পরিচ্ছেদঃ বিবাহ করার ব্যাপারে উৎসাহ প্ৰদান

৯৬৭. ’আবদুল্লাহ ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদেরকে বলেছেন, হে যুব সম্প্রদায়! যে ব্যক্তির সামর্থ্য আছে, সে যেন বিয়ে করে নেয়। কেননা বিয়ে চোখকে অবনত রাখে এবং লজ্জাস্থানকে সংযত করে। আর যার সামর্থ্য নেই, সে যেন সওম পালন করে। সওম তার প্রবৃত্তিকে দমন করে।[1]

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «يَا مَعْشَرَ الشَّبَابِ! مَنِ اسْتَطَاعَ مِنْكُمُ الْبَاءَةَ فَلْيَتَزَوَّجْ, فَإِنَّهُ أَغَضُّ لِلْبَصَرِ, وَأَحْصَنُ لِلْفَرْجِ, وَمَنْ لَمْ يَسْتَطِعْ فَعَلَيْهِ بِالصَّوْمِ; فَإِنَّهُ لَهُ وِجَاءٌ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (1905)، ومسلم (1400)

عن عبد الله بن مسعود - رضي الله عنه - قال لنا رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «يا معشر الشباب! من استطاع منكم الباءة فليتزوج, فانه اغض للبصر, واحصن للفرج, ومن لم يستطع فعليه بالصوم; فانه له وجاء». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (1905)، ومسلم (1400)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহ করা নাবী (ﷺ) এর একটি সুন্নাত

৯৬৮। আনাস বিন মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (একদা) আল্লাহর জন্য স্তূতি বর্ণনা ও প্রশংসা করলেন, আর বললেন- আমি তো সালাত আদায় করি, ঘুমাই, সওম পালন করি, সওম (নফল) রাখি কোন সময়ে ত্যাগও করি, মহিলাদের বিবাহ করি (এসবই আমার আদর্শভুক্ত)। ফলে যে ব্যক্তি আমার তরীকাহ (জীবনযাপন পদ্ধতি) হতে বিমুখ হবে সে আমার উম্মাতের মধ্যে নয়।[1]

وَعَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه - - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - حَمِدَ اللَّهَ, وَأَثْنَى عَلَيْهِ, وَقَالَ: «لَكِنِّي أَنَا أُصَلِّي وَأَنَامُ, وَأَصُومُ وَأُفْطِرُ, وَأَتَزَوَّجُ النِّسَاءَ, فَمَنْ رَغِبَ عَنْ سُنَّتِي فَلَيْسَ مِنِّي». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5063)، ومسلم (1401) عن أنس بن مالك - رضي الله عنه- يقول: جاء ثلاثة رهط إلى بيوت أزواج النبي -صلى الله عليه وسلم- يسألون عن عبادة النبي -صلى الله عليه وسلم-، فلما أخبروا كأنهم تقالوها. فقالوا: وأين نحن من النبي -صلى الله عليه وسلم-؟ قد غفر الله له ما تقدم من ذنبه وما تأخر. قال أحدهم: أما أنا فأنا أصلي الليل أبدًا. وقال آخر: أنا أصوم الدهر ولا أفطر. وقال آخر أنا أعتزل النساء ولا أتزوج أبدًا، فجاء رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فقال: أنتم الذين قلتم كذا وكذا؟ أما والله إني لأخشاكم لله وأتقاكم له، لكني أصوم ... الحديث. والسياق للبخاري

وعن انس بن مالك - رضي الله عنه - - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - حمد الله, واثنى عليه, وقال: «لكني انا اصلي وانام, واصوم وافطر, واتزوج النساء, فمن رغب عن سنتي فليس مني». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5063)، ومسلم (1401) عن انس بن مالك - رضي الله عنه- يقول: جاء ثلاثة رهط الى بيوت ازواج النبي -صلى الله عليه وسلم- يسالون عن عبادة النبي -صلى الله عليه وسلم-، فلما اخبروا كانهم تقالوها. فقالوا: واين نحن من النبي -صلى الله عليه وسلم-؟ قد غفر الله له ما تقدم من ذنبه وما تاخر. قال احدهم: اما انا فانا اصلي الليل ابدا. وقال اخر: انا اصوم الدهر ولا افطر. وقال اخر انا اعتزل النساء ولا اتزوج ابدا، فجاء رسول الله -صلى الله عليه وسلم-، فقال: انتم الذين قلتم كذا وكذا؟ اما والله اني لاخشاكم لله واتقاكم له، لكني اصوم ... الحديث. والسياق للبخاري

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ স্নেহপরায়ন, বেশী সন্তান প্রসবিনী নারীদেরকে বিবাহ করা

৯৬৯। আনাস বিন মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদেরকে বিবাহের দায়িত্ব নিতে আদেশ করতেন আর অবিবাহিত থাকাকে কঠোরভাবে নিষেধ করতেন। তিনি আরো বলতেন, তোমরা এমন সব মহিলাদেরকে বিবাহ কর যারা প্ৰেম প্ৰিয়া ও বেশী সন্তান প্ৰসবিনী হয়। কেননা তোমাদেরকে নিয়ে আমি কিয়ামতের দিনে আমার উম্মাতের আধিক্যের গর্ব প্রকাশ করব। —ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَأْمُرُ بِالْبَاءَةِ, وَيَنْهَى عَنِ التَّبَتُّلِ نَهْيًا شَدِيدًا, وَيَقُولُ: «تَزَوَّجُوا الْوَدُودَ الْوَلُودَ. إِنِّي مُكَاثِرٌ بِكُمُ الْأَنْبِيَاءَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه أحمد (3/ 158 و 245)، وابن حبان (1228) موارد

وعنه قال: كان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يامر بالباءة, وينهى عن التبتل نهيا شديدا, ويقول: «تزوجوا الودود الولود. اني مكاثر بكم الانبياء يوم القيامة». رواه احمد, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه احمد (3/ 158 و 245)، وابن حبان (1228) موارد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ স্নেহপরায়ন, বেশী সন্তান প্রসবিনী নারীদেরকে বিবাহ করা

৯৭০। আবূ দাউদ, নাসায়ী ও ইবনু হিব্বানে মা’কাল বিন ইয়াসার থেকে এ হাদীসের শাহিদ বা সমর্থক হাদীস রয়েছে।[1]

وَلَهُ شَاهِدٌ: عِنْدَ أَبِي دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيِّ, وَابْنِ حِبَّانَ أَيْضًا مِنْ حَدِيثِ مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ

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رواه أبو داود (2050)، والنسائي (6/ 65 - 66)، وابن حبان (1229) ولفظه: عن معقل بن يسار قال: جاء رجل إلى النبي -صلى الله عليه وسلم- فقال: إني أصبت امرأة ذات حسب وجمال، وإنها لا تلد، أفأتزوجها؟ قال: «لا». ثم أتاه الثانية. فنهاه. ثم أتاه الثالثة فقال: «تزوجوا الودود الولود، فإني مكاثر بكم [الأمم]». والسياق والزيادة لأبي داود

وله شاهد: عند ابي داود, والنساىي, وابن حبان ايضا من حديث معقل بن يسار - رواه ابو داود (2050)، والنساىي (6/ 65 - 66)، وابن حبان (1229) ولفظه: عن معقل بن يسار قال: جاء رجل الى النبي -صلى الله عليه وسلم- فقال: اني اصبت امراة ذات حسب وجمال، وانها لا تلد، افاتزوجها؟ قال: «لا». ثم اتاه الثانية. فنهاه. ثم اتاه الثالثة فقال: «تزوجوا الودود الولود، فاني مكاثر بكم [الامم]». والسياق والزيادة لابي داود

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ যে সমস্ত গুণাবলীর কারণে মেয়েদের বিবাহ করা হয়

৯৭১। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন, চারটি বিষয়ের প্রতি লক্ষ্য রেখে মেয়েদেরকে বিয়ে করা হয় : তার সম্পদ, তার বংশমর্যাদা, তার সৌন্দর্য ও তার দীনদারী। সুতরাং তুমি দীনদারীকেই প্রাধান্য দেবে নতুবা তুমি ক্ষতিগ্রস্ত হবে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ لِأَرْبَعٍ: لِمَالِهَا, وَلِحَسَبِهَا, وَلِجَمَالِهَا, وَلِدِينِهَا, فَاظْفَرْ بِذَاتِ الدِّينِ تَرِبَتْ يَدَاكَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ مَعَ بَقِيَّةِ السَّبْعَةِ

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صحيح. رواه البخاري (5090)، ومسلم (1466)، وأبو داود (2047)، والنسائي (6/ 68)، وابن ماجه (1858)، وأحمد (2/ 428) «تنبيه»: وهم الحافظ - رحمه الله - في عزو الحديث للسبعة، ومنهم الترمذي - كما هو اصطلاحه في المقدمة - إذ لم يروه الترمذي

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «تنكح المراة لاربع: لمالها, ولحسبها, ولجمالها, ولدينها, فاظفر بذات الدين تربت يداك». متفق عليه مع بقية السبعة - صحيح. رواه البخاري (5090)، ومسلم (1466)، وابو داود (2047)، والنساىي (6/ 68)، وابن ماجه (1858)، واحمد (2/ 428) «تنبيه»: وهم الحافظ - رحمه الله - في عزو الحديث للسبعة، ومنهم الترمذي - كما هو اصطلاحه في المقدمة - اذ لم يروه الترمذي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ নব দম্পতির জন্য যে দুআ করতে হয়

৯৭২। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বিবাহ উপলক্ষে কাউকে মুবারকবাদ জানিয়ে বলতেন:

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ, وَبَارَكَ عَلَيْكَ, وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ

“আল্লাহ তোমাদের বরকত দান করুন, তোমাদের উপর বরকত নাযিল করুন এবং কল্যাণের সাথে তোমাদের একত্র করুন”।

–তিরমিযী, ইবনু খুযাইমাহ ও ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْهُ; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - كَانَ إِذَا رَفَّأَ إِنْسَانًا إِذَا تَزَوَّجَ قَالَ: «بَارَكَ اللَّهُ لَكَ, وَبَارَكَ عَلَيْكَ, وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ حِبَّانَ

-

صحيح. رواه أحمد (2/ 381)، وأبو داود (2130)، والنسائي في «عمل اليوم الليلة» (259)، والترمذي (1091)، وابن ماجه (1905) وقال الترمذي: حسن صحيح

وعنه; ان النبي - صلى الله عليه وسلم - كان اذا رفا انسانا اذا تزوج قال: «بارك الله لك, وبارك عليك, وجمع بينكما في خير». رواه احمد, والاربعة, وصححه الترمذي, وابن خزيمة, وابن حبان - صحيح. رواه احمد (2/ 381)، وابو داود (2130)، والنساىي في «عمل اليوم الليلة» (259)، والترمذي (1091)، وابن ماجه (1905) وقال الترمذي: حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহ সংঘটিত হওয়ার সময় খুতবা পাঠ করা

৯৭৩। ’আবদুল্লাহ ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদের প্রয়োজনের সময় এ তাশাহুদ পড়া শিক্ষা দিতেন- “সমস্ত প্রশংসা আল্লাহর জন্য। আমরা তাঁর প্রশংসা করি, তার সাহায্য প্রার্থনা করি, তার নিকট ক্ষমা প্রার্থনা করি। আমরা আমাদের প্রবৃত্তির অনিষ্ট ও আমাদের কাজের নিকৃষ্টতা থেকে আল্লাহর কাছে আশ্রয় চাই। আল্লাহ যাকে সৎপথে পরিচালিত করেন তাকে কেউ পথভ্ৰষ্ট করতে পারে না এবং যাকে পথভ্ৰষ্ট করেন তার কোন পথপ্ৰদৰ্শক নাই। আমি সাক্ষ্য দেই যে, আল্লাহ ছাড়া কোন ইলাহ নাই, তিনি এক এবং তাঁর কোন শরীক নাই। আমি আরো সাক্ষ্য দেই যে, মুহাম্মাদ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর বান্দা ও রসূল” এর পরে তিনি তিনটি আয়াত পড়তেন।* -তিরমিযী ও হাকিম একে হাসান বলেছেন।

*আয়াত তিনটি হচ্ছে- সূরা আন-নিসার প্রথম আয়াত, সূরা আলে ’ইমরানের ১০২ আয়াত (মুসলিমুন) পর্যন্ত, সূরা আহযাবের (৭০-৭১ নং আয়াত) পর্যন্ত।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: عَلَّمَنَا رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - التَّشَهُّدَ فِي الْحَاجَةِ: «إِنَّ الْحَمْدَ لِلَّهِ, نَحْمَدُهُ, وَنَسْتَعِينُهُ, وَنَسْتَغْفِرُهُ, وَنَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ شُرُورِ أَنْفُسِنَا, مَنْ يَهْدِهِ اللَّهُ فَلَا مُضِلَّ لَهُ, وَأَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ, وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ»، وَيَقْرَأُ ثَلَاثَ آيَاتٍ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَحَسَّنَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَالْحَاكِمُ

-

صحيح. رواه أحمد (1/ 392 - 393)، وأبو داود (2118)، والنسائي (3/ 104 - 105)، والترمذي (1105)، وابن ماجه (1892)، والحاكم (2/ 182 - 183) وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: وللحديث طرق وشواهد، كنت خرَّجْتُ بعضَها في «مشكل الآثار» للطحاوي رقم (1 - 5) ولشيخنا - حفظه الله تعالى - رسالة في هذه الخطبة أسماها: «خطبة الحاجة التي كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- يعلمها أصحابه». وهي مطبوعة متداولة، وقد كان لهذه الرسالة الأثر الطيب في نشر هذه السنة بين الناس، أسأل الله عز وجل أن يثيب مؤلفها خيرا

وعن عبد الله بن مسعود - رضي الله عنه - قال: علمنا رسول الله - صلى الله عليه وسلم - التشهد في الحاجة: «ان الحمد لله, نحمده, ونستعينه, ونستغفره, ونعوذ بالله من شرور انفسنا, من يهده الله فلا مضل له, واشهد ان لا اله الا الله, واشهد ان محمدا عبده ورسوله»، ويقرا ثلاث ايات. رواه احمد, والاربعة, وحسنه الترمذي, والحاكم - صحيح. رواه احمد (1/ 392 - 393)، وابو داود (2118)، والنساىي (3/ 104 - 105)، والترمذي (1105)، وابن ماجه (1892)، والحاكم (2/ 182 - 183) وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: وللحديث طرق وشواهد، كنت خرجت بعضها في «مشكل الاثار» للطحاوي رقم (1 - 5) ولشيخنا - حفظه الله تعالى - رسالة في هذه الخطبة اسماها: «خطبة الحاجة التي كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- يعلمها اصحابه». وهي مطبوعة متداولة، وقد كان لهذه الرسالة الاثر الطيب في نشر هذه السنة بين الناس، اسال الله عز وجل ان يثيب مولفها خيرا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিয়ের প্রস্তাবকারীর প্রস্তাবিত পাত্রীকে দেখা শরীয়তসম্মত

৯৭৪। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যখন তোমাদের কেউ কোন মেয়েকে বিবাহের পয়গাম বা প্রস্তাব দিবে তখন দেখা সম্ভব হলে, যে বিষয় বিবাহের জন্য তাকে আহবান করে তা যেন দেখে নেয়। -এ হাদীসের রাবীগণ নির্ভরযোগ্য। হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا خَطَبَ أَحَدُكُمُ الْمَرْأَةَ, فَإِنِ اسْتَطَاعَ أَنْ يَنْظُرَ مِنْهَا مَا يَدْعُوهُ إِلَى نِكَاحِهَا, فَلْيَفْعَلْ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (3/ 334 و 360)، وأبو داود (2082)، والحاكم (2/ 165) وتمامه: قال جابر - رضي الله عنه-: «فخطبت جارية، فكنت أتخبأ لها حتى رأيت منها ما دعاني إلى نكاحها وتزوجها، فتزوجتها». قلت: وهذا الحديث وما بعده مُخَرَّج في رسالتي: الأحكام المطلوبة في رؤية المخطوبة

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اذا خطب احدكم المراة, فان استطاع ان ينظر منها ما يدعوه الى نكاحها, فليفعل». رواه احمد, وابو داود, ورجاله ثقات, وصححه الحاكم - صحيح. رواه احمد (3/ 334 و 360)، وابو داود (2082)، والحاكم (2/ 165) وتمامه: قال جابر - رضي الله عنه-: «فخطبت جارية، فكنت اتخبا لها حتى رايت منها ما دعاني الى نكاحها وتزوجها، فتزوجتها». قلت: وهذا الحديث وما بعده مخرج في رسالتي: الاحكام المطلوبة في روية المخطوبة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিয়ের প্রস্তাবকারীর প্রস্তাবিত পাত্রীকে দেখা শরীয়তসম্মত

৯৭৫। হাদীসটির শাহিদ (সমর্থক) হাদীস তিরমিযী ও নাসায়ীতে মুগীরাহ (রাঃ) থেকে রয়েছে।[1]

وَلَهُ شَاهِدٌ: عِنْدَ التِّرْمِذِيِّ, وَالنَّسَائِيِّ; عَنِ الْمُغِيرَةِ

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صحيح. ولفظه: عن المغيرة بن شعبة - رضي الله عنه- قال: خطبت امرأة، فقال لي رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «أنظرتَ إليها؟» قال: قلت: لا. قال: «انظر إليها؛ فإنه أحرى أن يُؤْدَم بينكما». فأتيتها وعندها أبواها، وهي في خدرها. فقلت: إن رسول الله -صلى الله عليه وسلم- أمرني أن أنظر إليها؟ قال: فسكتا. قال: فرفعت الجارية جانب الخدر. فقالت: أُحَرِّجُ عليك إن كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- أمرك أن تنظر إلي لما نظرت، وإن كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- لم يأمر أن تنظر إليَّ فلا تنظر. قلت: ولتخريجه انظر «الأحكام المطلوبة

وله شاهد: عند الترمذي, والنساىي; عن المغيرة - صحيح. ولفظه: عن المغيرة بن شعبة - رضي الله عنه- قال: خطبت امراة، فقال لي رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «انظرت اليها؟» قال: قلت: لا. قال: «انظر اليها؛ فانه احرى ان يودم بينكما». فاتيتها وعندها ابواها، وهي في خدرها. فقلت: ان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- امرني ان انظر اليها؟ قال: فسكتا. قال: فرفعت الجارية جانب الخدر. فقالت: احرج عليك ان كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- امرك ان تنظر الي لما نظرت، وان كان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- لم يامر ان تنظر الي فلا تنظر. قلت: ولتخريجه انظر «الاحكام المطلوبة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিয়ের প্রস্তাবকারীর প্রস্তাবিত পাত্রীকে দেখা শরীয়তসম্মত

৯৭৬। ইবনু মাজাহ ও ইবনু হিব্বানে মুহাম্মাদ বিন মাসলামাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত হয়েছে।[1]

وَعِنْدَ ابْنِ مَاجَهْ, وَابْنِ حِبَّانَ: مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ مَسْلَمَةَ

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ولفظه: عن ابن أبي حثمة قال: رأيت محمد بن مسلمة يطارد امرأة ببصره على إجَّار يقال لها: ثبيتة بنت الضحاك، فقلت: أتفعل هذا، وأنت صاحب رسول الله -صلى الله عليه وسلم-؟ فقال: نعم. قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: إذا ألقى الله في قلب رجل خطبة امرأة، فلا بأس أن ينظر إليها». وانظر الأحكام المطلوبة

وعند ابن ماجه, وابن حبان: من حديث محمد بن مسلمة - ولفظه: عن ابن ابي حثمة قال: رايت محمد بن مسلمة يطارد امراة ببصره على اجار يقال لها: ثبيتة بنت الضحاك، فقلت: اتفعل هذا، وانت صاحب رسول الله -صلى الله عليه وسلم-؟ فقال: نعم. قال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: اذا القى الله في قلب رجل خطبة امراة، فلا باس ان ينظر اليها». وانظر الاحكام المطلوبة

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিয়ের প্রস্তাবকারীর প্রস্তাবিত পাত্রীকে দেখা শরীয়তসম্মত

৯৭৭। মুসলিমে- আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, একজন মহিলাকে বিবাহ করতে যাচ্ছেন এমন একজন সাহাবীকে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তুমি কি মেয়েটিকে দেখেছ? সাহাবী বললেন, না। তিনি বললেন, যাও, তাকে গিয়ে দেখ।[1]

وَلِمُسْلِمٍ: عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه: أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ لِرَجُلٍ تَزَوَّجَ امْرَأَةً: «أَنَظَرْتَ إِلَيْهَا?» قَالَ: لَا. قَالَ: اذْهَبْ فَانْظُرْ إِلَيْهَا

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صحيح. رواه مسلم (1424)، وزاد: «فإن في أعين الأنصار شيئا». وانظر الرسالة المشار إليها آنفا

ولمسلم: عن ابي هريرة - رضي الله عنه: ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال لرجل تزوج امراة: «انظرت اليها?» قال: لا. قال: اذهب فانظر اليها - صحيح. رواه مسلم (1424)، وزاد: «فان في اعين الانصار شيىا». وانظر الرسالة المشار اليها انفا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ মুসলিম ভাইয়ের বিয়ের প্রস্তাবের উপর অন্য কারও প্রস্তাব দেওয়া নিষেধ

৯৭৮। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, এক মুসলিম ভাইয়ের বিয়ের প্রস্তাবের ওপরে অন্য ভাইকে প্রস্তাব দিতে নিষেধ করেছেন, যতক্ষণ না প্রথম প্রস্তাবকারী তার প্রস্তাব উঠিয়ে নেবে বা তাকে অনুমতি দেবে। -শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَخْطُبْ بَعْضُكُمْ عَلَى خِطْبَةِ أَخِيهِ, حَتَّى يَتْرُكَ الْخَاطِبُ قَبْلَهُ, أَوْ يَأْذَنَ لَهُ الْخَاطِبُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

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صحيح. رواه البخاري (5142)، ومسلم (1412)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يخطب بعضكم على خطبة اخيه, حتى يترك الخاطب قبله, او ياذن له الخاطب». متفق عليه, واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (5142)، ومسلم (1412)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ কি দ্বারা বিবাহ সংঘটিত হয়?

৯৭৯। সাহল ইবনু সা’দ (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, এক মহিলা রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কাছে এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমি আমার জীবনকে আপনার হাতে সমর্পণ করতে এসেছি। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার দিকে তাকালেন এবং সতর্ক দৃষ্টিতে তার আপাদমস্তক লক্ষ্য করলেন। তারপর তিনি মাথা নিচু করলেন। যখন মহিলাটি দেখল, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার সম্পর্কে কোন ফয়সালা দিচ্ছেন না, তখন সে বসে পড়ল। এরপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাহাবীদের মধ্যে একজন দাঁড়ালেন এবং বললেন, হে আল্লাহর রসূল! যদি আপনার বিয়ের প্রয়োজন না থাকে, তবে আমার সঙ্গে এর বিয়ে দিয়ে দিন। রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জিজ্ঞেস করলেন, তোমার কাছে কিছু আছে কি? সে উত্তর করলো- না, আল্লাহর কসম, হে আল্লাহর রসূল! আমার কাছে কিছুই নেই। রসূলুল্লাহ্ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তুমি তোমার পরিবার-পরিজনের কাছে ফিরে গিয়ে দেখ, কিছু পাও কিনা। এরপর লোকটি চলে গেল। ফিরে এসে বলল, আল্লাহর কসম! আমি কিছুই পাইনি। এরপর রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, আবার দেখ, লোহার একটি আংটিও যদি পাও। তারপর লোকটি আবার ফিরে গেল। এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! তাও পেলাম না, কিন্তু এই আমার লুঙ্গি (শুধু এটাই আছে)।

(রাবী) সাহল (রাঃ) বলেন, তার কাছে কোন চাদর ছিল না। লোকটি এর অর্ধেক তাকে দিতে চাইল। তখন রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, সে তোমার লুঙ্গি দিয়ে কী করবে? তুমি যদি পরিধান কর, তাহলে তার কোন কাজে আসবে না, আর সে যদি পরিধান করে, তবে তোমার কোন কাজে আসবে না। তারপর বেশ কিছুক্ষণ লোকটি নীরবে বসে থাকল। তারপর উঠে দাঁড়াল। সে যেতে উদ্যত হলে নবী পুনঃ তাকে ডেকে আনলেন এবং জিজ্ঞেস করলেন, তোমার কী পরিমাণ কুরআন মাজীদ মুখস্থ আছে? সে বলল, আমার অমুক অমুক সূরা মুখস্থ আছে এবং সে গণনা করল। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জিজ্ঞেস করলেন, এগুলো কি তোমার মুখস্থ আছে। সে বলল, হাঁ। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, যে পরিমাণ কুরআন তোমার মুখস্থ আছে তার বিনিময়ে তোমার কাছে। এ মহিলাটিকে তোমার অধীনস্থ করে (বিয়ে) দিলাম। বুখারীর অন্য একটি বর্ণনায় আছে, আমি তোমাকে তার উপরে অধিকার দিয়ে দিলাম— তোমার জানা কুরআন তাকে শিক্ষা দেয়ার বিনিময়ে।[1]

وَعَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: جَاءَتِ امْرَأَةٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! جِئْتُ أَهَبُ لَكَ نَفْسِي. فَنَظَرَ إِلَيْهَا رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَصَعَّدَ النَّظَرَ فِيهَا, وَصَوَّبَهُ, ثُمَّ طَأْطَأَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - رَأْسَهُ, فَلَمَّا رَأَتْ الْمَرْأَةُ أَنَّهُ لَمْ يَقْضِ فِيهَا شَيْئًا جَلَسَتْ, فَقَامَ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِهِ
فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنْ لَمْ يَكُنْ لَكَ بِهَا حَاجَةٌ فَزَوِّجْنِيهَا
قَالَ: فَهَلْ عِنْدكَ مِنْ شَيْءٍ
فَقَالَ: لَا, وَاللَّهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ
فَقَالَ: اذْهَبْ إِلَى أَهْلِكَ, فَانْظُرْ هَلْ تَجِدُ شَيْئًا فَذَهَبَ, ثُمَّ رَجَعَ
فَقَالَ: لَا, وَاللَّهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ، مَا وَجَدْتُ شَيْئًا
فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «انْظُرْ وَلَوْ خَاتَمًا مِنْ حَدِيدٍ»، فَذَهَبَ، ثُمَّ رَجَعَ
فَقَالَ: لَا وَاللَّهِ, يَا رَسُولَ اللَّهِ, وَلَا خَاتَمًا مِنْ حَدِيدٍ, وَلَكِنْ هَذَا إِزَارِي - قَالَ سَهْلٌ: مَالُهُ رِدَاءٌ - فَلَهَا نِصْفُهُ
فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «مَا تَصْنَعُ بِإِزَارِكَ? إِنْ لَبِسْتَهُ لَمْ يَكُنْ عَلَيْهَا مِنْهُ شَيْءٌ، وَإِنْ لَبِسَتْهُ لَمْ يَكُنْ عَلَيْكَ شَيْءٌ». فَجَلَسَ الرَّجُلُ, وَحَتَّى إِذَا طَالَ مَجْلِسُهُ قَامَ; فَرَآهُ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - مُوَلِّيًا, فَأَمَرَ بِهِ, فَدُعِيَ لَهُ, فَلَمَّا جَاءَ
قَالَ: مَاذَا مَعَكَ مِنَ الْقُرْآنِ
قَالَ: مَعِي سُورَةُ كَذَا, وَسُورَةُ كَذَا, عَدَّدَهَا
فَقَالَ: تَقْرَؤُهُنَّ عَنْ ظَهْرِ قَلْبِكَ
قَالَ: نَعَمْ, قَالَ: «اذْهَبْ, فَقَدَ مَلَّكْتُكَهَا بِمَا مَعَكَ مِنَ الْقُرْآنِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

وَفِي رِوَايَةٍ لَهُ: انْطَلِقْ, فَقَدْ زَوَّجْتُكَهَا, فَعَلِّمْهَا مِنَ الْقُرْآنِ

وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: «أَمْكَنَّاكَهَا بِمَا مَعَكَ مِنَ الْقُرْآنِ

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صحيح. رواه البخاري (5030) و (5087)، ومسلم (1425) (76) , واللفظ متفق عليه، وليس كما فرَّق الحافظ رحمه الله

وعن سهل بن سعد الساعدي - رضي الله عنهما- قال: جاءت امراة الى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فقالت: يا رسول الله! جىت اهب لك نفسي. فنظر اليها رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فصعد النظر فيها, وصوبه, ثم طاطا رسول الله - صلى الله عليه وسلم - راسه, فلما رات المراة انه لم يقض فيها شيىا جلست, فقام رجل من اصحابه فقال: يا رسول الله! ان لم يكن لك بها حاجة فزوجنيها قال: فهل عندك من شيء فقال: لا, والله يا رسول الله فقال: اذهب الى اهلك, فانظر هل تجد شيىا فذهب, ثم رجع فقال: لا, والله يا رسول الله، ما وجدت شيىا فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «انظر ولو خاتما من حديد»، فذهب، ثم رجع فقال: لا والله, يا رسول الله, ولا خاتما من حديد, ولكن هذا ازاري - قال سهل: ماله رداء - فلها نصفه فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «ما تصنع بازارك? ان لبسته لم يكن عليها منه شيء، وان لبسته لم يكن عليك شيء». فجلس الرجل, وحتى اذا طال مجلسه قام; فراه رسول الله - صلى الله عليه وسلم - موليا, فامر به, فدعي له, فلما جاء قال: ماذا معك من القران قال: معي سورة كذا, وسورة كذا, عددها فقال: تقروهن عن ظهر قلبك قال: نعم, قال: «اذهب, فقد ملكتكها بما معك من القران». متفق عليه, واللفظ لمسلم وفي رواية له: انطلق, فقد زوجتكها, فعلمها من القران وفي رواية للبخاري: «امكناكها بما معك من القران - صحيح. رواه البخاري (5030) و (5087)، ومسلم (1425) (76) , واللفظ متفق عليه، وليس كما فرق الحافظ رحمه الله

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ সাহল বিন সা'দ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ কি দ্বারা বিবাহ সংঘটিত হয়?

৯৮০। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে আবূ দাউদে আছে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম লোকটিকে বললেন, তোমার কি (কুরআনের কিছু) মুখস্থ আছে? সে বললো, সূরা বাকারাহ ও তার পরের সূরা (আল ইমরান)। তিনি বললেন, ওঠ! তাকে বিশটি আয়াত (মাহরানার বিনিময়ে) শিখিয়ে দাও।[1]

وَلِأَبِي دَاوُدَ: عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ: مَا تَحْفَظُ
قَالَ: سُورَةَ الْبَقَرَةِ, وَالَّتِي تَلِيهَا
قَالَ: قُمْ. فَعَلِّمْهَا عِشْرِينَ آيَةً

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منكر. رواه أبو داود (2112)، وزاد: «وهي امرأتك». قلت: في إسناده عسل بن سفيان، وهو ضعيف، وفي روايته هذه ممخالفة لرواية الثقات

ولابي داود: عن ابي هريرة قال: ما تحفظ قال: سورة البقرة, والتي تليها قال: قم. فعلمها عشرين اية - منكر. رواه ابو داود (2112)، وزاد: «وهي امراتك». قلت: في اسناده عسل بن سفيان، وهو ضعيف، وفي روايته هذه ممخالفة لرواية الثقات

হাদিসের মানঃ সহিহ/যঈফ [মিশ্রিত]
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহের ঘোষণা দেওয়া আবশ্যক

৯৮১। ’আমির বিন ’আবদুল্লাহ বিন যুবাইর থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে বর্ণনা করেন যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বিবাহ সংবাদকে ছড়িয়ে দাও। —হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ, عَنْ أَبِيهِ; أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «أَعْلِنُوا النِّكَاحَ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

-

حسن. رواه أحمد (4/ 5)، والحاكم (283) بسند حسن، وله شواهد أخرى مذكورة بالأصل

وعن عامر بن عبد الله بن الزبير, عن ابيه; ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «اعلنوا النكاح». رواه احمد, وصححه الحاكم - حسن. رواه احمد (4/ 5)، والحاكم (283) بسند حسن، وله شواهد اخرى مذكورة بالاصل

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহে অভিভাবক থাকা শর্ত

৯৮২। আবূ বুরদাহ ইবনু আবূ মূসা থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা থেকে বর্ণনা করেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বিবাহ অলী ব্যতীত সিদ্ধ হবে না। -ইবনুল মাদীনী, তিরমিযী ও ইবনু হিব্বান সহীহ বলেছেন এবং মুরসাল হবার ত্রুটি আরোপ করেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي بُرْدَةَ بْنِ أَبِي مُوسَى, عَنْ أَبِيهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ». رَوَاهُ أَحْمَدُ وَالْأَرْبَعَةُ (1) وَصَحَّحَهُ ابْنُ الْمَدِينِيِّ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَأُعِلَّ بِالْإِرْسَالِ

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صحيح. رواه أحمد (4/ 394 و 413)، وأبو داود (2085)، والترمذي (1101)، وابن ماجه (1881)، وابن حبان (1243) وقد صحَّحه غير واحد، وله شواهد أخرى. «تنبيه»: وَهِمَ الحافظ -رحمه الله- في عَزْو الحديث للأربعة؛ إذ لم يخرجه النسائي. والله أعلم

وعن ابي بردة بن ابي موسى, عن ابيه قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا نكاح الا بولي». رواه احمد والاربعة (1) وصححه ابن المديني, والترمذي, وابن حبان, واعل بالارسال - صحيح. رواه احمد (4/ 394 و 413)، وابو داود (2085)، والترمذي (1101)، وابن ماجه (1881)، وابن حبان (1243) وقد صححه غير واحد، وله شواهد اخرى. «تنبيه»: وهم الحافظ -رحمه الله- في عزو الحديث للاربعة؛ اذ لم يخرجه النساىي. والله اعلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহে অভিভাবক থাকা শর্ত

৯৮৩। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যে নারীকে তার অভিভাবক বিবাহ দেয়নি তার বিবাহ বাতিল। স্বামী তার সাথে সহবাস করলে তাতে সে মাহরের অধিকারী হবে। তাদের মধ্যে মতবিরোধ হলে সে ক্ষেত্রে যার অভিভাবক নাই, শাসক তার অভিভাবক।
-আবূ আওয়ানাহ, ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَيُّمَا امْرَأَةٍ نَكَحَتْ بِغَيْرِ إِذْنِ وَلِيِّهَا, فَنِكَاحُهَا بَاطِلٌ, فَإِنْ دَخَلَ بِهَا فَلَهَا الْمَهْرُ بِمَا اسْتَحَلَّ مِنْ فَرْجِهَا, فَإِنِ اشْتَجَرُوا فَالسُّلْطَانُ وَلِيُّ مَنْ لَا وَلِيَّ لَهُ». أَخْرَجَهُ الْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ أَبُو عَوَانَةَ, وَابْنُ حِبَّانَ وَالْحَاكِمُ

-

حسن. رواه أبو داود (2083)، والترمذي (1102)، وابن ماجه (1879)، وابن حبان (1248) وقال الترمذي: «هو عندي حسن». قلت: وهو صحيح بشواهده. والله أعلم

وعن عاىشة رضي الله عنها قالت: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ايما امراة نكحت بغير اذن وليها, فنكاحها باطل, فان دخل بها فلها المهر بما استحل من فرجها, فان اشتجروا فالسلطان ولي من لا ولي له». اخرجه الاربعة الا النساىي, وصححه ابو عوانة, وابن حبان والحاكم - حسن. رواه ابو داود (2083)، والترمذي (1102)، وابن ماجه (1879)، وابن حبان (1248) وقال الترمذي: «هو عندي حسن». قلت: وهو صحيح بشواهده. والله اعلم

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহের ক্ষেত্রে বিধবার কাছ থেকে সুস্পষ্ট ভাবে অনুমতি নেওয়া এবং কুমারীর (চুপ থাকা) অনুমতি নেওয়া আবশ্যক

৯৮৪। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন বিধবা নারীকে তার সম্মতি ব্যতীত বিয়ে দেয়া যাবে না এবং কুমারী মহিলাকে তার অনুমতি ছাড়া বিয়ে দিতে পারবে না। লোকেরা জিজ্ঞেস করল, হে আল্লাহর রসূল! কেমন করে তার অনুমতি নেয়া হবে। তিনি বললেন, তার চুপ থাকাটাই হচ্ছে তার অনুমতি।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا تُنْكَحُ الْأَيِّمُ حَتَّى تُسْتَأْمَرَ, وَلَا تُنْكَحُ الْبِكْرُ حَتَّى تُسْتَأْذَنَ». قَالُوا: يَا رَسُولَ اللَّهِ, وَكَيْفَ إِذْنُهَا قَالَ: «أَنْ تَسْكُتَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5136)، ومسلم (1419)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا تنكح الايم حتى تستامر, ولا تنكح البكر حتى تستاذن». قالوا: يا رسول الله, وكيف اذنها قال: «ان تسكت». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5136)، ومسلم (1419)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহের ক্ষেত্রে বিধবার কাছ থেকে সুস্পষ্ট ভাবে অনুমতি নেওয়া এবং কুমারীর (চুপ থাকা) অনুমতি নেওয়া আবশ্যক

৯৮৫। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বিধবা মেয়েরা নিজেদের ব্যাপারে ওয়ালীর থেকে অধিক হকদার আর কুমারী, (সাবালিকার) অনুমতি নিতে হবে- তাদের নীরবতা অনুমতি বলে গণ্য হবে। অন্য শব্দ বিন্যাসে এরূপ আছে- বিধবা মেয়েদের সাথে ওয়ালীর কোন ব্যাপার নেই। আর ইয়াতীম মেয়েদের অনুমতি নিতে হবে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «الثَّيِّبُ أَحَقُّ بِنَفْسِهَا مِنْ وَلِيِّهَا, وَالْبِكْرُ تُسْتَأْمَرُ, وَإِذْنُهَا سُكُوتُهَا». رَوَاهُ مُسْلِمٌ
وَفِي لَفْظٍ: «لَيْسَ لِلْوَلِيِّ مَعَ الثَّيِّبِ أَمْرٌ, وَالْيَتِيمَةُ تُسْتَأْمَرُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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صحيح. رواه مسلم (1421)
صحيح. رواه أبو داود (2100)، والنسائي (6/ 84)، وابن حبان (1241)

وعن ابن عباس - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «الثيب احق بنفسها من وليها, والبكر تستامر, واذنها سكوتها». رواه مسلم وفي لفظ: «ليس للولي مع الثيب امر, واليتيمة تستامر». رواه ابو داود, والنساىي, وصححه ابن حبان - صحيح. رواه مسلم (1421) صحيح. رواه ابو داود (2100)، والنساىي (6/ 84)، وابن حبان (1241)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহের মধ্যে মহিলার অভিভাবকত্ব নেই

৯৮৬। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ কোন মহিলা অপর কোন মহিলাকে বিবাহ দিবে না এবং কোন মহিলা নিজেকেও বিবাহ দিবে না। -হাদীসটির সকল রাবী নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا تُزَوِّجُ الْمَرْأَةُ الْمَرْأَةَ, وَلَا تُزَوِّجُ الْمَرْأَةُ نَفْسَهَا». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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صحيح. رواه ابن ماجه (1882)، والدارقطني (327)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا تزوج المراة المراة, ولا تزوج المراة نفسها». رواه ابن ماجه, والدارقطني, ورجاله ثقات - صحيح. رواه ابن ماجه (1882)، والدارقطني (327)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ “শিগার” বিবাহ নিষিদ্ধ

৯৮৭। নাফি থেকে বর্ণিত, তিনি ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আশ-শিগার নিষিদ্ধ করেছেন। ’আশ-শিগার’ হলো, কোন ব্যক্তি নিজের কন্যাকে অন্য এক ব্যক্তি পুত্রের সঙ্গে বিবাহ দিবে এবং তার কন্যা নিজের পুত্রের জন্য আনবে এবং দু’কন্যাই মাহর পাবে না। অন্য সূত্রে বুখারী ও মুসলিম একমত হয়ে বলেছেন ’শিগার’ নামক বিবাহের ব্যাখ্যাটি নাফি’ (রাঃ) এর নিজের উক্তি।[1]

وَعَنْ نَافِعٍ, عَنْ اِبْنِ عُمَرَ قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنِ الشِّغَارِ; وَالشِّغَارُ: أَنْ يُزَوِّجَ الرَّجُلُ ابْنَتَهُ عَلَى أَنْ يُزَوِّجَهُ الْآخَرُ ابْنَتَهُ, وَلَيْسَ بَيْنَهُمَا صَدَاقٌ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَاتَّفَقَا مِنْ وَجْهٍ آخَرَ عَلَى أَنَّ تَفْسِيرَ الشِّغَارِ مِنْ كَلَامِ نَافِعٍ

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صحيح. رواه البخاري (5112)، ومسلم (1415)
البخاري (6960)، ومسلم (1415) (58) وفيه: «قال عبيد الله: قلت لنافع: ما الشغار؟» زاد البخاري: «قال: ينكح ابنة الرجل وينكحه ابنته بغير صداق، وينكح أخت الرجل وينكحه أخته بغير صداق

وعن نافع, عن ابن عمر قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن الشغار; والشغار: ان يزوج الرجل ابنته على ان يزوجه الاخر ابنته, وليس بينهما صداق. متفق عليه واتفقا من وجه اخر على ان تفسير الشغار من كلام نافع - صحيح. رواه البخاري (5112)، ومسلم (1415) البخاري (6960)، ومسلم (1415) (58) وفيه: «قال عبيد الله: قلت لنافع: ما الشغار؟» زاد البخاري: «قال: ينكح ابنة الرجل وينكحه ابنته بغير صداق، وينكح اخت الرجل وينكحه اخته بغير صداق

