (1429)

وعن عبد الله بن عمر - رضي الله عنهما- قال: قال النبي - صلى الله عليه وسلم: «الولاء لحمة كلحمة النسب, لا يباع, ولا يوهب». رواه الحاكم: من طريق الشافعي, عن محمد بن الحسن, عن ابي يوسف، وصححه ابن حبان, واعله البيهقي - رواه الشافعي (1232)، وابن حبان (4929)، والحاكم (4/ 231)، والبيهقي (10/ 292)، وقد وقع في اسناده اضطراب واختلاف، فضلا عن مخالفة المتن الصحيح المتقدم برقم (1429)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২০. ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তির বণ্টন বিধি - ফারায়েযের ক্ষেত্রে যায়েদ বিন হারেছ (রাঃ) সাহাবীদের মাঝে সবচেয়ে বিজ্ঞ

৯৫৭। আবূ কিলাবাহ (রহঃ) হতে বর্ণিত, তিনি আনাস বিন মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যায়দ বিন সাবিত (রাঃ) তোমাদের মধ্যে ফারায়িয বা মৃতের পরিত্যক্ত সম্পত্তি বণ্টন বিষয়ে অধিক পারদর্শী। -তিরমিযী, ইবনু হিব্বান ও হাকিম। সহীহ বলেছেন। কিন্তু এর উপর মুরসাল হবার ত্রুটি আরোপ করা হয়েছে।[1]

وَعَنْ أَبِي قِلَابَةَ, عَنْ أَنَسٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَفْرَضُكُمْ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ». أَخْرَجَهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ سِوَى أَبِي دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ, وَأُعِلَّ بِالْإِرْسَالِ

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ضعيف. وتفصيل ذلك بالأصل

وعن ابي قلابة, عن انس قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «افرضكم زيد بن ثابت». اخرجه احمد, والاربعة سوى ابي داود, وصححه الترمذي, وابن حبان, والحاكم, واعل بالارسال - ضعيف. وتفصيل ذلك بالاصل

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আবূ কিলাবাহ্ (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - ওয়াসিয়্যাত দ্রুত সম্পন্ন করার ব্যাপারে উৎসাহ প্ৰদান

৯৫৮। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন মুসলিম ব্যক্তির এটা উচিত নয় যে, কোন ব্যাপারে কোন ওয়াসিয়্যাত করতে ইচ্ছা করার পর লিখিত আকারে কাছে না রেখে দু’দিন অতিবাহিত করে।[1]

عَنْ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-; أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَا حَقُّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ لَهُ شَيْءٌ يُرِيدُ أَنْ يُوصِيَ فِيهِ يَبِيتُ لَيْلَتَيْنِ إِلَّا وَوَصِيَّتُهُ مَكْتُوبَةٌ عِنْدَهُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2738)، ومسلم (1627)

عن ابن عمر - رضي الله عنهما-; ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «ما حق امرى مسلم له شيء يريد ان يوصي فيه يبيت ليلتين الا ووصيته مكتوبة عنده». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2738)، ومسلم (1627)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - কতটুকু পরিমাণ ওয়াসিয়্যাত করা হবে-এর বর্ণনা

৯৫৯। সা’দ বিন আবূ ওয়াক্কাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমি সম্পদশালী। আর একমাত্ৰ কন্যা ছাড়া কেউ আমার উত্তরাধিকারী নেই। তবে আমি কি আমার সম্পদের দু’ তৃতীয়াংশ সাদাকা করতে পারি? তিনি বললেন, না। আমি আবার নিবেদন করলাম, তাহলে অর্ধেক। তিনি বললেন, না। অতঃপর তিনি বললেন, এক তৃতীয়াংশ আর এক তৃতীয়াংশও বিরাট পরিমাণ অথবা অধিক। তোমার ওয়ারিসদের অভাবমুক্ত রেখে যাওয়া, তাদেরকে খালি হাতে পরমুখাপেক্ষী অবস্থায় রেখে যাওয়ার চেয়ে উত্তম।[1]

وَعَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! أَنَا ذُو مَالٍ, وَلَا يَرِثُنِي إِلَّا اِبْنَةٌ لِي وَاحِدَةٌ, أَفَأَتَصَدَّقُ بِثُلُثَيْ مَالِي قَالَ: «لَا»، قُلْتُ: أَفَأَتَصَدَّقُ بِشَطْرِهِ قَالَ: «لَا»، قُلْتُ: أَفَأَتَصَدَّقُ بِثُلُثِهِ قَالَ: «الثُّلُثُ, وَالثُّلُثُ كَثِيرٌ, إِنَّكَ أَنْ تَذَرَ وَرَثَتَكَ أَغْنِيَاءَ خَيْرٌ مِنْ أَنْ تَذَرَهُمْ عَالَةً يَتَكَفَّفُونَ النَّاسَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (1295)، ومسلم (1628)، عن سعد بن أبي وقاص، قال: عادني رسول الله -صلى الله عليه وسلم- في حجة الوداع من وجع أشفيت منه على الموت فقلت: يا رسول الله! بلغني ما ترى من الوجع، وأنا ذو مال … الحديث. وزادا: «ولست تنفق نفقة تبتغي بها وجه الله إلا أجرت بها. حتى اللقمة تجعلها في فيِّ امرأتك. قال: قلت: يا رسول الله! أُخَلَّف بعد أصحابي؟ قال: إنك لن تُخَلَّف، فتعمل عملًا تبتغي به وجه الله، إلا ازددت به درجة ورفعة. ولعلك تخلف حتى يُنْفَع بك أقوامٌ ويُضَرّ بك آخرون. اللهم أمض لأصحابي هجرتهم. ولا تردهم على أعقابهم، لكن البائس سعد بن خولة

وعن سعد بن ابي وقاص - رضي الله عنه - قال: قلت: يا رسول الله! انا ذو مال, ولا يرثني الا ابنة لي واحدة, افاتصدق بثلثي مالي قال: «لا»، قلت: افاتصدق بشطره قال: «لا»، قلت: افاتصدق بثلثه قال: «الثلث, والثلث كثير, انك ان تذر ورثتك اغنياء خير من ان تذرهم عالة يتكففون الناس». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (1295)، ومسلم (1628)، عن سعد بن ابي وقاص، قال: عادني رسول الله -صلى الله عليه وسلم- في حجة الوداع من وجع اشفيت منه على الموت فقلت: يا رسول الله! بلغني ما ترى من الوجع، وانا ذو مال … الحديث. وزادا: «ولست تنفق نفقة تبتغي بها وجه الله الا اجرت بها. حتى اللقمة تجعلها في في امراتك. قال: قلت: يا رسول الله! اخلف بعد اصحابي؟ قال: انك لن تخلف، فتعمل عملا تبتغي به وجه الله، الا ازددت به درجة ورفعة. ولعلك تخلف حتى ينفع بك اقوام ويضر بك اخرون. اللهم امض لاصحابي هجرتهم. ولا تردهم على اعقابهم، لكن الباىس سعد بن خولة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - মৃত ব্যক্তির পক্ষ থেকে সদাকাহ দান করা মুস্তাহাব

৯৬০। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, এক ব্যক্তি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে এসে বলল, হে আল্লাহর রাসূল! আমার মায়ের আকস্মিক মৃত্যু ঘটে, কিন্তু আমার বিশ্বাস তিনি (মৃত্যুর পূর্বে) কথা বলতে সক্ষম হলে কিছু সাদাকা করে যেতেন। এখন আমি তাঁর পক্ষ হতে সাদাকা করলে তিনি এর প্রতিফল পাবেন কি? তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, হ্যাঁ। শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا: أَنَّ رَجُلًا أَتَى النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ أُمِّي اُفْتُلِتَتْ نَفْسُهَا وَلَمْ تُوصِ, وَأَظُنُّهَا لَوْ تَكَلَّمَتْ تَصَدَّقَتْ, أَفَلَهَا أَجْرٌ إِنْ تَصَدَّقْتُ عَنْهَا قَالَ: «نَعَمْ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