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ নাফি‘ (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ কুমারী মেয়েকে পছন্দ করার স্বাধীনতা দেয়া যখন তার অমতে বিবাহ দেয়া হয়

৯৮৮। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, একটি কুমারী মেয়ে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট এসে তাঁকে জানায় যে, তার পিতা তার অমতে তাকে বিবাহ দিয়েছে। ফলে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মেয়েটিকে ঐ বিবাহ বহাল রাখা বা বহাল না রাখার ব্যাপারে স্বাধীনতা দিলেন। -হাদীসটি মুরসালের দোষে দুষ্ট।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا؛ أَنَّ جَارِيَةً بِكْرًا أَتَتِ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَذَكَرَتْ: أَنَّ أَبَاهَا زَوَّجَهَا وَهِيَ كَارِهَةٌ, فَخَيَّرَهَا النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَأُعِلَّ بِالْإِرْسَالِ

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صحيح. رواه أحمد (2469)، وأبو داود (2096)، وابن ماجه (1875) قلت: وأما إعلانه بالإرسال فقد قال به جماعة، منهم أبو داود في «سننه» (2/ 232) وتبعه على ذلك البيهقي في «معرفة السنن والآثار» (10/ 47) بل بالغ الأخير في رد الحديث، ولو كان موصولًا من طريق الثقات، ولذلك رد عليه ابن القيم في «تهذيب السنن» (3/ 40) فكان من جملة ما قال: «وعلى طريقة البيهقي وأكثر الفقهاء وجميع أهل الأصول هذا حديث صحيح». وقال الحافظ في «الفتح» (969) «الطعن في الحديث لا معنى له، فإن طرقه يقوى بعضُها ببعض

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما؛ ان جارية بكرا اتت النبي - صلى الله عليه وسلم - فذكرت: ان اباها زوجها وهي كارهة, فخيرها النبي - صلى الله عليه وسلم. رواه احمد, وابو داود, وابن ماجه, واعل بالارسال - صحيح. رواه احمد (2469)، وابو داود (2096)، وابن ماجه (1875) قلت: واما اعلانه بالارسال فقد قال به جماعة، منهم ابو داود في «سننه» (2/ 232) وتبعه على ذلك البيهقي في «معرفة السنن والاثار» (10/ 47) بل بالغ الاخير في رد الحديث، ولو كان موصولا من طريق الثقات، ولذلك رد عليه ابن القيم في «تهذيب السنن» (3/ 40) فكان من جملة ما قال: «وعلى طريقة البيهقي واكثر الفقهاء وجميع اهل الاصول هذا حديث صحيح». وقال الحافظ في «الفتح» (969) «الطعن في الحديث لا معنى له، فان طرقه يقوى بعضها ببعض

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ যে নারীর বিয়ে দুজন অভিভাবক দিবে -এর বিধান

৯৮৯। হাসান হতে বর্ণিত, তিনি সামুরাহ (রাঃ) থেকে, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, দু’জন আলী যে মহিলার বিবাহ দু’জনের কাছে দিয়ে দিবে-এরূপ অবস্থায় ঐ মহিলা প্রথম স্বামীর হবে। -তিরমিযী একে হাসান বলেছেন।[1]

وَعَنْ الْحَسَنِ, عَنْ سَمُرَةَ, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «أَيُّمَا امْرَأَةٍ زَوَّجَهَا وَلِيَّانِ, فَهِيَ لِلْأَوَّلِ مِنْهُمَا». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَحَسَّنَهُ التِّرْمِذِيُّ

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ضعيف. رواه أحمد (5/ 8 و 11 و 12 و 18)، وأبو داود (2088)، والنسائي (7/ 314)، والترمذي (1110)، من طريق قتادة، عن الحسن، عن سمرة، به .. وتمامه: «وإذا باع بيعا من رجلين فهو للأول منهما». وقال الترمذي: «حديث حسن». قلت: وعلته عنعنة الحسن، فإنه على جلالته كان مدلسا، فلابد من تصريحه بالتحديث. وقد تلطف الحافظ في «التلخيص» (3 65) فقال: «وصحته متوقفة على ثبوت سماع الحسن من سمرة، فإن رجاله ثقات». وقد اختلف فيه على الحسن أيضا. «تنبيه»: لم يرو ابن ماجه الحديث بتمامه، وإنما رواه بالجملة الخاصة بالبيع دون ما يتعلق بمحل الشاهد المراد، فوجب التنبيه على ذلك

وعن الحسن, عن سمرة, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «ايما امراة زوجها وليان, فهي للاول منهما». رواه احمد, والاربعة, وحسنه الترمذي - ضعيف. رواه احمد (5/ 8 و 11 و 12 و 18)، وابو داود (2088)، والنساىي (7/ 314)، والترمذي (1110)، من طريق قتادة، عن الحسن، عن سمرة، به .. وتمامه: «واذا باع بيعا من رجلين فهو للاول منهما». وقال الترمذي: «حديث حسن». قلت: وعلته عنعنة الحسن، فانه على جلالته كان مدلسا، فلابد من تصريحه بالتحديث. وقد تلطف الحافظ في «التلخيص» (3 65) فقال: «وصحته متوقفة على ثبوت سماع الحسن من سمرة، فان رجاله ثقات». وقد اختلف فيه على الحسن ايضا. «تنبيه»: لم يرو ابن ماجه الحديث بتمامه، وانما رواه بالجملة الخاصة بالبيع دون ما يتعلق بمحل الشاهد المراد، فوجب التنبيه على ذلك

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ হাসান বাসরী (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ মনিবের অনুমতি ব্যতিরেকে দাসের বিবাহের বিধান

৯৯০। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে দাস তার মুনিবের বা আপনজনের অনুমতি ব্যতীত বিয়ে করবে। সে ব্যভিচারী বা যিনাকারী বলে গণ্য হবে। —তিরমিযী; তিনি একে সহীহও বলেছেন, ইবনু হিব্বানও তদ্রুপ।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَيُّمَا عَبْدٍ تَزَوَّجَ بِغَيْرِ إِذْنِ مَوَالِيهِ أَوْ أَهْلِهِ, فَهُوَ عَاهِرٌ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ وَصَحَّحَهُ, وَكَذَلِكَ ابْنُ حِبَّانَ

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حسن. رواه أحمد (3/ 301 و 377)، وأبو داود (2078)، والترمذي (1111 و 1112) من طريق عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر، به. واللفظ لأحمد، وفي لفظ وهو للترمذي: «بغير إذن سيده». ولفظ أبي داود: «بغير إذن مواليه». وقال الترمذي: «هذا حديث حسن صحيح». قلت: بل حسن فقط من أجل ابن عقيل

وعن جابر قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ايما عبد تزوج بغير اذن مواليه او اهله, فهو عاهر». رواه احمد, وابو داود, والترمذي وصححه, وكذلك ابن حبان - حسن. رواه احمد (3/ 301 و 377)، وابو داود (2078)، والترمذي (1111 و 1112) من طريق عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر، به. واللفظ لاحمد، وفي لفظ وهو للترمذي: «بغير اذن سيده». ولفظ ابي داود: «بغير اذن مواليه». وقال الترمذي: «هذا حديث حسن صحيح». قلت: بل حسن فقط من اجل ابن عقيل

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ স্ত্রীর ফুফু অথবা খালাকে একত্রে বিবাহ করা নিষেধ

৯৯১। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কেউ যেন ফুফু ও তার ভাতিজিকে এবং খালা এবং তার বোনঝিকে একত্রে বিয়ে না করে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا يُجْمَعُ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَعَمَّتِهَا, وَلَا بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَخَالَتِهَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5109)، ومسلم (1408)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا يجمع بين المراة وعمتها, ولا بين المراة وخالتها». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5109)، ومسلم (1408)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ইহরামরত ব্যক্তির নিজের বিবাহ করা বা অপরকে বিবাহ দেওয়া নিষেধ

৯৯২। ’উসমান (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, হাজের ইহরাম বেঁধে আছে এমন (মুহরিম) ব্যক্তি নিজে বিবাহ করতে পারবে না এবং অন্যকে বিয়ে দিতেও পারবে না।

মুসলিমের অন্য বর্ণনায় আছে- সে বিবাহের প্রস্তাব দিতে পারবে না; ইবনু হিব্বানের অতিরিক্ত বর্ণনায় আছে- তাকেও বিবাহের প্রস্তাব দেয়া চলবে না।[1]

وَعَنْ عُثْمَانَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: لَا يَنْكِحُ الْمُحْرِمُ, وَلَا يُنْكَحُ - رَوَاهُ مُسْلِمٌ. وَفِي رِوَايَةٍ لَهُ: وَلَا يَخْطُبُ
وَزَادَ ابْنُ حِبَّانَ: «وَلَا يُخْطَبُ عَلَيْهِ

وعن عثمان - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: لا ينكح المحرم, ولا ينكح - رواه مسلم. وفي رواية له: ولا يخطب وزاد ابن حبان: «ولا يخطب عليه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ইহরামরত ব্যক্তির নিজের বিবাহ করা বা অপরকে বিবাহ দেওয়া নিষেধ

৯৯৩. ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মাইমুনাকে (রাঃ) মুহরিম অবস্থায় বিবাহ করেছিলেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: تَزَوَّجَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - مَيْمُونَةَ وَهُوَ مُحْرِمٌ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (1837)، ومسلم (1410) قلت: وهذا الحديث في كونه مع «الصحيحين» إلا أن الناس قد أكثروا فيه الكلام لمخالفة ابن عباس غيره، فقال الحافظ في «الفتح» (965): «قال الأثرم: قلت لأحمد: إن أبا ثور يقول: بأيّ شيء يدفع حديث ابن عباس - أي -: مع صحته - قال: فقال: الله المستعان. ابن المسيب يقول: وَهِمَ ابن عباس، وميمونة تقول: تزوجني وهو حلال». وقال ابن عبد الهادي في «التنقيح» (204) نقلًا عن «الإرواء» (4/ 227 - 228) «وقد عد هذا - أي: حديث ابن عباس - من الغلطات التي وقعت في «الصحيح» وميمونة أخبرت أن هذا ما وقع، والإنسان أعرف بحال نفسه

وعن ابن عباس -رضي الله عنهما- قال: تزوج النبي - صلى الله عليه وسلم - ميمونة وهو محرم. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (1837)، ومسلم (1410) قلت: وهذا الحديث في كونه مع «الصحيحين» الا ان الناس قد اكثروا فيه الكلام لمخالفة ابن عباس غيره، فقال الحافظ في «الفتح» (965): «قال الاثرم: قلت لاحمد: ان ابا ثور يقول: باي شيء يدفع حديث ابن عباس - اي -: مع صحته - قال: فقال: الله المستعان. ابن المسيب يقول: وهم ابن عباس، وميمونة تقول: تزوجني وهو حلال». وقال ابن عبد الهادي في «التنقيح» (204) نقلا عن «الارواء» (4/ 227 - 228) «وقد عد هذا - اي: حديث ابن عباس - من الغلطات التي وقعت في «الصحيح» وميمونة اخبرت ان هذا ما وقع، والانسان اعرف بحال نفسه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ইহরামরত ব্যক্তির নিজের বিবাহ করা বা অপরকে বিবাহ দেওয়া নিষেধ

৯৯৪। মাইমুনাহ (রাঃ) থেকে নিজের সম্পর্কে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে হালাল (ইহরামহীন) অবস্থায় বিবাহ করেছিলেন।[1]

وَلِمُسْلِمٍ: عَنْ مَيْمُونَةَ نَفْسِهَا - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - تَزَوَّجَهَا وَهُوَ حَلَالٌ

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صحيح. رواه مسلم (1411)

ولمسلم: عن ميمونة نفسها - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - تزوجها وهو حلال - صحيح. رواه مسلم (1411)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ মাইমূনাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ বিবাহে শর্তাবলীর বিধান

৯৯৫. ’উকবাহ বিন ’আমির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে শর্তের দ্বারা তোমরা মেয়েদের লজ্জাস্থানকে বৈধ করে নিয়েছ ঐ শর্তসমূহ পূরণের সর্বাপেক্ষা অধিক গুরুত্বপূর্ণ।[1]

وَعَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ أَحَقَّ الشُّرُوطِ أَنْ يُوَفَّى بِهِ, مَا اسْتَحْلَلْتُمْ بِهِ الْفُرُوجَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ


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صحيح. رواه البخاري (2271 و5151)، ومسلم (1418)، واللفظ لمسلم

وعن عقبة بن عامر - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ان احق الشروط ان يوفى به, ما استحللتم به الفروج». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2271 و5151)، ومسلم (1418)، واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ মুতআ বিবাহ নিষিদ্ধ

৯৯৬. সালামাহ বিন আল-আকওয়া (রাঃ) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’আওতাস’ অভিযানকালে তিন দিনের জন্য ’মুতআহ’ বা সাময়িক বিবাহ-এর অনুমতি দিয়েছিলেন, তারপর তিনি তা নিষিদ্ধ করে দেন।[1]

وَعَنْ سَلَمَةَ بْنِ الْأَكْوَعِ - رضي الله عنه - قَالَ: رَخَّصَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَامَ أَوْطَاسٍ فِي الْمُتْعَةِ, ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ, ثُمَّ نَهَى عَنْهَا. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1405) (18) وأوطاس: واد بالطائف، وعام أوطاس هو عام الفتح

وعن سلمة بن الاكوع - رضي الله عنه - قال: رخص رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عام اوطاس في المتعة, ثلاثة ايام, ثم نهى عنها. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1405) (18) واوطاس: واد بالطاىف، وعام اوطاس هو عام الفتح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ মুতআ বিবাহ নিষিদ্ধ

৯৯৭. ’আলী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খায়বার যুদ্ধাভিযানের সময় ’মুতআহ’ (সাময়িক বিবাহ) নিষিদ্ধ করেন।

’আলী (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মেয়েদের সাথে মুত’আহ বিবাহ করা, গৃহপালিত গাধার মাংস খাওয়া, খাইবার যুদ্ধে নিষিদ্ধ করে দিয়েছেন।[1]


[৯৯৮] রবী’ বিন সাবরাহ (রহঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি তাঁর পিতা থেকে বর্ণনা করেন যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, আমি তোমাদেরকে মেয়েদের সাথে ’মুতআ’ বিবাহ (স্বল্পকালীন বিবাহ) করতে অনুমতি দিয়েছিলাম। অবশ্য আল্লাহ তাআলা এখন কিয়ামত পর্যন্ত তা হারাম করে দিয়েছেন। যদি ঐরূপ কোন মেয়ে কারো নিকটে এখনও থেকে থাকে। তবে তার পথকে উম্মুক্ত করে দিবে অর্থাৎ তাকে বিদায় করে দিবে এবং তাকে তোমাদের দেয়া কিছু ফেরত নেবে না। মুসলিম, আবূ দাউদ, ইবনু মাজাহ, আহমাদ ও ইবনু হিব্বান।[1]

وَعَنْ عَلَيٍّ - رضي الله عنه - قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ الْمُتْعَةِ عَامَ خَيْبَرَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5115)، ومسلم (1407)

وعن علي - رضي الله عنه - قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن المتعة عام خيبر. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5115)، ومسلم (1407)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ 'হিল্লা' বিবাহ করা হারাম

৯৯৮। ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (তিন তালাক প্রাপ্ত) হালালাকারী ও যার জন্য হালাল করা হয় উভয়ের উপর লানত করেছেন। —তিরমিযী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: لَعَنَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - الْمُحَلِّلَ وَالْمُحَلَّلَ لَهُ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالنَّسَائِيُّ, وَالتِّرْمِذِيُّ وَصَحَّحَهُ

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صحيح. رواه أحمد (1/ 448 و 462)، والنسائي (649)، والترمذي (1120) واللفظ للترمذي قال: حديث حسن صحيح

وعن ابن مسعود - رضي الله عنه - قال: لعن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - المحلل والمحلل له. رواه احمد, والنساىي, والترمذي وصححه - صحيح. رواه احمد (1/ 448 و 462)، والنساىي (649)، والترمذي (1120) واللفظ للترمذي قال: حديث حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ 'হিল্লা' বিবাহ করা হারাম

৯৯৯। ’আলী (রাঃ) হতেও এ অনুচ্ছেদে অনুরূপ হাদীসই বর্ণিত হয়েছে।[1]

وَفِي الْبَابِ: عَنْ عَلِيٍّ أَخْرَجَهُ الْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ

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صحيح بشواهده. رواه أبو داود (2076)، والترمذي (1119)، وابن ماجه (1935) وفي سنده الحارث الأعور، وهو ضعيف. لكن يشهد له ما قبله، وأيضا له شواهد أخرى مذكورة بالأصل

وفي الباب: عن علي اخرجه الاربعة الا النساىي - صحيح بشواهده. رواه ابو داود (2076)، والترمذي (1119)، وابن ماجه (1935) وفي سنده الحارث الاعور، وهو ضعيف. لكن يشهد له ما قبله، وايضا له شواهد اخرى مذكورة بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ব্যভিচারিণীকে বিবাহ করা হারাম এবং তাকে ব্যভিচারীর সাথে বিবাহ দেওয়া

১০০০। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, দোররা লাগান (যিনার দায়ে শাস্তি প্রাপ্ত) মেয়েকে তার মত (দুশ্চরিত্র) পুরুষ ব্যতীত বিবাহ করবে না। -এর সকল রাবী নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَنْكِحُ الزَّانِي الْمَجْلُودُ إِلَّا مِثْلَهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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صحيح. رواه أحمد (2/ 324)، وأبو داود (2052)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا ينكح الزاني المجلود الا مثله». رواه احمد, وابو داود, ورجاله ثقات - صحيح. رواه احمد (2/ 324)، وابو داود (2052)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ তিন তালাকপ্রাপ্ত মহিলা অপর কাউকে বিবাহ না করা পর্যন্ত তার পূর্বের স্বামীর জন্য বৈধ নয়

১০০১। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কোন ব্যক্তি তার স্ত্রীকে তিন তালাক দিয়েছিল; ঐ স্ত্রীলোকটিকে কোন ব্যক্তি বিবাহ করে, তারপর তাকে সহবাসের পূর্বেই তালাক দিয়ে দেয়। তারপর তার প্রথম স্বামী তাকে বিবাহ করতে ইচ্ছা করে। এ সম্বন্ধে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম জিজ্ঞাসিত হয়ে বলেনঃ না, যতক্ষণ না পরবর্তী স্বামী তার স্বাদ গ্রহণ (সঙ্গম) করবে। যেমন তার পূর্বস্বামী গ্ৰহণ করেছে। -শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا, قَالَتْ: طَلَّقَ رَجُلٌ امْرَأَتَهُ ثَلَاثًا, فَتَزَوَّجَهَا رَجُلٌ, ثُمَّ طَلَّقَهَا قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَ بِهَا, فَأَرَادَ زَوْجُهَا أَنْ يَتَزَوَّجَهَا, فَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ ذَلِكَ, فَقَالَ: «لَا. حَتَّى يَذُوقَ الْآخَرُ مِنْ عُسَيْلَتِهَا مَا ذَاقَ الْأَوَّلُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

-

صحيح. رواه البخاري (5261)، ومسلم (1433) (115)

وعن عاىشة رضي الله عنها, قالت: طلق رجل امراته ثلاثا, فتزوجها رجل, ثم طلقها قبل ان يدخل بها, فاراد زوجها ان يتزوجها, فسىل رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن ذلك, فقال: «لا. حتى يذوق الاخر من عسيلتها ما ذاق الاول». متفق عليه, واللفظ لمسلم - صحيح. رواه البخاري (5261)، ومسلم (1433) (115)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - বিবাহে বংশের সমতা রক্ষা প্রসঙ্গ

১০০২। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, আরবগণ একে অপরের সমপর্যায়ের, মুক্ত কৃতদাস মুক্ত কৃতদাসের সমতুল্য, তবে জেলা বা তাঁতী ও হাজ্জাম ব্যতীত। - এর সানাদে একজন রাবীর নাম অজ্ঞাত। আবূ হাতিম একে মুনকার বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الْعَرَبُ بَعْضُهُمْ أَكْفَاءُ بَعْضٍ, وَالْمَوَالِي بَعْضُهُمْ أَكْفَاءُ بَعْضٍ, إِلَّا حَائِكٌ أَوْ حَجَّامٌ». رَوَاهُ الْحَاكِمُ, وَفِي إِسْنَادِهِ رَاوٍ لَمْ يُسَمَّ, وَاسْتَنْكَرَهُ أَبُو حَاتِمٍ

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موضوع. وقد سأل ابن أبي حاتم أباه عنه فقال (1/ 412/ 1236): «هذا كذب. لا أصل له». وقال في موضع آخر (1/ 423 - 424/ 1275): «هذا حديث منكر». وأيضا قال بوضعه ابن حبان في «المجروحين» (2/ 124)، وابن عبد البر في «التمهيد» إذ قال: حديث منكر موضوع

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «العرب بعضهم اكفاء بعض, والموالي بعضهم اكفاء بعض, الا حاىك او حجام». رواه الحاكم, وفي اسناده راو لم يسم, واستنكره ابو حاتم - موضوع. وقد سال ابن ابي حاتم اباه عنه فقال (1/ 412/ 1236): «هذا كذب. لا اصل له». وقال في موضع اخر (1/ 423 - 424/ 1275): «هذا حديث منكر». وايضا قال بوضعه ابن حبان في «المجروحين» (2/ 124)، وابن عبد البر في «التمهيد» اذ قال: حديث منكر موضوع

হাদিসের মানঃ জাল (Fake)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - বিবাহে বংশের সমতা রক্ষা প্রসঙ্গ

১০০৩। ঐ হাদীসের একটি শাহিদ বাযযারে মু’আয বিন জাবাল থেকে মুনকাতে (বিচ্ছিন্ন) সানাদে রয়েছে।

وَلَهُ شَاهِدٌ عِنْدَ الْبَزَّارِ: عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ بِسَنَدٍ مُنْقَطِعٍ

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موضوع كسابقه

وله شاهد عند البزار: عن معاذ بن جبل بسند منقطع - موضوع كسابقه

হাদিসের মানঃ জাল (Fake)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - বৈবাহিক সম্পর্ক স্থাপনে বংশ কোন বিবেচ্য বিষয় নয়

১০০৪। ফাতিমাহ বিনতু কায়স (রাঃ) বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে বলেছেন, উসামাহ বিন যায়দকে বিবাহ কর।[1]

وَعَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ لَهَا: «انْكِحِي أُسَامَةَ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1480)

وعن فاطمة بنت قيس; ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال لها: «انكحي اسامة». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1480)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - বৈবাহিক সম্পর্ক স্থাপনে বংশ কোন বিবেচ্য বিষয় নয়

১০০৫। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, হে বনি বায়াযাহ, তোমরা আবূ হিন্দের বিবাহ দিয়ে দাও আর তার সঙ্গে বিবাহের সম্পর্ক কায়িম কর। আবূ হিন্দ পেশায় হাজ্জাম ছিলেন- আবূ দাউদও হাকিম হাসান সানাদে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «يَا بَنِي بَيَاضَةَ, أَنْكِحُوا أَبَا هِنْدٍ, وَانْكِحُوا إِلَيْهِ». وَكَانَ حَجَّامًا. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالْحَاكِمُ بِسَنَدٍ جَيِّدٍ

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حسن. رواه أبو داود (2102)، والحاكم (2/ 164) من طريق محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، به. وقال الحافظ في «التلخيص» (364): إسناده حسن

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «يا بني بياضة, انكحوا ابا هند, وانكحوا اليه». وكان حجاما. رواه ابو داود, والحاكم بسند جيد - حسن. رواه ابو داود (2102)، والحاكم (2/ 164) من طريق محمد بن عمرو، عن ابي سلمة، عن ابي هريرة، به. وقال الحافظ في «التلخيص» (364): اسناده حسن

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - দাসীকে আযাদ করার পর তার (দাস) স্বামীর সাথে বিয়ের সম্পর্ক স্থায়ী রাখা বা না রাখার অধিকার দেয়া

১০০৬। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, বারীরাকে তার দাসত্ব মোচনের পর তার (দাস) স্বামীর সাথে বিবাহ সম্পর্ক বহাল রাখা না রাখার স্বাধীনতা দেয়া হয়েছিল। (এটা একটা দীর্ঘ হাদীসের অংশ বিশেষ)।

মুসলিমে ’আয়িশা বর্ণিত আছে যে, তাঁর স্বামী দাস ছিলেন[1] এবং অন্য বর্ণনায় আছে তার স্বামী স্বাধীন ছিলেন। তবে (অর্থাৎ দাস ছিলেন) প্রথম এ বর্ণনাটি সর্বাপেক্ষা ঠিক।

বুখারীতে ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে সহীহ সূত্রে বর্ণিত হাদীসে আছে, তিনি দাস ছিলেন।[2]

وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: خُيِّرَتْ بَرِيرَةُ عَلَى زَوْجِهَا حِينَ عَتَقَتْ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ فِي حَدِيثٍ طَوِيلٍ
وَلِمُسْلِمٍ عَنْهَا: أَنَّ زَوْجَهَا كَانَ عَبْدًا
وَفِي رِوَايَةٍ عَنْهَا: كَانَ حُرًّا -. وَالْأَوَّلُ أَثْبَتُ
وَصَحَّ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عِنْدَ الْبُخَارِيِّ; أَنَّهُ كَانَ عَبْدًا

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صحيح. رواه البخاري (5097)، ومسلم (1504) (14) واللفظ لمسلم
رواه مسلم (1504) (11) و (13) وفي أخرى (9): ولو كان حرا لم يخيرها

وعن عاىشة رضي الله عنها قالت: خيرت بريرة على زوجها حين عتقت. متفق عليه في حديث طويل ولمسلم عنها: ان زوجها كان عبدا وفي رواية عنها: كان حرا -. والاول اثبت وصح عن ابن عباس عند البخاري; انه كان عبدا - صحيح. رواه البخاري (5097)، ومسلم (1504) (14) واللفظ لمسلم رواه مسلم (1504) (11) و (13) وفي اخرى (9): ولو كان حرا لم يخيرها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - যে ব্যক্তি ইসলাম ধর্মগ্রহণ করে এমতাবস্থায় তার কাছে আপনি দু’বোন স্ত্রী হিসেবে রয়েছে এর বিধান

১০০৭। যাহহাক বিন ফাইরূয দায়লামী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে বর্ণনা করেন, তিনি বলেন, আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমি ইসলাম গ্ৰহণ করেছি এবং আমার বিবাহে দু (সহোদর) বোন রয়েছে। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে বলেন: তোমার ইচ্ছামত এদের মধ্যে একজনকে তালাক দিয়ে পৃথক করে দাও। -ইবনু হিববান, দারাকুতনী ও বাইহাকী একে সহীহ বলেছেন; আর বুখারী সানাদের ত্রুটি বর্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنِ الضَّحَّاكِ بْنِ فَيْرُوزَ الدَّيْلَمِيِّ, عَنْ أَبِيهِ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنِّي أَسْلَمْتُ وَتَحْتِي أُخْتَانِ, فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «طَلِّقْ أَيَّتَهُمَا شِئْتَ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ, وَالْبَيْهَقِيُّ, وَأَعَلَّهُ الْبُخَارِيُّ

-

ضعيف. رواه أحمد (4/ 232)، وأبو داود (2243)، والترمذي (1129 و 1130)، وابن ماجه (1951)، وابن حبان (1376)، والدارقطني (3/ 273)، والبيهقي (7/ 184)، من طريق أبي وهب الجيشاني، عن الضحاك بن فيروز، به. وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: أبو وهب الجيشاني، والضحاك بن فيروز ترجمهما الحافظ في «التقريب» بقوله: «مقبول» فهذه علة، ولذلك فقول الترمذي: «حسن» فيه تساهل. وعلة أخرى قالها البخاري في «التاريخ الكبير» (2/ 2 / 333): «الضحاك بن فيروز الديلمي، عن أبيه، روى عنه أبو وهب الجيشاني، لا يعرف سماع بعضهم من بعض

وعن الضحاك بن فيروز الديلمي, عن ابيه قال: قلت: يا رسول الله! اني اسلمت وتحتي اختان, فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «طلق ايتهما شىت». رواه احمد, والاربعة الا النساىي, وصححه ابن حبان, والدارقطني, والبيهقي, واعله البخاري - ضعيف. رواه احمد (4/ 232)، وابو داود (2243)، والترمذي (1129 و 1130)، وابن ماجه (1951)، وابن حبان (1376)، والدارقطني (3/ 273)، والبيهقي (7/ 184)، من طريق ابي وهب الجيشاني، عن الضحاك بن فيروز، به. وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: ابو وهب الجيشاني، والضحاك بن فيروز ترجمهما الحافظ في «التقريب» بقوله: «مقبول» فهذه علة، ولذلك فقول الترمذي: «حسن» فيه تساهل. وعلة اخرى قالها البخاري في «التاريخ الكبير» (2/ 2 / 333): «الضحاك بن فيروز الديلمي، عن ابيه، روى عنه ابو وهب الجيشاني، لا يعرف سماع بعضهم من بعض

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - চারের অধিক স্ত্রী থাকাবস্থায় ইসলাম গ্ৰহণকারীর বিধান

১০০৮। সালিম হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা ’আবদুল্লাহ থেকে বর্ণনা করেছেন যে, গাইলান বিন সালামাহ (রাঃ) ইসলাম গ্রহণ করেন, সে সময় তাঁর দশটি স্ত্রী ছিল—তারা সকলেই তাঁর সাথে ইসলাম গ্ৰহণ করেন। অতঃপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাদের মধ্যে চারজনকে পছন্দ করে রাখতে হুকুম দিলেন। —ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন আর বুখারী, আবূ যুর’আহ ও আবূ হাতিম-এর ইল্লত বৰ্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنْ سَالِمٍ, عَنْ أَبِيهِ, أَنَّ غَيْلَانَ بْنَ سَلَمَةَ أَسْلَمَ وَلَهُ عَشْرُ نِسْوَةٍ, فَأَسْلَمْنَ مَعَهُ, فَأَمَرَهُ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ يَتَخَيَّرَ مِنْهُنَّ أَرْبَعًا. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ، وَأَعَلَّهُ الْبُخَارِيُّ, وَأَبُو زُرْعَةَ, وَأَبُو حَاتِمٍ

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رواه أحمد (23 و 14)، والترمذي (1128)، وابن حبان (1377)، والحاكم (292) وهو معلول وقد أبان الحافظ في «التلخيص» (3/ 168 - 169) عن علله

وعن سالم, عن ابيه, ان غيلان بن سلمة اسلم وله عشر نسوة, فاسلمن معه, فامره النبي - صلى الله عليه وسلم - ان يتخير منهن اربعا. رواه احمد, والترمذي, وصححه ابن حبان, والحاكم، واعله البخاري, وابو زرعة, وابو حاتم - رواه احمد (23 و 14)، والترمذي (1128)، وابن حبان (1377)، والحاكم (292) وهو معلول وقد ابان الحافظ في «التلخيص» (3/ 168 - 169) عن علله

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - স্বামী-স্ত্রীর কোন একজন অপরজনের পূর্বে ইসলাম গ্রহণকরার বিধান

১০০৯। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর কন্যা যায়নাব’ (রাঃ)-কে প্রথম বিবাহের সুবাদে ছয় বছর পর আবূল আস ইবনুর রবী (রাঃ)-এর নিকট ফেরত পাঠান। নতুনভাবে তাঁর বিবাহ পড়াননি। —আর আহমাদ ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: رَدَّ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - ابْنَتَهُ زَيْنَبَ عَلَى أَبِي الْعَاصِ بْنِ الرَّبِيعِ, بَعْدَ سِتِّ سِنِينَ بِالنِّكَاحِ الْأَوَّلِ, وَلَمْ يُحْدِثْ نِكَاحًا. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ (1) إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ أَحْمَدُ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (1876 و 2366)، وأبو داود (2240)، والترمذي (1143)، وابن ماجه (2009)، والحاكم (2/ 200)، من طريق محمد بن إسحاق، عن داود بن الحصين، عن عكرمة، عن ابن عباس، به. قلت: وابن إسحاق صرَّح بالتحديث، ولكن داود بن الحصين ضعيف في عكرمة، فقد قال أبو داود: «أحاديثه عن عكرمة مناكير، وأحاديثه عن شيوخه مستقيمة». وقال الحافظ في «التقريب»: «ثقة إلا في عكرمة». ولذلك قال الترمذي: «هذا حديث ليس بإسناده بأس، ولكن لا نعرف وجه هذا الحديث، ولعله قد جاء هذا الحديث من قِبَل داود بن حصين؛ من قِبَل حفظه». قلت: وللحديث شواهد مرسلة بأسانيد صحيحة أوردها ابن سعد في ترجمة زينب -رضي الله عنها- في «الطبقات» وأما عن تصحيح أحمد، فسيأتي في الحديث التالي

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: رد النبي - صلى الله عليه وسلم - ابنته زينب على ابي العاص بن الربيع, بعد ست سنين بالنكاح الاول, ولم يحدث نكاحا. رواه احمد, والاربعة (1) الا النساىي, وصححه احمد, والحاكم - صحيح. رواه احمد (1876 و 2366)، وابو داود (2240)، والترمذي (1143)، وابن ماجه (2009)، والحاكم (2/ 200)، من طريق محمد بن اسحاق، عن داود بن الحصين، عن عكرمة، عن ابن عباس، به. قلت: وابن اسحاق صرح بالتحديث، ولكن داود بن الحصين ضعيف في عكرمة، فقد قال ابو داود: «احاديثه عن عكرمة مناكير، واحاديثه عن شيوخه مستقيمة». وقال الحافظ في «التقريب»: «ثقة الا في عكرمة». ولذلك قال الترمذي: «هذا حديث ليس باسناده باس، ولكن لا نعرف وجه هذا الحديث، ولعله قد جاء هذا الحديث من قبل داود بن حصين؛ من قبل حفظه». قلت: وللحديث شواهد مرسلة باسانيد صحيحة اوردها ابن سعد في ترجمة زينب -رضي الله عنها- في «الطبقات» واما عن تصحيح احمد، فسياتي في الحديث التالي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - স্বামী-স্ত্রীর কোন একজন অপরজনের পূর্বে ইসলাম গ্রহণকরার বিধান

১০১০. ’আমর ইবনু শু’আইব (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে, তিনি তাঁর দাদা থেকে বর্ণনা করেছেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম স্বীয় কন্যা যায়নাব (রাঃ)-কে তাঁর স্বামী আবূল আসের নিকটে নতুনভাবে বিবাহ পড়িয়ে ফেরত দিয়েছিলেন।

তিরমিযী বলেছেন, ইবনু ’আব্বাস কর্তৃক বর্ণিত হাদীসটি সানাদের দিক দিয়ে জাইয়্যিদ (উত্তম), তাতে ’আমর বিন শু’আইবের হাদীসের উপর ’আমল রয়েছে (কার্যকর করা হচ্ছে)।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - رَدَّ ابْنَتَهُ زَيْنَبَ عَلَى أَبِي الْعَاصِ بِنِكَاحٍ جَدِيدٍ. قَالَ التِّرْمِذِيُّ: حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ أَجْوَدُ إِسْنَادًا, وَالْعَمَلُ عَلَى حَدِيثِ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ

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ضعيف. رواه أحمد (2/ 207 - 208) والترمذي (1142)، وابن ماجه (2010) من طريق حجاج بن أرطاة، عن عمرو بن شعيب، به. وقال الترمذي: «هذا حديث في إسناده مقال، وفي الحديث الآخر - حديث ابن عباس - أيضا مقال». وقال أيضا: «قال يزيد بن هارون: حديث ابن عباس أجود إسنادا». قال عبد الله بن أحمد (11/ 6939 / شاكر): «قال أبي في حديث حجاج: «رد زينب» قال: هذا حديث ضعيف. أو قال: وَاهٍ. ولم يسمعه الحجاج من عمرو بن شعيب، إنما سمعه من محمد بن عبيد الله العرزمي لا يساوي حديثه شيئا. والحديث الصحيح الذي روي، أن النبي -صلى الله عليه وسلم- أقرهما على النكاح الأول

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - رد ابنته زينب على ابي العاص بنكاح جديد. قال الترمذي: حديث ابن عباس اجود اسنادا, والعمل على حديث عمرو بن شعيب - ضعيف. رواه احمد (2/ 207 - 208) والترمذي (1142)، وابن ماجه (2010) من طريق حجاج بن ارطاة، عن عمرو بن شعيب، به. وقال الترمذي: «هذا حديث في اسناده مقال، وفي الحديث الاخر - حديث ابن عباس - ايضا مقال». وقال ايضا: «قال يزيد بن هارون: حديث ابن عباس اجود اسنادا». قال عبد الله بن احمد (11/ 6939 / شاكر): «قال ابي في حديث حجاج: «رد زينب» قال: هذا حديث ضعيف. او قال: واه. ولم يسمعه الحجاج من عمرو بن شعيب، انما سمعه من محمد بن عبيد الله العرزمي لا يساوي حديثه شيىا. والحديث الصحيح الذي روي، ان النبي -صلى الله عليه وسلم- اقرهما على النكاح الاول

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - স্বামী-স্ত্রীর কোন একজন অপরজনের পূর্বে ইসলাম গ্রহণকরার বিধান

১০১১। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কোন এক মহিলা ইসলাম গ্রহণ করে (দ্বিতীয়) বিবাহ করে নিলেন। তারপর তার পূর্ব স্বামী এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমিও ইসলাম গ্রহণ করেছি আর আমার ইসলাম গ্রহণের কথা আমার স্ত্রী জেনেছে। অতঃপর রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ঐ স্ত্রী লোকটিকে তার ২য় স্বামীর নিকট থেকে বিচ্ছেদ করে দিয়ে তার প্রথম স্বামীকে ফিরিয়ে দিলেন। —ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: أَسْلَمَتْ امْرَأَةٌ, فَتَزَوَّجَتْ, فَجَاءَ زَوْجُهَا, فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنِّي كُنْتُ أَسْلَمْتُ, وَعَلِمَتْ بِإِسْلَامِي, فَانْتَزَعَهَا رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - مِنْ زَوْجِهَا الْآخَرِ, وَرَدَّهَا إِلَى زَوْجِهَا الْأَوَّلِ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ. وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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ضعيف. رواه أحمد (2059 و 2974)، وأبو داود (2238)، والترمذي (1144)، وابن ماجه (2008)، وابن حبان (1280)، والحاكم (200)، من طريق سماك بن حرب، عن عكرمة، عن ابن عباس، به. واختلف قول الترمذي، فقال في «السنن»: «صحيح» وفي «تحفة الأشراف»: «حسن». قلت: وسواء كان هذا أو ذاك فالحديث إسناده ضعيف، وعلته رواية سماك، عن عكرمة فقد قال باضطرابها ابن المديني ويعقوب وغيرهما، ولذلك قال الحافظ في «التقريب»: «صدوق، وروايته عن عكرمة -خاصةً- مضطربة، وقد تغير بآخره، فكان ربما يُلَقَّن

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما - قال: اسلمت امراة, فتزوجت, فجاء زوجها, فقال: يا رسول الله! اني كنت اسلمت, وعلمت باسلامي, فانتزعها رسول الله - صلى الله عليه وسلم - من زوجها الاخر, وردها الى زوجها الاول. رواه احمد, وابو داود, وابن ماجه. وصححه ابن حبان, والحاكم - ضعيف. رواه احمد (2059 و 2974)، وابو داود (2238)، والترمذي (1144)، وابن ماجه (2008)، وابن حبان (1280)، والحاكم (200)، من طريق سماك بن حرب، عن عكرمة، عن ابن عباس، به. واختلف قول الترمذي، فقال في «السنن»: «صحيح» وفي «تحفة الاشراف»: «حسن». قلت: وسواء كان هذا او ذاك فالحديث اسناده ضعيف، وعلته رواية سماك، عن عكرمة فقد قال باضطرابها ابن المديني ويعقوب وغيرهما، ولذلك قال الحافظ في «التقريب»: «صدوق، وروايته عن عكرمة -خاصة- مضطربة، وقد تغير باخره، فكان ربما يلقن

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১. বিবাহের ব্যাপারে সমতা ও বিচ্ছেদের স্বাধীনতা - বিবাহের মধ্যে ত্রুটিসমূহ

১০১২। যায়দ বিন কা’ব বিন উজরাহ থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বানু গিফার গোত্রের ’আলিয়াহ নামক এক মহিলাকে বিবাহ করেন। তারপর ঐ মহিলা নবী রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে প্রবেশ করেন ও তাঁর দেহাবরণ উন্মোচন করেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর কোমরের কাছাকাছি অঙ্গে সাদা দাগ দেখতে পান এবং তাঁকে বলেন- কাপড় পরে তুমি তোমার পরিবারের নিকটে চলে যাও। তিনি তাকে তার মোহর দিয়ে দেয়ার জন্য আদেশ করেন।

হাকিম এটি বর্ণনা করেছেন। এ হাদীসের সূত্রে জামিল বিন যায়দ একজন অজ্ঞাত রাবী বা বর্ণনাকারী। তাঁর ওস্তাদ কে ছিলেন এ নিয়ে বিরাট মতভেদ ঘটেছে।

সাঈদ বিন মুসাইয়্যিব (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, ’উমার বিন খাত্তাব (রাঃ) বলেছেন- যে ব্যক্তি কোন মহিলাকে বিবাহ করে, অতঃপর তার সাথে মিলন করতে গিয়ে দেখে যে, ঐ নারী শ্বেত কুষ্ঠরোগী বা পাগলী বা কুষ্ঠ রোগগ্ৰস্তা তাহলে ঐ মহিলার জন্য তার স্বামীর উপর স্পর্শ করা (মিলন) হেতু মাহর আদায় যোগ্য হবে। তবে ঐ ব্যাপারে যদি কেউ ধোঁ‌কা দিয়ে থাকে তাহলে তাকেই মোহরের জন্য দায়ী করা হবে। হাদীসটিকে সাঈদ বিন মানসূর, মালিক, ইবনু আবী শাইবাহ বৰ্ণনা করেছেন। হাদীসটির রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।

উক্ত সাহাবী সাঈদ আলী (রাঃ) থেকে অনুরূপ আরো অতিরিক্ত বর্ণনা করেছেন- তাতে আছে আর যে মহিলার গুপ্তাঙ্গে ক্বার্ণ অর্থাৎ গুপ্তাঙ্গে দাঁতের অনুরূপ শক্ত বস্তু উদগত হয়ে থাকে তাহলে স্বামী বিবাহ বিচ্ছেদের অধিকার পাবে। আর ঐ স্ত্রীর সাথে মিলনে গুপ্তাঙ্গ ব্যবহার হয়ে থাকলে স্ত্রী মোহর প্রাপ্য যা দ্বারা তার গুপ্তাঙ্গ হালাল হবে।

এবং সাঈদ বিন মুসায়্যিবের সূত্রে আরও আছে তিনি (সাঈদ) বলেছেন– ’উমার (রাঃ) তাঁর খেলাফতকালে ইন্নীন বা পুরুষত্বহীনকে এক বছর অবসর দেয়ার ফয়সালা প্ৰদান করেছিলেন। -এর বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ زَيْدِ بْنِ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ, عَنْ أَبِيهِ قَالَ: تَزَوَّجَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - الْعَالِيَةَ مِنْ بَنِي غِفَارٍ, فَلَمَّا دَخَلَتْ عَلَيْهِ وَوَضَعَتْ ثِيَابَهَا, رَأَى بِكَشْحِهَا بَيَاضًا، فَقَالَ: «الْبَسِي ثِيَابَكِ, وَالْحَقِي بِأَهْلِكِ»، وَأَمَرَ لَهَا بِالصَّدَاقِ. رَوَاهُ الْحَاكِمُ, وَفِي إِسْنَادِهِ جَمِيلُ بْنُ زَيْدٍ وَهُوَ مَجْهُولٌ, وَاخْتُلِفَ عَلَيْهِ فِي شَيْخِهِ اِخْتِلَافًا كَثِيرًا

وَعَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ; أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ - رضي الله عنه - قَالَ: أَيُّمَا رَجُلٍ تَزَوَّجَ امْرَأَةً, فَدَخَلَ بِهَا, فَوَجَدَهَا بَرْصَاءَ, أَوْ مَجْنُونَةً, أَوْ مَجْذُومَةً, فَلَهَا الصَّدَاقُ بِمَسِيسِهِ إِيَّاهَا, وَهُوَ لَهُ عَلَى مَنْ غَرَّهُ مِنْهَا. أَخْرَجَهُ سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ, وَمَالِكٌ, وَابْنُ أَبِي شَيْبَةَ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

وَرَوَى سَعِيدٌ أَيْضًا: عَنْ عَلِيٍّ نَحْوَهُ, وَزَادَ: وَبِهَا قَرَنٌ, فَزَوْجُهَا بِالْخِيَارِ, فَإِنْ مَسَّهَا فَلَهَا الْمَهْرُ بِمَا اسْتَحَلَّ مِنْ فَرْجِهَا

وَمِنْ طَرِيقِ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ أَيْضًا قَالَ: قَضَى [بِهِ] عُمَرُ فِي الْعِنِّينِ, أَنْ يُؤَجَّلَ سَنَةً، وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ
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ضعيف جدا. رواه الحاكم (4/ 34)، من طريق أبي معاوية الضرير، عن جميل بن زيد الطائي، عن زيد بن كعب، به. وجميل بن زيد قال عنه ابن معين: «ليس بثقة». وقال البخاري: «لم يصح حديثه». وأما الإختلاف عليه في الحديث فهو كثير كما قال الحافظ، ومن قبله قال ابن عدي في «الكامل» بعد أن ذكر شيئا من هذا الاختلاف (2/ 593): «جميل بن زيد يُعْرف بهذا الحديث، واضطرب الرواة عنه بهذا الحديث حسب ما ذكره البخاري، وتلون على ألوانه

وعن زيد بن كعب بن عجرة, عن ابيه قال: تزوج رسول الله - صلى الله عليه وسلم - العالية من بني غفار, فلما دخلت عليه ووضعت ثيابها, راى بكشحها بياضا، فقال: «البسي ثيابك, والحقي باهلك»، وامر لها بالصداق. رواه الحاكم, وفي اسناده جميل بن زيد وهو مجهول, واختلف عليه في شيخه اختلافا كثيرا وعن سعيد بن المسيب; ان عمر بن الخطاب - رضي الله عنه - قال: ايما رجل تزوج امراة, فدخل بها, فوجدها برصاء, او مجنونة, او مجذومة, فلها الصداق بمسيسه اياها, وهو له على من غره منها. اخرجه سعيد بن منصور, ومالك, وابن ابي شيبة, ورجاله ثقات وروى سعيد ايضا: عن علي نحوه, وزاد: وبها قرن, فزوجها بالخيار, فان مسها فلها المهر بما استحل من فرجها ومن طريق سعيد بن المسيب ايضا قال: قضى [به] عمر في العنين, ان يوجل سنة، ورجاله ثقات - ضعيف جدا. رواه الحاكم (4/ 34)، من طريق ابي معاوية الضرير، عن جميل بن زيد الطاىي، عن زيد بن كعب، به. وجميل بن زيد قال عنه ابن معين: «ليس بثقة». وقال البخاري: «لم يصح حديثه». واما الاختلاف عليه في الحديث فهو كثير كما قال الحافظ، ومن قبله قال ابن عدي في «الكامل» بعد ان ذكر شيىا من هذا الاختلاف (2/ 593): «جميل بن زيد يعرف بهذا الحديث، واضطرب الرواة عنه بهذا الحديث حسب ما ذكره البخاري، وتلون على الوانه

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্ত্রীর পশ্চাৎদ্বার দিয়ে সঙ্গম করা হারাম

১০১৩. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, স্ত্রীর বাহ্যদ্বারে সঙ্গমকারী ব্যক্তি অভিশপ্ত। -শব্দ বিন্যাস নাসায়ীর, এ হাদীসের রাবীগণ নির্ভরযোগ্য। কিন্তু এর সানাদের উপর ইরাসালের দোষারোপ করা হয়েছে।[1]

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَلْعُونٌ مَنْ أَتَى امْرَأَةً فِي دُبُرِهَا». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ وَاللَّفْظُ لَهُ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ, وَلَكِنْ أُعِلَّ بِالْإِرْسَالِ

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صحيح بشواهده. وفي «الأصل» تفصيل ذلك

عن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ملعون من اتى امراة في دبرها». رواه ابو داود, والنساىي واللفظ له, ورجاله ثقات, ولكن اعل بالارسال - صحيح بشواهده. وفي «الاصل» تفصيل ذلك

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্ত্রীর পশ্চাৎদ্বার দিয়ে সঙ্গম করা হারাম

১০১৪। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি পুরুষের অথবা স্ত্রীর বাহ্যদ্বারে সঙ্গম করবে তার প্রতি আল্লাহ তাকবেন না। —হাদসিটিকে মাওকুফ হওয়ার দোষারোপ করা হয়েছে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَنْظُرُ اللَّهُ إِلَى رَجُلٍ أَتَى رَجُلًا أَوْ امْرَأَةً فِي دُبُرِهَا». رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ, وَالنَّسَائِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَأُعِلَّ بِالْوَقْفِ

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صحيح بشواهده

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا ينظر الله الى رجل اتى رجلا او امراة في دبرها». رواه الترمذي, والنساىي, وابن حبان, واعل بالوقف - صحيح بشواهده

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্ত্রীর সাথে সদাচারণ করার ব্যাপারে উৎসাহ প্রদান

১০১৫। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন, যে আল্লাহ এবং আখিরাতের ওপর বিশ্বাস রাখে, সে যেন আপন প্রতিবেশীকে কষ্ট না দেয়। আর তোমরা নারীদের সঙ্গে সদ্ব্যবহার করবে। কেননা, তাদেরকে সৃষ্টি করা হয়েছে পাঁজরার হাড় থেকে এবং সবচেয়ে বাঁকা হচ্ছে পাঁজরার ওপরের হাড়। যদি তা সোজা করতে যাও, তাহলে ভেঙ্গে যাবে। আর যদি তা যেভাবে আছে সেভাবে রেখে দাও তাহলে বাঁকাই থাকবে। অতএব, তোমাদেরকে ওসীয়ত করা হলো নারীদের সঙ্গে সদ্ব্যবহার করার জন্য।

শব্দ বিন্যাস বুখারীর আর মুসলিমে আছে—আর যদি তোমরা তাদের থেকে ফায়দা উঠাতে চাও তাহলে বাঁকা থাকা অবস্থায়ই তাদের থেকে উপভোগ নিতে থাকবে। আর যদি সোজা করতে যাও তাহলে তা ভেঙ্গে ফেলবে। আর ভেঙ্গে ফেলার অর্থ তালাক দেয়া।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلَا يُؤْذِي جَارَهُ, وَاسْتَوْصُوا بِالنِّسَاءِ خَيْرًا, فَإِنَّهُنَّ خُلِقْنَ مِنْ ضِلَعٍ, وَإِنَّ أَعْوَجَ شَيْءٍ فِي الضِّلَعِ أَعْلَاهُ, فَإِنْ ذَهَبْتَ تُقِيمَهُ كَسَرْتَهُ, وَإِنْ تَرَكْتَهُ لَمْ يَزَلْ أَعْوَجَ, فَاسْتَوْصُوا بِالنِّسَاءِ خَيْرًا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ
وَلِمُسْلِمٍ: «فَإِنِ اسْتَمْتَعْتَ بِهَا اسْتَمْتَعْتَ وَبِهَا عِوَجٌ, وَإِنْ ذَهَبْتَ تُقِيمُهَا كَسَرْتَهَا, وَكَسْرُهَا طَلَاقُهَا

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صحيح. رواه البخاري (9 52 - 253 / فتح)، ومسلم (1468) (62) «تنبيه»: هذا الحديث حقيقته حديثان، ونبَّه على ذلك الحافظ نفسه في «الفتح» فإلى قوله: «جاره» حديث، والباقي حديث، وفي رواية مسلم لم يذكر الحديث الأول، وإنما ذكر حديثا آخر، وهو: من كان يؤمن بالله واليوم الآخر، فإذا شهد أمرا فليتكلم بخير أو ليسكت

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من كان يومن بالله واليوم الاخر فلا يوذي جاره, واستوصوا بالنساء خيرا, فانهن خلقن من ضلع, وان اعوج شيء في الضلع اعلاه, فان ذهبت تقيمه كسرته, وان تركته لم يزل اعوج, فاستوصوا بالنساء خيرا». متفق عليه, واللفظ للبخاري ولمسلم: «فان استمتعت بها استمتعت وبها عوج, وان ذهبت تقيمها كسرتها, وكسرها طلاقها - صحيح. رواه البخاري (9 52 - 253 / فتح)، ومسلم (1468) (62) «تنبيه»: هذا الحديث حقيقته حديثان، ونبه على ذلك الحافظ نفسه في «الفتح» فالى قوله: «جاره» حديث، والباقي حديث، وفي رواية مسلم لم يذكر الحديث الاول، وانما ذكر حديثا اخر، وهو: من كان يومن بالله واليوم الاخر، فاذا شهد امرا فليتكلم بخير او ليسكت

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - যে ব্যক্তি দীর্ঘদিন ধরে বাড়িতে অনুপস্থিত থাকে তার রাত্রিকালে (হঠাৎ করে) বাড়িতে প্রবেশ করা নিষেধ

১০১৬। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমরা কোন এক যুদ্ধে (হুদাইবিয়ার সন্ধিকালে) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাথে ছিলাম। তারপর যখন আমরা মদীনাহয় প্রবেশ করব, এমন সময় নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে বললেন, তুমি অপেক্ষা কর এবং রাতে প্রবেশ কর, যেন অনুপস্থিত স্বামীর স্ত্রী নিজের অবিন্যস্ত কেশরাশি বিন্যাস করতে পারে এবং লোম পরিষ্কার করতে পারে।

বুখারীর অন্য বর্ণনায় আছে-যখন তোমাদের কেউ দীর্ঘ সময় বাড়ি থেকে অনুপস্থিত থাকে। সে যেন তার বাড়িতে রাত্রিকালে (হঠাৎ করে) প্রবেশ না করে।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فِي غَزَاةٍ, فَلَمَّا قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ, ذَهَبْنَا لِنَدْخُلَ. فَقَالَ: «أَمْهِلُوا حَتَّى تَدْخُلُوا لَيْلًا». يَعْنِي: عِشَاءً - لِكَيْ تَمْتَشِطَ الشَّعِثَةُ, وَتَسْتَحِدَّ الْمَغِيبَةُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: إِذَا أَطَالَ أَحَدُكُمُ الْغَيْبَةَ, فَلَا يَطْرُقْ أَهْلَهُ لَيْلًا

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صحيح. رواه البخاري (5079)، ومسلم (715) (57) واللفظ للبخاري وهو عندهما مطول

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: كنا مع رسول الله - صلى الله عليه وسلم - في غزاة, فلما قدمنا المدينة, ذهبنا لندخل. فقال: «امهلوا حتى تدخلوا ليلا». يعني: عشاء - لكي تمتشط الشعثة, وتستحد المغيبة. متفق عليه وفي رواية للبخاري: اذا اطال احدكم الغيبة, فلا يطرق اهله ليلا - صحيح. رواه البخاري (5079)، ومسلم (715) (57) واللفظ للبخاري وهو عندهما مطول

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্বামী পক্ষে স্ত্রীর গোপন বিষয় ফাঁস করা হারাম

১০১৭। আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, পরকালে সর্বাপেক্ষা নিকৃষ্ট শ্রেণীর মানুষ আল্লাহর নিকটে ঐ লোকেরা হবে যে স্ত্রীকে উপভোগ করে এবং তার স্ত্রীও তাকে উপভোগ করে তারপর তার স্ত্রীর গুপ্ত রহস্য অন্যের নিকটে ফাঁস করে দেয়।[1]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ شَرَّ النَّاسِ مَنْزِلَةً عِنْدَ اللَّهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ; الرَّجُلُ يُفْضِي إِلَى امْرَأَتِهِ وَتُفْضِي إِلَيْهِ, ثُمَّ يَنْشُرُ سِرَّهَا». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ

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منكر. رواه مسلم (1437) وآفته عمر بن حمزة قال عنه أحمد في «العلل» (2/ 44 / 317) أحاديثه أحاديث مناكير. وقال الذهبي في «الكاشف»: «ضعفه ابن معين والنسائي» ثم أضاف إلى ذلك كلمة أحمد السابقة. وقال الحافظ في «التقريب»: «ضعيف». ونص الذهبي في «الميزان» (3/ 192) على هذا الحديث، وأنه: مما استنكر لعمر

وعن ابي سعيد الخدري - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ان شر الناس منزلة عند الله يوم القيامة; الرجل يفضي الى امراته وتفضي اليه, ثم ينشر سرها». اخرجه مسلم - منكر. رواه مسلم (1437) وافته عمر بن حمزة قال عنه احمد في «العلل» (2/ 44 / 317) احاديثه احاديث مناكير. وقال الذهبي في «الكاشف»: «ضعفه ابن معين والنساىي» ثم اضاف الى ذلك كلمة احمد السابقة. وقال الحافظ في «التقريب»: «ضعيف». ونص الذهبي في «الميزان» (3/ 192) على هذا الحديث، وانه: مما استنكر لعمر

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্বামীর উপর স্ত্রীর অধিকার

১০১৮। হাকিম ইবনু মুআবিয়াহ হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা হতে বর্ণনা করেন, তিনি বলেছেন-আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমাদের উপর স্ত্রীর হক কি? তিনি বললেন, তুমি যখন খাবে তোমার স্ত্রীকেও খাওয়াবে, আর যখন তুমি পোষাক পরবে তাকেও পোষাক পরাবে। আর মুখে আঘাত করবে না, তাকে অশ্লীল ভাষায় গালি দিবে না, তার সাথে চলাফেরা, কথাবার্তা বর্জন করবে না- তবে বাড়ির মধ্যে রেখে তা করতে পারবে। --বুখারী এ হাদীসের কিছু অংশকে মুয়াল্লাক (সানাদ বিহীন) রূপে বর্ণনা করেছেন। ইবনু হিব্বান ও হাকিম একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ حَكِيمِ بْنِ مُعَاوِيَةَ, عَنْ أَبِيهِ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! مَا حَقُّ زَوْجِ أَحَدِنَا عَلَيْهِ قَالَ: «تُطْعِمُهَا إِذَا أَكَلْتَ, وَتَكْسُوهَا إِذَا اكْتَسَيْتَ, وَلَا تَضْرِبِ الْوَجْهَ, وَلَا تُقَبِّحْ, وَلَا تَهْجُرْ إِلَّا فِي الْبَيْتِ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَابْنُ مَاجَهْ، وَعَلَّقَ الْبُخَارِيُّ بَعْضَهُ، وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (4/ 447 و 5/ 3 و 5)، وأبو داود (2142)، والنسائي في «عِشْرَة النساء» (289)، وابن ماجه (1850)، وابن حبان (1268)، والحاكم (2/ 187 - 188) وعلَّق البخاري منه فقط (9/ 300 / فتح) قوله: غير أن لا تهجر إلا في البيت

وعن حكيم بن معاوية, عن ابيه قال: قلت: يا رسول الله! ما حق زوج احدنا عليه قال: «تطعمها اذا اكلت, وتكسوها اذا اكتسيت, ولا تضرب الوجه, ولا تقبح, ولا تهجر الا في البيت». رواه احمد, وابو داود, والنساىي, وابن ماجه، وعلق البخاري بعضه، وصححه ابن حبان, والحاكم - صحيح. رواه احمد (4/ 447 و 5/ 3 و 5)، وابو داود (2142)، والنساىي في «عشرة النساء» (289)، وابن ماجه (1850)، وابن حبان (1268)، والحاكم (2/ 187 - 188) وعلق البخاري منه فقط (9/ 300 / فتح) قوله: غير ان لا تهجر الا في البيت

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্ত্রীর সম্মুখভাগ দিয়ে যে কোন পদ্ধতিতে সঙ্গম করা জায়েয

১০১৯। জাবির বিন ’আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, ইয়াহুদীরা বলত যে, যদি কেউ স্ত্রীর পেছন দিক থেকে সহবাস করে তাহলে সন্তান টেরা চোখের হয়। তখন (এর প্রতিবাদে) (نِسَاؤُكُمْ حَرْثٌ لَكُمْ) আয়াত অবতীর্ণ হয়। শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: كَانَتِ الْيَهُودُ تَقُولُ: إِذَا أَتَى الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ مِنْ دُبُرِهَا فِي قُبُلِهَا, كَانَ الْوَلَدُ أَحْوَلَ. فَنَزَلَتْ: (نِسَاؤُكُمْ حَرْثٌ لَكُمْ فَأْتُوْا حَرْثَكُمْ أَنَّى شِئْتُمْ) [الْبَقَرَة: 223]. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

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صحيح. رواه البخاري (4528)، ومسلم (1435) (117)

وعن جابر بن عبد الله - رضي الله عنهما- قال: كانت اليهود تقول: اذا اتى الرجل امراته من دبرها في قبلها, كان الولد احول. فنزلت: (نساوكم حرث لكم فاتوا حرثكم انى شىتم) [البقرة: 223]. متفق عليه, واللفظ لمسلم - صحيح. رواه البخاري (4528)، ومسلم (1435) (117)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - সঙ্গমের সময় যা বলা মুস্তাহাব

১০২০। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন-তোমাদের মধ্যে কেউ যখন যৌন সঙ্গম করে, তখন যেন সে বলে, ’বিসমিল্লাহ আল্লাহুম্মা জান্নিবনাশ শায়তানা ওয়া জান্নিবিশ শায়তানা মা রাযাকাতানা”-আল্লাহর নামে শুরু করছি, হে আল্লাহ! আমাকে তুমি শয়তান থেকে দূরে রাখ এবং আমাকে তুমি যা দান করবে তা থেকে শয়তানকে দূরে রাখ। এরপরে যদি তাদের দু’জনের মাঝে কিছু ফল দেয়া হয় অথবা বাচ্চা পয়দা হয়, তাকে শয়তান কখনো ক্ষতি করতে পারবে না।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَوْ أَنَّ أَحَدَكُمْ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَأْتِيَ أَهْلَهُ قَالَ: بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا; فَإِنَّهُ إِنْ يُقَدَّرْ بَيْنَهُمَا وَلَدٌ فِي ذَلِكَ, لَمْ يَضُرَّهُ الشَّيْطَانُ أَبَدًا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (51655)، ومسلم (1434) واللفظ لمسلم

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لو ان احدكم اذا اراد ان ياتي اهله قال: بسم الله، اللهم جنبنا الشيطان وجنب الشيطان ما رزقتنا; فانه ان يقدر بينهما ولد في ذلك, لم يضره الشيطان ابدا». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (51655)، ومسلم (1434) واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - স্ত্রীর স্বামীর বিছানায় (মিলনের জন্য) যাওয়ার অস্বীকৃতি জানানো নিষেধ

১০২১। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যদি কোন পুরুষ তার স্ত্রীকে তার সঙ্গে একই বিছানায় শোয়ার জন্য ডাকে, আর সে আসতে অস্বীকার করে, তাহলে সকাল পর্যন্ত ফেরেশতাগণ ঐ মহিলার ওপর লা’নত বর্ষণ করতে থাকে। শব্দ বিন্যাস বুখারীর।

মুসলিমে আছে-আসমানে অবস্থানকারী ফেরেশতাগণ তার উপর অসন্তুষ্ট থাকে যতক্ষণ না তার স্বামী তার উপর সম্ভষ্ট হয়।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِذَا دَعَا الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ إِلَى فِرَاشِهِ فَأَبَتْ أَنْ تَجِيءَ, لَعَنَتْهَا الْمَلَائِكَةُ حَتَّى تُصْبِحَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ
وَلِمُسْلِمٍ: «كَانَ الَّذِي فِي السَّمَاءِ سَاخِطًا عَلَيْهَا حَتَّى يَرْضَى عَنْهَا

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صحيح. رواه البخاري (5193)، ومسلم (1436)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «اذا دعا الرجل امراته الى فراشه فابت ان تجيء, لعنتها الملاىكة حتى تصبح». متفق عليه, واللفظ للبخاري ولمسلم: «كان الذي في السماء ساخطا عليها حتى يرضى عنها - صحيح. رواه البخاري (5193)، ومسلم (1436)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - কৃত্রিম চুল মাথায় লাগানো হারাম

১০২২। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ঐসব মহিলাদেরকে লানত করেছেন- যেসব মহিলা (কেশ বড় করার জন্য অন্য) কেশ সংযোগ করে আর যে মহিলা কেশ সংযোগ করায়, আর উল্কিকারিণী এবং যে উল্কি করায় এমন মহিলাদেরকেও।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا؛ - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - لَعَنَ الْوَاصِلَةَ وَالْمُسْتَوْصِلَةَ, وَالْوَاشِمَةَ وَالْمُسْتَوْشِمَةَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5940)، ومسلم (2124)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما؛ - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - لعن الواصلة والمستوصلة, والواشمة والمستوشمة. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5940)، ومسلم (2124)

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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - ‘গীলা’র বৈধতা এবং ‘আযল’ এর নিষেধাজ্ঞা

১০২৩। জুযামাহ বিনতু ওয়াহাব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, কিছু লোকের মধ্যে আমি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে উপস্থিত ছিলাম, আর তিনি বলছিলেন, ’আমি অবশ্য তোমাদেরকে ’গীলা’ করার ব্যাপারে নিষেধ করার ইচ্ছা করেছিলাম। তারপর দেখলাম রোম ও পারস্যের লোকেরা ’গীলা’[1] করে থাকে তাতে তাদের শিশু সন্তানদের কোন ক্ষতি করে না। এরপর তাঁকে আযল সম্বন্ধে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বললেন, —এটাতো গোপন শিশু হত্যা![2]

وَعَنْ جُذَامَةَ بِنْتِ وَهْبٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- قَالَتْ: حَضَرْتُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فِي أُنَاسٍ, وَهُوَ يَقُولُ: «لَقَدْ هَمَمْتُ أَنْ أَنْهَى عَنِ الْغِيلَةِ, فَنَظَرْتُ فِي الرُّومِ وَفَارِسَ, فَإِذَا هُمْ يُغِيلُونَ أَوْلَادَهُمْ فَلَا يَضُرُّ ذَلِكَ أَوْلَادَهُمْ شَيْئًا
ثُمَّ سَأَلُوهُ عَنِ الْعَزْلِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «ذَلِكَ الْوَأْدُ الْخَفِيُّ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1442) (141) من طريق سعيد بن أبي أيوب، حدثني أبو الأسود، عن عروة، عن عائشة، عن جذامة، به. وقد ضعَّف بعضُهم هذا الحديثَ؛ لتعارضه مع الحديث التالي، ولهم في ذلك علل أشبه بالأوهام حتى قال الحافظ في «الفتح» (9/ 309) في معرض الرد عليهم: «وهذا دفع للأحاديث الصحيحة بالتوهم، والحديث صحيح لا ريب فيه». وانظر ما بعده

وعن جذامة بنت وهب -رضي الله عنها- قالت: حضرت رسول الله - صلى الله عليه وسلم - في اناس, وهو يقول: «لقد هممت ان انهى عن الغيلة, فنظرت في الروم وفارس, فاذا هم يغيلون اولادهم فلا يضر ذلك اولادهم شيىا ثم سالوه عن العزل فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «ذلك الواد الخفي». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1442) (141) من طريق سعيد بن ابي ايوب، حدثني ابو الاسود، عن عروة، عن عاىشة، عن جذامة، به. وقد ضعف بعضهم هذا الحديث؛ لتعارضه مع الحديث التالي، ولهم في ذلك علل اشبه بالاوهام حتى قال الحافظ في «الفتح» (9/ 309) في معرض الرد عليهم: «وهذا دفع للاحاديث الصحيحة بالتوهم، والحديث صحيح لا ريب فيه». وانظر ما بعده

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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - ‘আযল’ করার বৈধতা প্রসঙ্গে

১০২৪। আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, একটি লোক বললো, হে আল্লাহর রসূল! আমার একটি দাসী আছে, আমি তার সাথে আযল[1] করে থাকি। আর আমি তার গর্ভ ধারণ চাই না। অথচ পুরুষ যা চায় আমিও তা (যৌন মিলন) চাই। আর ইহুদীগণ বলে থাকে, আযল করা হচ্ছে মিনি শিশু হত্যা। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, ইহুদীগণ মিথ্যা বলেছে। যদি আল্লাহ সন্তান সৃষ্টির ইচ্ছা করেন তাহলে তুমি তা প্রতিরোধ করতে পারবে না। শব্দ বিন্যাস আবূ দাউদের। এর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[2]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - أَنَّ رَجُلًا قَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ لِي جَارِيَةً, وَأَنَا أَعْزِلُ عَنْهَا, وَأَنَا أَكْرَهُ أَنْ تَحْمِلَ, وَأَنَا أُرِيدُ مَا يُرِيدُ الرِّجَالُ, وَإِنَّ الْيَهُودَ تُحَدِّثُ: أَنَّ الْعَزْلَ المَوْؤُدَةُ الصُّغْرَى. قَالَ: «كَذَبَتْ يَهُودُ, لَوْ أَرَادَ اللَّهُ أَنْ يَخْلُقَهُ مَا اسْتَطَعْتَ أَنْ تَصْرِفَهُ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ وَاللَّفْظُ لَهُ, وَالنَّسَائِيُّ, وَالطَّحَاوِيُّ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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صحيح. رواه أحمد (3/ 33 و 51 و 53)، وأبو داود (2171)، والنسائي في «عشرة النساء» (194)، والطحاوي في «المشكل» (1916)

وعن ابي سعيد الخدري - رضي الله عنه - ان رجلا قال: يا رسول الله! ان لي جارية, وانا اعزل عنها, وانا اكره ان تحمل, وانا اريد ما يريد الرجال, وان اليهود تحدث: ان العزل الموودة الصغرى. قال: «كذبت يهود, لو اراد الله ان يخلقه ما استطعت ان تصرفه». رواه احمد, وابو داود واللفظ له, والنساىي, والطحاوي, ورجاله ثقات - صحيح. رواه احمد (3/ 33 و 51 و 53)، وابو داود (2171)، والنساىي في «عشرة النساء» (194)، والطحاوي في «المشكل» (1916)

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পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - ‘আযল’ করার বৈধতা প্রসঙ্গে

১০২৫। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে এবং কুরআন অবতীর্ণ হওয়াকালে ’আযল করতাম। যদি তাতে নিষেধ করার মত কিছু থাকতো তাহলে কুরআন সে ব্যাপারে আমাদেরকে নিষেধ করতো।

মুসলিমে আরো আছে- এ কথা আল্লাহর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর নিকট যাওয়ার পরও তিনি আমাদেরকে নিষেধ করেননি।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: كُنَّا نَعْزِلُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَالْقُرْآنُ يَنْزِلُ, وَلَوْ كَانَ شَيْئًا يُنْهَى عَنْهُ لَنَهَانَا عَنْهُ الْقُرْآنُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِمُسْلِمٍ: فَبَلَغَ ذَلِكَ نَبِيَّ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَلَمْ يَنْهَنَا

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صحيح. رواه البخاري 9/ 305 / فتح)، ومسلم (1440) «تنبيه»: عَزْو الحديث بهذا التمام للبخاري ومسلم وَهْمٌ من الحافظ - رحمه الله - إذ المتفق عليه إلى قوله: «والقرآن ينزل». وأما هذه الزيادة: «لو كان شيئًا ... » فرواها مسلم وحده من طريق إسحاق بن راهويه قال: قال سفيان: «لو كان شيئا ... » فإدراج الحافظ لها في الحديث وَهْمٌ، وعزوها إلى الشيخين وهْمٌ آخر، بل هو نفسه -رحمه الله- قال في «الفتح». «هذا ظاهر في أن سفيان قاله استنباطا، وأوهم كلام صاحب «العمدة» ومَن تبعه أن هذه الزيادة من نفس الحديث فأدْرَجها، وليس الأمر كذلك؛ فإني تتبعته من المسانيد، فوجدت أكثر رواته عن سفيان لا يذكرون هذه الزيادة

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: كنا نعزل على عهد رسول الله - صلى الله عليه وسلم - والقران ينزل, ولو كان شيىا ينهى عنه لنهانا عنه القران. متفق عليه ولمسلم: فبلغ ذلك نبي الله - صلى الله عليه وسلم - فلم ينهنا - صحيح. رواه البخاري 9/ 305 / فتح)، ومسلم (1440) «تنبيه»: عزو الحديث بهذا التمام للبخاري ومسلم وهم من الحافظ - رحمه الله - اذ المتفق عليه الى قوله: «والقران ينزل». واما هذه الزيادة: «لو كان شيىا ... » فرواها مسلم وحده من طريق اسحاق بن راهويه قال: قال سفيان: «لو كان شيىا ... » فادراج الحافظ لها في الحديث وهم، وعزوها الى الشيخين وهم اخر، بل هو نفسه -رحمه الله- قال في «الفتح». «هذا ظاهر في ان سفيان قاله استنباطا، واوهم كلام صاحب «العمدة» ومن تبعه ان هذه الزيادة من نفس الحديث فادرجها، وليس الامر كذلك؛ فاني تتبعته من المسانيد، فوجدت اكثر رواته عن سفيان لا يذكرون هذه الزيادة

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পরিচ্ছেদঃ ২. স্ত্রীলোকদের প্রতি সৎ ব্যবহার - ‘আযল’ করার বৈধতা প্রসঙ্গে

১০২৬। আনাস ইবনু মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর স্ত্রীদের সাথে শেষে একবার মাত্ৰ গোসল করতেন। শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।[1]

وَعَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - كَانَ يَطُوفُ عَلَى نِسَائِهِ بِغُسْلٍ وَاحِدٍ. أَخْرَجَاهُ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

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صحيح. رواه البخاري (268) و (284 و 5068 و 5215)، ومسلم (309)، وهذا لفظ مسلم كما قال الحافظ. وأما لفظ البخاري فهو: «كان يطوف على نسائه في ليلة واحدة». وفي أخرى: «كان يدور على نسائه في الساعة الواحدة من الليل والنهار

وعن انس بن مالك - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - كان يطوف على نساىه بغسل واحد. اخرجاه, واللفظ لمسلم - صحيح. رواه البخاري (268) و (284 و 5068 و 5215)، ومسلم (309)، وهذا لفظ مسلم كما قال الحافظ. واما لفظ البخاري فهو: «كان يطوف على نساىه في ليلة واحدة». وفي اخرى: «كان يدور على نساىه في الساعة الواحدة من الليل والنهار

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পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - দাসীকে মুক্ত করে বিবাহ করাই মাহরানা হিসেবে গন্য হয়

১০২৭। আনাস বিন মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন যে, তিনি তাঁর স্ত্রী সাফীয়াহ (রাঃ)-এর দাসত্ব মুক্তির বিনিময়কে তাঁর মাহরানা ধাৰ্য করেছিলেন।[1]

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم؛ أَنَّهُ أَعْتَقَ صَفِيَّةَ, وَجَعَلَ عِتْقَهَا صَدَاقَهَا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5086)، ومسلم (2/ 1045 / رقم 85)

عن انس بن مالك, عن النبي - صلى الله عليه وسلم؛ انه اعتق صفية, وجعل عتقها صداقها. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5086)، ومسلم (2/ 1045 / رقم 85)

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পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - নাবী (ﷺ) এর স্ত্রীদের মাহরানার পরিমাণ

১০২৮. আবূ সালামাহ ইবনু ’আবদুর রহমান থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর স্ত্রী ’আয়িশা (রাঃ)-কে জিজ্ঞেস করেছিলাম— নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (বিবিদের জন্য) কি পরিমাণ মাহরানা দিয়েছিলেন? ’আয়িশা (রাঃ) বলেছেন- সাড়ে বারো উকিয়াহ বা স্বর্ণমুদ্রা পরিমাণ মাহরানা তিনি তাঁর স্ত্রীদের জন্য দিয়েছিলেন এবং নাশশ। আয়িশা (রাঃ) বলেন, নাশশ কি তা জান? রাবী বলেন, আমি বললাম, না। তিনি বললেন, অর্ধ উকিয়াহ বা স্বর্ণ মুদ্রা। এগুলো যা রৌপ্য মুদ্রার পাঁচশত দিরহামের সমান। এটাই ছিল নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর বিবিদের জন্য মাহরানা।[1]

وَعَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ; أَنَّهُ قَالَ: سَأَلْتُ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - كَمْ كَانَ صَدَاقُ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَتْ: كَانَ صَدَاقُهُ لِأَزْوَاجِهِ ثِنْتَيْ عَشْرَةَ أُوقِيَّةً وَنَشًّا. قَالَتْ: أَتَدْرِي مَا النَّشُّ قَالَ: قُلْتُ: لَا. قَالَتْ: نِصْفُ أُوقِيَّةٍ. فَتِلْكَ خَمْسُمِائَةِ دِرْهَمٍ, فَهَذَا صَدَاقُ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - لِأَزْوَاجِهِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1426)

وعن ابي سلمة بن عبد الرحمن; انه قال: سالت عاىشة زوج النبي - صلى الله عليه وسلم - كم كان صداق رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قالت: كان صداقه لازواجه ثنتي عشرة اوقية ونشا. قالت: اتدري ما النش قال: قلت: لا. قالت: نصف اوقية. فتلك خمسماىة درهم, فهذا صداق رسول الله - صلى الله عليه وسلم - لازواجه. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1426)

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পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - বিবাহে মোহরানা দেওয়া আবশ্যক

১০২৯। ইবনে ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, যখন আলী (রাঃ) ফাতিমাহ (রাঃ))-কে বিবাহ করেন তখন রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বললেন- তুমি ফাতিমাহকে (মাহরানা স্বরূপ) কিছু দাও। ’আলী (রাঃ) বললেন, আমার নিকটে কিছু নেই। নবী (রহঃ) তাকে বললেন, তোমার হুতামিয়্যাহ বর্মটি কোথায়? আবূ দাউদ, নাসায়ী, হাকিম হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: لَمَّا تَزَوَّجَ عَلِيٌّ فَاطِمَةَ. قَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَعْطِهَا شَيْئًا». قَالَ: مَا عِنْدِي شَيْءٌ. قَالَ: «فَأَيْنَ دِرْعُكَ الحُطَمِيَّةُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (2125)، والنسائي (6/ 130) الحطمية. قال في «النهاية» (1/ 402): «هي التي تُحَطِّم السيوف؛ أي: تكسرها، وقيل: هي العريضة الثقيلة. وقيل: هي منسوبة إلى بطن من عبد القيس يقال لهم: حطمة بن محارب، كانوا يعملون بالدروع، وهذا أشبه بالأقوال

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: لما تزوج علي فاطمة. قال له رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اعطها شيىا». قال: ما عندي شيء. قال: «فاين درعك الحطمية». رواه ابو داود, والنساىي, وصححه الحاكم - صحيح. رواه ابو داود (2125)، والنساىي (6/ 130) الحطمية. قال في «النهاية» (1/ 402): «هي التي تحطم السيوف؛ اي: تكسرها، وقيل: هي العريضة الثقيلة. وقيل: هي منسوبة الى بطن من عبد القيس يقال لهم: حطمة بن محارب، كانوا يعملون بالدروع، وهذا اشبه بالاقوال

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - স্বামীর পক্ষ থেকে স্ত্রী এবং তার অভিভাবকদেরকে উপটৌকন দেয়ার বিধান

১০৩০। আমর ইবনু শু’আইব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি তার পিতা হতে, তিনি তাঁর দাদা থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, অনুষ্ঠানের পূর্বে যে উপঢৌকন, হাদিয়া (উপহার) ইত্যাদি দেয়া হয় তা নারীর প্রাপ্য এবং বিবাহের পর দেয় বস্তুসমূহ সেই পাবে, যাকে তা দান করা হয় বা যার জন্য তা আনা হয়। কোন ব্যক্তির সর্বাধিক অনুগ্রহ পাওয়ার অধিকারী হলো তার বোন অথবা তার কন্যা।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَيُّمَا امْرَأَةٍ نَكَحَتْ عَلَى صَدَاقٍ, أَوْ حِبَاءٍ, أَوْ عِدَةٍ, قَبْلَ عِصْمَةِ النِّكَاحِ, فَهُوَ لَهَا, وَمَا كَانَ بَعْدَ عِصْمَةِ النِّكَاحِ, فَهُوَ لِمَنْ أُعْطِيَهُ, وَأَحَقُّ مَا أُكْرِمَ الرَّجُلُ عَلَيْهِ ابْنَتُهُ, أَوْ أُخْتُهُ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا التِّرْمِذِيَّ

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ضعيف. رواه أحمد (2/ 182)، وأبو داود (2129)، والنسائي (6/ 120)، وابن ماجه (1955) من طريق ابن جريج، عن عمرو، به. وعلته عنعنة ابن جريج، فهو مدلس

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ايما امراة نكحت على صداق, او حباء, او عدة, قبل عصمة النكاح, فهو لها, وما كان بعد عصمة النكاح, فهو لمن اعطيه, واحق ما اكرم الرجل عليه ابنته, او اخته. رواه احمد, والاربعة الا الترمذي - ضعيف. رواه احمد (2/ 182)، وابو داود (2129)، والنساىي (6/ 120)، وابن ماجه (1955) من طريق ابن جريج، عن عمرو، به. وعلته عنعنة ابن جريج، فهو مدلس

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - স্ত্রীর মোহরানা নির্ধারণের পূর্বে স্বামী মারা গেলে

১০৩১। আলকামাহ, ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, তাকে এক ব্যক্তি কোন মহিলাকে মোহর ধার্য না করে বিবাহ করলো আর তার সাথে যৌন মিলন না করে মরে গেল এমন লোক সম্বন্ধে জিজ্ঞেস করা হলো। ইবনু মাস’উদ (রাঃ) বললেন, মহিলাটি তার পরিবারের মহিলাদের সমপরিমাণ মোহর পাবে। তার কম বা অধিক নয়, আর তাকে ইদ্দত পালন করতে হবে এবং সে স্বামীর সম্পদের ওয়ারিস হবে। অতঃপর মাকিল বিন সিনান আশজয়ী (রাঃ) দাঁড়িয়ে বললেন, আমাদের এক মেয়ে ’বারওয়া’- বিনতে ওয়াশেক সম্বন্ধে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আপনার ফয়সালার মতই এরূপ ফয়সালাহ করেছিলেন। এরূপ শুনে ইবনু মাস’উদ (রাঃ) অত্যন্ত খুশী হলেন। -তিরমিযী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন, এবং আরো এক জামা’আত মুহাদ্দিস হাসান বলেছেন।[1]

وَعَنْ عَلْقَمَةَ, عَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ رَجُلٍ تَزَوَّجَ امْرَأَةً, وَلَمْ يَفْرِضْ لَهَا صَدَاقًا, وَلَمْ يَدْخُلْ بِهَا حَتَّى مَاتَ, فَقَالَ ابْنُ مَسْعُودٍ: لَهَا مِثْلُ صَدَاقِ نِسَائِهَا, لَا وَكْسَ, وَلَا شَطَطَ, وَعَلَيْهَا الْعِدَّةُ, وَلَهَا الْمِيرَاثُ، فَقَامَ مَعْقِلُ بْنُ سِنَانٍ الْأَشْجَعِيُّ فَقَالَ: قَضَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فِي بِرْوَعَ بِنْتِ وَاشِقٍ - امْرَأَةٍ مِنَّا - مِثْلَ مَا قَضَيْتَ, فَفَرِحَ بِهَا ابْنُ مَسْعُودٍ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ وَالْجَمَاعَةُ