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صحيح. رواه البخاري (1388)، ومسلم (1004) وزاد البخاري في رواية (2960: تصدق عنها

وعن عاىشة -رضي الله عنها: ان رجلا اتى النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: يا رسول الله! ان امي افتلتت نفسها ولم توص, واظنها لو تكلمت تصدقت, افلها اجر ان تصدقت عنها قال: «نعم». متفق عليه, واللفظ لمسلم - صحيح. رواه البخاري (1388)، ومسلم (1004) وزاد البخاري في رواية (2960: تصدق عنها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - ওয়ারিছের জন্য ওয়াসিয়্যাত করার বিধান

৯৬১। আবূ উমামাহ বাহিলী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছি যে, নিশ্চয় আল্লাহ তা’আলা প্ৰত্যেক প্রাপকের প্রাপ্য অংশ নির্দিষ্ট করে দিয়েছেন। অতএব কোন ওয়ারিসের অনুকূলে ওসিয়াত করা যাবে না। -আহমাদ ও তিরমিযী একে হাসান বলেছেন এবং ইবনু খুযাইমাহ ও ইবনু জারূদ একে শক্তিশালী বলে মন্তব্য করেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي أُمَامَةَ الْبَاهِلِيِّ - رضي الله عنه - سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ: «إِنَّ اللَّهَ قَدْ أَعْطَى كُلَّ ذِي حَقٍّ حَقَّهُ, فَلَا وَصِيَّةَ لِوَارِثٍ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَحَسَّنَهُ أَحْمَدُ وَالتِّرْمِذِيُّ, وَقَوَّاهُ ابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ

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صحيح. رواه أحمد (5 67)، وأبو داود (3565)، والترمذي (2120)، وابن ماجه (2713)، وابن الجارود (949)، واقتصر ابن الجارود وابن ماجه على ما ذكره الحافظ، وزاد الباقون: «[الولد للفراش، وللعاهر الحجر، وحسابهم على الله، ومن ادعى إلى غير أبيه، أو انتمى إلى غير مواليه، فعليه لعنة الله التابعة إلى يوم القيامة]. لا تنفق امرأة من بيت زوجها إلا بإذن زوجها. قيل: يا رسول الله! ولا الطعام؟. قال: ذلك أفضل أموالنا. ثم قال: العارية مؤداة. والمنحة مردودة. والدين مقضي. والزعيم غارم». والزيادة لأحمد والترمذي. قلت: وسنده حسن؛ إلا أن الجملة التي ذكرها الحافظ صحيحة لشواهدها الكثيرة. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح

وعن ابي امامة الباهلي - رضي الله عنه - سمعت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول: «ان الله قد اعطى كل ذي حق حقه, فلا وصية لوارث». رواه احمد, والاربعة الا النساىي, وحسنه احمد والترمذي, وقواه ابن خزيمة, وابن الجارود - صحيح. رواه احمد (5 67)، وابو داود (3565)، والترمذي (2120)، وابن ماجه (2713)، وابن الجارود (949)، واقتصر ابن الجارود وابن ماجه على ما ذكره الحافظ، وزاد الباقون: «[الولد للفراش، وللعاهر الحجر، وحسابهم على الله، ومن ادعى الى غير ابيه، او انتمى الى غير مواليه، فعليه لعنة الله التابعة الى يوم القيامة]. لا تنفق امراة من بيت زوجها الا باذن زوجها. قيل: يا رسول الله! ولا الطعام؟. قال: ذلك افضل اموالنا. ثم قال: العارية موداة. والمنحة مردودة. والدين مقضي. والزعيم غارم». والزيادة لاحمد والترمذي. قلت: وسنده حسن؛ الا ان الجملة التي ذكرها الحافظ صحيحة لشواهدها الكثيرة. وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - ওয়ারিছের জন্য ওয়াসিয়্যাত করার বিধান