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صحيح. رواه أحمد (4 79 - 280)، وأبو داود (2115)، والنسائي (6 21)، والترمذي (1145)، وابن ماجه (1891) وقال الترمذي: «حسن صحيح». الوَكْس: النقصُ؛ أي: لا ينقص عن مهر نسائها. والشَّطَط: الجَوْر؛ أي: لا يُجَار على زوجها بزيادة مهرها على نسائها

وعن علقمة, عن ابن مسعود - رضي الله عنه - انه سىل عن رجل تزوج امراة, ولم يفرض لها صداقا, ولم يدخل بها حتى مات, فقال ابن مسعود: لها مثل صداق نساىها, لا وكس, ولا شطط, وعليها العدة, ولها الميراث، فقام معقل بن سنان الاشجعي فقال: قضى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - في بروع بنت واشق - امراة منا - مثل ما قضيت, ففرح بها ابن مسعود. رواه احمد, والاربعة, وصححه الترمذي والجماعة - صحيح. رواه احمد (4 79 - 280)، وابو داود (2115)، والنساىي (6 21)، والترمذي (1145)، وابن ماجه (1891) وقال الترمذي: «حسن صحيح». الوكس: النقص؛ اي: لا ينقص عن مهر نساىها. والشطط: الجور؛ اي: لا يجار على زوجها بزيادة مهرها على نساىها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আলকামাহ (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - অল্প মোহরানা প্রসঙ্গ এবং তা নগদ টাকার পরিবর্তে অন্য কিছু দ্বারা দেয়ার বৈধতা

১০৩২। জাবির বিন ’আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন,-যে ব্যক্তি কোন রমণীকে মোহরানায় ছাতু বা খেজুর দিলো সে ঐ মহিলাকে (তার জন্য) হালাল করে নিলো। -আবূ দাউদ হাদীসটির মাওকুফ হওয়ার প্রতি ইঙ্গিত করেছেন।[1]

وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ أَعْطَى فِي صَدَاقِ امْرَأَةٍ (1) سَوِيقًا, أَوْ تَمْرًا, فَقَدْ اسْتَحَلَّ». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَأَشَارَ إِلَى تَرْجِيحِ وَقْفِهِ

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ضعيف رواه أبو داود (2110) من طريق موسى بن مسلم بن رومان، عن أبي الزبير، عن جابر، به. قال الحافظ في «التلخيص» (3/ 190): «وفي إسناده ابن رومان، وهو ضعيف». قلت: وأيضًا أبو الزبير مُدَلِّس، وقد عَنْعَنَهُ، وقد صرح في بعض المصادر إلا أن أسانيدها مُهَلْهَلَةٌ. انظر «ناسخ الحديث» لابن شاهين (507)

وعن جابر بن عبد الله - رضي الله عنهما - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من اعطى في صداق امراة (1) سويقا, او تمرا, فقد استحل». اخرجه ابو داود, واشار الى ترجيح وقفه - ضعيف رواه ابو داود (2110) من طريق موسى بن مسلم بن رومان، عن ابي الزبير، عن جابر، به. قال الحافظ في «التلخيص» (3/ 190): «وفي اسناده ابن رومان، وهو ضعيف». قلت: وايضا ابو الزبير مدلس، وقد عنعنه، وقد صرح في بعض المصادر الا ان اسانيدها مهلهلة. انظر «ناسخ الحديث» لابن شاهين (507)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - অল্প মোহরানা প্রসঙ্গ এবং তা নগদ টাকার পরিবর্তে অন্য কিছু দ্বারা দেয়ার বৈধতা

১০৩৩। ’আবদুল্লাহ ইবনু আমির বিন রবীয়া (রহঃ) হতে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা (রাবীয়া) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দুখানা জুতার বিনিময়ে (মোহর ধার্যে) জনৈক মহিলার নিকাহ বা বিবাহকে জায়িয করেছিলেন। —তিরমিযী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন এবং এ (সহীহ হওয়ার) ব্যাপারে ভিন্ন মতও রয়েছে।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ, عَنْ أَبِيهِ: أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَجَازَ نِكَاحَ امْرَأَةٍ عَلَى نَعْلَيْنِ. أَخْرَجَهُ التِّرْمِذِيُّ وَصَحَّحَهُ, وَخُولِفَ فِي ذَلِكَ

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منكر. رواه الترمذي (1113)، وابن ماجه (1888) من طريق عاصم بن عبيد الله، عن عبد الله بن عامر، عن أبيه: أن امرأة من بني فَزَارَة تزوجت على نعلين. فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «أرضيتِ من نفسك ومالك بنعلين؟» قالت: نعم. قال: فأجازه. والسياق للترمذي، وقال: «حديث حسن صحيح». قلت: كيف؟ وعاصم ضعيف سيء الحفظ، وترَكه بعضُهم. وقد أورد الذهبي حديثه هذا في «الميزان» مما أنكر له. وقال ابن أبي حاتم في «العلل» (1/ 424 / رقم 1276): «سألت أبي عن عاصم بن عبيد الله؟ فقال: منكر الحديث. يقال: إنه ليس له حديث يعتمد عليه. قلت: ما أنكروا عليه؟ قال: روى عن عبد الله بن عامر بن ربيعة، عن أبيه؛ أن رجلًا تزوج امرأة على نعلين، فأجازه النبي -صلى الله عليه وسلم-. وهو منك

وعن عبد الله بن عامر بن ربيعة, عن ابيه: ان النبي - صلى الله عليه وسلم - اجاز نكاح امراة على نعلين. اخرجه الترمذي وصححه, وخولف في ذلك - منكر. رواه الترمذي (1113)، وابن ماجه (1888) من طريق عاصم بن عبيد الله، عن عبد الله بن عامر، عن ابيه: ان امراة من بني فزارة تزوجت على نعلين. فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «ارضيت من نفسك ومالك بنعلين؟» قالت: نعم. قال: فاجازه. والسياق للترمذي، وقال: «حديث حسن صحيح». قلت: كيف؟ وعاصم ضعيف سيء الحفظ، وتركه بعضهم. وقد اورد الذهبي حديثه هذا في «الميزان» مما انكر له. وقال ابن ابي حاتم في «العلل» (1/ 424 / رقم 1276): «سالت ابي عن عاصم بن عبيد الله؟ فقال: منكر الحديث. يقال: انه ليس له حديث يعتمد عليه. قلت: ما انكروا عليه؟ قال: روى عن عبد الله بن عامر بن ربيعة، عن ابيه؛ ان رجلا تزوج امراة على نعلين، فاجازه النبي -صلى الله عليه وسلم-. وهو منك

হাদিসের মানঃ মুনকার (সহীহ হাদীসের বিপরীত)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - অল্প মোহরানা প্রসঙ্গ এবং তা নগদ টাকার পরিবর্তে অন্য কিছু দ্বারা দেয়ার বৈধতা

১০৩৪। সাহল বিন সা’দ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম একটি লোহার আংটির বিনিময়ে একজন লোকের সাথে এক মহিলার বিবাহ দিয়েছিলেন। —এটা একটি পূর্ববতী দীর্ঘ হাদীসের অংশবিশেষ যা বিবাহ অধ্যায়ের প্রথম দিকে উল্লেখ রয়েছে।[1]

’আলী (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, মোহর (সাধারণত) দশ দিরহামের কমে হয় না।

—দারাকুৎনী, মওকুফ রূপে; এর সানাদে ত্রুটি রয়েছে।[2]

وَعَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: زَوَّجَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - رَجُلًا امْرَأَةً بِخَاتَمٍ مِنْ حَدِيدٍ. أَخْرَجَهُ الْحَاكِمُ
وَهُوَ طَرَفٌ مِنَ الْحَدِيثِ الطَّوِيلِ الْمُتَقَدِّمِ فِي أَوَائِلِ النِّكَاحِ

وَعَنْ عَلَيٍّ - رضي الله عنه - قَالَ: «لَا يَكُونُ الْمَهْرُ أَقَلَّ مِنْ عَشَرَةِ دَرَاهِمَ». أَخْرَجَهُ الدَّارَقُطْنِيُّ مَوْقُوفًا, وَفِي سَنَدِهِ مَقَالٌ
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منكر. رواه الحاكم (278)، والطبراني في «الكبير» (656 - 157/ 5837) من طريق عبد الله بن مصعب الزبيري، عن أبي حازم، عن سهل، به. وزادا: «فصه من فضة». قلت: وآفته عبد الله الزبيري، فقد ضعَّفه ابن معين، ثم هو خالف الثقات عن أبي حازم كما في الحديث السابق (979): وفيه قوله -صلى الله عليه وسلم-: «انظر ولو خاتما من حديد» وذهاب الرجل وعودته إلى النبي -صلى الله عليه وسلم- وقوله له: لا، والله يا رسول الله. ما وجدت شيئا، ولا خاتما من حديد. «تنبيه»: قال الحافظ في «الفتح» (9/ 211): «وقع عند الحاكم والطبراني من طريق الثوري، عن أبي حازم، عن سهل بن سعد؛ أن النبي -صلى الله عليه وسلم- زوج رجلًا بخاتم من حديد فصه من فضة. قلت: وهذا وَهْمٌ من الحافظ -رحمه الله - إذ قد عرفت أنه من طريق الزبيري لا من طريق الثوري

ضعيف. رواه الدارقطني في «السنن» (3/ 245 / رقم 13) من طريق داود الأودي، عن الشعبي قال: قال عليٌّ: فذكره. قلت: داود: هو ابن يزيد وهو «ضعيف» كما في «التقريب»، والشعبي لم يسمع من عليٍّ

وعن سهل بن سعد - رضي الله عنهما- قال: زوج النبي - صلى الله عليه وسلم - رجلا امراة بخاتم من حديد. اخرجه الحاكم وهو طرف من الحديث الطويل المتقدم في اواىل النكاح وعن علي - رضي الله عنه - قال: «لا يكون المهر اقل من عشرة دراهم». اخرجه الدارقطني موقوفا, وفي سنده مقال - منكر. رواه الحاكم (278)، والطبراني في «الكبير» (656 - 157/ 5837) من طريق عبد الله بن مصعب الزبيري، عن ابي حازم، عن سهل، به. وزادا: «فصه من فضة». قلت: وافته عبد الله الزبيري، فقد ضعفه ابن معين، ثم هو خالف الثقات عن ابي حازم كما في الحديث السابق (979): وفيه قوله -صلى الله عليه وسلم-: «انظر ولو خاتما من حديد» وذهاب الرجل وعودته الى النبي -صلى الله عليه وسلم- وقوله له: لا، والله يا رسول الله. ما وجدت شيىا، ولا خاتما من حديد. «تنبيه»: قال الحافظ في «الفتح» (9/ 211): «وقع عند الحاكم والطبراني من طريق الثوري، عن ابي حازم، عن سهل بن سعد؛ ان النبي -صلى الله عليه وسلم- زوج رجلا بخاتم من حديد فصه من فضة. قلت: وهذا وهم من الحافظ -رحمه الله - اذ قد عرفت انه من طريق الزبيري لا من طريق الثوري ضعيف. رواه الدارقطني في «السنن» (3/ 245 / رقم 13) من طريق داود الاودي، عن الشعبي قال: قال علي: فذكره. قلت: داود: هو ابن يزيد وهو «ضعيف» كما في «التقريب»، والشعبي لم يسمع من علي

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ সাহল বিন সা'দ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - সামান্য পরিমান মোহরানা ধার্য করা মুস্তাহাব

১০৩৫। উকবাহ ইবন আমির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, উত্তম মোহর হচ্ছে যা দেয়া সহজ হয়। —আবূ দাউদ; হাকিম সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «خَيْرُ الصَّدَاقِ أَيْسَرُهُ». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (2117)، والحاكم (2/ 181 - 182) ولفظه كما عند الحاكم: عن عقبة بن عامر - رضي الله عنه-؛ أن النبي -صلى الله عليه وسلم- قال لرجل: «أترضى أن أزوجك فلانة؟» قال: نعم. وقال للمرأة: «أترضين أن أزوجك فلانا؟» قالت: نعم. فزوج أحدهما صاحبه، ولم يفرض لها صدقا ولا يعطها شيئا، وكان ممن شهد الحديبية - وكان من شهد الحديبية له سهم بخيبر - فلما حضرته الوفاة. قال: إن رسول الله -صلى الله عليه وسلم- زوجني فلانة، ولم أفرض لها صداقا، ولم أعطها شيئا، وإني أشهدكم أني أعطيتها صداقها سهمي بخيبر، فأخذت سهما فباعته بمئة ألف. قال: وقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم: «خير الصداق أيسره

وعن عقبة بن عامر قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «خير الصداق ايسره». اخرجه ابو داود, وصححه الحاكم - صحيح. رواه ابو داود (2117)، والحاكم (2/ 181 - 182) ولفظه كما عند الحاكم: عن عقبة بن عامر - رضي الله عنه-؛ ان النبي -صلى الله عليه وسلم- قال لرجل: «اترضى ان ازوجك فلانة؟» قال: نعم. وقال للمراة: «اترضين ان ازوجك فلانا؟» قالت: نعم. فزوج احدهما صاحبه، ولم يفرض لها صدقا ولا يعطها شيىا، وكان ممن شهد الحديبية - وكان من شهد الحديبية له سهم بخيبر - فلما حضرته الوفاة. قال: ان رسول الله -صلى الله عليه وسلم- زوجني فلانة، ولم افرض لها صداقا، ولم اعطها شيىا، واني اشهدكم اني اعطيتها صداقها سهمي بخيبر، فاخذت سهما فباعته بمىة الف. قال: وقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم: «خير الصداق ايسره

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - তালাকপ্ৰাপ্তাকে সাধ্যানুযায়ী ভরণ-পোষণ প্ৰদান করা শরীয়তসম্মত

১০৩৬। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। আল-জাওন কন্যা ’আমরাহকে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট পেশ করা হলে সে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম থেকে (আল্লাহর) আশ্রয় প্রার্থনা করে। তিনি বলেন : তুমি এক মহান সত্তার নিকটই আশ্রয় প্রার্থনা করেছে। অতঃপর তিনি তাকে তিন তালাক দিলেন এবং উসামাহ (রাঃ)-কে নির্দেশ দিলে তদনুযায়ী তিনি তাকে (উপঢৌকনস্বরূপ) তিনখানা সাদা লম্বা কাপড় দেন। ইবনু মাজাহ; এর সানাদে একজন মাতরুক (পরিত্যক্ত) রাবী রয়েছে।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا - أَنَّ عَمْرَةَ بِنْتَ الْجَوْنِ تَعَوَّذَتْ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - حِينَ أُدْخِلَتْ عَلَيْهِ - تَعْنِي: لَمَّا تَزَوَّجَهَا - فَقَالَ: «لَقَدْ عُذْتِ بِمَعَاذٍ» , فَطَلَّقَهَا, وَأَمَرَ أُسَامَةَ فَمَتَّعَهَا بِثَلَاثَةِ أَثْوَابٍ. أَخْرَجَهُ ابْنُ مَاجَهْ, وَفِي إِسْنَادِهِ رَاوٍ مَتْرُوكٌ

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منكر. رواه ابن ماجه (2037) من طريق عبيد القاسم، حدثنا هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة، به. قلت: وآفته عبيد بن القاسم، وهو كذَّاب يضع الحديث. ولقد كان في الحديث التالي الصحيح غُنْيَة عنه، والله المستعان

وعن عاىشة - رضي الله عنها - ان عمرة بنت الجون تعوذت من رسول الله - صلى الله عليه وسلم - حين ادخلت عليه - تعني: لما تزوجها - فقال: «لقد عذت بمعاذ» , فطلقها, وامر اسامة فمتعها بثلاثة اثواب. اخرجه ابن ماجه, وفي اسناده راو متروك - منكر. رواه ابن ماجه (2037) من طريق عبيد القاسم، حدثنا هشام بن عروة، عن ابيه، عن عاىشة، به. قلت: وافته عبيد بن القاسم، وهو كذاب يضع الحديث. ولقد كان في الحديث التالي الصحيح غنية عنه، والله المستعان

হাদিসের মানঃ মুনকার (সহীহ হাদীসের বিপরীত)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৩. মাহরানার বিবরণ - তালাকপ্ৰাপ্তাকে সাধ্যানুযায়ী ভরণ-পোষণ প্ৰদান করা শরীয়তসম্মত

১০৩৭। আর আবূ উসাইদ সাঈদী কর্তৃক মূল বিরাবণ সহীহ বুখারীর হাদীসে রয়েছে।[1]

وَأَصْلُ الْقِصَّةِ فِي «الصَّحِيحِ» مِنْ حَدِيثِ أَبِي أُسَيْدٍ السَّاعِدِيِّ

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البخاري برقم (5255) - وفيه: «وقد أُتِيَ بالجَوْنِيَة ... فلما دخل عليها النبي -صلى الله عليه وسلم- قال: «هَبي نفسك لي». قالت: وهل تهب الملكة نفسها للسوقة؟ قال: «فأهوى بيده يضع يده عليها لتسكن». فقالت: أعوذ بالله منك. فقال: «قد عُذْتِ بمَعَاذ». ثم خرج علينا. فقال: يا أبا أسيد! اكسها رَازِقِيَّتَيْن، وأَلْحِقْهَا بأهلها

واصل القصة في «الصحيح» من حديث ابي اسيد الساعدي - البخاري برقم (5255) - وفيه: «وقد اتي بالجونية ... فلما دخل عليها النبي -صلى الله عليه وسلم- قال: «هبي نفسك لي». قالت: وهل تهب الملكة نفسها للسوقة؟ قال: «فاهوى بيده يضع يده عليها لتسكن». فقالت: اعوذ بالله منك. فقال: «قد عذت بمعاذ». ثم خرج علينا. فقال: يا ابا اسيد! اكسها رازقيتين، والحقها باهلها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ উসাইদ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - বিবাহের ওয়ালিমা করা শরীয়তসম্মত

১০৩৮। আনাস (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’আবদুর রহমান ইবনু ’আওফ (রাঃ)-এর দেহে সুফরার (হলুদ রং) চিহ্ন দেখতে পেয়ে বললেন, এ কী? ’আবদুর রহমান (রাঃ) বললেন, হে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম! আমি এক মহিলাকে একটি খেজুরের আঁটি পরিমাণ স্বর্ণের বিনিময়ে বিয়ে করেছি। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, আল্লাহ্ তা’আলা তোমার এ বিয়েতে বারাকাত দান করুন। তুমি একটি ছাগলের দ্বারা হলেও ওয়ালীমার ব্যবস্থা কর। শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।[1]

عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - رَأَى عَلَى عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَثَرَ صُفْرَةٍ, قَالَ: «مَا هَذَا»، قَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنِّي تَزَوَّجْتُ امْرَأَةً عَلَى وَزْنِ نَوَاةٍ مِنْ ذَهَبٍ. فَقَالَ: «فَبَارَكَ اللَّهُ لَكَ, أَوْلِمْ وَلَوْ بِشَاةٍ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ

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صحيح. رواه البخاري (5155)، ومسلم (1427) ولا معنى لقول الحافظ: «واللفظ لمسلم» إذ هو نفس لفظ البخاري

عن انس بن مالك - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - راى على عبد الرحمن بن عوف اثر صفرة, قال: «ما هذا»، قال: يا رسول الله! اني تزوجت امراة على وزن نواة من ذهب. فقال: «فبارك الله لك, اولم ولو بشاة». متفق عليه, واللفظ لمسلم - صحيح. رواه البخاري (5155)، ومسلم (1427) ولا معنى لقول الحافظ: «واللفظ لمسلم» اذ هو نفس لفظ البخاري

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - ওয়ালিমার দাওয়াত কবুল করার বিধান

১০৩৯। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমাদের কাউকে ওয়ালীমার দাওয়াত করা হলে তা অবশ্যই গ্রহণ করবে।

মুসলিমে আছে- যখন কেউ তাঁর (মুসলিম) ভাইকে বিবাহ উপলক্ষে বা তদনুরূপ কোন ব্যাপারে দা’ওয়াত করবে। তখন যেন সে তা গ্ৰহণ করে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا دُعِيَ أَحَدُكُمْ إِلَى الْوَلِيمَةِ فَلْيَأْتِهَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَلِمُسْلِمٍ: إِذَا دَعَا أَحَدُكُمْ أَخَاهُ, فَلْيُجِبْ; عُرْسًا كَانَ أَوْ نَحْوَهُ

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صحيح. رواه البخاري (5173)، ومسلم (1429) (96)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اذا دعي احدكم الى الوليمة فلياتها». متفق عليه ولمسلم: اذا دعا احدكم اخاه, فليجب; عرسا كان او نحوه - صحيح. رواه البخاري (5173)، ومسلم (1429) (96)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - ওয়ালিমার দাওয়াত কবুল করার বিধান

১০৪০। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- ওয়ালিমাহর ঐ খানা মন্দ খানা যার আগমনকারীকে নিষেধ করা হয়। আর অস্বীকারকারীকে আহবান করা হয়। আর যে ব্যক্তি ওয়ালিমাহর দাওয়াত গ্ৰহণ করে না সে আল্লাহ ও তদীয় রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নাফরমানী করে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «شَرُّ الطَّعَامِ طَعَامُ الْوَلِيمَةِ: يُمْنَعُهَا مَنْ يَأْتِيهَا, وَيُدْعَى إِلَيْهَا مَنْ يَأْبَاهَا, وَمَنْ لَمْ يُجِبِ الدَّعْوَةَ فَقَدْ عَصَى اللَّهَ وَرَسُولَهُ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1432) (110) قلت: ورواه البخاري (5177)، ومسلم (14532) (107) بنحوه، ولكن موقوفا على أبي هريرة، وله حكم الرفع كما ذكر ذلك الحافظ في «الفتح» (9/ 244)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «شر الطعام طعام الوليمة: يمنعها من ياتيها, ويدعى اليها من ياباها, ومن لم يجب الدعوة فقد عصى الله ورسوله». اخرجه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1432) (110) قلت: ورواه البخاري (5177)، ومسلم (14532) (107) بنحوه، ولكن موقوفا على ابي هريرة، وله حكم الرفع كما ذكر ذلك الحافظ في «الفتح» (9/ 244)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - রোযাদারের ওয়ালিমার দাওয়াতের সম্মতিদান এবং ভক্ষণ করা

১১৪১. আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যখন তোমাদের কেউ দাওয়াত প্রাপ্ত (আমন্ত্ৰিত) হবে, সে যেন তা গ্রহণ করে। যদি আমন্ত্রিত ব্যক্তি রোযাদার হয় তবে সে তার জন্য দু’আ করবে। আর যদি রোযাদার না হয় তবে যেন সে খানা খায়।[1]

وَعَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا دُعِيَ أَحَدُكُمْ فَلْيُجِبْ; فَإِنْ كَانَ صَائِمًا فَلْيُصَلِّ, وَإِنْ كَانَ مُفْطِرًا فَلْيُطْعَمْ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ أَيْضًا

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صحيح. رواه مسلم (1431) وقوله: «فَلْيُصَلِّ» جاء مفسرًا في الرواية من بعض رواته «بالدعاء» كما عند البيهقي في «الكبرى» (7/ 263)

وعنه قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اذا دعي احدكم فليجب; فان كان صاىما فليصل, وان كان مفطرا فليطعم». اخرجه مسلم ايضا - صحيح. رواه مسلم (1431) وقوله: «فليصل» جاء مفسرا في الرواية من بعض رواته «بالدعاء» كما عند البيهقي في «الكبرى» (7/ 263)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - রোযাদারের ওয়ালিমার দাওয়াতের সম্মতিদান এবং ভক্ষণ করা

১০৪২। মুসলিমে জাবির (রাঃ) থেকে অনুরূপ হাদীস বর্ণিত হয়েছে; তাতে আছে- ইচ্ছা হলে খাবে নতুবা খাওয়া বর্জন করবে।[1]

وَلَهُ مِنْ حَدِيثِ جَابِرٍ نَحْوُهُ. وَقَالَ: فَإِنْ شَاءَ طَعِمَ وَإِنْ شَاءَ تَرَكَ

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صحيح. رواه مسلم (1430)

وله من حديث جابر نحوه. وقال: فان شاء طعم وان شاء ترك - صحيح. رواه مسلم (1430)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - দাওয়াত দেওয়ার একদিন পর দাওয়াত কবুল করার বিধান

১০৪৩। ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, প্রথম দিবসের ওয়ালিমাহর খানা ন্যায্য, দ্বিতীয় দিবসের ওয়ালিমাহর খানা সুন্নাত, তৃতীয় দিবসের ওয়ালিমাহর খানা রিযা বা স্বীয় গৌরব জাহির করা। আর যে নিজের সুনাম ছড়ানোর উদ্দেশে কোন কাজ করে, আল্লাহ তাকে কিয়ামত দিবসে জনগণের নিকটে প্রকাশ করে লাঞ্ছিত করবেন। —তিরমিযী হাদীসটিকে গরীব বলেছেন; হাদীসটির রাবী সহীহ হাদীসের অনুরূপ।[1]

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «طَعَامُ الْوَلِيمَةِ أَوَّلَ يَوْمٍ حَقٌّ, وَطَعَامُ يَوْمِ الثَّانِي سُنَّةٌ, وَطَعَامُ يَوْمِ الثَّالِثِ سُمْعَةٌ، وَمَنْ سَمَّعَ سَمَّعَ اللهُ بِهِ». رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ وَاسْتَغْرَبَهُ, وَرِجَالُهُ رِجَالُ الصَّحِيحِ

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ضعيف. رواه الترمذي (1097) من طريق زياد بن عبد الله، حدثنا عطاء بن السائب، عن أبي عبد الرحمن، عن ابن مسعود، به. وزاد: «ومن سَمَّع سَمَّع الله به» ثم قال: «حديث ابن مسعود لا نعرفه مرفوعا إلا من حديث زياد بن عبد الله. وزياد بن عبد الله كثير الغرائب والمناكير. قال: وسمعت محمد بن إسماعيل يذكر عن محمد بن عقبة قال: قال وكيع: زياد بن عبد الله مع شرفه يكذب في الحديث». قلت: وأيضا عطاء مختلط، وسماع زياد منه بعد الاختلاط. وللحديث طرق وشواهد أخرى، لكن كلها لا تصلح لتقوية الحديث

وعن ابن مسعود - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «طعام الوليمة اول يوم حق, وطعام يوم الثاني سنة, وطعام يوم الثالث سمعة، ومن سمع سمع الله به». رواه الترمذي واستغربه, ورجاله رجال الصحيح - ضعيف. رواه الترمذي (1097) من طريق زياد بن عبد الله، حدثنا عطاء بن الساىب، عن ابي عبد الرحمن، عن ابن مسعود، به. وزاد: «ومن سمع سمع الله به» ثم قال: «حديث ابن مسعود لا نعرفه مرفوعا الا من حديث زياد بن عبد الله. وزياد بن عبد الله كثير الغراىب والمناكير. قال: وسمعت محمد بن اسماعيل يذكر عن محمد بن عقبة قال: قال وكيع: زياد بن عبد الله مع شرفه يكذب في الحديث». قلت: وايضا عطاء مختلط، وسماع زياد منه بعد الاختلاط. وللحديث طرق وشواهد اخرى، لكن كلها لا تصلح لتقوية الحديث

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - দাওয়াত দেওয়ার একদিন পর দাওয়াত কবুল করার বিধান

১০৪৪। ইবনু মাজাহতে আনাস (রাঃ) কর্তৃক, এ হাদীসের শাহেদ বা সমার্থক হাদীস বর্ণিত।[1]

وَلَهُ شَاهِدٌ: عَنْ أَنَسٍ عِنْدَ ابْنِ مَاجَهْ

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ضعيف. وللحافظ فيه وهم لا شك في ذلك. فإن كان يقصد حديث أنس فلم يروه ابن ماجه من حديث أنس، وإنما رواه (1915) من حديث أبي هريرة. وكلاهما بسند ضعيف جدا

وله شاهد: عن انس عند ابن ماجه - ضعيف. وللحافظ فيه وهم لا شك في ذلك. فان كان يقصد حديث انس فلم يروه ابن ماجه من حديث انس، وانما رواه (1915) من حديث ابي هريرة. وكلاهما بسند ضعيف جدا

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - বিবাহের ওয়ালিমার ব্যাপারে নাবী (ﷺ) এর দিক নির্দেশনা

১০৪৫. সাফিয়্যাহ বিনতে শাইবাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর কোন সহধর্মিনীর বিবাহতে দু’ মুদ[1] যাব-এর খাবার ওয়ালিমাহ দিয়েছিলেন।[2]

وَعَنْ صَفِيَّةَ بِنْتِ شَيْبَةَ قَالَتْ: أَوْلَمَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - عَلَى بَعْضِ نِسَائِهِ بِمُدَّيْنِ مِنْ شَعِيرٍ. أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

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مرسل. رواه البخاري (5172)، من طريق الثوري، عن منصور بن صفية، عن أم صفية، به. قلت: وهذا مرسل، صفية بنت شيبة تابعية لا تثبت لها صُحْبَة، كما جزم بذلك غير واحد كابن سعد وابن حبان وغيرهما. وقد افق الثقات كابن مهدي ووكيع، والفريابي، وابن أبي زائدة وغيرهم في روايتهم للحديث عن سفيان فلم يَتَعَدَّوْا فيه «صفية بنت شيبة». وخالفهم بعض الضعفاء كيحيى بن اليمان، ومُؤمل بن إسماعيل فرووه عن الثوري، فقالوا فيه: «عن صفية بنت شيبة، عن عائشة». وأحسن من رواه عن الثوري بذكر «عائشة» أبو أحمد الزبيري؛ محمد بن عبد الله، رواه أحمد (6/ 113) فهو ثقة؛ إلا أن روايته عن الثوري فيها كلام، بل قال الإمام أحمد: «كان كثير الخطأ في حديث سفيان». ولذلك قال بإرساله النسائي كما في «الكبرى» (4/ 140)، وإسماعيل القاضي كما في «النكت الظراف» (11/ 342)، والبرقاني، والدارقطني كما في «الفتح» (9/ 238 - 239)

وعن صفية بنت شيبة قالت: اولم النبي - صلى الله عليه وسلم - على بعض نساىه بمدين من شعير. اخرجه البخاري - مرسل. رواه البخاري (5172)، من طريق الثوري، عن منصور بن صفية، عن ام صفية، به. قلت: وهذا مرسل، صفية بنت شيبة تابعية لا تثبت لها صحبة، كما جزم بذلك غير واحد كابن سعد وابن حبان وغيرهما. وقد افق الثقات كابن مهدي ووكيع، والفريابي، وابن ابي زاىدة وغيرهم في روايتهم للحديث عن سفيان فلم يتعدوا فيه «صفية بنت شيبة». وخالفهم بعض الضعفاء كيحيى بن اليمان، ومومل بن اسماعيل فرووه عن الثوري، فقالوا فيه: «عن صفية بنت شيبة، عن عاىشة». واحسن من رواه عن الثوري بذكر «عاىشة» ابو احمد الزبيري؛ محمد بن عبد الله، رواه احمد (6/ 113) فهو ثقة؛ الا ان روايته عن الثوري فيها كلام، بل قال الامام احمد: «كان كثير الخطا في حديث سفيان». ولذلك قال بارساله النساىي كما في «الكبرى» (4/ 140)، واسماعيل القاضي كما في «النكت الظراف» (11/ 342)، والبرقاني، والدارقطني كما في «الفتح» (9/ 238 - 239)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - বিবাহের ওয়ালিমার ব্যাপারে নাবী (ﷺ) এর দিক নির্দেশনা

১০৪৬। আনাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খায়বার এবং মদীনাহর মাঝে তিন দিন অবস্থান করলেন এবং হুয়ায়্যার কন্যা সাফীয়ার সঙ্গে রাতে বাসর যাপনের ব্যবস্থা করলেন। আমি মুসলিমদেরকে তাঁর ওয়ালীমার দাওয়াত দিলাম। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দস্তরখানা বিছানোর নির্দেশ দিলেন এবং সেখানে মাংস ও রুটি ছিল না। খেজুর, পনির, মাখন ও ঘি রাখা হল। -শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]

وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: أَقَامَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - بَيْنَ خَيْبَرَ وَالْمَدِينَةِ ثَلَاثَ لَيَالٍ, يُبْنَى عَلَيْهِ بِصَفِيَّةَ, فَدَعَوْتُ الْمُسْلِمِينَ إِلَى وَلِيمَتِهِ, فَمَا كَانَ فِيهَا مِنْ خُبْزٍ وَلَا لَحْمٍ, وَمَا كَانَ فِيهَا إِلَّا أَنْ أَمَرَ بِالْأَنْطَاعِ, فَبُسِطَتْ, فَأُلْقِيَ عَلَيْهَا التَّمْرُ, وَالْأَقِطُ, وَالسَّمْنُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

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صحيح. رواه البخاري (5085)، ومسلم (1365) (ج 2 / ص 1044) الأنطاع: جمع نطع، وهو البِسَاط من الجلد المَدْبُوغ. الأقط: هو اللبن المجفف

وعن انس قال: اقام النبي - صلى الله عليه وسلم - بين خيبر والمدينة ثلاث ليال, يبنى عليه بصفية, فدعوت المسلمين الى وليمته, فما كان فيها من خبز ولا لحم, وما كان فيها الا ان امر بالانطاع, فبسطت, فالقي عليها التمر, والاقط, والسمن. متفق عليه, واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (5085)، ومسلم (1365) (ج 2 / ص 1044) الانطاع: جمع نطع، وهو البساط من الجلد المدبوغ. الاقط: هو اللبن المجفف

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - দুজন নিমন্ত্রনকারী একত্রে দাওয়াত দিলে কার দাওয়াত কবুল করবে এর বিধান

১০৪৭। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর কোন একজন সাহাবী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন-দু’জন নিমন্ত্রণকারী একত্র হলে, তোমার দরজার (বাড়ির) নিকটবর্তী ব্যক্তির দাওয়াত গ্ৰহণ করবে। আর যদি তাদের কেউ পূর্বে আসে। তবে প্রথম ব্যক্তির দাওয়াত গ্ৰহণ করবে। —এর সানাদ দুর্বল।[1]

وَعَنْ رَجُلٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: إِذَا اجْتَمَعَ دَاعِيَانِ, فَأَجِبْ أَقْرَبَهُمَا بَابًا, فَإِنْ سَبَقَ أَحَدُهُمَا فَأَجِبِ الَّذِي سَبَقَ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَسَنَدُهُ ضَعِيفٌ

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ضعيف. رواه أبو داود (3756) وفي سنده أبو خالد الدالاني، وهو «صدوق، يخطئ كثيرًا، وكان يدلس» كما قال الحافظ في التقريب

وعن رجل من اصحاب النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: اذا اجتمع داعيان, فاجب اقربهما بابا, فان سبق احدهما فاجب الذي سبق. رواه ابو داود, وسنده ضعيف - ضعيف. رواه ابو داود (3756) وفي سنده ابو خالد الدالاني، وهو «صدوق، يخطى كثيرا، وكان يدلس» كما قال الحافظ في التقريب

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
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পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - হেলান দিয়ে বসে খাওয়া

১০৪৮। আবূ জুহাইফাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, আমি হিলান বা ঠেস লাগিয়ে বসে খাবার খাই না।[1]

وَعَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا آكُلُ مُتَّكِئًا». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (5398)، وأوله: «إني» وفي رواية أخرى: لا آكل وأنا متكئ

وعن ابي جحيفة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا اكل متكىا». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (5398)، واوله: «اني» وفي رواية اخرى: لا اكل وانا متكى

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ জুহাইফাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - খাওয়ার শিষ্টাচারিতা সমূহ

১০৪৯। ’উমার ইবনু আবি সালামাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে বলেছেন- হে বৎস! বিসমিল্লাহ বলে ডান হাত দিয়ে আহার কর এবং তোমার নিকটবর্তী (স্থানের খাবার) থেকে খাও।[1]

وَعَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «يَا غُلَامُ! سَمِّ اللَّهَ, وَكُلْ بِيَمِينِكَ, وَكُلْ مِمَّا يَلِيكَ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5376)، ومسلم (2022)، عن عمر بن أبي سلمة قال: «كنت غلاما في حِجْر النبي -صلى الله عليه وسلم-، وكانت يدي تطيش في الصَّحْفَة، فقال لي رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: فذكره. وزاد البخاري: «فما زالت تلك طعمتي بعدُ

وعن عمر بن ابي سلمة - رضي الله عنه - قال: قال النبي - صلى الله عليه وسلم: «يا غلام! سم الله, وكل بيمينك, وكل مما يليك». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5376)، ومسلم (2022)، عن عمر بن ابي سلمة قال: «كنت غلاما في حجر النبي -صلى الله عليه وسلم-، وكانت يدي تطيش في الصحفة، فقال لي رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: فذكره. وزاد البخاري: «فما زالت تلك طعمتي بعد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - থালার চতুর্দিক থেকে খাওয়ার বিধান

১০৫০। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সমীপে একটি ’পেয়ালায় করে সারিদ বা সুরুয়াতে ভিজানো রুটি আনা হলে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন- তোমরা চতুর্দিক থেকে খাও, মধ্য থেকে খেওনা- কেননা বারকাত মধ্যেই অবতীর্ণ হয়। -শব্দ বিন্যাস নাসায়ীর; আর এর সানাদ সহীহ।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أُتِيَ بِقَصْعَةٍ مِنْ ثَرِيدٍ، فَقَالَ: «كُلُوا مِنْ جَوَانِبِهَا, وَلَا تَأْكُلُوا مِنْ وَسَطِهَا, فَإِنَّ الْبَرَكَةَ تَنْزِلُ فِي وَسَطِهَا». رَوَاهُ الْأَرْبَعَةُ, وَهَذَا لَفْظُ النَّسَائِيِّ, وَسَنَدُهُ صَحِيحٌ

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صحيح. رواه أبو داود (3772)، والنسائي في «الكبرى» (475)، والترمذي (1805)، وابن ماجه (3277) من طرق عن عطاء بن السائب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس، به. وهو عند النسائي، وأبي داود، من رواية شعبة، عن عطاء، وهو ممن روى عنه قبل الاختلاط، ولذلك قال الحافظ: «سنده صحيح

وعن ابن عباس; - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - اتي بقصعة من ثريد، فقال: «كلوا من جوانبها, ولا تاكلوا من وسطها, فان البركة تنزل في وسطها». رواه الاربعة, وهذا لفظ النساىي, وسنده صحيح - صحيح. رواه ابو داود (3772)، والنساىي في «الكبرى» (475)، والترمذي (1805)، وابن ماجه (3277) من طرق عن عطاء بن الساىب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس، به. وهو عند النساىي، وابي داود، من رواية شعبة، عن عطاء، وهو ممن روى عنه قبل الاختلاط، ولذلك قال الحافظ: «سنده صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - খাবারকে নিন্দা করা অপছন্দনীয়

১০৫১। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কখনো কোন খাবারের দোষ-ত্রুটি প্ৰকাশ করেননি। ভাল লাগলে তিনি খেতেন এবং খারাপ লাগলে রেখে দিতেন।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: مَا عَابَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - طَعَامًا قَطُّ, كَانَ إِذَا اشْتَهَى شَيْئًا أَكَلَهُ, وَإِنْ كَرِهَهُ تَرَكَهُ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

-

صحيح. رواه البخاري (5409)، ومسلم (2064)، واللفظ لمسلم

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: ما عاب رسول الله - صلى الله عليه وسلم - طعاما قط, كان اذا اشتهى شيىا اكله, وان كرهه تركه. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5409)، ومسلم (2064)، واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - বাম হাত দ্বারা খাওয়া নিষেধ

১০৫২। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- বাম হাতে খাবেনা, কেননা শয়তান বাম হাতে খেয়ে থাকে।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ, عَنْ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا تَأْكُلُوا بِالشِّمَالِ; فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَأْكُلُ بِالشِّمَالِ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

صحيح. رواه مسلم (2019) من طريق الليث، عن أبي الزبير، عن جابر، به. أقول: وجَدِير بالذِّكْر أن رواية أبي الزبير، عن جابر صحيحة إذا كانت من طريق الليث، إذ قال رحمه الله: «قدمت مكة فجئت أبا الزبير، فدفع إليَّ كتابين، وانقلبت بهما، ثم قلت في نفسي: لو عاودته فسألته: أسمع هذا كله من جابر؟ فقال: منه ما سمعت، ومنه ما حدثناه عنه، فقلت له: أَعْلِمْ لي على ما سمعت فأَعَلَمَ لي على هذا الذي عندي

وعن جابر, عن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا تاكلوا بالشمال; فان الشيطان ياكل بالشمال». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (2019) من طريق الليث، عن ابي الزبير، عن جابر، به. اقول: وجدير بالذكر ان رواية ابي الزبير، عن جابر صحيحة اذا كانت من طريق الليث، اذ قال رحمه الله: «قدمت مكة فجىت ابا الزبير، فدفع الي كتابين، وانقلبت بهما، ثم قلت في نفسي: لو عاودته فسالته: اسمع هذا كله من جابر؟ فقال: منه ما سمعت، ومنه ما حدثناه عنه، فقلت له: اعلم لي على ما سمعت فاعلم لي على هذا الذي عندي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - পাত্রে ফুঁ দেওয়া অথবা শ্বাস ফেলা নিষেধ

১০৫৩। আবূ কাতাদাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যখন তোমাদের কেউ পান করবে। তখন যেন সে পাত্ৰে শ্বাস ত্যাগ না করে।[1]

وَعَنْ أَبِي قَتَادَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِذَا شَرِبَ أَحَدُكُمْ, فَلَا يَتَنَفَّسْ فِي الْإِنَاءِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

-

صحيح. رواه البخاري (153)، ومسلم (267) واللفظ للبخاري

وعن ابي قتادة - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «اذا شرب احدكم, فلا يتنفس في الاناء». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (153)، ومسلم (267) واللفظ للبخاري

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৪. ওয়ালিমাহ - পাত্রে ফুঁ দেওয়া অথবা শ্বাস ফেলা নিষেধ

১০৫৪। আবূ দাউদে ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) কর্তৃক হাদীসটি এরূপই, তবে এতে এ অংশটুকু বেশি আছে-’পানীয় পাত্রে ফুঁ দেবে না’। তিরমিযী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَلِأَبِي دَاوُدَ: عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ نَحْوُهُ, وَزَادَ: «أَوْ يَنْفُخْ فِيهِ». وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ

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صحيح. رواه أبو داود (3728)، والترمذي (1888) ولفظه: نهى رسول الله -صلى الله عليه وسلم- أن يتنفس في الإناء، أو ينفخ فيه. وقال الترمذي: حديث حسن صحيح

ولابي داود: عن ابن عباس نحوه, وزاد: «او ينفخ فيه». وصححه الترمذي - صحيح. رواه ابو داود (3728)، والترمذي (1888) ولفظه: نهى رسول الله -صلى الله عليه وسلم- ان يتنفس في الاناء، او ينفخ فيه. وقال الترمذي: حديث حسن صحيح

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - স্ত্রীদের মাঝে সমানভাবে পালা বণ্টন করা শরীয়তসম্মত

১০৫৫। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আপনি স্ত্রীদের মধ্যে ইনসাফের সাথে (সব কিছু) সমানভাবে বণ্টন করতেন, অতঃপর বলতেন: হে আল্লাহ! এ হলো আমার সামৰ্থ্য অনুযায়ী আমার কাজ। যে বিষয়ে তোমার ক্ষমতা আছে, আমার সামৰ্থ্য নাই, সে বিষয়ে আমাকে তিরস্কার করো না। -ইবনু হিব্বান ও হাকিম হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন। কিন্তু তিরমিযী হাদীসটির মুরসাল হওয়াকে প্রাধান্য দিয়েছেন।[1]

عَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- قَالَتْ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقْسِمُ, فَيَعْدِلُ, وَيَقُولُ: «اللَّهُمَّ هَذَا قَسْمِي فِيمَا أَمْلِكُ, فَلَا تَلُمْنِي فِيمَا تَمْلِكُ وَلَا أَمْلِكُ». رَوَاهُ الْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ وَالْحَاكِمُ, وَلَكِنْ رَجَّحَ التِّرْمِذِيُّ إِرْسَالَه

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ضعيف. رواه أبو داود (2134)، والنسائي (7/ 64)، والترمذي (1140)، وابن ماجه (1971)، وابن حبان (1305)، والحاكم (2/ 187)، من طريق حماد بن سلمة، عن أيوب، عن أبي قلابة، عن عبد الله بن يزيد، عن عائشة، به. وقال الترمذي: «حديث عائشة هكذا رواه غير واحد، عن حماد بن سلمة، عن أيوب، عن أبي قلابة، عن عبد الله بن يزيد، عن عائشة؛ أن النبي -صلى الله عليه وسلم-. ورواه حماد بن زيد - وغير واحد - عن أيوب، عن أبي قلابة مرسلًا؛ أن النبي -صلى الله عليه وسلم- كان يقسم. وهذا أصح من حديث حماد بن سلمة «. قلت: وبمثل ما أعلَّه الترمذي أعلَّه غير واحد من جهابذة الحفاظ كأبي زرعة، وابن أبي حاتم، كما تجده في «العلل» (1/ 425 / 1279)

عن عاىشة -رضي الله عنها- قالت: كان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقسم, فيعدل, ويقول: «اللهم هذا قسمي فيما املك, فلا تلمني فيما تملك ولا املك». رواه الاربعة, وصححه ابن حبان والحاكم, ولكن رجح الترمذي ارساله - ضعيف. رواه ابو داود (2134)، والنساىي (7/ 64)، والترمذي (1140)، وابن ماجه (1971)، وابن حبان (1305)، والحاكم (2/ 187)، من طريق حماد بن سلمة، عن ايوب، عن ابي قلابة، عن عبد الله بن يزيد، عن عاىشة، به. وقال الترمذي: «حديث عاىشة هكذا رواه غير واحد، عن حماد بن سلمة، عن ايوب، عن ابي قلابة، عن عبد الله بن يزيد، عن عاىشة؛ ان النبي -صلى الله عليه وسلم-. ورواه حماد بن زيد - وغير واحد - عن ايوب، عن ابي قلابة مرسلا؛ ان النبي -صلى الله عليه وسلم- كان يقسم. وهذا اصح من حديث حماد بن سلمة «. قلت: وبمثل ما اعله الترمذي اعله غير واحد من جهابذة الحفاظ كابي زرعة، وابن ابي حاتم، كما تجده في «العلل» (1/ 425 / 1279)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - স্ত্রীদের মাঝে পরিমানমত ন্যায়পরায়ণতা বজায় রাখা আবশ্যক

১০৫৬। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন— যার দু’জন স্ত্রী আছে, আর সে তাদের একজনের চেয়ে অপরজনের প্রতি বেশি ঝুকে পড়ে, সে ক্বিয়ামাতের দিন একদিকে বক্রভাবে ঝুঁকে থাকা অবস্থায় উপস্থিত হবে। এর সানাদ সহীহ।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ كَانَتْ لَهُ امْرَأَتَانِ, فَمَالَ إِلَى إِحْدَاهُمَا, جَاءَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَشِقُّهُ مَائِلٌ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَسَنَدُهُ صَحِيحٌ

-

رواه أحمد (2/ 347 و 471)، وأبو داود (2133)، والنسائي (7/ 63)، والترمذي (1141)، وابن ماجه (1969) قلت: وقد أُعِلَّ بعلةٍ غريبةٍ لا تَقْدَحُ فيه، ولذلك صححه الحافظ كابن الجارود. وابن حبان. والحاكم. والذهبي. وابن دقيق العيد، وغيرهم

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «من كانت له امراتان, فمال الى احداهما, جاء يوم القيامة وشقه ماىل». رواه احمد, والاربعة, وسنده صحيح - رواه احمد (2/ 347 و 471)، وابو داود (2133)، والنساىي (7/ 63)، والترمذي (1141)، وابن ماجه (1969) قلت: وقد اعل بعلة غريبة لا تقدح فيه، ولذلك صححه الحافظ كابن الجارود. وابن حبان. والحاكم. والذهبي. وابن دقيق العيد، وغيرهم

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - নতুন স্ত্রীর নিকট অবস্থান করার পরিমাণ

১০৫৭। আনাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সুন্নাত হচ্ছে, যদি কেউ বিধবা স্ত্রী থাকা অবস্থায় কুমারী বিয়ে করে তবে সে যেন তার সঙ্গে সাত দিন অতিবাহিত করে এবং এরপর পালা অনুসারে এবং কেউ যদি কোন বিধবাকে বিয়ে করে এবং তার ঘরে পূর্ব থেকেই কুমারী স্ত্রী থাকে তবে সে যেন তার সঙ্গে তিন দিন কাটায় এবং তারপর পালাক্রমে। শব্দ বিন্যাস বুখারীর।[1]

وَعَنْ أَنَسٍ قَالَ: مِنَ السُّنَّةِ إِذَا تَزَوَّجَ الرَّجُلُ الْبِكْرَ عَلَى الثَّيِّبِ أَقَامَ عِنْدَهَا سَبْعًا, ثُمَّ قَسَمَ, وَإِذَا تَزَوَّجَ الثَّيِّبَ أَقَامَ عِنْدَهَا ثَلَاثًا, ثُمَّ قَسَمَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ

-

صحيح. رواه البخاري (5214)، ومسلم (1461) من طريق أبي قلابة، عن أنس. وزاد البخاري: «قال أبو قلابة: ولو شئت لقلت: إن أنسا رفعه إلى النبي -صلى الله عليه وسلم». وهي بمعناها عند مسلم أيضا

وعن انس قال: من السنة اذا تزوج الرجل البكر على الثيب اقام عندها سبعا, ثم قسم, واذا تزوج الثيب اقام عندها ثلاثا, ثم قسم. متفق عليه, واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (5214)، ومسلم (1461) من طريق ابي قلابة، عن انس. وزاد البخاري: «قال ابو قلابة: ولو شىت لقلت: ان انسا رفعه الى النبي -صلى الله عليه وسلم». وهي بمعناها عند مسلم ايضا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - অকুমারী স্ত্রীর তিন বা সাত দিন যে কোন মেয়াদে পালা গ্রহণের স্বাধীনতা

১০৫৮। উম্মু সালামাহ (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, এটা সুন্নাত বা বিধিসম্মত হবে- যখন মানুষ কোন কুমারীকে অকুমারীর উপর বিয়ে বিয়ে করবে, তার সাথে সাত দিন অবস্থান করার পর তার স্ত্রীদের মধ্যে সভাবে পালা বণ্টন করবে। আর যখন কোন অকুমারীকে বিয়ে করবে তখন তার সাথে একাধিক্রমে তিন দিন অবস্থান করার পর তাদের পালা সমভাবে বণ্টন করবে।[1]

وَعَنْ أُمِّ سَلَمَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا- - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - لَمَّا تَزَوَّجَهَا أَقَامَ عِنْدَهَا ثَلَاثًا, وَقَالَ: «إِنَّهُ لَيْسَ بِكِ عَلَى أَهْلِكِ هَوَانٌ, إِنْ شِئْتِ سَبَّعْتُ لَكِ, وَإِنْ سَبَّعْتُ لَكِ سَبَّعْتُ لِنِسَائِي». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

صحيح. رواه مسلم (1460) (41)

وعن ام سلمة -رضي الله عنها- - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - لما تزوجها اقام عندها ثلاثا, وقال: «انه ليس بك على اهلك هوان, ان شىت سبعت لك, وان سبعت لك سبعت لنساىي». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1460) (41)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ উম্মু সালামাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - কোন স্ত্রী তার সতীনকে তার পালা দান করতে পারে

১০৫৯। ’আয়িশা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, সওদা বিনতে যাম’আহ (রাঃ) তাঁর পালার রাত ’আয়িশা (রাঃ)-কে দান করেছিলেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’আয়িশা (রাঃ)-এর জন্য দু’দিন বরাদ্দ করেন- ’আয়িশা (রাঃ)’র দিন এবং সওদা (রাঃ)-’র দিন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا: أَنَّ سَوْدَةَ بِنْتَ زَمْعَةَ وَهَبَتْ يَوْمَهَا لِعَائِشَةَ, وَكَانَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - يَقْسِمُ لِعَائِشَةَ يَوْمَهَا وَيَوْمَ سَوْدَةَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

-

صحيح. رواه البخاري (5212)، ومسلم (1463) واللفظ للبخاري

وعن عاىشة -رضي الله عنها: ان سودة بنت زمعة وهبت يومها لعاىشة, وكان النبي - صلى الله عليه وسلم - يقسم لعاىشة يومها ويوم سودة. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5212)، ومسلم (1463) واللفظ للبخاري

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - পালা নেই এমন স্ত্রীর নিকট গমন করা বৈধ যখন অন্য স্ত্রীদের সাথে সমতা বহাল থাকবে

১০৬০। ’উরওয়াহ (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, ’আয়িশা (রাঃ) বলেছিলেন-হে আমার বোনের ছেলে, আমাদের নিকটে অবস্থান ব্যাপারে একজনকে অপরের উপরে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কোনরূপ অধিক প্রাধান্য দিতেন না। এমন দিন খুব কমই যেত— তিনি আমাদের সকলের নিকট আগমন ব্যতীত থাকতেন, অর্থাৎ সকলের নিকটে প্রায়ই আসতেন। আমাদেরকে তিনি স্পর্শ ব্যতীত সকলের নিকটবর্তী হতেন। অবশেষে যাঁর নিকটে রাত্রি যাপনের বারি (পাল) থাকতো তিনি তাঁর নিকটে উপস্থিত হয়ে রাত্রি যাপন করতেন।—শব্দ বিন্যাস আবূ দাউদের; হাকিম হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ عُرْوَةَ قَالَ: قَالَتْ عَائِشَةُ: يَا ابْنَ أُخْتِي! كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - لَا يُفَضِّلُ بَعْضَنَا عَلَى بَعْضٍ فِي الْقَسْمِ مِنْ مُكْثِهِ عِنْدَنَا, وَكَانَ قَلَّ يَوْمٌ إِلَّا وَهُوَ يَطُوفُ عَلَيْنَا جَمِيعًا, فَيَدْنُو مِنْ كُلِّ امْرَأَةٍ مِنْ غَيْرِ مَسِيسٍ, حَتَّى يَبْلُغَ الَّتِي هُوَ يَوْمُهَا, فَيَبِيتَ عِنْدَهَا. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ وَاللَّفْظُ لَهُ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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حسن. رواه أحمد (6/ 107 - 108)، وأبو داود (2135)، والحاكم (2/ 186) وتمامه كما عند أبي داود: «ولقد قالت سودة بنت زمعة حين أَسَنَّتْ، وفَرَقَتْ أن يفارقها رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: يا رسول الله! يومي لعائشة، فقبل ذلك رسول الله -صلى الله عليه وسلم- منها. قالت: نقول في ذلك: أنزل الله تعالى فيها وفي أشباهها - أراه قال: «وإن امرأة خافت من بعلها نشوزا». قلت: وقوله: «من غير مسيس»، أي: من غير جماع، كما جاء في بعض الروايات: «بغير وقاع»، وإلا فاللمس والتقبيل لا شيء فيهما، وعلى ذلك أيضا تدل رواية أحمد، ففيها: «فيدنو ويلمس من غير مسيس

وعن عروة قال: قالت عاىشة: يا ابن اختي! كان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - لا يفضل بعضنا على بعض في القسم من مكثه عندنا, وكان قل يوم الا وهو يطوف علينا جميعا, فيدنو من كل امراة من غير مسيس, حتى يبلغ التي هو يومها, فيبيت عندها. رواه احمد, وابو داود واللفظ له, وصححه الحاكم - حسن. رواه احمد (6/ 107 - 108)، وابو داود (2135)، والحاكم (2/ 186) وتمامه كما عند ابي داود: «ولقد قالت سودة بنت زمعة حين اسنت، وفرقت ان يفارقها رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: يا رسول الله! يومي لعاىشة، فقبل ذلك رسول الله -صلى الله عليه وسلم- منها. قالت: نقول في ذلك: انزل الله تعالى فيها وفي اشباهها - اراه قال: «وان امراة خافت من بعلها نشوزا». قلت: وقوله: «من غير مسيس»، اي: من غير جماع، كما جاء في بعض الروايات: «بغير وقاع»، والا فاللمس والتقبيل لا شيء فيهما، وعلى ذلك ايضا تدل رواية احمد، ففيها: «فيدنو ويلمس من غير مسيس

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ উরওয়াহ (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - পালা নেই এমন স্ত্রীর নিকট গমন করা বৈধ যখন অন্য স্ত্রীদের সাথে সমতা বহাল থাকবে

১০৬১। মুসলিমে ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’আসর সালাত পড়ে তাঁর সকল স্ত্রীর নিকটে যেতেন, তাতে তিনি সকলের নিকটে উপস্থিত হতেন। (এটি একটি দীর্ঘ হাদীসের অংশ বিশেষ)[1]

وَلِمُسْلِمٍ: عَنْ عَائِشَةَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا - قَالَتْ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - إِذَا صَلَّى الْعَصْرَ دَارَ عَلَى نِسَائِهِ, ثُمَّ يَدْنُو مِنْهُنَّ. الْحَدِيثَ

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صحيح. رواه مسلم (1474) (21)، وهو أيضا عند البخاري في مواطن منها (5268)، ولكن اللفظ لمسلم. فعلى عادة المصنف كان حقه - رحمه الله - أن يقول: متفق عليه واللفظ لمسلم

ولمسلم: عن عاىشة - رضي الله عنها - قالت: كان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - اذا صلى العصر دار على نساىه, ثم يدنو منهن. الحديث - صحيح. رواه مسلم (1474) (21)، وهو ايضا عند البخاري في مواطن منها (5268)، ولكن اللفظ لمسلم. فعلى عادة المصنف كان حقه - رحمه الله - ان يقول: متفق عليه واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - অসুস্থ অবস্থায় স্ত্রীদের মাঝে সমানভাবে বন্টন করা

১০৬২। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর যে অসুখে ইন্তিকাল করেছিলেন, সেই অসুখের সময় জিজ্ঞেস করতেন, আগামীকাল আমার কার কাছে থাকার পালা? আগামীকাল আমার কার কাছে থাকার পালা? তিনি ’আয়িশা (রাঃ)-এর পালার জন্য এরূপ বলতেন। সুতরাং উম্মাহাতুল মু’মিনীন (স্ত্রীগণ) তাঁকে যার ঘরে ইচ্ছে থাকার অনুমতি দিলেন। অতঃপর তিনি ’আয়িশা (রাঃ)-এর গৃহে অবস্থান করেছিলেন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - كَانَ يَسْأَلُ فِي مَرَضِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ: «أَيْنَ أَنَا غَدًا?» , يُرِيدُ: يَوْمَ عَائِشَةَ, فَأَذِنَ لَهُ أَزْوَاجُهُ يَكُونُ حَيْثُ شَاءَ, فَكَانَ فِي بَيْتِ عَائِشَةَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5217)، ومسلم (2443) واللفظ للبخاري، وتمامه عنده: «حتى مات عندها. قالت عائشة: فمات في اليوم الذي كان يدور عليَّ فيه في بيتي، فقبضه الله، وإن رأسه لبين نَحْرِي وسَحْرِي، وخالط رِيقُه ريقِي

وعن عاىشة - رضي الله عنها - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - كان يسال في مرضه الذي مات فيه: «اين انا غدا?» , يريد: يوم عاىشة, فاذن له ازواجه يكون حيث شاء, فكان في بيت عاىشة. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5217)، ومسلم (2443) واللفظ للبخاري، وتمامه عنده: «حتى مات عندها. قالت عاىشة: فمات في اليوم الذي كان يدور علي فيه في بيتي، فقبضه الله، وان راسه لبين نحري وسحري، وخالط ريقه ريقي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - স্ত্রীদের কোন একজনকে সফর সঙ্গী করতে হলে সকলের মাঝে লটারী করা

১০৬৩। ’আয়িশা (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সফরের মনস্থ করলে স্ত্রীগণের মধ্যে লটারি করতেন। যার নাম আসত তিনি তাঁকে নিয়েই সফরে বের হতেন।[1]

وَعَنْهَا قَالَتْ: كَانَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - إِذَا أَرَادَ سَفَرًا أَقْرَعَ بَيْنَ نِسَائِهِ, فَأَيَّتُهُنَّ خَرَجَ سَهْمُهَا, خَرَجَ بِهَا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2593)، ومسلم (2770) وهو طرف من حديث الإفك

وعنها قالت: كان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - اذا اراد سفرا اقرع بين نساىه, فايتهن خرج سهمها, خرج بها. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2593)، ومسلم (2770) وهو طرف من حديث الافك

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৫. স্ত্রীদের হক বণ্টন - স্ত্রীকে অধিক প্ৰহার করা নিষেধ

১০৬৪। ’আবদুল্লাহ বিন যাম’আহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমরা কেউ নিজ স্ত্রীদেরকে গোলামের মত প্ৰহার করো না।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَمْعَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَجْلِدُ أَحَدُكُمْ امْرَأَتَهُ جَلْدَ الْعَبْدِ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (5204)، وتمامه: «ثم يجامعها في آخر اليوم». قلت: وهو في البخاري ومسلم أيضا بلفظ آخر

وعن عبد الله بن زمعة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يجلد احدكم امراته جلد العبد». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (5204)، وتمامه: «ثم يجامعها في اخر اليوم». قلت: وهو في البخاري ومسلم ايضا بلفظ اخر

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৬. খোলা তালাক্বের বিবরণ

১০৬৫। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, সাবিত ইবনু কায়স এর স্ত্রী নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কাছে এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! চরিত্রগত বা দীনী বিষয়ে সাবিত ইবনু কায়সের উপর আমি দোষারোপ করছি না। তবে আমি ইসলামের ভিতরে থেকে কুফরী করা (অর্থাৎ স্বামীর সঙ্গে অমিল) পছন্দ করছি না। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেনঃ তুমি কি তার বাগানটি ফিরিয়ে দেবে? সে বললঃ হ্যাঁ। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: তুমি বাগানটি গ্রহণ কর এবং মহিলাকে এক ত্বলাক (তালাক)্ব দিয়ে দাও।

বুখারীর অন্য বর্ণনায় এরূপ আছে– ’নবী (রহঃ) তাঁকে তালাক দেয়ার জন্য আদেশ করলেন।[1]

عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا: أَنَّ امْرَأَةَ ثَابِتِ بْنِ قَيْسٍ أَتَتْ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! ثَابِتُ بْنُ قَيْسٍ مَا أَعِيبُ عَلَيْهِ فِي خُلُقٍ وَلَا دِينٍ, وَلَكِنِّي أَكْرَهُ الْكُفْرَ فِي الْإِسْلَامِ, قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَتَرُدِّينَ عَلَيْهِ حَدِيقَتَهُ?»، قَالَتْ: نَعَمْ. قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «اقْبَلِ الْحَدِيقَةَ, وَطَلِّقْهَا تَطْلِيقَةً». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ.
وَفِي رِوَايَةٍ لَهُ: وَأَمَرَهُ بِطَلَاقِهَا

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صحيح. رواه البخاري (9/ 395 / فتح)

عن ابن عباس - رضي الله عنهما: ان امراة ثابت بن قيس اتت النبي - صلى الله عليه وسلم - فقالت: يا رسول الله! ثابت بن قيس ما اعيب عليه في خلق ولا دين, ولكني اكره الكفر في الاسلام, قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اتردين عليه حديقته?»، قالت: نعم. قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اقبل الحديقة, وطلقها تطليقة». رواه البخاري. وفي رواية له: وامره بطلاقها - صحيح. رواه البخاري (9/ 395 / فتح)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৬. খোলা তালাক্বের বিবরণ

১০৬৬। আবূ দাউদও তিরমিযী-যা তিনি হাসান বলেছেন- এতে আছে যে, অবশ্য সাবিত বিন কায়েসের স্ত্রী সাবিতের নিকট থেকে খোলা তালাক গ্ৰহণ করেছিলেন। ফলে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মাত্র এক হায়িয তাঁর ইদ্দতের ব্যবস্থা করেছিলেন।[1]

وَلِأَبِي دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيِّ وَحَسَّنَهُ: «أَنَّ امْرَأَةَ ثَابِتِ بْنِ قَيْسٍ اخْتَلَعَتْ مِنْهُ, فَجَعَلَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - عِدَّتَهَا حَيْضَةً

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حسن. رواه أبو داود (2229)، والترمذي (1185)، وقال الترمذي: هذا حديث حسن غريب

ولابي داود, والترمذي وحسنه: «ان امراة ثابت بن قيس اختلعت منه, فجعل النبي - صلى الله عليه وسلم - عدتها حيضة - حسن. رواه ابو داود (2229)، والترمذي (1185)، وقال الترمذي: هذا حديث حسن غريب

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৬. খোলা তালাক্বের বিবরণ

১০৬৭। অন্য বর্ণনায় ’আমর (রাঃ) থেকে, তিনি তাঁর পিতা থেকে, তিনি তাঁর দাদা থেকে বর্ণনা করেছেন, সাবিত বিন কায়েস (রাঃ) কুৎসিত ছিলেন। ফলে তাঁর স্ত্রী বলেছিলেন, হে আল্লাহর রসূল! আল্লাহর শপথ! আল্লাহর ভয় না থাকলে সাবিত যখন আমার নিকট আসে তখন অবশ্যই আমি তার মুখে থুথু নিক্ষেপ করতাম।[1]

وَفِي رِوَايَةِ عَمْرِوِ بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ عِنْدَ ابْنِ مَاجَهْ: أَنَّ ثَابِتَ بْنَ قَيْسٍ كَانَ دَمِيمًا وَأَنَّ امْرَأَتَهُ قَالَتْ: لَوْلَا مَخَافَةُ اللَّهِ إِذَا دَخَلَ عَلَيَّ لَبَسَقْتُ فِي وَجْهِهِ

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ضعيف. رواه ابن ماجه (2507)، وفي سنده الحجاج بن أرطأة، وهو مدلس وقد عَنْعَنَ

وفي رواية عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده عند ابن ماجه: ان ثابت بن قيس كان دميما وان امراته قالت: لولا مخافة الله اذا دخل علي لبسقت في وجهه - ضعيف. رواه ابن ماجه (2507)، وفي سنده الحجاج بن ارطاة، وهو مدلس وقد عنعن

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৬. খোলা তালাক্বের বিবরণ

১০৬৮৷ সাহল বিন আবূ হাসমাহ থেকে আহমদে রয়েছে, সাবিত বিন কায়েসের ঘটনাটি ছিল ইসলামের ইতিহাসে প্রথম খোলা তালাক।[1]

وَلِأَحْمَدَ: مِنْ حَدِيثِ سَهْلِ بْنِ أَبِي حَثْمَةَ: وَكَانَ ذَلِكَ أَوَّلَ خُلْعٍ فِي الْإِسْلَامِ

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ضعيف. رواه أحمد (4/ 3) وعلته كعلة سابقه

ولاحمد: من حديث سهل بن ابي حثمة: وكان ذلك اول خلع في الاسلام - ضعيف. رواه احمد (4/ 3) وعلته كعلة سابقه

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - তালাক দেওয়া অপছন্দনীয়

১০৬৯। ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তালাক্ব হচ্ছে হালাল বস্তুর মধ্যে আল্লাহর নিকটে সর্বাপেক্ষা ঘৃণ্য বস্তু। আবূ দাউদ, ইবনু মাজাহ, হাকিম হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন। আবূ হাতিম হাদীসটির মুরসাল হওয়াকে প্রাধান্য দিয়েছেন।[1]

عَنِ اِبْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَبْغَضُ الْحَلَالِ عِنْدَ اللَّهِ الطَّلَاقُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَرَجَّحَ أَبُو حَاتِمٍ إِرْسَالَهُ

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ضعيف. رواه أبو داود (2177 و 2178)، وابن ماجه (2018)، والحاكم (2/ 169) موصولًا ومرسلًا. وانظر «العلل» لابن أبي حاتم (1/ 431)

عن ابن عمر - رضي الله عنهما- قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ابغض الحلال عند الله الطلاق». رواه ابو داود, وابن ماجه, وصححه الحاكم, ورجح ابو حاتم ارساله - ضعيف. رواه ابو داود (2177 و 2178)، وابن ماجه (2018)، والحاكم (2/ 169) موصولا ومرسلا. وانظر «العلل» لابن ابي حاتم (1/ 431)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - হায়েয অবস্থায় তালাকের বিধান

১০৭০। ’আবদুল্লাহ ইবন ’উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, তিনি রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে স্বীয় স্ত্রীকে হায়েয অবস্থায় ত্বলাক (তালাক)্ব দেন। উমার ইবন খাত্তাব (রাঃ) এ ব্যাপারে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে জিজ্ঞেস করলেন। তখন রসূলুল্লাহ বললেনঃ তাকে নির্দেশ দাও, সে যেন তার স্ত্রীকে ফিরিয়ে আনে এবং নিজের কাছে রেখে দেয় যতক্ষণ না সে মহিলা পবিত্র হয়ে আবার ঋতুবতী হয় এবং আবার পবিত্র হয়। অতঃপর সে যদি ইচ্ছে করে, তাকে রেখে দিবে। আর যদি ইচ্ছে করে তবে সহবাসের পূর্বে তাকে ত্বলাক (তালাক)্ব দেবে। আর এটাই ত্বলাক (তালাক)্বের নিয়ম, যে নিয়মে আল্লাহ তা’আলা স্ত্রীদের ত্বলাক (তালাক)্ব দেয়ার বিধান দিয়েছেন।

মুসলিমের অন্য বর্ণনায় এসেছে ’আপনি তাকে (ইবনু ’উমারকে) হুকুম দিন তার স্ত্রীকে সে ফেরত নিক তারপর পবিত্র অবস্থায় বা গর্ভাবস্থায় ত্বলাক (তালাক)্ব দিক।

বুখারীর অন্য বর্ণনায় আছে, এতে তার একটি ত্বালাক্ব হিসেবে ধরা হয়েছিল। মুসলিমের অন্য বর্ণনায় আছে- ইবনু ’উমার (রাঃ) কোন জিজ্ঞেসকারীকে বললেন, যদি তুমি তোমার স্ত্রীকে এক বা দু-তালাক্ব দাও। তাহলে এক্ষেত্রে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে আদেশ করেছিলেন- যেন আমি তাকে ফেরত নিই তারপর তার অন্য একটি হায়িয হওয়া পর্যন্ত তাকে আমি ঐ অবস্থায় রেখে দিই। অতঃপর পবিত্র না হওয়া পর্যন্ত অবকাশ দিই। তারপর তাকে স্পর্শ করার পূর্বে তালাক্ব দিই।

আর তুমি তাকে তিন তালাক্ব দিয়েছ। আর তুমি তোমার প্রভুর যে নির্দেশ তোমার স্ত্রীকে তালাক দেয়ার ব্যাপারে ছিল তার বিরুদ্ধাচরণ করেছ।

অন্য বর্ণনায় আছে- ’আবদুল্লাহ বিন উমার (রাঃ) বলেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে স্ত্রী ফেরত দিয়েছিলেন আর হায়িয অবস্থার ঐ তালাক্বটিকে কোন ব্যাপার বলে মনে করেননি এবং তিনি বলেছিলেন যখন সে পবিত্র হবে তখন তালাক্ব দিবে অথবা (তালাক্ব না দিয়ে) রেখে দিবে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّهُ طَلَّقَ اِمْرَأَتَهُ - وَهِيَ حَائِضٌ - فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَسَأَلَ عُمَرُ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ: «مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا, ثُمَّ لْيُمْسِكْهَا حَتَّى تَطْهُرَ, ثُمَّ تَحِيضَ, ثُمَّ تَطْهُرَ, ثُمَّ إِنْ شَاءَ أَمْسَكَ بَعْدُ, وَإِنْ شَاءَ طَلَّقَ بَعْدَ أَنْ يَمَسَّ, فَتِلْكَ الْعِدَّةُ الَّتِي أَمَرَ اللَّهُ أَنْ تُطَلَّقَ لَهَا النِّسَاءُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: «مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا, ثُمَّ لْيُطَلِّقْهَا طَاهِرًا أَوْ حَامِلًا
وَفِي رِوَايَةٍ أُخْرَى لِلْبُخَارِيِّ: «وَحُسِبَتْ عَلَيْهِ تَطْلِيقَةً
وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: قَالَ ابْنُ عُمَرَ: أَمَّا أَنْتَ طَلَّقْتَهَا وَاحِدَةً أَوْ اثْنَتَيْنِ; فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَمَرَنِي أَنْ أُرَاجِعَهَا, ثُمَّ أُمْهِلَهَا حَتَّى تَحِيضَ حَيْضَةً أُخْرَى, وَأَمَّا أَنْتَ طَلَّقْتَهَا ثَلَاثًا, فَقَدْ عَصَيْتَ رَبَّكَ فِيمَا أَمَرَكَ مِنْ طَلَاقِ امْرَأَتِكَ
وَفِي رِوَايَةٍ أُخْرَى: قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ: فَرَدَّهَا عَلَيَّ, وَلَمْ يَرَهَا شَيْئًا, وَقَالَ: «إِذَا طَهُرَتْ فَلْيُطَلِّقْ أَوْ لِيُمْسِكْ

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صحيح. رواه البخاري (5251)، ومسلم (1471) (1)

وعن ابن عمر - رضي الله عنهما - انه طلق امراته - وهي حاىض - في عهد رسول الله - صلى الله عليه وسلم - فسال عمر رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن ذلك فقال: «مره فليراجعها, ثم ليمسكها حتى تطهر, ثم تحيض, ثم تطهر, ثم ان شاء امسك بعد, وان شاء طلق بعد ان يمس, فتلك العدة التي امر الله ان تطلق لها النساء». متفق عليه وفي رواية لمسلم: «مره فليراجعها, ثم ليطلقها طاهرا او حاملا وفي رواية اخرى للبخاري: «وحسبت عليه تطليقة وفي رواية لمسلم: قال ابن عمر: اما انت طلقتها واحدة او اثنتين; فان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - امرني ان اراجعها, ثم امهلها حتى تحيض حيضة اخرى, واما انت طلقتها ثلاثا, فقد عصيت ربك فيما امرك من طلاق امراتك وفي رواية اخرى: قال عبد الله بن عمر: فردها علي, ولم يرها شيىا, وقال: «اذا طهرت فليطلق او ليمسك - صحيح. رواه البخاري (5251)، ومسلم (1471) (1)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - নাবী (ﷺ) এবং তাঁর দুই সাহাবীর যুগে তিন তালাকের বিধান

১০৭১। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর যুগে এবং আবূ বকর সিদ্দীকের শাসনামলে ও ’উমার ফারুক (রাঃ)-এর প্রথম দুবছরের খেলাফতকাল পর্যন্ত একসঙ্গে প্রদত্ত তিন তালাককে একটিমাত্র তালাক গণ্য করা হতো। তারপর ’উমার (রাঃ) বললেন- লোক তো তালাক্ব সম্পাদনের সুযোগ গ্রহণ করে তাড়াহুড়ো করছে, এমতাবস্থায় যদি আমি ওটা (তিন তালাক্বকে) তাদের উপর চালু করেই দিই! ফলে তিনি তিন তালাক্বকে তাদের উপর চালু করেই দিলেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: كَانَ الطَّلَاقُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَأَبِي بَكْرٍ, وَسَنَتَيْنِ مِنْ خِلَافَةِ عُمَرَ, طَلَاقُ الثَّلَاثِ وَاحِدَةٌ, فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ: إِنَّ النَّاسَ قَدْ اسْتَعْجَلُوا فِي أَمْرٍ كَانَتْ لَهُمْ فِيهِ أَنَاةٌ, فَلَوْ أَمْضَيْنَاهُ عَلَيْهِمْ? فَأَمْضَاهُ عَلَيْهِمْ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1472)

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: كان الطلاق على عهد رسول الله - صلى الله عليه وسلم - وابي بكر, وسنتين من خلافة عمر, طلاق الثلاث واحدة, فقال عمر بن الخطاب: ان الناس قد استعجلوا في امر كانت لهم فيه اناة, فلو امضيناه عليهم? فامضاه عليهم. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1472)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - এক শব্দ দ্বারা তিন তালাক দেওয়ার বিধান

১০৭২। মাহমুদ ইবনু লাবীদ (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে কোন লোক সম্বন্ধে সংবাদ দেয়া হলো যে, লোকটি তার স্ত্রীকে একই সাথে তিন তালাক দিয়ে ফেলেছে। (এরূপ শুনে) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম রাগাম্বিত হয়ে উঠে দাঁড়ালেন, অতঃপর বললেন, তোমাদের মধ্যে আমি বিদ্যমান থাকা অবস্থাতেই কুরআন নিয়ে কি খেলা করা হচ্ছে? এমনকি এক ব্যক্তি (সাহাবী) দাঁড়িয়ে গিয়ে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! আমি কি তাকে হত্যা করব না? -হাদীসটির রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ قَالَ: أُخْبِرَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عَنْ رَجُلٍ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ ثَلَاثَ تَطْلِيقَاتٍ جَمِيعًا, فَقَامَ غَضْبَانَ ثُمَّ قَالَ: «أَيُلْعَبُ بِكِتَابِ اللَّهِ تَعَالَى, وَأَنَا بَيْنَ أَظْهُرِكُمْ». حَتَّى قَامَ رَجُلٌ, فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! أَلَا أَقْتُلُهُ رَوَاهُ النَّسَائِيُّ وَرُوَاتُهُ مُوَثَّقُونَ

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ضعيف. رواه النسائي (6/ 142 - 143)، ورواته ثقات، ولكنه من رواية مخرمة بن بكير، عن أبيه، ولم يسمع منه

وعن محمود بن لبيد قال: اخبر رسول الله - صلى الله عليه وسلم - عن رجل طلق امراته ثلاث تطليقات جميعا, فقام غضبان ثم قال: «ايلعب بكتاب الله تعالى, وانا بين اظهركم». حتى قام رجل, فقال: يا رسول الله! الا اقتله رواه النساىي ورواته موثقون - ضعيف. رواه النساىي (6/ 142 - 143)، ورواته ثقات، ولكنه من رواية مخرمة بن بكير، عن ابيه، ولم يسمع منه

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - তিন তালাক দ্বারা যা সংঘটিত হয়

১০৭৩৷ ইবনু আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, সাহাবী আবূ রুকানাহ তাঁর স্ত্রী উম্মু রুকানাহকে তালাক দিয়েছিলেন। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বললেন, তোমার স্ত্রীকে তুমি ’রাজায়াত’ কর অর্থাৎ ফেরত নাও, উক্ত সাহাবী বললেন আমি তো তাকে তিন তালাক দিয়ে ফেলেছি। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তা তো আমি জানিই, তুমি তাকে ফিরিয়ে নাও।[1]

মুসনাদে আহমাদের শব্দে আছে, সাহাবী আবূ রুকানাহ তাঁর স্ত্রীকে একই বৈঠকে তিন তালাক দিয়েছিলেন। তারপর তিনি তাঁর স্ত্রী বিচ্ছেদ হেতু পেরেশান হয়ে পড়লেন। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে বললেন— এটা তো একটি মাত্র তালাক গণ্য হয়েছে। হাদীস দু’টির রাবী ইবনু ইসহাক-এ হাদীসে ত্রুটি রয়েছে।

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: طَلَّقَ أَبُو رُكَانَةَ أُمَّ رُكَانَةَ. فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «رَاجِعِ امْرَأَتَكَ»، فَقَالَ: إِنِّي طَلَّقْتُهَا ثَلَاثًا. قَالَ: «قَدْ عَلِمْتُ, رَاجِعْهَا». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ
وَفِي لَفْظٍ لِأَحْمَدَ: طَلَّقَ أَبُو رُكَانَةَ اِمْرَأَتَهُ فِي مَجْلِسٍ وَاحِدٍ ثَلَاثًا, فَحَزِنَ عَلَيْهَا, فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «فَإِنَّهَا وَاحِدَةٌ». وَفِي سَنَدِهَا ابْنُ إِسْحَاقَ, وَفِيهِ مَقَالٌ

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ضعيف. رواه أبو داود (2196) بسندٍ ضعيفٍ
رواه أحمد (165) وليست علته في ابن إسحاق، وإنما له علة أخرى

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما- قال: طلق ابو ركانة ام ركانة. فقال له رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «راجع امراتك»، فقال: اني طلقتها ثلاثا. قال: «قد علمت, راجعها». رواه ابو داود وفي لفظ لاحمد: طلق ابو ركانة امراته في مجلس واحد ثلاثا, فحزن عليها, فقال له رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «فانها واحدة». وفي سندها ابن اسحاق, وفيه مقال - ضعيف. رواه ابو داود (2196) بسند ضعيف رواه احمد (165) وليست علته في ابن اسحاق، وانما له علة اخرى

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - তিন তালাক দ্বারা যা সংঘটিত হয়

১০৭৪। আবূ দাউদ অন্য সূত্রে বর্ণনা করেছেন যে সূত্রটি এর থেকে উত্তম-তাতে আছে, অবশ্য আবূ রুকানাহ তাঁর স্ত্রী সুহায়মাহকে ’আল-বাত্তাহ তালাক্ব’ দিয়েছিলেন। আর তিনি বলেছিলেন- আল্লাহর শপথ! ’আমি তো এতে একটি মাত্র তালাকেরই ইচ্ছা করেছিলাম। ফলে নবী (রহঃ) তাঁর স্ত্রীকে তার নিকট ফেরত দিয়েছিলেন।[1]

وَقَدْ رَوَى أَبُو دَاوُدَ مِنْ وَجْهٍ آخَرَ أَحْسَنَ مِنْهُ: أَنَّ رُكَانَةَ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ سُهَيْمَةَ الْبَتَّةَ, فَقَالَ: وَاللَّهِ مَا أَرَدْتُ بِهَا إِلَّا وَاحِدَةً, فَرَدَّهَا إِلَيْهِ النَّبِيُّ - صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

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ضعيف. رواه أبو داود (2206) وله علل

وقد روى ابو داود من وجه اخر احسن منه: ان ركانة طلق امراته سهيمة البتة, فقال: والله ما اردت بها الا واحدة, فردها اليه النبي - صلى الله عليه وسلم - ضعيف. رواه ابو داود (2206) وله علل

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - রসিকতা করে তালাক দেওয়ার বিধান

১০৭৫। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ তিনটি বিষয়ে বাস্তবিকই বলা হলেও যথার্থ বিবেচিত হবে অথবা উপহাসচ্ছলে বলা হলেও যথার্থ গণ্য হবে: বিবাহ, তালাক ও প্রত্যাহার। নাসায়ী ব্যতীত চার জনে; হাকিম সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «ثَلَاثٌ جِدُّهنَّ جِدٌّ, وَهَزْلُهُنَّ جِدٌّ: النِّكَاحُ, وَالطَّلَاقُ, وَالرَّجْعَةُ». رَوَاهُ الْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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حسن. رواه أبو داود (2194)، والترمذي (1184)، وابن ماجه (2039)، وله شواهد منها ما ذكره الحافظ هنا، وانظر «التلخيص» (3/ 209 - 210)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «ثلاث جدهن جد, وهزلهن جد: النكاح, والطلاق, والرجعة». رواه الاربعة الا النساىي, وصححه الحاكم - حسن. رواه ابو داود (2194)، والترمذي (1184)، وابن ماجه (2039)، وله شواهد منها ما ذكره الحافظ هنا، وانظر «التلخيص» (3/ 209 - 210)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - প্ৰাণীদের শাস্তি দেওয়া নিষেধ