৯৬২। দারাকুতনী ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে হাদীসটি বর্ণনা করেছেন—তার শেষে তিনি অতিরিক্ত বর্ণনা করেছেন যে, ’তবে যদি উত্তরাধিকারীগণ ইচ্ছা করে’। এর সানাদ হাসান।[1]

وَرَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ مِنْ حَدِيثِ اِبْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-, وَزَادَ فِي آخِرِهِ: «إِلَّا أَنْ يَشَاءَ الْوَرَثَةُ». وَإِسْنَادُهُ حَسَنٌ

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منكر. رواه الدارقطني (4/ 98 و 152) بسند ضعيف، بل أعله الحافظ نفسه في «التلخيص» (3/ 62 / رقم 1370) قلت: وسبب النكارة هذه الزيادة: «إلا أن يشاء الورثة» فقد ورد الحديث عن جماعة من الصحابة دون هذه الزيادة فلم ترد إلا بهذا الإسناد الضعيف. بل الحديث جاء عن ابن عباس نفسه بسند حسن. رواه الدارقطني (4/ 98) بدون هذه الزيادة، بل وحسَّن الحافظ نفسه إسناده من الطريق التي ليست فيها الزيادة فقال في «التلخيص» (3/ 62 / رقم 1369) أثناء تخريجه لحديث: «لا وصية لوارث». رواه الدارقطني من حديث ابن عباس بسند حسن. ومن راجع «التلخيص» عرف صواب صنيع الحافظ هناك، وأيضا عرف وهمه هنا رحمه الله

ورواه الدارقطني من حديث ابن عباس - رضي الله عنهما-, وزاد في اخره: «الا ان يشاء الورثة». واسناده حسن - منكر. رواه الدارقطني (4/ 98 و 152) بسند ضعيف، بل اعله الحافظ نفسه في «التلخيص» (3/ 62 / رقم 1370) قلت: وسبب النكارة هذه الزيادة: «الا ان يشاء الورثة» فقد ورد الحديث عن جماعة من الصحابة دون هذه الزيادة فلم ترد الا بهذا الاسناد الضعيف. بل الحديث جاء عن ابن عباس نفسه بسند حسن. رواه الدارقطني (4/ 98) بدون هذه الزيادة، بل وحسن الحافظ نفسه اسناده من الطريق التي ليست فيها الزيادة فقال في «التلخيص» (3/ 62 / رقم 1369) اثناء تخريجه لحديث: «لا وصية لوارث». رواه الدارقطني من حديث ابن عباس بسند حسن. ومن راجع «التلخيص» عرف صواب صنيع الحافظ هناك، وايضا عرف وهمه هنا رحمه الله

হাদিসের মানঃ মুনকার (সহীহ হাদীসের বিপরীত)
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পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - ওয়াসিয়্যাতের বিধানের মাধ্যমে আল্লাহ তায়ালার অনুগ্রহের বর্ণনা

৯৬৩। মু’আয বিন জাবাল (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, আল্লাহ তোমাদের সওয়াবকে বৃদ্ধি করার সুযোগ দেবার জন্যে তোমাদের মালের তৃতীয়াংশ তোমাদের মৃত্যুর সময় তোমাদেরকে দান করেছেন।[1]

وَعَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ - رضي الله عنه - قَالَ: «قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ اللَّهَ تَصَدَّقَ عَلَيْكُمْ بِثُلُثِ أَمْوَالِكُمْ عِنْدَ وَفَاتِكُمْ; زِيَادَةً فِي حَسَنَاتِكُمْ». رَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ

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حسن بشواهده. رواه الدارقطني (4/ 150)