১০৭৬। ইবনু ’আদীর অন্য একটি দুর্বল বর্ণনায় আছে- (ঐ তিনটি হচ্ছে) তালাক, দাসমুক্তি ও বিবাহ।[1]

وَفِي رِوَايَةٍ لِابْنِ عَدِيٍّ مِنْ وَجْهٍ آخَرَ ضَعِيفٍ: «الطَّلَاقُ, وَالْعِتَاقُ, وَالنِّكَاحُ

وفي رواية لابن عدي من وجه اخر ضعيف: «الطلاق, والعتاق, والنكاح

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - অন্তরে তালাকের চিন্তা করলেই তালাক কার্যকর হয় না

১০৭৭। উবাদাহ ইবনু সামিত (রাঃ) থেকে একটা মারফূ’ সূত্রে হারিস ইবনু আবি উসামাহ হতে বর্ণিত হয়েছে; তিনটি ব্যাপারে খেল-তামাশা চলে না। তালাক, বিবাহ ও দাসমুক্তিতে। এ সম্বন্ধে যে কথা বলবে তার উপর তা সাব্যস্ত হয়ে যাবে। এর সানাদ দুর্বল।[1]

وَلِلْحَارِثِ ابْنِ أَبِي أُسَامَةَ: مِنْ حَدِيثِ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ رَفَعَهُ: «لَا يَجُوزُ اللَّعِبُ فِي ثَلَاثٍ: الطَّلَاقُ, وَالنِّكَاحُ, وَالْعِتَاقُ, فَمَنْ قَالَهُنَّ فَقَدَ وَجَبْنَ». وَسَنَدُهُ ضَعِيفٌ

وللحارث ابن ابي اسامة: من حديث عبادة بن الصامت رفعه: «لا يجوز اللعب في ثلاث: الطلاق, والنكاح, والعتاق, فمن قالهن فقد وجبن». وسنده ضعيف

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - অন্তরে তালাকের চিন্তা করলেই তালাক কার্যকর হয় না

১০৭৮। আবূ হুরাইরা (রাঃ) সূত্রে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেছেনঃ আমার উম্মতের হৃদয়ে যে খেয়াল জাগ্রত হয় আল্লাহ তা ক্ষমা করে দিয়েছেন, যতক্ষণ না সে তা কার্যে পরিণত করে বা মুখে উচ্চারণ করে।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِنَّ اللَّهَ تَجَاوَزَ عَنْ أُمَّتِي مَا حَدَّثَتْ بِهِ أَنْفُسَهَا, مَا لَمْ تَعْمَلْ أَوْ تَكَلَّمْ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5269)، ومسلم (127)، من طريق قتادة، عن زرارة بن أوفى، عن أبي هريرة، به. وزاد البخاري: قال قتادة: إذا طلق في نفسه فليس بشيء

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «ان الله تجاوز عن امتي ما حدثت به انفسها, ما لم تعمل او تكلم». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5269)، ومسلم (127)، من طريق قتادة، عن زرارة بن اوفى، عن ابي هريرة، به. وزاد البخاري: قال قتادة: اذا طلق في نفسه فليس بشيء

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - যাদের তালাক দেওয়া কার্যকর হয় না

১০৭৯। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন: আল্লাহ্ আমার উম্মাতকে ভুল, বিস্মৃতি ও জোরপূর্বক কৃত কাজের দায় থেকে অব্যাহতি দিয়েছেন। -আবূ হাতিম বলেন: এর সানাদ ঠিক নয়।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-, عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِنَّ اللَّهَ تَعَالَى وَضَعَ عَنْ أُمَّتِي الْخَطَأَ, وَالنِّسْيَانَ, وَمَا اسْتُكْرِهُوا عَلَيْهِ». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ, وَالْحَاكِمُ, وَقَالَ أَبُو حَاتِمٍ: لَا يَثْبُتُ

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صحيح. رواه ابن ماجه (2045)، والحاكم (2/ 189)، وفي «الأصل» تفصيل ذلك وبيان من صحَّحه من العلماء

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما-, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «ان الله تعالى وضع عن امتي الخطا, والنسيان, وما استكرهوا عليه». رواه ابن ماجه, والحاكم, وقال ابو حاتم: لا يثبت - صحيح. رواه ابن ماجه (2045)، والحاكم (2/ 189)، وفي «الاصل» تفصيل ذلك وبيان من صححه من العلماء

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - স্ত্রীকে নিজের উপর হারাম করে নেয়ার বিধান

১০৮০। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, কোন ব্যক্তি তার স্ত্রীকে হারাম বলে ঘোষণা দেয় সে ক্ষেত্রে কিছু (অর্থাৎ ত্বলাক (তালাক)) হয় না। তিনি আরও বলেন, ’নিশ্চয় তোমাদের জন্য রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর মধ্যে রয়েছে উত্তম আদর্শ’।

মুসলিমে আছে, যখন কোন লোক তার স্ত্রীকে হারাম বলে ব্যক্ত করে তখন তা শপথ বা কসম বলে গণ্য হয়-তার জন্য তাকে কসমের কাফফারা দিতে হবে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: إِذَا حَرَّمَ امْرَأَتَهُ لَيْسَ بِشَيْءٍ. وَقَالَ: (لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ) [الأحزاب: 21] رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ
وَلِمُسْلِمٍ: إِذَا حَرَّمَ الرَّجُلُ عَلَيْهِ امْرَأَتَهُ, فَهِيَ يَمِينٌ يُكَفِّرُهَا

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صحيح. رواه ابن ماجه (2045)، والحاكم (2/ 189)، وفي «الأصل» تفصيل ذلك وبيان من صحَّحه من العلماء

وعن ابن عباس - رضي الله عنهما - قال: اذا حرم امراته ليس بشيء. وقال: (لقد كان لكم في رسول الله اسوة حسنة) [الاحزاب: 21] رواه البخاري ولمسلم: اذا حرم الرجل عليه امراته, فهي يمين يكفرها - صحيح. رواه ابن ماجه (2045)، والحاكم (2/ 189)، وفي «الاصل» تفصيل ذلك وبيان من صححه من العلماء

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - তালাকের আনুষাঙ্গিক শব্দাবলী

১০৮১। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, জাওনের কন্যাকে যখন রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর নিকট (একটি ঘরে) পাঠানো হল আর তিনি তার নিকটবর্তী হলেন, তখন সে বলল, আমি আপনার থেকে আল্লাহর কাছে আশ্রয় চাচ্ছি। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেনঃ তুমি তো এক মহামহিমের কাছে পানাহ চেয়েছ। তুমি তোমার পরিবারের কাছে গিয়ে মিলিত হও।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا: أَنَّ ابْنَةَ الْجَوْنِ لَمَّا أُدْخِلَتْ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَدَنَا مِنْهَا. قَالَتْ: أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْكَ, قَالَ: «لَقَدْ عُذْتِ بِعَظِيمٍ, الْحَقِي بِأَهْلِكِ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (5254)

وعن عاىشة - رضي الله عنها: ان ابنة الجون لما ادخلت على رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ودنا منها. قالت: اعوذ بالله منك, قال: «لقد عذت بعظيم, الحقي باهلك». رواه البخاري - صحيح. رواه البخاري (5254)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - বিবাহের পরেই শুধুমাত্র তালাক দেয়া যায়

১০৮২। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বিবাহ সম্পাদন হওয়ার পর ব্যতীত তালাক নেই, আর দাস-দাসীর উপর মালিকানা প্রতিষ্ঠা হওয়ার পর ব্যতীত দাসত্ব মুক্তি নেই। -হাকিম সহীহ বলেছেন, এর সানাদটির মধ্যে কিছু দুর্বলতা রয়েছে।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا طَلَاقَ إِلَّا بَعْدَ نِكَاحٍ, وَلَا عِتْقَ إِلَّا بَعْدَ مِلْكٍ». رَوَاهُ أَبُو يَعْلَى, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَهُوَ مَعْلُولٌ

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صحيح. رواه الحاكم (2/ 204) ولم أجده في المطبوع من مسند أبي يعلى. والله أعلم. والحديث صحيح بشواهده التي بعده

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا طلاق الا بعد نكاح, ولا عتق الا بعد ملك». رواه ابو يعلى, وصححه الحاكم, وهو معلول - صحيح. رواه الحاكم (2/ 204) ولم اجده في المطبوع من مسند ابي يعلى. والله اعلم. والحديث صحيح بشواهده التي بعده

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - বিবাহের পরেই শুধুমাত্র তালাক দেয়া যায়

১০৮৩। ইবনু মাজাহ মিসওয়ার বিন মাখরামাহ থেকে অনুরূপ হাদীস বর্ণনা করেছেন, তার সানাদটি হাসান, কিন্তু এটাও ত্রুটিযুক্ত।[1]

وَأَخْرَجَ ابْنُ مَاجَهْ: عَنِ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ مِثْلَهُ, وَإِسْنَادُهُ حَسَنٌ, لَكِنَّهُ مَعْلُولٌ أَيْضًا

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صحيح. رواه ابن ماجه (2048)، وانظر ما قبله، وما بعده. وحسَّن إسناده البوصيريُّ في الزوائد

واخرج ابن ماجه: عن المسور بن مخرمة مثله, واسناده حسن, لكنه معلول ايضا - صحيح. رواه ابن ماجه (2048)، وانظر ما قبله، وما بعده. وحسن اسناده البوصيري في الزواىد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - বিবাহের পরেই শুধুমাত্র তালাক দেয়া যায়

১০৮৪। “আমার বিন শু’আইব (রহঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পিতা থেকে, তিনি তাঁর দাদা থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে বিষয়ে মালিকানা নেই, সে বিষয়ে আদম সন্তানের কোন মানৎ মানা চলবে না এবং মালিকানা প্রতিষ্ঠা ব্যতীত কোন দাসত্ব মুক্তি নেই, বিবাহ সম্পাদনের মাধ্যমে স্ত্রীর অধিকার অর্জন ব্যতীত তালাকু নেই। —তিরমিযী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন, বুখারী (রহঃ) হতে বর্ণিত, এ ব্যাপারে হাদীসের মধ্যে এটি সর্বাধিক সহীহ।[1]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا نَذْرَ لِابْنِ آدَمَ فِيمَا لَا يَمْلِكُ, وَلَا عِتْقِ لَهُ فِيمَا لَا يَمْلِكُ, وَلَا طَلَاقَ لَهُ فِيمَا لَا يَمْلِكُ». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ وَالتِّرْمِذِيُّ وَصَحَّحَهُ, وَنُقِلَ عَنْ الْبُخَارِيِّ أَنَّهُ أَصَحُّ مَا وَرَدَ فِيهِ

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صحيح. رواه أبو داود (2190 و 2191 و 2192)، والترمذي (1181)، وقال الأخير. «وفي الباب عن علي، ومعاذ بن جبل، وجابر، وابن عباس، وعائشة. قال أبو عيسى: حديث عبد الله بن عمرو حديث حسن صحيح. وهو أحسن شيء روي في هذا الباب». قلت: وقول البخاري نقله البيهقي في «الخلافيات»، وانظر «التلخيص» (310) وفي «الأصل» بيان لكل هذه الشواهد وطرقها

وعن عمرو بن شعيب, عن ابيه, عن جده قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا نذر لابن ادم فيما لا يملك, ولا عتق له فيما لا يملك, ولا طلاق له فيما لا يملك». اخرجه ابو داود والترمذي وصححه, ونقل عن البخاري انه اصح ما ورد فيه - صحيح. رواه ابو داود (2190 و 2191 و 2192)، والترمذي (1181)، وقال الاخير. «وفي الباب عن علي، ومعاذ بن جبل، وجابر، وابن عباس، وعاىشة. قال ابو عيسى: حديث عبد الله بن عمرو حديث حسن صحيح. وهو احسن شيء روي في هذا الباب». قلت: وقول البخاري نقله البيهقي في «الخلافيات»، وانظر «التلخيص» (310) وفي «الاصل» بيان لكل هذه الشواهد وطرقها

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
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পরিচ্ছেদঃ ৭. তালাক্বের বিবরণ - শরীয়তের বিধান প্রযোজ্য নয় এমন ব্যক্তির তালাকের হুকুম

১০৮৫। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন- তিন ব্যক্তি থেকে কলম উঠিয়ে রাখা হয়েছেঃ ঘুমন্ত ব্যক্তি যতক্ষণ না সে জাগ্রত হয়, নাবালেগ, যতক্ষণ না সে বালেগ হয় এবং পাগল, যতক্ষণ না সে জ্ঞান ফিরে পায় বা সুস্থ হয়। -হাকিম সহীহ বলেছেন, ইবনু হিব্বানও বর্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا, عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «رُفِعَ الْقَلَمُ عَنْ ثَلَاثَةٍ: عَنِ النَّائِمِ حَتَّى يَسْتَيْقِظَ, وَعَنِ الصَّغِيرِ حَتَّى يَكْبُرَ, وَعَنِ الْمَجْنُونِ حَتَّى يَعْقِلَ, أَوْ يَفِيقَ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا التِّرْمِذِيَّ وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أحمد (600 - 101و 144)، وأبو داود (4398)، والنسائي (656)، وابن ماجه (2041)، وابن حبان (142)، والحاكم (2/ 59) بسند صحيح. وأيضا له شواهد أخرى مذكورة بالأصل

وعن عاىشة رضي الله عنها, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «رفع القلم عن ثلاثة: عن الناىم حتى يستيقظ, وعن الصغير حتى يكبر, وعن المجنون حتى يعقل, او يفيق». رواه احمد, والاربعة الا الترمذي وصححه الحاكم - صحيح. رواه احمد (600 - 101و 144)، وابو داود (4398)، والنساىي (656)، وابن ماجه (2041)، وابن حبان (142)، والحاكم (2/ 59) بسند صحيح. وايضا له شواهد اخرى مذكورة بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৮. রাজা’আত বা তালাক্বের পর (স্ত্রী ফেরত) নেয়ার বিবরণ - রাজআত করার ব্যাপারে সাক্ষী রাখার বিধান

১০৮৬। ’ইমরান বিন হুসাইন (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, তিনি ঐ লোক সম্বন্ধে জিজ্ঞাসিত হলেন, যে ব্যক্তি তালাক দিয়ে রাজ’আত বা স্ত্রীকে ফেরত নেয় আর ফেরত নেয়ার কোন সাক্ষী রাখে না। তিনি বললেন, স্ত্রীর তালাকের ও তার রাজা’আতের উপর সাক্ষী রাখবে; আবূ দাউদএরূপ মাওকুফ সানাদে বর্ণনা করেছেন, এ হাদীসের সানাদ সহীহ।[1]

ইমাম বায়হাক্বী এ শব্দে বর্ণনা করেছেন- ’ইমরান বিন হুসাইন (রাঃ) এমন ব্যক্তি সম্বন্ধে তিনি জিজ্ঞাসিত হয়েছিলেন ’যে ব্যক্তি স্বীয় স্ত্রীকে তালাক দেয়ার পর ফেরত নেয়। কিন্তু ফেরত নেয়ার স্বাক্ষী করে রাখে না’।

অতঃপর তিনি বলেছিলেন—’এটা সুন্নাত তরীকা নয়। বরং সে এখন তার সাক্ষী করে রাখুক। তাবারানী, অন্য বর্ণনায় অতিরিক্ত করেছেন যে, সে আল্লাহর নিকটে ক্ষমা প্রার্থনা করবে।

عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا; أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ الرَّجُلِ يُطَلِّقُ, ثُمَّ يُرَاجِعُ, وَلَا يُشْهِدُ? فَقَالَ: أَشْهِدْ عَلَى طَلَاقِهَا, وَعَلَى رَجْعَتِهَا. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ هَكَذَا مَوْقُوفًا, وَسَنَدُهُ صَحِيحٌ

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صحيح. رواه أبو داود (2186)، ولفظه تاما: طلقت لغير سنة، وراجعت لغير سنة؛ أشهد على طلاقها، وعلى رجعتها، ولا تعد

عن عمران بن حصين رضي الله عنهما; انه سىل عن الرجل يطلق, ثم يراجع, ولا يشهد? فقال: اشهد على طلاقها, وعلى رجعتها. رواه ابو داود هكذا موقوفا, وسنده صحيح - صحيح. رواه ابو داود (2186)، ولفظه تاما: طلقت لغير سنة، وراجعت لغير سنة؛ اشهد على طلاقها، وعلى رجعتها، ولا تعد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৮. রাজা’আত বা তালাক্বের পর (স্ত্রী ফেরত) নেয়ার বিবরণ - রাজআত করার ব্যাপারে সাক্ষী রাখার বিধান

১০৮৭। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, তিনি যখন তাঁর স্ত্রীকে তালাক দিয়েছিলেন- তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (তাঁর পিতা) উমর (রাঃ)-কে বলেছিলেন, তাকে (আবদুল্লাহ) হুকুম করুন সে যেন তার স্ত্রীকে ফেরত নেয়।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ, - أَنَّهُ لَمَّا طَلَّقَ امْرَأَتَهُ، قَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - لِعُمَرَ: «مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

وعن ابن عمر, - انه لما طلق امراته، قال النبي - صلى الله عليه وسلم - لعمر: «مره فليراجعها». متفق عليه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৯. ঈলা, যিহার ও কাফফারার বিবরণ - যে ব্যক্তি স্বীয় স্ত্রীর নিকট সহবস্থান না করার শপথ করে

১০৮৮। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর স্ত্রীদের সাথে (নিকটবর্তী না হবার জন্য) ’ঈলা’ বা কসমও হারাম করেছিলেন। ফলে হালাল কাজকে হারাম করেছিলেন এবং তিনি এরূপ শপথ ভঙ্গ করার জন্য কাফফারা প্ৰদান করেছিলেন। --রাবীগুলো নির্ভরযোগ্য।[1]

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: آلَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - مِنْ نِسَائِهِ وَحَرَّمَ, فَجَعَلَ الْحَرَامَ حَلَالًا, وَجَعَلَ لِلْيَمِينِ كَفَّارَةً. رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ, وَرُوَاتُهُ ثِقَاتٌ

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رواه الترمذي (1201) من طريق مسلمة بن علقمة، أنبأنا داود بن أبي هند (ووقع في السنن: داود بن علي. وهو خطأ)، عن عامر الشعبي، عن مسروق، عن عائشة، به. وقال: «حديث مسلمة بن علقمة، عن داود. رواه علي بن مسهر وغيره: عن داود، عن الشعبي، أن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلا. وليس فيه: عن مسروق، عن عائشة. وهذا أصح من حديث مسلمة بن علقمة». وابن مسهر أضبط وأتقن من مسلمة لا شك في ذلك، خاصة وأن مسلمة هناك من تكلم في حفظه فضلا عن روايته عن داود، فقد سئل الإمام أحمد عنه فقال: «شيخ ضعيف الحديث. حدث عن داود بن أبي هند أحاديث مناكير». قلت: وهذا منها، كما قال الذهبي في «الميزان» (409)

عن عاىشة رضي الله عنها قالت: الى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - من نساىه وحرم, فجعل الحرام حلالا, وجعل لليمين كفارة. رواه الترمذي, ورواته ثقات - رواه الترمذي (1201) من طريق مسلمة بن علقمة، انبانا داود بن ابي هند (ووقع في السنن: داود بن علي. وهو خطا)، عن عامر الشعبي، عن مسروق، عن عاىشة، به. وقال: «حديث مسلمة بن علقمة، عن داود. رواه علي بن مسهر وغيره: عن داود، عن الشعبي، ان النبي صلى الله عليه وسلم مرسلا. وليس فيه: عن مسروق، عن عاىشة. وهذا اصح من حديث مسلمة بن علقمة». وابن مسهر اضبط واتقن من مسلمة لا شك في ذلك، خاصة وان مسلمة هناك من تكلم في حفظه فضلا عن روايته عن داود، فقد سىل الامام احمد عنه فقال: «شيخ ضعيف الحديث. حدث عن داود بن ابي هند احاديث مناكير». قلت: وهذا منها، كما قال الذهبي في «الميزان» (409)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৯. ঈলা, যিহার ও কাফফারার বিবরণ - ঈ’লার (স্ত্রী থেকে পৃথক থাকার শপথ করা) বিধানাবলী

১০৮৯. ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, চার মাস অতিক্রান্ত হয়ে গেলে ত্বলাক (তালাক)্ব দেয়া পর্যন্ত তাকে (ঈলাকারীকে) আটকে রাখা হবে। আর ত্বলাক (তালাক)্ব না দেয়া পর্যন্ত ত্বলাক (তালাক)্ব প্রযোজ্য হবে না।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: إِذَا مَضَتْ أَرْبَعَةُ أَشْهُرٍ وُقِفَ الْمُؤْلِي حَتَّى يُطَلِّقَ, وَلَا يَقَعُ عَلَيْهِ الطَّلَاقُ حَتَّى يُطَلِّقَ. أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (5291)

وعن ابن عمر رضي الله عنهما قال: اذا مضت اربعة اشهر وقف المولي حتى يطلق, ولا يقع عليه الطلاق حتى يطلق. اخرجه البخاري - صحيح. رواه البخاري (5291)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৯. ঈলা, যিহার ও কাফফারার বিবরণ - ঈ’লার (স্ত্রী থেকে পৃথক থাকার শপথ করা) বিধানাবলী

১০৯০। সুলাইমান ইবনু ইয়াসার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি দশ জনেরও অধিক সাহাবীকে দেখেছি তারা (ঈলাকারীদেরকে) বিচারকের নিকট হাজির করেছেন। —শাফেয়ী।[1]

وَعَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ قَالَ: أَدْرَكْتُ بِضْعَةَ عَشَرَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - كُلُّهُمْ يَقِفُونَ الْمُولِي. رَوَاهُ الشَّافِعِيُّ

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صحيح. رواه الشافعي في «المسند» (2/ 42/ رقم 139)

وعن سليمان بن يسار قال: ادركت بضعة عشر من اصحاب النبي - صلى الله عليه وسلم - كلهم يقفون المولي. رواه الشافعي - صحيح. رواه الشافعي في «المسند» (2/ 42/ رقم 139)

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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৯. ঈলা, যিহার ও কাফফারার বিবরণ - ঈ’লার (স্ত্রী থেকে পৃথক থাকার শপথ করা) বিধানাবলী

১০৯১। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, জাহিলিয়াতের যুগের ঈলা এক বৎসর ও দু’ বৎসর কাল দীর্ঘ হতো। আল্লাহ ঐ দীর্ঘ সময়কে চার মাস নির্ধারণ করে দিয়েছেন। অতএব যদি তা চার মাসের কম হয় তাহলে ঈলা বলে গণ্য হবে না।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: كَانَ إِيلَاءُ الْجَاهِلِيَّةِ السَّنَةَ وَالسَّنَتَيْنِ, فَوَقَّتَ اللَّهُ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ, فَإِنْ كَانَ أَقَلَّ مِنْ أَرْبَعَةِ أَشْهُرٍ, فَلَيْسَ بِإِيلَاءٍ. أَخْرَجَهُ الْبَيْهَقِيُّ

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صحيح. رواه البيهقي (7/ 381)

وعن ابن عباس رضي الله عنهما قال: كان ايلاء الجاهلية السنة والسنتين, فوقت الله اربعة اشهر, فان كان اقل من اربعة اشهر, فليس بايلاء. اخرجه البيهقي - صحيح. رواه البيهقي (7/ 381)

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পরিচ্ছেদঃ ৯. ঈলা, যিহার ও কাফফারার বিবরণ - যিহারের (স্ত্রী মায়ের সঙ্গে তুলনা করা) বিধানাবলী

১০৯২। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, কোন এক ব্যক্তি তার স্ত্রীর সাথে যিহার করে, অতঃপর তার সাথে সহবাস করে ফেলে। তারপর সে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে এসে বলল যে, আমি তো কাফফারা দেয়ার পূর্বেই আমার স্ত্রীর সাথে সহবাস করেছি। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন,-আল্লাহর আদেশ পালন না করে স্ত্রীর নিকটে যেও না। -তিরমিযী সহীহ বলেছেন, নাসায়ী এর ইরসাল হওয়াকে প্রাধান্য দিয়েছেন।[1]

বাযযার অন্য সূত্রে ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন, তাতে অতিরিক্ত আছে- তুমি তোমার এ কাজের জন্য (কসম ভঙ্গের জন্যে) কাফফারা দাও, এরূপ আর করবে না।

وَعَنْهُ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُمَا; أَنَّ رَجُلًا ظَاهَرَ مِنِ امْرَأَتِهِ, ثُمَّ وَقَعَ عَلَيْهَا, فَأَتَى النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: إِنِّي وَقَعْتُ عَلَيْهَا قَبْلَ أَنْ أُكَفِّرَ, قَالَ: «فَلَا تَقْرَبْهَا حَتَّى تَفْعَلَ مَا أَمَرَكَ اللَّهُ». رَوَاهُ الْأَرْبَعَةُ وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, وَرَجَّحَ النَّسَائِيُّ إِرْسَالَهُ

وَرَوَاهُ الْبَزَّارُ: مِنْ وَجْهٍ آخَرَ, عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ وَزَادَ فِيهِ: «كَفِّرْ وَلَا تَعُدْ

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صحيح. رواه أبو داود (2223)، والنسائي (667)، والترمذي (1199)، وابن ماجه (2065)، من طريق الحكم بن أبان، عن عكرمة، عن ابن عباس. وقال الترمذي: «حديث حسن غريب صحيح». قلت: وهو حسن الإسناد من أجل الحكم بن أبان، وقد حسنه الحافظ نفسه في «الفتح» (9/ 433) وأما إعلال الحديث بالإرسال، كما قال النسائي في «السنن» (668)، وأبو حاتم في «العلل» (1/ 434307)، فهو مردود بقول ابن حزم في «المحلى» (10/ 55) «هذا خبر صحيح من رواية الثقات، لا يضره إرسال من أرسله». قلت: وما بعده أيضا يشهد له

وعنه رضي الله تعالى عنهما; ان رجلا ظاهر من امراته, ثم وقع عليها, فاتى النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: اني وقعت عليها قبل ان اكفر, قال: «فلا تقربها حتى تفعل ما امرك الله». رواه الاربعة وصححه الترمذي, ورجح النساىي ارساله ورواه البزار: من وجه اخر, عن ابن عباس وزاد فيه: «كفر ولا تعد - صحيح. رواه ابو داود (2223)، والنساىي (667)، والترمذي (1199)، وابن ماجه (2065)، من طريق الحكم بن ابان، عن عكرمة، عن ابن عباس. وقال الترمذي: «حديث حسن غريب صحيح». قلت: وهو حسن الاسناد من اجل الحكم بن ابان، وقد حسنه الحافظ نفسه في «الفتح» (9/ 433) واما اعلال الحديث بالارسال، كما قال النساىي في «السنن» (668)، وابو حاتم في «العلل» (1/ 434307)، فهو مردود بقول ابن حزم في «المحلى» (10/ 55) «هذا خبر صحيح من رواية الثقات، لا يضره ارسال من ارسله». قلت: وما بعده ايضا يشهد له

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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ৯. ঈলা, যিহার ও কাফফারার বিবরণ - যিহারের কাফফারা সমূহ

১০৯৩৷ সালামাহ ইবনু সাখার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন- রামাযান মাস এসে যাবার পর আমার মনে ভয়ের উদ্রেক হল যে, হয়তো আমি আমার স্ত্রীর সাথে সঙ্গম করে বসব। অনন্তর আমি তার নিকটবর্তী হলাম। এমত অবস্থায় তার একটি অংশ (হাঁটুর নিম্নাংশ) রাত্রে আমার সামনে উম্মুক্ত হয়ে গেল; ফলে আমি তার উপরে পতিত হলাম অর্থাৎ সহবাস করে ফেললাম। রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাকে বললেন, একটি দাস মুক্ত কর। আমি বললাম, আমি দাসের মালিক নই।-কেবল আমি নিজেরই মালিক। তিনি বললেন,- একাদিক্ৰমে দুমাস সওম পালন কর। আমি বললাম, আমি সওম পালনের জন্যেই তো এ বিপদে পড়েছি। তিনি বললেন-তবে তুমি ষাট জন দরিদ্রকে এক অরাক বা ফারাক (আনুমানিক ৪৫ কেজি ওজনের) খেজুর খাইয়ে দাও। —ইবনু খুযাইমাহ ও ইবনু জারূদ একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ سَلَمَةَ بْنِ صَخْرٍ قَالَ: دَخَلَ رَمَضَانُ, فَخِفْتُ أَنْ أُصِيبَ اِمْرَأَتِي, فَظَاهَرْتُ مِنْهَا, فَانْكَشَفَ لِي مِنْهَا شَيْءٌ لَيْلَةً, فَوَقَعَتْ عَلَيْهَا, فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - «حَرِّرْ رَقَبَةً» قُلْتُ: مَا أَمْلِكُ إِلَّا رَقَبَتِي. قَالَ: «فَصُمْ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ»، قُلْتُ: وَهَلْ أَصَبْتُ الَّذِي أَصَبْتُ إِلَّا مِنْ الصِّيَامِ? قَالَ: «أَطْعِمْ عِرْقًا مِنْ تَمْرٍ بَيْنَ سِتِّينَ مِسْكِينًا». أَخْرَجَهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ إِلَّا النَّسَائِيَّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ خُزَيْمَةَ, وَابْنُ الْجَارُودِ

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صحيح. رواه أحمد (4/ 37)، وأبو داود (2213)، والترمذي (1198 و 3299)، وابن ماجه (2062)، وابن الجارود (744)، من طريق محمد بن إسحاق، عن محمد بن عمرو بن عطاء، عن سليمان بن يسار، عن سلمة بن صخر، به. وقال الترمذي: «حديث حسن» ونقل إعلال البخاري له بالانقطاع بين سليمان بن يسار وبين سلمة. قلت: وأيضا ابن إسحاق مدلس. ولكنه جاء من طرق أخرى. رواه الترمذي (1200)، من طريق أبي سلمة. ومحمد بن عبد الرحمن بن ثوبان، عن سلمة، به. وقال: «هذا حديث حسن». قلت: وفيه نفس العلة السابقة، وهي الانقطاع. ورواه أبو داود (2217)، وابن الجارود (745) بسند مرسل صحيح. والخلاصة أن الحديث بهذه الطرق، وشاهده السابق عن ابن عباس صحيح، خاصة وقد حسن الحافظ في «الفتح» (9/ 433) حديث سلمة هذا

وعن سلمة بن صخر قال: دخل رمضان, فخفت ان اصيب امراتي, فظاهرت منها, فانكشف لي منها شيء ليلة, فوقعت عليها, فقال لي رسول الله - صلى الله عليه وسلم - «حرر رقبة» قلت: ما املك الا رقبتي. قال: «فصم شهرين متتابعين»، قلت: وهل اصبت الذي اصبت الا من الصيام? قال: «اطعم عرقا من تمر بين ستين مسكينا». اخرجه احمد, والاربعة الا النساىي, وصححه ابن خزيمة, وابن الجارود - صحيح. رواه احمد (4/ 37)، وابو داود (2213)، والترمذي (1198 و 3299)، وابن ماجه (2062)، وابن الجارود (744)، من طريق محمد بن اسحاق، عن محمد بن عمرو بن عطاء، عن سليمان بن يسار، عن سلمة بن صخر، به. وقال الترمذي: «حديث حسن» ونقل اعلال البخاري له بالانقطاع بين سليمان بن يسار وبين سلمة. قلت: وايضا ابن اسحاق مدلس. ولكنه جاء من طرق اخرى. رواه الترمذي (1200)، من طريق ابي سلمة. ومحمد بن عبد الرحمن بن ثوبان، عن سلمة، به. وقال: «هذا حديث حسن». قلت: وفيه نفس العلة السابقة، وهي الانقطاع. ورواه ابو داود (2217)، وابن الجارود (745) بسند مرسل صحيح. والخلاصة ان الحديث بهذه الطرق، وشاهده السابق عن ابن عباس صحيح، خاصة وقد حسن الحافظ في «الفتح» (9/ 433) حديث سلمة هذا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - লি’আনের (স্বামী এবং স্ত্রীর পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান করা) বৈধতা এবং এর বিবরণ

১০৯৪। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, অমুক ব্যক্তি (উআইমের ’আজলানী) জিজ্ঞেস করে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! আপনি কি মনে করেন, আমাদের কেউ যদি তার স্ত্রীকে ব্যভিচারে লিপ্ত পায় তবে সে কি করবে? যদি সে এ কথা ফাঁস করে দেয় তাহলে তা বিরাট ব্যাপার হয়ে যাবে। আর যদি চুপ থেকে যায় তাহলে তাকে এরূপ বিরাট ব্যাপারে চুপ থাকতে হবে। (কথা শুনে) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে কোন উত্তর দিলেন না। এরপর আর একদিন সে এসে বললো, যে জিজ্ঞেস আমি আপনাকে করেছিলাম তাতেই আমি আজ পরীক্ষার সম্মুখীন হয়েছি। অতঃপর আল্লাহ (এর সমাধানকল্পে) সূরা নূরের আয়াতগুলো অবতীর্ণ করলেন।

নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে ঐসব আয়াত পড়ে শুনালেন এবং তাকে উপদেশ দিলেন ও জানালেন যে, পরকালের শাস্তি থেকে ইহকালের শাস্তি অনেক হালকা। উআইমের (রাঃ) বললেন- না, আপনাকে যিনি সত্য সহকারে পাঠিয়েছেন তার শপথ আমি তার উপর মিথ্যা বলছি না। তারপর নবীসাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার স্ত্রীকে ডাকলেন, অনুরূপভাবে তাকে উপদেশ দিলেন। সে বললো না-সত্য সহকারে যে আল্লাহ আপনাকে পাঠিয়েছেন তাঁর শপথ। তিনি (আমার স্বামী) মিথ্যাবাদী। এরপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পুরুষের চারটি সাক্ষী আল্লাহর শপথযোগে গ্ৰহণ আরম্ভ করলেন তারপর দ্বিতীয় পর্যায়ে মেয়েটির সাক্ষ্য আল্লাহর কসম যোগে চারবার গ্রহণ করে তাদের মধ্যের বিবাহবিচ্ছেদ করে দিলেন।[1]

عَنِ اِبْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: سَأَلَ فُلَانٌ فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! أَرَأَيْتَ أَنْ لَوْ وَجَدَ أَحَدُنَا اِمْرَأَتَهُ عَلَى فَاحِشَةٍ, كَيْفَ يَصْنَعُ? إِنْ تَكَلَّمَ تَكَلَّمَ بِأَمْرٍ عَظِيمٍ, وَإِنْ سَكَتَ سَكَتَ عَلَى مِثْلِ ذَلِكَ! فَلَمْ يُجِبْهُ, فَلَمَّا كَانَ بَعْدَ ذَلِكَ أَتَاهُ, فَقَالَ: إِنَّ الَّذِي سَأَلْتُكَ عَنْهُ قَدِ ابْتُلِيتُ بِهِ, فَأَنْزَلَ اللَّهُ الْآيَاتِ فِي سُورَةِ النُّورِ, فَتَلَاهُنَّ عَلَيْهِ وَوَعَظَهُ وَذَكَّرَهُ، وَأَخْبَرَهُ أَنَّ عَذَابَ الدُّنْيَا أَهْوَنُ مِنْ عَذَابِ الْآخِرَةِ. قَالَ: لَا, وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ مَا كَذَبْتُ عَلَيْهَا, ثُمَّ دَعَاهَا النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم - فَوَعَظَهَا كَذَلِكَ, قَالَتْ: لَا, وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ إِنَّهُ لَكَاذِبٌ, فَبَدَأَ بِالرَّجُلِ, فَشَهِدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ, ثُمَّ ثَنَّى بِالْمَرْأَةِ, ثُمَّ فَرَّقَ بَيْنَهُمَا. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1493) (4) وقد اختصره الحافظ هنا، وهو بتمامه في مسلم: من طريق سعيد بن جبير قال: سئلت عن المتلاعنين في إمرة مصعب. أيفرق بينهما؟ قال: فما دريت ما أقول: فمضيت إلى منزل ابن عمر بمكة. فقالت للغلام: استأذن لي. قال: إنه قائل. فسمع صوتي. قال: ابن جبير؟ قلت: نعم. قال: ادخل. فوالله ما جاء بك هذه الساعة إلا حاجة. فدخلت. فإذا هو مفترش بَرْذَعَةً. متوسد وسادة حشوها ليف. قلت: أبا عبد الرحمن! المتلاعنان، أيفرق بينهما؟ قال: سبحان الله! نعم. إن أول من سأل عن ذلك فلان بن فلان. قال: يا رسول الله! أرأيت أن لو وجد أحدنا امرأته على فاحشة، كيف يصنع؟! إن تكلم تكلم بأمر عظيم، وإن سكت سكت على مثل ذلك. قال: فسكت النبي صلى الله عليه وسلم فلم يجبه، فلما كان بعد ذلك أتاه، فقال: إن الذي سألتك عنه قد ابتليت به. فأنزل الله عز وجل هؤلاء الآيات في سورة النور: «والذين يرمون أزواجهم…» [النور: 6 - 9] فتلاهن عليه، ووعظه، وذكّره. وأخبره أن عذاب الدنيا أهون من عذاب الآخرة. قال: لا. والذي بعثك بالحق ما كذبت عليها. ثم دعاها فوعظها وذكّرها، وأخبرها أن عذاب الدنيا أهون من عذاب الآخرة. قالت: لا. والذي بعثك بالحق إنه لكاذب. فبدأ بالرجل، فشهد أربع شهادات بالله إنه لمن الصادقين. والخامسة أن لعنة الله عليه إن كان من الكاذبين. ثم ثنى بالمرأة، فشهدت أربع شهادات بالله إنه لمن الكاذبين، والخامسة أن غضب الله عليها إن كان من الصادقين. ثم فرق بينهما

عن ابن عمر رضي الله عنهما قال: سال فلان فقال: يا رسول الله! ارايت ان لو وجد احدنا امراته على فاحشة, كيف يصنع? ان تكلم تكلم بامر عظيم, وان سكت سكت على مثل ذلك! فلم يجبه, فلما كان بعد ذلك اتاه, فقال: ان الذي سالتك عنه قد ابتليت به, فانزل الله الايات في سورة النور, فتلاهن عليه ووعظه وذكره، واخبره ان عذاب الدنيا اهون من عذاب الاخرة. قال: لا, والذي بعثك بالحق ما كذبت عليها, ثم دعاها النبي - صلى الله عليه وسلم - فوعظها كذلك, قالت: لا, والذي بعثك بالحق انه لكاذب, فبدا بالرجل, فشهد اربع شهادات, ثم ثنى بالمراة, ثم فرق بينهما. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1493) (4) وقد اختصره الحافظ هنا، وهو بتمامه في مسلم: من طريق سعيد بن جبير قال: سىلت عن المتلاعنين في امرة مصعب. ايفرق بينهما؟ قال: فما دريت ما اقول: فمضيت الى منزل ابن عمر بمكة. فقالت للغلام: استاذن لي. قال: انه قاىل. فسمع صوتي. قال: ابن جبير؟ قلت: نعم. قال: ادخل. فوالله ما جاء بك هذه الساعة الا حاجة. فدخلت. فاذا هو مفترش برذعة. متوسد وسادة حشوها ليف. قلت: ابا عبد الرحمن! المتلاعنان، ايفرق بينهما؟ قال: سبحان الله! نعم. ان اول من سال عن ذلك فلان بن فلان. قال: يا رسول الله! ارايت ان لو وجد احدنا امراته على فاحشة، كيف يصنع؟! ان تكلم تكلم بامر عظيم، وان سكت سكت على مثل ذلك. قال: فسكت النبي صلى الله عليه وسلم فلم يجبه، فلما كان بعد ذلك اتاه، فقال: ان الذي سالتك عنه قد ابتليت به. فانزل الله عز وجل هولاء الايات في سورة النور: «والذين يرمون ازواجهم…» [النور: 6 - 9] فتلاهن عليه، ووعظه، وذكره. واخبره ان عذاب الدنيا اهون من عذاب الاخرة. قال: لا. والذي بعثك بالحق ما كذبت عليها. ثم دعاها فوعظها وذكرها، واخبرها ان عذاب الدنيا اهون من عذاب الاخرة. قالت: لا. والذي بعثك بالحق انه لكاذب. فبدا بالرجل، فشهد اربع شهادات بالله انه لمن الصادقين. والخامسة ان لعنة الله عليه ان كان من الكاذبين. ثم ثنى بالمراة، فشهدت اربع شهادات بالله انه لمن الكاذبين، والخامسة ان غضب الله عليها ان كان من الصادقين. ثم فرق بينهما

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - লি’আনকারী স্বামী-স্ত্রীর মাহরানার বিধান