وعن معاذ بن جبل - رضي الله عنه - قال: «قال النبي - صلى الله عليه وسلم: «ان الله تصدق عليكم بثلث اموالكم عند وفاتكم; زيادة في حسناتكم». رواه الدارقطني - حسن بشواهده. رواه الدارقطني (4/ 150)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - ওয়াসিয়্যাতের বিধানের মাধ্যমে আল্লাহ তায়ালার অনুগ্রহের বর্ণনা

৯৬৪। ইমাম আহমাদ ও বাযযার হাদীসটিকে আবূদ দারদা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন।[1]

وَأَخْرَجَهُ أَحْمَدُ, وَالْبَزَّارُ مِنْ حَدِيثِ أَبِي الدَّرْدَاءِ

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رواه أحمد (6/ 440 - 441)، والبزار (1382)

واخرجه احمد, والبزار من حديث ابي الدرداء - رواه احمد (6/ 440 - 441)، والبزار (1382)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবুদ দারদা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২১. অসিয়তের বিধান - ওয়াসিয়্যাতের বিধানের মাধ্যমে আল্লাহ তায়ালার অনুগ্রহের বর্ণনা

৯৬৫। আর ইবনু মাজাহ হাদীসটি আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন। এর সকল সূত্র দুর্বল কিন্তু এক সূত্র অন্য সূত্র (সানাদ) দ্বারা শক্তিশালী হচ্ছে। (আল্লাহ সবচেয়ে ভাল জানেন।)[1]

وَابْنُ مَاجَهْ: مِنْ حَدِيثِ أَبِي هُرَيْرَةَ
وَكُلُّهَا ضَعِيفَةٌ, لَكِنْ قَدْ يَقْوَى بَعْضُهَا بِبَعْضٍ. وَاللَّهُ أَعْلَمُ

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رواه ابن ماجه (27009)

وابن ماجه: من حديث ابي هريرة وكلها ضعيفة, لكن قد يقوى بعضها ببعض. والله اعلم - رواه ابن ماجه (27009)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৭ঃ ক্ৰয়-বিক্রয়ের বিধান (كتاب البيوع) 7/ Business Transactions

পরিচ্ছেদঃ ২২. কোন বস্তু আমানত রাখা - কোন বস্তু কারো সংরক্ষনের জিম্মায় রাখার বিধান

৯৬৬। ’আমর বিন শু’আইব হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা থেকে, তিনি তাঁর দাদা থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কেউ কারো কাছে ওয়াদিয়া রাখলে (তা ধ্বংস হলে) তার কোন ক্ষতিপূরণ নাই। —এর সানাদ য’ঈফ।[1]


وَبَابُ قَسْمِ الصَّدَقَاتِ تَقَدَّمَ فِي آخِرِ الزَّكَاةِ
وَبَابُ قَسْمِ الْفَيْءِ وَالْغَنِيمَةِ يَأْتِي عَقِبَ الْجِهَادِ إِنْ شَاءَ اللَّهُ تَعَالَى

হাফিয ইবনু হাজার (রহঃ) বলেছেন- সাদাকাহ বণ্টনের বর্ণনা যাকাতের বর্ণনার শেষে বৰ্ণিত হয়েছে; আর ফাই এবং গানীমাতের মালের বণ্টনের বর্ণনা জিহাদের বর্ণনার পরে বর্ণিত হবে ইনশাআল্লাহ তা’আলা।

عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: مَنْ أُودِعَ وَدِيعَةً, فَلَيْسَ عَلَيْهِ ضَمَانٌ - أَخْرَجَهُ ابْنُ مَاجَهْ, وَإِسْنَادُهُ ضَعِيفٌ

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رواه ابن ماجه (2401)

عن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: من اودع وديعة, فليس عليه ضمان - اخرجه ابن ماجه, واسناده ضعيف - رواه ابن ماجه (2401)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ শু‘আয়ব (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
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