১০৯৫। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম লি’আনকারী স্বামী-স্ত্রীকে বলেছিলেন, আল্লাহই তোমাদের হিসাব নিবেন। তোমাদের একজন মিথ্যাবাদী। তার (মহিলার) উপর তোমার কোন অধিকার নেই। সে বলল: হে আল্লাহর রসূল! আমার মাল! রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তুমি যদি সত্যি কথা বলে থাক, তাহলে এ মাল তার লজ্জাস্থানকে হালাল করার বিনিময়ে হবে। আর যদি মিথ্যা বলে থাক, তবে এটা তুমি মোটেই চাইতে পার না, তুমি তো তার থেকে অনেক দূরে।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ أَيْضًا - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ لِلْمُتَلَاعِنَيْنِ: «حِسَابُكُمَا عَلَى اللَّهِ تَعَالَى, أَحَدُكُمَا كَاذِبٌ, لَا سَبِيلَ لَكَ عَلَيْهَا». قَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! مَالِي قَالَ: «إِنْ كُنْتَ صَدَقْتَ عَلَيْهَا, فَهُوَ بِمَا اسْتَحْلَلْتَ مِنْ فَرْجِهَا, وَإِنْ كُنْتَ كَذَبْتَ عَلَيْهَا, فَذَاكَ أَبْعَدُ لَكَ مِنْهَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5350)، ومسلم (1493) (5) وهو إحدى روايات الحديث السابق

وعن ابن عمر ايضا - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال للمتلاعنين: «حسابكما على الله تعالى, احدكما كاذب, لا سبيل لك عليها». قال: يا رسول الله! مالي قال: «ان كنت صدقت عليها, فهو بما استحللت من فرجها, وان كنت كذبت عليها, فذاك ابعد لك منها». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5350)، ومسلم (1493) (5) وهو احدى روايات الحديث السابق

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - গৰ্ভবতী স্ত্রীকে লি’আন করা

১০৯৬। আনাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, (গর্ভবতী স্ত্রীকে অপবাদ দেয়া হলে) তোমরা মহিলার উপর লক্ষ্য রাখো, যদি সন্তান পূর্ণ সাদা ও সোজা (বাঁকা নয়) হয় তাহলে তা তার স্বামীরই হবে। আর যদি সন্তান সুৰমা মাখা চোখে ও কোঁকড়া চুলবিশিষ্ট (নিগ্রোদের) হয় তাহলে যার সাথে তার ব্যভিচারের অপবাদ দেয়া হয়েছে সন্তানটি তার হবে।[1]

وَعَنِ أَنَسٍ, أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «أَبْصِرُوهَا, فَإِنْ جَاءَتْ بِهِ أَبْيَضَ سَبِطًا فَهُوَ لِزَوْجِهَا, وَإِنْ جَاءَتْ بِهِ أَكْحَلَ جَعْدًا, فَهُوَ الَّذِي رَمَاهَا بِهِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. وإن كان الحافظ - رحمه الله- وهم في عزوه، وتصرف في لفظه! فالحديث لم يروه البخاري. وإنما رواه مسلم (1496) ولفظه: من طريق محمد بن سيرين قال: سألت أنس بن مالك، وأنا أرى أن عنده منه علما. فقال: إن هلال بن أمية قذف امرأته بشريك بن سحماء، وكان أخا البراء بن مالك لأمه. وكان أول رجل لاعن في الإسلام. قال: فلاعنها. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «أبصروها. فإن جاءت به أبيض سبطا قضيء العينين، فهو لهلال بن أمية. وإن جاءت به أكحل جعدا حمش الساقين، فهو لشريك بن سحماء». قال: فأنبئت أنها جاءت به أكحل، جعدا، حمش الساقين

وعن انس, ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «ابصروها, فان جاءت به ابيض سبطا فهو لزوجها, وان جاءت به اكحل جعدا, فهو الذي رماها به». متفق عليه - صحيح. وان كان الحافظ - رحمه الله- وهم في عزوه، وتصرف في لفظه! فالحديث لم يروه البخاري. وانما رواه مسلم (1496) ولفظه: من طريق محمد بن سيرين قال: سالت انس بن مالك، وانا ارى ان عنده منه علما. فقال: ان هلال بن امية قذف امراته بشريك بن سحماء، وكان اخا البراء بن مالك لامه. وكان اول رجل لاعن في الاسلام. قال: فلاعنها. فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «ابصروها. فان جاءت به ابيض سبطا قضيء العينين، فهو لهلال بن امية. وان جاءت به اكحل جعدا حمش الساقين، فهو لشريك بن سحماء». قال: فانبىت انها جاءت به اكحل، جعدا، حمش الساقين

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - লি’আনের কসম করার সময় পঞ্চমবারে আল্লাহর ভয় দেখানো মুস্তাহাব

১০৯৭। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কোন এক ব্যক্তিকে (লি’আনের কসম করার সময়) ৫ম বারে তার হাত তার মুখে রাখবার নির্দেশ দিয়েছিলেন। আর বলেছিলেন এটা (বিচ্ছেদকে ও মিথ্যাবাদীর শাস্তিকে) নিশ্চিতকারী। —এর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا; - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَمَرَ رَجُلًا أَنْ يَضَعَ يَدَهُ عِنْدَ الْخَامِسَةِ عَلَى فِيهِ, وَقَالَ: «إِنَّهَا مُوجِبَةٌ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

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حسن. رواه أبو داود (2255)، والنسائي (657)

وعن ابن عباس رضي الله عنهما; - ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - امر رجلا ان يضع يده عند الخامسة على فيه, وقال: «انها موجبة». رواه ابو داود, والنساىي, ورجاله ثقات - حسن. رواه ابو داود (2255)، والنساىي (657)

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - লি’আনের মাধ্যমে স্বামী-স্ত্রীর পৃথক হয়ে যাওয়া

১০৯৮৷ সাহল বিন সা’দ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি দু’জন লি’আন বা পরস্পর অভিশাপকারীর ঘটনা সম্পর্কে বলেছেন, যখন তারা স্বামী-স্ত্রী তাদের লি’আন কার্য সমাধান করলো তখন পুরুষটি বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমি তার উপর মিথ্যা অপবাদ দিয়েছি বলে সাব্যস্ত হবে—যদি আমি তাকে রেখে দিই। তারপর সে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নির্দেশ লাভের পূর্বেই তার স্ত্রীকে তিন তালাক্ব দিয়ে দিল।[1]

وَعَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ -فِي قِصَّةِ الْمُتَلَاعِنَيْنِ- قَالَ: فَلَمَّا فَرَغَا مِنْ تَلَاعُنِهِمَا قَالَ: كَذَبْتُ عَلَيْهَا يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنْ أَمْسَكْتُهَا, فَطَلَّقَهَا ثَلَاثًا قَبْلَ أَنْ يَأْمُرَهُ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5308) ومسلم (1492) (1)

وعن سهل بن سعد -في قصة المتلاعنين- قال: فلما فرغا من تلاعنهما قال: كذبت عليها يا رسول الله! ان امسكتها, فطلقها ثلاثا قبل ان يامره رسول الله - صلى الله عليه وسلم. متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5308) ومسلم (1492) (1)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ সাহল বিন সা'দ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - ব্যাভিচারিণীকে বিবাহ করার বিধান

১০৯৯। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, কোন লোক নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে এসে বলল, আমার স্ত্রী কোন স্পর্শকারীর হাতকে প্রত্যাখ্যান করে না। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তাকে দূর করে দাও। সে বলল, আমি ভয় করছি আমার অন্তর তার বাসনায় ঝুঁকে থাকবে। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, হলে তাকে উপভোগ করতে থাক। --রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।

ইমাম নাসায়ী অন্য সূত্রে ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে এরূপ শব্দে বর্ণনা করেছেন- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে বললেন, তুমি তাকে তালাক দাও, সে বললো, আমি তাকে ছেড়ে ধৈর্য ধারণ করতে পারব না, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তাহলে তাকে রেখে দাও।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّ رَجُلًا جَاءَ إِلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: إِنَّ امْرَأَتِي لَا تَرُدُّ يَدَ لَامِسٍ. قَالَ: «غَرِّبْهَا». قَالَ: أَخَافُ أَنْ تَتْبَعَهَا نَفْسِي. قَالَ: «فَاسْتَمْتِعْ بِهَا». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالْبَزَّارُ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ
وَأَخْرَجَهُ النَّسَائِيُّ مِنْ وَجْهٍ آخَرَ: عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ بِلَفْظٍ - قَالَ: طَلِّقْهَا. قَالَ: لَا أَصْبِرُ عَنْهَا. قَالَ: «فَأَمْسِكْهَا

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ضعيف. رواه أبو داود (2049)، والنسائي (6/ 67 - 68)، وقد ضعف الحديث أحمد بن حنبل، والنسائي، وابن الجوزي وغيرهم

وعن ابن عباس رضي الله عنهما - ان رجلا جاء الى النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: ان امراتي لا ترد يد لامس. قال: «غربها». قال: اخاف ان تتبعها نفسي. قال: «فاستمتع بها». رواه ابو داود, والبزار, ورجاله ثقات واخرجه النساىي من وجه اخر: عن ابن عباس بلفظ - قال: طلقها. قال: لا اصبر عنها. قال: «فامسكها - ضعيف. رواه ابو داود (2049)، والنساىي (6/ 67 - 68)، وقد ضعف الحديث احمد بن حنبل، والنساىي، وابن الجوزي وغيرهم

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - নিজ সন্তানকে স্বীকৃতি দানের পর পুনরায় অস্বীকার করার ব্যাপারে সতর্কীকরন

১১০০। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি দু’জন লি’আনকারী সম্বন্ধে কুরআনের আয়াত নাযিল হবার সময় নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বলতে শুনেছেন, যে নারী কোন সম্প্রদায়ের সাথে এমন বাচ্চাকে শামিল করে যে তাদের নয়, তার সাথে আল্লাহর কোন সম্পর্ক নেই এবং তিনি কখনো তাকে জান্নাতে প্রবেশ করবেন না। আর যে পুরুষ নিজের সন্তানকে চিনতে পেরেও অস্বীকার করলো, কিয়ামতের দিন আল্লাহ তার থেকে আড়ালে থাকবেন এবং সমস্ত সৃষ্টিকুলের সামনে তাকে অপমান করবেন। —ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ - حِينَ نَزَلَتْ آيَةُ الْمُتَلَاعِنَيْنِ: «أَيُّمَا امْرَأَةٍ أَدْخَلَتْ عَلَى قَوْمٍ مَنْ لَيْسَ مِنْهُمْ, فَلَيْسَتْ مِنَ اللَّهِ فِي شَيْءٍ, وَلَنْ يُدْخِلَهَا اللَّهُ جَنَّتَهُ, وَأَيُّمَا رَجُلٍ جَحَدَ وَلَدَهُ -وَهُوَ يَنْظُرُ إِلَيْهِ- احْتَجَبَ اللَّهُ عَنْهُ, وَفَضَحَهُ اللَّهُ عَلَى رُءُوسِ الْخَلَائِقِ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

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ضعيف. رواه أبو داود (2263)، والنسائي (679 - 80)، وابن ماجه (2743)، وابن حبان (1335)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - انه سمع رسول الله - صلى الله عليه وسلم - يقول - حين نزلت اية المتلاعنين: «ايما امراة ادخلت على قوم من ليس منهم, فليست من الله في شيء, ولن يدخلها الله جنته, وايما رجل جحد ولده -وهو ينظر اليه- احتجب الله عنه, وفضحه الله على رءوس الخلاىق الاولين والاخرين». اخرجه ابو داود, والنساىي, وابن ماجه, وصححه ابن حبان - ضعيف. رواه ابو داود (2263)، والنساىي (679 - 80)، وابن ماجه (2743)، وابن حبان (1335)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - নিজ সন্তানকে স্বীকৃতি দানের পর পুনরায় অস্বীকার করার ব্যাপারে সতর্কীকরন

১১০১। উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন সন্তানের প্রতি তার সন্তান হবার স্বীকৃতি এক মুহুর্তের জন্য দান করবে। সে তার ঐ স্বীকৃতিকে আর অস্বীকার করতে পারবে না। —এ হাদীস হাসান ও মাওকূফ।[1]

وَعَنْ عُمَرَ - رضي الله عنه - قَالَ: مَنْ أَقَرَّ بِوَلَدٍ طَرْفَةَ عَيْنٍ, فَلَيْسَ لَهُ أَنْ يَنْفِيَهُ. أَخْرَجَهُ الْبَيْهَقِيُّ, وَهُوَ حَسَنٌ مَوْقُوفٌ

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ضعيف. رواه البيهقي في «الكبرى» (7/ 411 - 412) وفي سنده مجالد بن سعيد ضعفه غير واحد، وقال الحافظ نفسه في «التقريب»: ليس بالقوي، وقد تغير في آخر عمره

وعن عمر - رضي الله عنه - قال: من اقر بولد طرفة عين, فليس له ان ينفيه. اخرجه البيهقي, وهو حسن موقوف - ضعيف. رواه البيهقي في «الكبرى» (7/ 411 - 412) وفي سنده مجالد بن سعيد ضعفه غير واحد، وقال الحافظ نفسه في «التقريب»: ليس بالقوي، وقد تغير في اخر عمره

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১০. লি’আন বা পরস্পরের প্রতি অভিশাপ প্ৰদান - সন্তান অস্বীকার করার ইঙ্গিত প্ৰদান

১১০২। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, এক ব্যক্তি বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমার স্ত্রী একটি কাল রং-এর পুত্ৰ সন্তান প্রসব করেছে। তিনি জিজ্ঞেস করলেন, তোমার কিছু উট আছে কি? সে জবাব দিল হাঁ। তিনি বললেন, সেগুলোর রং কেমন? সে বললা: লাল। তিনি বললেন: সেগুলোর মধ্যে কোনটি ছাই বর্ণের আছে কি? সে বলল: হ্যাঁ। তিনি জিজ্ঞেস করলেন: তাহলে সেটিতে এমন রং কোথেকে এলো। লোকটি বলল: সম্ভবত পূর্ববর্তী বংশের কারণে এমন হয়েছে। তিনি বললেন: তাহলে হতে পারে, তোমার এ সন্তানও বংশগত কারণে এমন হয়েছে।[1]

মুসলিমের অন্য বর্ণনায় আছে- (সে তার সন্তানের রং কালো বলে অভিযোগ করার পর) সন্তানকে অস্বীকার করার ইঙ্গিত করেছিল। আর রাবী হাদীসের শেষাংশে বলেছেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সন্তানটিকে অস্বীকার করার অবকাশ তাকে দেননি।

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه: أَنَّ رَجُلًا قَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ امْرَأَتِي وَلَدَتْ غُلَامًا أَسْوَدَ قَالَ: «هَلْ لَكَ مِنْ إِبِلٍ» قَالَ: نَعَمْ. قَالَ: «فَمَا أَلْوَانُهَا?» قَالَ: حُمْرٌ. قَالَ: «هَلْ فِيهَا مَنْ أَوْرَقَ»، قَالَ: نَعَمْ. قَالَ: «فَأَنَّى ذَلِكَ»، قَالَ: لَعَلَّهُ نَزَعَهُ عِرْقٌ. قَالَ: «فَلَعَلَّ ابْنَكَ هَذَا نَزَعَهُ عِرْقٌ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ
وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ: وَهُوَ يُعَرِّضُ بِأَنْ يَنْفِيَهُ -, وَقَالَ فِي آخِرِهِ: وَلَمْ يُرَخِّصْ لَهُ فِي الِانْتِفَاءِ مِنْهُ

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صحيح. رواه البخاري (5305)، ومسلم (1500)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه: ان رجلا قال: يا رسول الله! ان امراتي ولدت غلاما اسود قال: «هل لك من ابل» قال: نعم. قال: «فما الوانها?» قال: حمر. قال: «هل فيها من اورق»، قال: نعم. قال: «فانى ذلك»، قال: لعله نزعه عرق. قال: «فلعل ابنك هذا نزعه عرق». متفق عليه وفي رواية لمسلم: وهو يعرض بان ينفيه -, وقال في اخره: ولم يرخص له في الانتفاء منه - صحيح. رواه البخاري (5305)، ومسلم (1500)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - গৰ্ভধারিণীর স্বামীর মৃত্যুর পর ইদ্দাত পালন করা

১১০৩। মিসওয়ার ইবনু মাখরামাহ (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, সুবায়’আ আসলামীয়া তার স্বামীর মৃত্যুর কয়েকদিন পর সন্তান প্রসব করে। এরপর সে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর কাছে এসে বিয়ে করার অনুমতি প্রার্থনা করে, তিনি তাকে অনুমতি দেন। তখন সে বিয়ে করে।[1]

এর মূল হাদীস বুখারী ও মুসলিম-এ রয়েছে।[2] তাতে আছে—তিনি তাঁর স্বামীর মৃত্যুর ৪০ রাত পর সন্তান প্রসব করেছিলেন।

আর মুসলিমের শব্দে এসেছে— যুহরী (তাবি’ঈ) বলেছেনঃ রক্তস্রাব হওয়া অবস্থায় বিবাহ হওয়াতে আমি ত্রুটি মনে করি না, কিন্তু পবিত্র না হওয়া পর্যন্ত স্বামী যেন তার নিকটবর্তী না হয়।[3]

عَنْ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ - رضي الله عنه: أَنَّ سُبَيْعَةَ الْأَسْلَمِيَّةَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا - نُفِسَتْ بَعْدَ وَفَاةِ زَوْجِهَا بِلَيَالٍ, فَجَاءَتْ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَاسْتَأْذَنَتْهُ أَنْ تَنْكِحَ, فَأَذِنَ لَهَا, فَنَكَحَتْ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ
وَأَصْلُهُ فِي الصَّحِيحَيْنِ
وَفِي لَفْظٍ: أَنَّهَا وَضَعَتْ بَعْدَ وَفَاةِ زَوْجِهَا بِأَرْبَعِينَ لَيْلَةً
وَفِي لَفْظٍ لِمُسْلِمٍ: قَالَ الزُّهْرِيُّ: وَلَا أَرَى بَأْسًا أَنْ تَزَوَّجَ وَهِيَ فِي دَمِهَا, غَيْرَ أَنَّهُ لَا يَقْرَبُهَا زَوْجُهَا حتَّى تَطْهُرَ

-

صحيح. رواه البخاري (5320)
روى البخاري (5318)، ومسلم (1485)، عن أم سلمة زوج النبي صلى الله عليه وسلم؛ أن امرأة من أسلم يقال لها سُبيعة، كانت تحت زوجها، توفي عنها وهي حبلى، فخطبها أبو السنابل بن بعكك، فأبت أن تَنكحه، فقال: والله ما يصلح أن تَنكحيه حتى تعتدِّي آخر الأجَلَيْن، فمكثت قريبا من عشر ليال، ثم جاءت النبي صلى الله عليه وسلم فقال: «انكحي». واللفظ للبخاري. وروى أيضا البخاري (5319)، ومسلم (1484)، وعن سبيعة نفسها أنها سألت النبي صلى الله عليه وسلم؟ فقالت: أفتاني إذا وضعت أن أنكح. واللفظ للبخاري. ولفظ مسلم: فأفتاني بأني قد حللت حين وضعت حملي. وأمرني بالتزوج إن بدا لي

عن المسور بن مخرمة - رضي الله عنه: ان سبيعة الاسلمية - رضي الله عنها - نفست بعد وفاة زوجها بليال, فجاءت النبي - صلى الله عليه وسلم - فاستاذنته ان تنكح, فاذن لها, فنكحت. رواه البخاري واصله في الصحيحين وفي لفظ: انها وضعت بعد وفاة زوجها باربعين ليلة وفي لفظ لمسلم: قال الزهري: ولا ارى باسا ان تزوج وهي في دمها, غير انه لا يقربها زوجها حتى تطهر - صحيح. رواه البخاري (5320) روى البخاري (5318)، ومسلم (1485)، عن ام سلمة زوج النبي صلى الله عليه وسلم؛ ان امراة من اسلم يقال لها سبيعة، كانت تحت زوجها، توفي عنها وهي حبلى، فخطبها ابو السنابل بن بعكك، فابت ان تنكحه، فقال: والله ما يصلح ان تنكحيه حتى تعتدي اخر الاجلين، فمكثت قريبا من عشر ليال، ثم جاءت النبي صلى الله عليه وسلم فقال: «انكحي». واللفظ للبخاري. وروى ايضا البخاري (5319)، ومسلم (1484)، وعن سبيعة نفسها انها سالت النبي صلى الله عليه وسلم؟ فقالت: افتاني اذا وضعت ان انكح. واللفظ للبخاري. ولفظ مسلم: فافتاني باني قد حللت حين وضعت حملي. وامرني بالتزوج ان بدا لي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - আযাদকৃত দাসীর ইদ্দাত পালন করা

১১০৪। ’আয়িশা (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন, বারীরাহ নাম্নী দাসীকে তিন হায়িয ইদ্দত পালনের জন্য হুকুম করা হয়েছিল। —বৰ্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য কিন্তু এর সানাদে কিছু সূক্ষ্ম ত্রুটি রয়েছে।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: أُمِرَتْ بَرِيرَةُ أَنْ تَعْتَدَّ بِثَلَاثِ حِيَضٍ. رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ, وَرُوَاتُهُ ثِقَاتٌ, لَكِنَّهُ مَعْلُولٌ

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صحيح. رواه ابن ماجه (2077)، وصححه البوصيري في الزوائد

وعن عاىشة رضي الله عنها قالت: امرت بريرة ان تعتد بثلاث حيض. رواه ابن ماجه, ورواته ثقات, لكنه معلول - صحيح. رواه ابن ماجه (2077)، وصححه البوصيري في الزواىد

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - তিন তালাকপ্ৰাপ্ত নারীর ভরনপোষনের ব্যয় এবং বাসস্থানের বিধান

১১০৫। শা’বী (রহঃ) হতে বর্ণিত, তিনি ফাতিমাহ বিনতে কায়েস (রাঃ) থেকে, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম থেকে বর্ণনা করেছেন যে, তিন তালাক প্রাপ্ত স্ত্রীর জন্য কোন বাসস্থান ও খোর-পোষের ব্যবস্থা নেই।[1]

وَعَنْ الشَّعْبِيِّ, عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ, - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فِي الْمُطَلَّقَةِ ثَلَاثًا: «لَيْسَ لَهَا سُكْنَى وَلَا نَفَقَةٌ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

صحيح. رواه مسلم (1480) (44)

وعن الشعبي, عن فاطمة بنت قيس, - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - في المطلقة ثلاثا: «ليس لها سكنى ولا نفقة». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1480) (44)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ শা‘বী (রহঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্বামীর মৃত্যুতে স্ত্রী শোক প্রকাশের সময় যা করা থেকে বিরত থাকবে

১১০৬। উম্মু আতীয়্যাহ থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন মহিলা যেন কারো মৃত্যুতে তিন দিনের অধিক শোক প্রকাশে না করে। তবে স্বামীর জন্য চার মাস দশ দিন শোক প্রকাশ করতে পারবে এবং রঙ্গীন কাপড় পরবে না, তবে রঙ্গীন সুতোর কাপড় পরতে পারবে, সুরমা ব্যবহার করবে না, সুগন্ধি দ্রব্য লাগাবে না। তবে পবিত্রতা অর্জনের জন্য কিছু কুস্ত বা আযফার সুগন্ধি ব্যবহার করতে পারবে। এ শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।

আবূ দাউদও নাসায়ীতে অতিরিক্তভাবে আছে-’খেযাব’ (মেহেদী) ব্যবহার করবে না। আর নাসায়ীতে আছে চিরুনী লাগবে না।[1]

وَعَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ; أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: لَا تَحِدَّ امْرَأَةٌ عَلَى مَيِّتٍ فَوْقَ ثَلَاثٍ إِلَّا عَلَى زَوْجٍ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا, وَلَا تَلْبَسْ ثَوْبًا مَصْبُوغًا, إِلَّا ثَوْبَ عَصْبٍ, وَلَا تَكْتَحِلْ, وَلَا تَمَسَّ طِيبًا, إِلَّا إِذَا طَهُرَتْ نُبْذَةً مِنْ قُسْطٍ أَوْ أَظْفَارٍ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَهَذَا لَفْظُ مُسْلِمٍ
وَلِأَبِي دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيِّ مِنْ الزِّيَادَةِ: وَلَا تَخْتَضِبْ
وَلِلنَّسَائِيِّ: وَلَا تَمْتَشِطْ

-

صحيح. رواه البخاري (313)، ومسلم (2127/ رقم66)
(2) - ووقع في «أ»: «ولا تخطب»، وجاء على هامش هذه النسخة: قوله: «ولا تخطب» كذا في الأصل، والظاهر أنه تصحيف، والصحيح: «لا تختضب» كما هو ثابت في النسخة المصححة المقروءة على مشايخ. قلت: وهو الذي في «الأصل» وفي سنن أبي داود أيضا

وعن ام عطية; ان رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال: لا تحد امراة على ميت فوق ثلاث الا على زوج اربعة اشهر وعشرا, ولا تلبس ثوبا مصبوغا, الا ثوب عصب, ولا تكتحل, ولا تمس طيبا, الا اذا طهرت نبذة من قسط او اظفار. متفق عليه, وهذا لفظ مسلم ولابي داود, والنساىي من الزيادة: ولا تختضب وللنساىي: ولا تمتشط - صحيح. رواه البخاري (313)، ومسلم (2127/ رقم66) (2) - ووقع في «ا»: «ولا تخطب»، وجاء على هامش هذه النسخة: قوله: «ولا تخطب» كذا في الاصل، والظاهر انه تصحيف، والصحيح: «لا تختضب» كما هو ثابت في النسخة المصححة المقروءة على مشايخ. قلت: وهو الذي في «الاصل» وفي سنن ابي داود ايضا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্বামীর মৃত্যুতে স্ত্রী শোক প্রকাশের সময় যা করা থেকে বিরত থাকবে

১১০৭। উম্মু সালামাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমার স্বামী আবূ সালামাহর ইনতিকাল হবার পর আমি আমার চোখে ’মুসব্বর’ লাগিয়ে ছিলাম। অতঃপর রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, এতে তো চেহারাকে লাবণ্য দান করে, ফলে তুমি এটা রাত্র ব্যতীত লাগাবে না, আর দিনের বেলায় তাকে অপসারিত করবে, আর সুগন্ধি দ্বারা কেশ বিন্যাস করবে না এবং মেহেদী লাগবে না। কেননা এটা হচ্ছে খিযাব।

উম্মু সালামাহ বলেন, আমি বললাম, তবে আমি কোন বস্তু দিয়ে চিরুনী করব? তিনি বললেন, কুলের পাতা দিয়ে। -এর সানাদ হাসান।[1]

وَعَنْ أُمِّ سَلَمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: جَعَلْتُ عَلَى عَيْنِي صَبْرًا, بَعْدَ أَنْ تُوُفِّيَ أَبُو سَلَمَةَ, فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّهُ يَشِبُ الْوَجْهَ, فَلَا تَجْعَلِيهِ إِلَّا بِاللَّيْلِ, وَانْزِعِيهِ بِالنَّهَارِ, وَلَا تَمْتَشِطِي بِالطِّيبِ, وَلَا بِالْحِنَّاءِ, فَإِنَّهُ خِضَابٌ». قُلْتُ: بِأَيِّ شَيْءٍ أَمْتَشِطُ? قَالَ: «بِالسِّدْرِ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَإِسْنَادُهُ حَسَنٌ

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ضعيف. رواه أبو داود (2305)، والنسائي (604 - 205)، من طريق مخرمة بن بكير، عن أبيه، قال: سمعت المغيرة بن الضحاك يقول: أخبرتني أم حكيم بنت أسيد، عن أمها أن زوجها توفي وكانت تشتكي عينها، فتكتحل الجلاء، فأرسلت مولاة لها إلى أم سلمة، فسألتها عن كحل الجلاء؟ فقالت: لا تكتحل إلا من أمر لا بد منه، دخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم حين توفي أبو سلمة، وقد جعلت على عيني صبرا ... الحديث. قلت: وهذا سند ضعيف. مخرمة لم يسمع من أبيه، والضحاك ومن فوقه مجاهيل، وأيضا فيه نكارة لمخالفته للحديث الصحيح التالي. والله أعلم

وعن ام سلمة رضي الله عنها قالت: جعلت على عيني صبرا, بعد ان توفي ابو سلمة, فقال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «انه يشب الوجه, فلا تجعليه الا بالليل, وانزعيه بالنهار, ولا تمتشطي بالطيب, ولا بالحناء, فانه خضاب». قلت: باي شيء امتشط? قال: «بالسدر». رواه ابو داود, والنساىي, واسناده حسن - ضعيف. رواه ابو داود (2305)، والنساىي (604 - 205)، من طريق مخرمة بن بكير، عن ابيه، قال: سمعت المغيرة بن الضحاك يقول: اخبرتني ام حكيم بنت اسيد، عن امها ان زوجها توفي وكانت تشتكي عينها، فتكتحل الجلاء، فارسلت مولاة لها الى ام سلمة، فسالتها عن كحل الجلاء؟ فقالت: لا تكتحل الا من امر لا بد منه، دخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم حين توفي ابو سلمة، وقد جعلت على عيني صبرا ... الحديث. قلت: وهذا سند ضعيف. مخرمة لم يسمع من ابيه، والضحاك ومن فوقه مجاهيل، وايضا فيه نكارة لمخالفته للحديث الصحيح التالي. والله اعلم

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ উম্মু সালামাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্বামীর মৃত্যুতে স্ত্রী শোক প্রকাশের সময় যা করা থেকে বিরত থাকবে

১১০৮। উম্মু সালামাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, কোন এক মহিলা বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমার মেয়ের স্বামী মারা গেছে। তার চোখে অসুখ। আমি কি তার চোখে সুরমা লাগাতে পারব? তখন রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, না।[1]

وَعَنْهَا; - أَنَّ امْرَأَةً قَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ ابْنَتِي مَاتَ عَنْهَا زَوْجُهَا, وَقَدِ اشْتَكَتْ عَيْنَهَا, أَفَنَكْحُلُهَا قَالَ: «لَا». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5336)، ومسلم (1488)، وزادا: «مرتين أو ثلاثا. كل ذلك يقول: لا. ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «إنما هي أربعة أشهر وعشر، وقد كانت إحداكن في الجاهلية ترمي بالبعرة على رأس الحول

وعنها; - ان امراة قالت: يا رسول الله! ان ابنتي مات عنها زوجها, وقد اشتكت عينها, افنكحلها قال: «لا». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5336)، ومسلم (1488)، وزادا: «مرتين او ثلاثا. كل ذلك يقول: لا. ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «انما هي اربعة اشهر وعشر، وقد كانت احداكن في الجاهلية ترمي بالبعرة على راس الحول

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ উম্মু সালামাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - তিন তালাকপ্ৰাপ্ত নারী ইদ্দাত পালনের সময় নিজ প্রয়োজনে বাহির হওয়া জায়েয

১১০৯। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমার খালাকে তালাক্ব দেয়া হলে তিনি তাঁর খেজুর গাছের ফল নামাবেন বলে ইচ্ছা করেন। কোন লোক তাঁকে বের হবার জন্য ধমকালেন। ফলে তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সমীপে আসলেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন-হাঁ, তুমি তোমার খেজুর ফল নামাবে। কেননা, তুমি এতে থেকে অচিরেই সাদাকাহ করবে অথবা সৎ কাজও করবে।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: طُلِّقَتْ خَالَتِي, فَأَرَادَتْ أَنْ تَجُدَّ نَخْلَهَا فَزَجَرَهَا رَجُلٌ أَنْ تَخْرُجَ, فَأَتَتْ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: «بَلْ جُدِّي نَخْلَكِ, فَإِنَّكَ عَسَى أَنْ تَصَدَّقِي, أَوْ تَفْعَلِي مَعْرُوفًا». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1483)

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: طلقت خالتي, فارادت ان تجد نخلها فزجرها رجل ان تخرج, فاتت النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: «بل جدي نخلك, فانك عسى ان تصدقي, او تفعلي معروفا». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1483)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্বামীর মৃত্যুতে স্ত্রীর ইদ্দাত শেষ হওয়া পর্যন্ত স্বামীগৃহে অবস্থান করা

১১১০। ফুরাইয়াহ বিনতে মালিক (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, তার স্বামী স্বীয়- পলাতক ক্রীতদাসদের সন্ধানে বের হয়েছিলেন। ফলে তারা তাকে হত্যা করে ফেলে, তিনি বলেছেন, আমি এ ব্যাপারে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে জিজ্ঞেস করলাম যে আমি আমার পিত্ৰালয়ে ফিরে যাই। কেননা আমার স্বামী আমার জন্য তাঁর কোন মালিকানাধীন বাসগৃহ ও খাদ্যবস্তু রেখে যাননি। তিনি বলেছেন- হাঁ রেখে যায়নি, অতঃপর আমি যখন কক্ষে রয়েছি, তিনি আমাকে ডেকে বললেন-তুমি তোমার ঘরেই থেকে যাও—যতক্ষণ না তোমার ইদ্দতের ধার্য সময় পূর্ণ না হয়। তিনি (ফুরাইয়াহ) বললেন— আমি চার মাস দশ দিন তথায় অবস্থান করলাম। তিনি বলেছেন- এরূপ ফয়সালা তৃতীয় খলিফা উসমান (রাঃ) করেছিলেন। —তিরমিযী, যুহালী, ইবনু হিব্বান, হাকিম ও অন্যান্যগণ একে সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ فُرَيْعَةَ بِنْتِ مَالِكٍ: أَنَّ زَوْجَهَا خَرَجَ فِي طَلَبِ أَعْبُدٍ لَهُ، فَقَتَلُوهُ. قَالَتْ: فَسَأَلْتُ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ أَرْجِعَ إِلَى أَهْلِي; فَإِنَّ زَوْجِي لَمْ يَتْرُكْ لِي مَسْكَنًا يَمْلِكُهُ وَلَا نَفَقَةً, فَقَالَ: «نَعَمْ». فَلَمَّا كُنْتُ فِي الْحُجْرَةِ نَادَانِي, فَقَالَ: «امْكُثِي فِي بَيْتِكِ حَتَّى يَبْلُغَ الْكِتَابُ أَجَلَهُ». قَالَتْ: فَاعْتَدَدْتُ فِيهِ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا, قَالَتْ: فَقَضَى بِهِ بَعْدَ ذَلِكَ عُثْمَانُ. أَخْرَجَهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ, والذُّهْلِيُّ, وَابْنُ حِبَّانَ, وَالْحَاكِمُ وَغَيْرُهُمْ

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حسن. رواه أحمد (6/ 370 و 420 - 421)، وأبو داود (2300)، والنسائي (699)، والترمذي (1204)، وابن ماجه (2031)، وابن حبان (1331 و 1332)، والحاكم (208) وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». وتصحيح الذهلي نقله الحاكم، وأما تضعيف ابن حزم له (10/ 302) فمردود عليه كما تجده بالأصل

وعن فريعة بنت مالك: ان زوجها خرج في طلب اعبد له، فقتلوه. قالت: فسالت النبي - صلى الله عليه وسلم - ان ارجع الى اهلي; فان زوجي لم يترك لي مسكنا يملكه ولا نفقة, فقال: «نعم». فلما كنت في الحجرة ناداني, فقال: «امكثي في بيتك حتى يبلغ الكتاب اجله». قالت: فاعتددت فيه اربعة اشهر وعشرا, قالت: فقضى به بعد ذلك عثمان. اخرجه احمد, والاربعة, وصححه الترمذي, والذهلي, وابن حبان, والحاكم وغيرهم - حسن. رواه احمد (6/ 370 و 420 - 421)، وابو داود (2300)، والنساىي (699)، والترمذي (1204)، وابن ماجه (2031)، وابن حبان (1331 و 1332)، والحاكم (208) وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». وتصحيح الذهلي نقله الحاكم، واما تضعيف ابن حزم له (10/ 302) فمردود عليه كما تجده بالاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - তিন তালাকপ্ৰাপ্ত নারীর প্রয়োজনে জায়গা স্থানান্তর করা জায়েয

১১১১। ফাতিমাহ বিনতে কায়স (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমার স্বামী আমাকে যথারীতি তিন তালাক দিয়েছেন। আমার ভয় হচ্ছে হয়তো আমার উপর চড়াও হয়ে যেতে পারে। অতঃপর নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর নির্দেশের ফলে তিনি ঐ স্থান পরিবর্তন করে ফেলেন।[1]

وَعَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ قَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ زَوْجِي طَلَّقَنِي ثَلَاثًا, وَأَخَافُ أَنْ يُقْتَحَمَ عَلَيَّ, قَالَ: فَأَمَرَهَا, فَتَحَوَّلَتْ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (14182)

وعن فاطمة بنت قيس قالت: يا رسول الله! ان زوجي طلقني ثلاثا, واخاف ان يقتحم علي, قال: فامرها, فتحولت. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (14182)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - উম্মুল ওয়ালাদের (এমন দাসী যার গর্ভে মনিবের সন্তান হয়েছে) ইদ্দাত পালন করা

১১১২। আমর ইবনু আস্ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, তোমরা আমাদের সামনে আমাদের নবী মুহাম্মাদ রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সুন্নাতকে বিপর্যন্ত করো না। উম্মুল ওয়ালাদের[1] মুনিবের মৃত্যুতে ইদ্দত চার মাস দশ দিন। -দারাকুতনী হাদীসটিকে মুনকাতে’ সানাদ হবার দোষারোপ করেছেন।[2]

وَعَنْ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ قَالَ: لَا تُلْبِسُوا عَلَيْنَا سُنَّةَ نَبِيِّنَا, عِدَّةُ أُمِّ الْوَلَدِ إِذَا تُوُفِّيَ عَنْهَا سَيِّدُهَا أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَابْنُ مَاجَهْ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَأَعَلَّهُ الدَّارَقُطْنِيُّ بِالِانْقِطَاعِ

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ضعيف. رواه أحمد (403)، وأبو داود (2308)، وابن ماجه (2083)، والحاكم (208) من طريق قبيصة بن ذؤيب، عن عمرو، به. وعلته قول الدارقطني في «السنن» (3/ 309): «قبيصة لم يسمع من عمرو». قلت: وروي موقوفا وصحح الوقف غير واحد، وأيضا استنكره الإمام أحمد

وعن عمرو بن العاص قال: لا تلبسوا علينا سنة نبينا, عدة ام الولد اذا توفي عنها سيدها اربعة اشهر وعشرا. رواه احمد, وابو داود, وابن ماجه, وصححه الحاكم, واعله الدارقطني بالانقطاع - ضعيف. رواه احمد (403)، وابو داود (2308)، وابن ماجه (2083)، والحاكم (208) من طريق قبيصة بن ذويب، عن عمرو، به. وعلته قول الدارقطني في «السنن» (3/ 309): «قبيصة لم يسمع من عمرو». قلت: وروي موقوفا وصحح الوقف غير واحد، وايضا استنكره الامام احمد

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ আমর ইবনুল আস (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - 'আকরা' শব্দের ব্যাখ্যা

১১১৩। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আকরাআ শব্দের অর্থ হায়িয পরবর্তী পবিত্রকাল। —মালিক, আহমাদ এবং নাসায়ী একটি সহীহ সানাদে কোন এক ঘটনা উপলক্ষে বর্ণনা করেছেন।[1]

وَعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: إِنَّمَا الْأَقْرَاءُ; الْأَطْهَارُ. أَخْرَجَهُ مَالِكٌ فِي قِصَّةٍ بِسَنَدٍ صَحِيحٍ

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صحيح. رواه مالك في «الموطأ» (2/ 576 - 577/ 54)

وعن عاىشة رضي الله عنها قالت: انما الاقراء; الاطهار. اخرجه مالك في قصة بسند صحيح - صحيح. رواه مالك في «الموطا» (2/ 576 - 577/ 54)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - দাসীর ইদ্দাত পালন করা

১১১৪। ইবনু ’উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেনঃ ক্রীতদাসীর জন্য তালাক্ব মাত্র দু’ ত্বলাক (তালাক)্ব আর তার ইদ্দত পালন করতে হবে দু’হায়িয কাল। —দারাকুতনী মারফূ’ সানাদে, তবে তিনি একে যঈফ বলেছেন।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: طَلَاقُ الْأَمَةِ تَطْلِيقَتَانِ, وَعِدَّتُهَا حَيْضَتَانِ. رَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ
وَأَخْرَجَهُ مَرْفُوعًا وَضَعَّفَهُ

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صحيح موقوفا. رواه الدارقطني (4/ 38)، موقوفا من طريق سالم ونافع، عن ابن عمر وصححه

منكر. رواه ابن ماجه (2079)، والدارقطني (4/ 38)، من طريق عمر بن شبيب، عن عبد الله بن عيسى، عن عطية، عن ابن عمر، مرفوعا. وقال الدارقطني: «حديث عبد الله بن عيسى، عن عطية، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم منكر غير ثابت من وجهين، أحدهما: أن عطية ضعيف، وسالم ونافع أثبت منه وأصح رواية. والوجه الآخر: أن عمر بن شبيب ضعيف الحديث لا يحتج بروايته. والله أعلم

وعن ابن عمر رضي الله عنهما قال: طلاق الامة تطليقتان, وعدتها حيضتان. رواه الدارقطني واخرجه مرفوعا وضعفه - صحيح موقوفا. رواه الدارقطني (4/ 38)، موقوفا من طريق سالم ونافع، عن ابن عمر وصححه منكر. رواه ابن ماجه (2079)، والدارقطني (4/ 38)، من طريق عمر بن شبيب، عن عبد الله بن عيسى، عن عطية، عن ابن عمر، مرفوعا. وقال الدارقطني: «حديث عبد الله بن عيسى، عن عطية، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم منكر غير ثابت من وجهين، احدهما: ان عطية ضعيف، وسالم ونافع اثبت منه واصح رواية. والوجه الاخر: ان عمر بن شبيب ضعيف الحديث لا يحتج بروايته. والله اعلم

হাদিসের মানঃ সহিহ/যঈফ [মিশ্রিত]
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - দাসীর ইদ্দাত পালন করা

১১১৫। আর আবূ দাউদ, তিরমিযী ও ইবনু হিব্বান ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন। হাকিম একে সহীহ বলেছেন- অন্যান্য মুহাদ্দিস এতে দ্বিমত করে এর যঈফ হওয়াতে ঐকমত্য পোষণ করেছেন।[1]

وَأَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَابْنُ مَاجَهْ: مِنْ حَدِيثِ عَائِشَةَ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ, وَخَالَفُوهُ, فَاتَّفَقُوا عَلَى ضَعْفِهِ

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ضعيف. رواه أبو داود (2189)، والترمذي (1182)، وابن ماجه (2080)، والحاكم (250) من طريق أبي عاصم، عن ابن جريج، عن مظاهر، عن القاسم بن محمد، عن عائشة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «طلاق الأمة تطليقتان، وقرؤها حيضتان» قال أبو عاصم: حدثني مظاهر، حدثني القاسم، عن عائشة، عن النبي صلى الله عليه وسلم مثله؛ إلا أنه قال: «وعدتها حيضتان». قال أبو داود: «وهو حديث مجهول». وقال الترمذي: «حديث عائشة حديث غريب؛ لا نعرفه مرفوعا إلا من حديث مظاهر بن أسلم، ومظاهر لا نعرف له في العلم غير هذا الحديث». وروى الدارقطني (4/ 40) بالسند الصحيح، عن أبي عاصم النبيل؛ الضحاك بن مخلد، قال: ليس بالبصرة حديث أنكر من حديث مظاهر هذا

واخرجه ابو داود, والترمذي, وابن ماجه: من حديث عاىشة, وصححه الحاكم, وخالفوه, فاتفقوا على ضعفه - ضعيف. رواه ابو داود (2189)، والترمذي (1182)، وابن ماجه (2080)، والحاكم (250) من طريق ابي عاصم، عن ابن جريج، عن مظاهر، عن القاسم بن محمد، عن عاىشة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «طلاق الامة تطليقتان، وقروها حيضتان» قال ابو عاصم: حدثني مظاهر، حدثني القاسم، عن عاىشة، عن النبي صلى الله عليه وسلم مثله؛ الا انه قال: «وعدتها حيضتان». قال ابو داود: «وهو حديث مجهول». وقال الترمذي: «حديث عاىشة حديث غريب؛ لا نعرفه مرفوعا الا من حديث مظاهر بن اسلم، ومظاهر لا نعرف له في العلم غير هذا الحديث». وروى الدارقطني (4/ 40) بالسند الصحيح، عن ابي عاصم النبيل؛ الضحاك بن مخلد، قال: ليس بالبصرة حديث انكر من حديث مظاهر هذا

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - অন্যের দ্বারা সঞ্চারিত ভ্ৰুণ গর্ভে থাকাবস্থায় গর্ভবতীর সঙ্গে সঙ্গম করা হারাম

১১১৬। রুঅয়ফি’ ইবনু সাবিত (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, কোন পরকালে বিশ্বাসী মুমিন মানুষের জন্য বৈধ হবে না যে সে নিজের পানি অপরের ক্ষেতের ফসলকে পান করাবে। -ইবনু হিব্বান হাদীসটিকে সহীহ এবং বাযযার হাসান বলেছেন।[1]

وَعَنْ رُوَيْفِعِ بْنِ ثَابِتٍ - رضي الله عنه - عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا يَحِلُّ لِامْرِئٍ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ أَنْ يَسْقِيَ مَاءَهُ زَرْعَ غَيْرِهِ». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَحَسَّنَهُ الْبَزَّارُ

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حسن. رواه أبو داود (2158)، والترمذي (1131)، وابن حبان (4830) وقال الترمذي: حديث حسن

وعن رويفع بن ثابت - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا يحل لامرى يومن بالله واليوم الاخر ان يسقي ماءه زرع غيره». اخرجه ابو داود, والترمذي, وصححه ابن حبان, وحسنه البزار - حسن. رواه ابو داود (2158)، والترمذي (1131)، وابن حبان (4830) وقال الترمذي: حديث حسن

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্বামী নিরুদ্দেশ হলে স্ত্রীর বিধান

১১১৭। উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি নিরুদ্দিষ্ট (দীর্ঘদিন অনুপস্থিত) পুরুষের স্ত্রীকে চার বৎসর কাল অপেক্ষা করার জন্য বলেছেন। অতঃপর সে চার মাস দশ দিন ইদ্দত পালন করবে। --মালিক ও শাফিয়ী[1]

وَعَنْ عُمَرَ - رضي الله عنه - فِي امْرَأَةِ الْمَفْقُودِ: تَرَبَّصُ أَرْبَعَ سِنِينَ, ثُمَّ تَعْتَدُّ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا. أَخْرَجَهُ مَالِكٌ, وَالشَّافِعِيُّ

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ضعيف. رواه مالك في «الموطأ» (2/ 575 /52)، من طريق سعيد بن المسيب، عن عمر، به وهو منقطع

وعن عمر - رضي الله عنه - في امراة المفقود: تربص اربع سنين, ثم تعتد اربعة اشهر وعشرا. اخرجه مالك, والشافعي - ضعيف. رواه مالك في «الموطا» (2/ 575 /52)، من طريق سعيد بن المسيب، عن عمر، به وهو منقطع

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্বামী নিরুদ্দেশ হলে স্ত্রীর বিধান

১১১৮। মুগীরাহ বিন শু’বাহ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, নিরুদ্দিষ্ট বা দীর্ঘদিন অনুপস্থিত ব্যক্তির সংবাদ তার স্ত্রীর নিকটে না পৌছা পর্যন্ত ঐ স্ত্রী তারই থাকবে। —দারাকুতনী দুর্বল সানাদে।[1]

وَعَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «امْرَأَةُ الْمَفْقُودِ امْرَأَتُهُ حَتَّى يَأْتِيَهَا الْبَيَانُ». أَخْرَجَهُ الدَّارَقُطْنِيُّ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

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ضعيف جدا. رواه الدارقطني (3/ 31255)، بإسناد رجاله ما بين متروك ومجهول

وعن المغيرة بن شعبة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «امراة المفقود امراته حتى ياتيها البيان». اخرجه الدارقطني باسناد ضعيف - ضعيف جدا. رواه الدارقطني (3/ 31255)، باسناد رجاله ما بين متروك ومجهول

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - গায়রে মাহরাম নারীর সাথে একাকী থাকার ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা

১১১৯। জাবির (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বিবাহ করেছে এমন পুরুষ অথবা মাহরাম (কখনই বিবাহ বৈধ নয় এমন ব্যক্তি) ব্যতীত কোন পুরুষ যেন কোন মহিলার নিকটে রাত্রে না থাকে।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يَبِيتَنَّ رَجُلٌ عِنْدَ امْرَأَةٍ, إِلَّا أَنْ يَكُونَ نَاكِحًا, أَوْ ذَا مَحْرَمٍ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (2171)

وعن جابر - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يبيتن رجل عند امراة, الا ان يكون ناكحا, او ذا محرم». اخرجه مسلم - صحيح. رواه مسلم (2171)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - গায়রে মাহরাম নারীর সাথে একাকী থাকার ব্যাপারে নিষেধাজ্ঞা

১১২০। ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, মাহরামের বিনা উপস্থিতিতে কোন পুরুষ কোন নারীর সঙ্গে নির্জনে সাক্ষাৎ করবে না।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا, عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا يَخْلُوَنَّ رَجُلٌ بِامْرَأَةٍ, إِلَّا مَعَ ذِي مَحْرَمٍ». أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (5233)، وهو لمسلم أيضا (1341) إلا أنه قال: «إلا ومعها ذو محرم

وعن ابن عباس رضي الله عنهما, عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «لا يخلون رجل بامراة, الا مع ذي محرم». اخرجه البخاري - صحيح. رواه البخاري (5233)، وهو لمسلم ايضا (1341) الا انه قال: «الا ومعها ذو محرم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - যুদ্ধ বন্দীনীর জরায়ু মুক্ত করা আবশ্যক

১১২১। আবূ সাঈদ (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আওতসের যুদ্ধের যুদ্ধ বন্দিনীদের সম্বন্ধে বলেছিলেন। গৰ্ভধারিণীর প্রসব না করা পর্যন্ত এবং গর্ভধারিণী নয় এমন মহিলাদের সাথে এক হায়িয অতিবাহিত না হওয়া পর্যন্ত যেন যৌন মিলন করা না হয়। -হাকিম সহীহ বলেছেন।[1]

وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ فِي سَبَايَا أَوْطَاسٍ: «لَا تُوطَأُ حَامِلٌ حَتَّى تَضَعَ, وَلَا غَيْرُ ذَاتِ حَمْلٍ حَتَّى تَحِيضَ حَيْضَةً». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (2157)، والحاكم (295) وهو وإن كان في سنده شريك، وهو سيء الحفظ، إلا أن له شواهد تدل على صحته، وعلى أنه قد حفظه. من هذه الشواهد حديث ابن عباس التالي، وحديث رويفع السابق (1116)، وبقية الشواهد مخرجة في الأصل

وعن ابي سعيد - رضي الله عنه - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قال في سبايا اوطاس: «لا توطا حامل حتى تضع, ولا غير ذات حمل حتى تحيض حيضة». اخرجه ابو داود, وصححه الحاكم - صحيح. رواه ابو داود (2157)، والحاكم (295) وهو وان كان في سنده شريك، وهو سيء الحفظ، الا ان له شواهد تدل على صحته، وعلى انه قد حفظه. من هذه الشواهد حديث ابن عباس التالي، وحديث رويفع السابق (1116)، وبقية الشواهد مخرجة في الاصل

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - যুদ্ধ বন্দীনীর জরায়ু মুক্ত করা আবশ্যক

১১২২। দারাকুতনীতে এ হাদীসের শাহেদ বা সহযোগী একটি হাদীস ইবনু ’আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত হয়েছে।[1]

وَلَهُ شَاهِدٌ: عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ فِي الدَّارَقُطْنِيِّ

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صحيح بشواهده ورواه الدارقطني (357) بسند حسن. ولفظه: «نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن توطأ حامل حتى تضع، أو حائل حتى تحيض

وله شاهد: عن ابن عباس في الدارقطني - صحيح بشواهده ورواه الدارقطني (357) بسند حسن. ولفظه: «نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم ان توطا حامل حتى تضع، او حاىل حتى تحيض

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্ত্রী যার বিছানায় শয়ন করে ঐ স্ত্রীর গর্ভজাত সন্তান তারই হবে, ব্যভিচারীর নয়

১১২৩। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, বিছানা যার তার সন্তান আর ব্যভিচারির জন্য পাথর।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - عَنْ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «الْوَلَدُ لِلْفِرَاشِ, وَلِلْعَاهِرِ الْحَجَرُ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ مِنْ حَدِيثِهِ

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صحيح. رواه البخاري (6818)، ومسلم (1458)

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «الولد للفراش, وللعاهر الحجر». متفق عليه من حديثه - صحيح. رواه البخاري (6818)، ومسلم (1458)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্ত্রী যার বিছানায় শয়ন করে ঐ স্ত্রীর গর্ভজাত সন্তান তারই হবে, ব্যভিচারীর নয়

১১২৪। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে একটি ঘটনা সম্বন্ধে বর্ণিত রয়েছে।

وَمِنْ حَدِيثِ عَائِشَةَ فِي قِصَّةٍ

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صحيح. رواه البخاري (6817)، ومسلم (1457)

ومن حديث عاىشة في قصة - صحيح. رواه البخاري (6817)، ومسلم (1457)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্ত্রী যার বিছানায় শয়ন করে ঐ স্ত্রীর গর্ভজাত সন্তান তারই হবে, ব্যভিচারীর নয়

১১২৫। ইবনু মাস’উদ (রাঃ) থেকে নাসায়ীতেও বর্ণিত হয়েছে।

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ, عِنْدَ النَّسَائِيِّ

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صحيح. رواه النسائي (681)

وعن ابن مسعود, عند النساىي - صحيح. رواه النساىي (681)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১১. ইদ্দত পালন, শোক প্রকাশ, জরায়ু শুদ্ধিকরণ ইত্যাদির বর্ণনা - স্ত্রী যার বিছানায় শয়ন করে ঐ স্ত্রীর গর্ভজাত সন্তান তারই হবে, ব্যভিচারীর নয়

১১২৬। উসমান (রাঃ) থেকে, আবূ দাউদে অনুরূপ হাদীস বর্ণিত হয়েছে।[1]

وَعَنْ عُثْمَانَ. عِنْدَ أَبِي دَاوُدَ

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ضعيف. رواه أبو داود (2275) وفي سنده رباح الكوفي وهو مجهول، وفي حديثه قصة طويلة

وعن عثمان. عند ابي داود - ضعيف. رواه ابو داود (2275) وفي سنده رباح الكوفي وهو مجهول، وفي حديثه قصة طويلة

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - এক চুমুক অথবা দুই চুমুক দুধ পান করা প্রসঙ্গে

১১২৭। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, এক ঢোক অথবা দু’ ঢোক পান করাতে বৈবাহিক সম্পর্ককে হারাম করে না।[1]

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا تُحَرِّمُ الْمَصَّةُ وَالْمَصَّتَانِ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1450)، ووقع في «أ»: «ولا المصتان». بزيادة: لا

عن عاىشة رضي الله عنها قالت: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا تحرم المصة والمصتان». اخرجه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1450)، ووقع في «ا»: «ولا المصتان». بزيادة: لا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - ক্ষুধা নিবারণের দুধ পান বৈবাহিক সম্পর্ককে হারাম করে

১১২৮। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, নারীগণ, কে তোমার সত্যিকার দুধ ভাই তা যাচাই করে দেখে নিও। কেননা, ক্ষুধার কারণে দুধ পানের ফলেই শুধু দুধ সম্পর্ক স্থাপিত হয়।[1]

وَعَنْهَا قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «انْظُرْنَ مَنْ إِخْوَانُكُنَّ, فَإِنَّمَا الرَّضَاعَةُ مِنَ الْمَجَاعَةِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2647)، ومسلم (1455) من طريق مسروق، عن عائشة، قالت: دخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم، وعندي رجل قاعد، فاشتد ذلك عليه، ورأيت الغضب في وجهه، فقال: يا عائشة من هذا؟ قلت: أخي من الرضاعة قال: «يا عائشة! انظرن…» الحديث. واللفظ للبخاري

وعنها قالت: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «انظرن من اخوانكن, فانما الرضاعة من المجاعة». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2647)، ومسلم (1455) من طريق مسروق، عن عاىشة، قالت: دخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم، وعندي رجل قاعد، فاشتد ذلك عليه، ورايت الغضب في وجهه، فقال: يا عاىشة من هذا؟ قلت: اخي من الرضاعة قال: «يا عاىشة! انظرن…» الحديث. واللفظ للبخاري

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - বড়দেরকে দুধ পান করানোর বিধান

১১২৯। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, সাহলাহ বিনতে সুহাইল এসে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! হুযইফার আযাদকৃত দাস সালিম আমাদের সাথে আমাদের বাড়িতেই রয়েছে এবং সে পুরুষের যোগ্য পুরুষত্ব লাভ করেছে। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তুমি তাকে তোমার দুধ পান করিয়ে দাও তুমি তার জন্য হারাম হয়ে যাবে।[1]

وَعَنْهَا قَالَتْ: جَاءَتْ سَهْلَةُ بِنْتُ سُهَيْلٍ. فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ سَالِمًا مَوْلَى أَبِي حُذَيْفَةَ مَعَنَا فِي بَيْتِنَا, وَقَدْ بَلَغَ مَا يَبْلُغُ الرِّجَالُ. قَالَ: «أَرْضِعِيهِ، تَحْرُمِي عَلَيْهِ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1453) (27)

وعنها قالت: جاءت سهلة بنت سهيل. فقالت: يا رسول الله! ان سالما مولى ابي حذيفة معنا في بيتنا, وقد بلغ ما يبلغ الرجال. قال: «ارضعيه، تحرمي عليه». رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1453) (27)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - দুধপানকারিণীর স্বামী এবং তার নিকট আত্মীয়ের বিধান

১১৩০। ’আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, পর্দার আইন চালুর পর আবূ কুআইসের ভাই আফলাহ ’আয়িশা (রাঃ)-এর নিকটে আসার অনুমতি চাইতে এলেন। ’আয়িশা (রাঃ) বলেছেন, আমি তাকে অনুমতি দিতে অস্বীকার করলাম। অতঃপর যখন রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এলেন, তখন আমি যা করেছি তা তাকে জানালাম। তিনি তাকে আমার নিকটে প্রবেশের অনুমতি দেবার জন্য আমাকে আদেশ দিলেন। আর বললেন, তিনি তো তোমার দুধ চাচা হচ্ছেন।[1]

وَعَنْهَا: أَنْ أَفْلَحَ - أَخَا أَبِي الْقُعَيْسِ - جَاءَ يَسْتَأْذِنُ عَلَيْهَا بَعْدَ الْحِجَابِ. قَالَتْ: فَأَبَيْتُ أَنْ آذَنَ لَهُ, فَلَمَّا جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَخْبَرْتُهُ بِالَّذِي صَنَعْتُ, فَأَمَرَنِي أَنْ آذَنَ لَهُ عَلَيَّ. وَقَالَ: «إِنَّهُ عَمُّكِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2644) وأطرافه، ومسلم (1445) وفي سياقه من الحافظ نوع تصرف

وعنها: ان افلح - اخا ابي القعيس - جاء يستاذن عليها بعد الحجاب. قالت: فابيت ان اذن له, فلما جاء رسول الله - صلى الله عليه وسلم - اخبرته بالذي صنعت, فامرني ان اذن له علي. وقال: «انه عمك». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2644) واطرافه، ومسلم (1445) وفي سياقه من الحافظ نوع تصرف

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - যতটুকু দুধ পান করলে বৈবাহিক সম্পর্ক হারাম হয়

১১৩১. আয়িশা (রাঃ) হতে বর্ণিত, কুরআন নাযিলকৃত আয়াতে এ বিধান ছিল যে, দশবার দুধ পান করলে বৈবাহিক সম্পর্ক হারাম হবে। তারপর পাঁচবার দুধ পান করার বিধান দ্বারা দশবার পান করার বিধান বাতিল করা হয়। এরূপ অবস্থায় রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর ইন্তিকাল ঘটে এবং ঐ বিধানটি কুরআন হিসেবে পড়া হতে থাকে।[1]

وَعَنْهَا قَالَتْ: كَانَ فِيمَا أُنْزِلُ فِي الْقُرْآنِ: عَشْرُ رَضَعَاتٍ مَعْلُومَاتٍ يُحَرِّمْنَ, ثُمَّ نُسِخْنَ بِخَمْسٍ مَعْلُومَاتٍ, فَتُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَهِيَ فِيمَا يُقْرَأُ مِنَ الْقُرْآنِ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1452) وقال النووي (1082): «معناه أن النسخ بخمس رضعات تأخر إنزاله جدا، حتى إنه صلى الله عليه وسلم توفي وبعض الناس يقرأ خمس رضعات، ويجعلها قرآنا متلوا؛ لكونه لم يبلغه النسخ لقرب عهده، فلما بلغهم النسخ بعد ذلك رجعوا عن ذلك، وأجمعوا على أن هذا لا يتلى». قلت: ولا مناص من قبول مثل هذا التأويل، وإن كان فيه بُعْد كما لا يخفى

وعنها قالت: كان فيما انزل في القران: عشر رضعات معلومات يحرمن, ثم نسخن بخمس معلومات, فتوفي رسول الله - صلى الله عليه وسلم - وهي فيما يقرا من القران. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1452) وقال النووي (1082): «معناه ان النسخ بخمس رضعات تاخر انزاله جدا، حتى انه صلى الله عليه وسلم توفي وبعض الناس يقرا خمس رضعات، ويجعلها قرانا متلوا؛ لكونه لم يبلغه النسخ لقرب عهده، فلما بلغهم النسخ بعد ذلك رجعوا عن ذلك، واجمعوا على ان هذا لا يتلى». قلت: ولا مناص من قبول مثل هذا التاويل، وان كان فيه بعد كما لا يخفى

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - বংশ সম্পর্কের কারণে যাদেরকে বিবাহ করা হারাম, দুধ সম্পর্কের কারণেও তাদেরকে বিবাহ করা হারাম

১১৩২। ইবনু আব্বাস (রাঃ) হতে বর্ণিত; নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হামযা (রাঃ) এর কন্যার স্বামী হবেন ভাবা হয়েছিল। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেনঃ সে তো আমার জন্য হালাল নয়! কারণ সে তো আমার দুধ ভাইয়ের কন্যা। দুধ সম্পর্ক ঐগুলো হারাম হবে যেগুলো বংশ সম্পপর্কের জন্য হারাম হয়।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أُرِيدُ عَلَى ابْنَةِ حَمْزَةَ. فَقَالَ: «إِنَّهَا لَا تَحِلُّ لِي; إِنَّهَا ابْنَةُ أَخِي مِنَ الرَّضَاعَةِ - وَيَحْرُمُ مِنَ الرَّضَاعَةِ مَا يَحْرُمُ مِنْ النَّسَبِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (2645)، ومسلم (1446)

وعن ابن عباس رضي الله عنهما - ان النبي - صلى الله عليه وسلم - اريد على ابنة حمزة. فقال: «انها لا تحل لي; انها ابنة اخي من الرضاعة - ويحرم من الرضاعة ما يحرم من النسب». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (2645)، ومسلم (1446)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - কী পরিমাণ এবং কত সময় দুধ পান করলে হারাম সাব্যস্ত হবে

১১৩৩। উম্মু সালামাহ (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ দুধ পান দ্বারা হারাম সাব্যস্ত তখন হবে, যখন দুধ পান দ্বারা সন্তানদের পেট পূর্ণ হবে, আর তা দুধ পানের উপযুক্ত সময়ে হবে।[1]

وَعَنْ أُمِّ سَلَمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا يُحَرِّمُ مِنَ الرَّضَاعَةِ إِلَّا مَا فَتَقَ الْأَمْعَاءَ, وَكَانَ قَبْلَ الْفِطَامِ». رَوَاهُ التِّرْمِذِيُّ, وَصَحَّحَهُ هُوَ وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه الترمذي (1152) وعنده «في الثدي» بعد قوله: «الأمعاء» وقال: «هذا حديث حسن صحيح، والعمل على هذا عند أكثر أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم؛ أن الرضاعة لا تحرم إلا ما كان دون الحولين. وما كان بعد الحولين الكاملين، فإنه لا يحرم شيئا

وعن ام سلمة رضي الله عنها قالت: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا يحرم من الرضاعة الا ما فتق الامعاء, وكان قبل الفطام». رواه الترمذي, وصححه هو والحاكم - صحيح. رواه الترمذي (1152) وعنده «في الثدي» بعد قوله: «الامعاء» وقال: «هذا حديث حسن صحيح، والعمل على هذا عند اكثر اهل العلم من اصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم؛ ان الرضاعة لا تحرم الا ما كان دون الحولين. وما كان بعد الحولين الكاملين، فانه لا يحرم شيىا

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ উম্মু সালামাহ (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - কী পরিমাণ এবং কত সময় দুধ পান করলে হারাম সাব্যস্ত হবে

১১৩৪। ইবনু আব্বাস (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, দু’বছর বয়সের মধ্যে দুধ পান করা ব্যতীত দুধ সম্পর্ক সাব্যস্ত হবে না।[1]

وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: لَا رَضَاعَ إِلَّا فِي الْحَوْلَيْنِ. رَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ وَابْنُ عَدِيٍّ مَرْفُوعًا وَمَوْقُوفًا, وَرَجَّحَا الْمَوْقُوفَ

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صحيح موقوفا. والمرفوع رواه الدارقطني (4740)، وابن عدي في «الكامل» (7562)، من طريق الهيثم بن جميل، حدثنا سفيان بن عيينة، عن عمرو بن دينار، عن ابن عباس مرفوعا، به. وقال الدارقطني: «لم يسنده عن ابن عيينة غير الهيثم بن جميل، وهو ثقة حافظ». وقال ابن عدي: «وهذا يعرف بالهيثم بن جميل، عن ابن عيينة مسندا، وغير الهيثم يوقفه على ابن عباس، والهيثم بن جميل يسكن أنطاكية، ويقال: هو البغدادي، ويغلط الكثير على الثقات كما يغلط غيره، وأرجو أنه لا يتعمد الكذب». قلت: ورجح الموقوف أيضا البيهقي، وعبد الحق، وابن عبد الهادي، والزيلعي

وعن ابن عباس رضي الله عنهما قال: لا رضاع الا في الحولين. رواه الدارقطني وابن عدي مرفوعا وموقوفا, ورجحا الموقوف - صحيح موقوفا. والمرفوع رواه الدارقطني (4740)، وابن عدي في «الكامل» (7562)، من طريق الهيثم بن جميل، حدثنا سفيان بن عيينة، عن عمرو بن دينار، عن ابن عباس مرفوعا، به. وقال الدارقطني: «لم يسنده عن ابن عيينة غير الهيثم بن جميل، وهو ثقة حافظ». وقال ابن عدي: «وهذا يعرف بالهيثم بن جميل، عن ابن عيينة مسندا، وغير الهيثم يوقفه على ابن عباس، والهيثم بن جميل يسكن انطاكية، ويقال: هو البغدادي، ويغلط الكثير على الثقات كما يغلط غيره، وارجو انه لا يتعمد الكذب». قلت: ورجح الموقوف ايضا البيهقي، وعبد الحق، وابن عبد الهادي، والزيلعي

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - কী পরিমাণ এবং কত সময় দুধ পান করলে হারাম সাব্যস্ত হবে

১১৩৫। ইবনু মাস’উদ (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যে দুধ পান দ্বারা হাড় বর্ধিত হয় এবং মাংস বৃদ্ধি পায় এমন দুধ পান করা ব্যতীত সম্পর্ক সাব্যস্ত হয় না।[1]

وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا رَضَاعَ إِلَّا مَا أَنْشَزَ الْعَظْمَ, وَأَنْبَتَ اللَّحْمَ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ

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ضعيف. رواه أبو داود (2060) بسند فيه ثلاثة مجاهيل

وعن ابن مسعود - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «لا رضاع الا ما انشز العظم, وانبت اللحم». رواه ابو داود - ضعيف. رواه ابو داود (2060) بسند فيه ثلاثة مجاهيل

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
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পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১২. সন্তানকে দুধ খাওয়ান প্রসঙ্গ - স্তন্যদানকারীনীর সাক্ষ্যদানের বিধান

১১৩৬। উকবাহ ইবনুল হারিস (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি আবূ ইহাবের কন্যা উম্মু ইয়াহইয়াকে বিয়ে করেছিলেন। তারপর কোন এক রমণী এসে বললো: আমি তোমাদের (স্বামী-স্ত্রী) দুজনকে দুধ পান করিয়েছি। অতঃপর তিনি-নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে এ প্রসঙ্গে জিজ্ঞেস করলেন, তিনি বললেন: এ কথার পর তুমি কিভাবে তার সঙ্গে সংসার করবে? অতঃপর ’উকবাহ তার স্ত্রীকে আলাদা করে দিলেন এবং সে মহিলা অন্য স্বামীর সঙ্গে বিবাহ বন্ধনে আবদ্ধ হল।[1]

وَعَنْ عُقْبَةَ بْنِ الْحَارِثِ; - أَنَّهُ تَزَوَّجَ أُمَّ يَحْيَى بِنْتَ أَبِي إِهَابٍ, فَجَاءَتِ امْرَأَةٌ. فَقَالَتْ: قَدْ أَرْضَعْتُكُمَا, فَسَأَلَ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: «كَيْفَ وَقَدْ قِيلَ?» فَفَارَقَهَا عُقْبَةُ. وَنَكَحَتْ زَوْجًا غَيْرَهُ. أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. رواه البخاري (88)

وعن عقبة بن الحارث; - انه تزوج ام يحيى بنت ابي اهاب, فجاءت امراة. فقالت: قد ارضعتكما, فسال النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: «كيف وقد قيل?» ففارقها عقبة. ونكحت زوجا غيره. اخرجه البخاري - صحيح. رواه البخاري (88)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - প্ৰাণীদের শাস্তি দেওয়া নিষেধ

১১৩৭। যিয়াদ ’সাহমী (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কম বুদ্ধির মেয়েদের দুধ পান করাতে নিষেধ করেছেন।[1]

وَعَنْ زِيَادِ السَّهْمِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - أَنْ تُسْتَرْضَعَ الْحَمْقَى. أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ وَهُوَ مُرْسَلٌ, وَلَيْسَتْ لِزِيَادٍ صُحْبَةٌ

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ضعيف. رواه أبو داود في «المراسيل» (207) وفي سنده مجهول فضلا عن كونه مرسلا

وعن زياد السهمي - رضي الله عنه - قال: نهى رسول الله - صلى الله عليه وسلم - ان تسترضع الحمقى. اخرجه ابو داود وهو مرسل, وليست لزياد صحبة - ضعيف. رواه ابو داود في «المراسيل» (207) وفي سنده مجهول فضلا عن كونه مرسلا

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
বর্ণনাকারীঃ যিয়াদ ‘সাহমী (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - স্বামীকে না জানিয়ে তার মাল স্ত্রীর খরচ করা জায়েয যখন যথেষ্ট পরিমাণে খরচ দিবে না

১১৩৮. আয়িশা (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি বলেন: উতবার কন্যা আবূ সুফইয়ানের স্ত্রী হিন্দ রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকটে উপস্থিত হয়ে বলেনঃ আবূ সুফইয়ান একজন কৃপণ লোক। আমাকে এত পরিমাণ খরচ দেন না, যা আমার ও আমার সন্তানদের জন্য যথেষ্ট হতে পারে যতক্ষণ না আমি তার অজান্তে মাল থেকে কিছু নিই। এমতাবস্থায় তাকে না জানিয়েই আমি তার মাল হতে যা নিয়ে থাকি তাতে কি আমার কোন গুনাহ হয়? তখন তিনি বললেনঃ তোমার ও তোমার সন্তানের জন্য ন্যায়সঙ্গতভাবে যা যথেষ্ট হয় তা তুমি নিতে পার।[1]

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: دَخَلَتْ هِنْدُ بِنْتُ عُتْبَةَ -امْرَأَةُ أَبِي سُفْيَانَ- عَلَى رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم -. فَقَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ أَبَا سُفْيَانَ رَجُلٌ شَحِيحٌ لَا يُعْطِينِي مِنَ النَّفَقَةِ مَا يَكْفِينِي وَيَكْفِي بَنِيَّ إِلَّا مَا أَخَذْتُ مِنْ مَالِهِ بِغَيْرِ عِلْمِهِ, فَهَلْ عَلَيَّ فِي ذَلِكَ مِنْ جُنَاحٍ فَقَالَ: «خُذِي مِنْ مَالِهِ بِالْمَعْرُوفِ مَا يَكْفِيكِ, وَيَكْفِي بَنِيكِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (5364)، ومسلم (1714) واللفظ لمسلم

عن عاىشة رضي الله عنها قالت: دخلت هند بنت عتبة -امراة ابي سفيان- على رسول الله - صلى الله عليه وسلم -. فقالت: يا رسول الله! ان ابا سفيان رجل شحيح لا يعطيني من النفقة ما يكفيني ويكفي بني الا ما اخذت من ماله بغير علمه, فهل علي في ذلك من جناح فقال: «خذي من ماله بالمعروف ما يكفيك, ويكفي بنيك». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (5364)، ومسلم (1714) واللفظ لمسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - খরচকারীর ফযীলতের বর্ণনা এবং খরচ করার সময় তার যে সমস্ত বিষয় লক্ষ রাখা উচিত

১১৩৯। তারিক্ব মুহারিবী (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, আমরা মদীনায় আগমন করলাম, আর তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দাঁড়িয়ে ভাষণ দিচ্ছিলেন, তিনি তাতে বলছিলেনঃ দাতার হাত উঁচু (মর্যাদাসম্পন্ন)। তোমার পোষ্যদের মধ্যে দানের কাজ আরম্ভ কর। (যেমন) তোমার মা, তোমার বাবা, তোমার বোন, ভাই; এভাবে যে যত তোমার নিকটাত্মীয় (তাকে পর্যায়ক্রমে দানের ব্যাপারে অগ্রাধিকার দাও)।[1]

وَعَنْ طَارِقِ الْمُحَارِبِيِّ قَالَ: قَدِمْنَا الْمَدِينَةَ, فَإِذَا رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَائِمٌ يَخْطُبُ وَيَقُولُ: «يَدُ الْمُعْطِي الْعُلْيَا, وَابْدَأْ بِمَنْ تَعُولُ: أُمَّكَ وَأَبَاكَ, وَأُخْتَكَ وَأَخَاكَ, ثُمَّ أَدْنَاكَ أَدْنَاكَ». رَوَاهُ النَّسَائِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ, وَالدَّارَقُطْنِيُّ

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صحيح. رواه النسائي (5/ 61)، وابن حبان (810)، والدارقطني (3/ 44 - 4586) وقال النسائي: مختصر. قلت: وقد بينت رواية الدارقطني هذا الاختصار، ففيها: عن طارق المحاربي قال: رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم مرتين؛ مرة بسوق ذي المجاز وأنا في تباعة لي هكذا قال: أبيعها. فمر وعليه حلة حمراء، وهو ينادي بأعلى صوته: يا أيها الناس! قولوا: لا إله إلا الله تفلحوا، ورجل يتبعه بالحجارة وقد أدمى كعبيه وعرقوبيه، وهو يقول: يا أيها الناس! لا تطيعوه فإنه كذاب. قلت: من هذا؟ فقالوا: هذا غلام بني عبد المطلب. قلت: من هذا الذي يتبعه يرميه؟ قالوا: هذا عمه عبد العزى وهو أبو لهب.
فلما ظهر الإسلام، وقدم المدينة أقبلنا في ركب من الربذة وجنوب الربذة، حتى نزلنا قريبا من المدينة ومعنا ظعينة لنا. قال: فَبَيْنَا نحن قعود إذ أتانا رجل عليه ثوبان أبيضان، فسلم، فرددنا عليه. فقال: «من أين أقبل القوم»؟ قلنا: من الربذة وجنوب الربذة. قال: ومعنا جمل أحمر. قال: «تبيعوني جملكم؟» قلنا: نعم. قال: «بكم؟» قلنا: بكذا وكذا صاعا من تمر. قال: فما استوضعنا شيئا، وقال «قد أخذته». ثم أخذ برأس الجمل، حتى دخل المدينة فتوارى عنا، فتلاومنا بيننا. وقلنا: أعطيتم جملكم من لا تعرفونه. فقالت الظعينة: لا تلاوموا, فقد رأيت وجه رجل ما كان ليحقركم، ما رأيت وجه رجل أشبه بالقمر ليلة البدر من وجهه، فلما كان العشاء أتانا رجل. فقال: السلام عليكم. أنا رسول رسول الله صلى الله عليه وسلم إليكم، وإنه أمركم أن تأكلوا من هذا حتى تشبعوا، وتكتالوا حتى تستوفوا. قال: فأكلنا حتى شبعنا، واكتلنا حتى استوفينا، فلما كان من الغد دخلنا المدينة، فإذا رسول الله صلى الله عليه وسلم قائم على المنبر، يخطب الناس، وهو يقول:… فذكره. وزاد: فقام رجل من الأنصار فقال: يا رسول الله! هؤلاء بنو ثعلبة ابن يربوع الذين قتلوا فلانا في الجاهلية، فخذ لنا بثأرنا، فرفع يديه حتى رأينا بياض إبطيه. فقال: ألا لا يجني والد على ولده

وعن طارق المحاربي قال: قدمنا المدينة, فاذا رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قاىم يخطب ويقول: «يد المعطي العليا, وابدا بمن تعول: امك واباك, واختك واخاك, ثم ادناك ادناك». رواه النساىي, وصححه ابن حبان, والدارقطني - صحيح. رواه النساىي (5/ 61)، وابن حبان (810)، والدارقطني (3/ 44 - 4586) وقال النساىي: مختصر. قلت: وقد بينت رواية الدارقطني هذا الاختصار، ففيها: عن طارق المحاربي قال: رايت رسول الله صلى الله عليه وسلم مرتين؛ مرة بسوق ذي المجاز وانا في تباعة لي هكذا قال: ابيعها. فمر وعليه حلة حمراء، وهو ينادي باعلى صوته: يا ايها الناس! قولوا: لا اله الا الله تفلحوا، ورجل يتبعه بالحجارة وقد ادمى كعبيه وعرقوبيه، وهو يقول: يا ايها الناس! لا تطيعوه فانه كذاب. قلت: من هذا؟ فقالوا: هذا غلام بني عبد المطلب. قلت: من هذا الذي يتبعه يرميه؟ قالوا: هذا عمه عبد العزى وهو ابو لهب. فلما ظهر الاسلام، وقدم المدينة اقبلنا في ركب من الربذة وجنوب الربذة، حتى نزلنا قريبا من المدينة ومعنا ظعينة لنا. قال: فبينا نحن قعود اذ اتانا رجل عليه ثوبان ابيضان، فسلم، فرددنا عليه. فقال: «من اين اقبل القوم»؟ قلنا: من الربذة وجنوب الربذة. قال: ومعنا جمل احمر. قال: «تبيعوني جملكم؟» قلنا: نعم. قال: «بكم؟» قلنا: بكذا وكذا صاعا من تمر. قال: فما استوضعنا شيىا، وقال «قد اخذته». ثم اخذ براس الجمل، حتى دخل المدينة فتوارى عنا، فتلاومنا بيننا. وقلنا: اعطيتم جملكم من لا تعرفونه. فقالت الظعينة: لا تلاوموا, فقد رايت وجه رجل ما كان ليحقركم، ما رايت وجه رجل اشبه بالقمر ليلة البدر من وجهه، فلما كان العشاء اتانا رجل. فقال: السلام عليكم. انا رسول رسول الله صلى الله عليه وسلم اليكم، وانه امركم ان تاكلوا من هذا حتى تشبعوا، وتكتالوا حتى تستوفوا. قال: فاكلنا حتى شبعنا، واكتلنا حتى استوفينا، فلما كان من الغد دخلنا المدينة، فاذا رسول الله صلى الله عليه وسلم قاىم على المنبر، يخطب الناس، وهو يقول:… فذكره. وزاد: فقام رجل من الانصار فقال: يا رسول الله! هولاء بنو ثعلبة ابن يربوع الذين قتلوا فلانا في الجاهلية، فخذ لنا بثارنا، فرفع يديه حتى راينا بياض ابطيه. فقال: الا لا يجني والد على ولده

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - দাসের যাবতীয় ভরণপোষণের জন্য মনিবের ব্যয় করা আবশ্যক

১১৪০। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ দাস আহার ও পরিধেয় বস্ত্রের হক্বদার, আর তাকে তার সামর্থ্যের বেশি কাজের বোঝা দেয়া যাবে না।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لِلْمَمْلُوكِ طَعَامُهُ وَكِسْوَتُهُ, وَلَا يُكَلَّفُ مِنَ الْعَمَلِ إِلَّا مَا يُطِيقُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

-

حسن. رواه مسلم (1662) ورجاله كلهم ثقات إلا العجلان مولى فاطمة فإنه حسن الحديث. وأما قول الحافظ في «التلخيص» (43): «وفيه محمد بن عجلان» يشير بذلك إلى أنه متكلم فيه وخاصة في أحاديث أبي هريرة، فهو وهم من الحافظ رحمه الله، إذ ليس في سند مسلم محمد بن عجلان. لكن رواه ابن حبان من طريقه (1205) وزاد: «فإن كلفتموهم فأعينوهم، ولا تعذبوا عباد الله، خلقا أمثالكم». قلت: وإسنادها حسن، خاصة ولها شاهد، وهو مخرج بالأصل

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «للمملوك طعامه وكسوته, ولا يكلف من العمل الا ما يطيق». رواه مسلم - حسن. رواه مسلم (1662) ورجاله كلهم ثقات الا العجلان مولى فاطمة فانه حسن الحديث. واما قول الحافظ في «التلخيص» (43): «وفيه محمد بن عجلان» يشير بذلك الى انه متكلم فيه وخاصة في احاديث ابي هريرة، فهو وهم من الحافظ رحمه الله، اذ ليس في سند مسلم محمد بن عجلان. لكن رواه ابن حبان من طريقه (1205) وزاد: «فان كلفتموهم فاعينوهم، ولا تعذبوا عباد الله، خلقا امثالكم». قلت: واسنادها حسن، خاصة ولها شاهد، وهو مخرج بالاصل

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - স্বামীর উপর স্ত্রীর খরচাদি বহন ওয়াজিব

১১৪১। হাকীম ইবনু মুআবিয়া আল কুশাইরী (রাঃ) তাঁর পিতা মু’আবিয়া হতে রিওয়ায়াত করেন, তিনি বলেন, আমি বললাম হে আল্লাহর রাসূল! আমাদের কারো স্ত্রীর হক তার উপর কতটুকু? তিনি বললেন, তুমি যখন আহার করবে তখন তাকেও আহার করাবে; আর যখন তুমি বস্ত্র পরবে, তখন তাকেও বস্ত্র পরাবে। মুখমণ্ডলে প্রহার করবে না। আর অশ্লীল ভাষা ব্যবহার করবে না। হাদীসটি ইতিপূর্বে ১০১৮ নং বর্ণিত হয়েছে।[1]

وَعَنْ حَكِيمِ بْنِ مُعَاوِيَةَ الْقُشَيْرِيِّ, عَنْ أَبِيهِ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! مَا حَقُّ زَوْجَةِ أَحَدِنَا عَلَيْهِ? قَالَ: «أَنْ تُطْعِمَهَا إِذَا طَعِمْتَ, وَتَكْسُوَهَا إِذَا اكْتَسَيْتَ, وَلَا تَضْرِبِ الْوَجْهَ, وَلَا تُقَبِّحْ…]». الْحَدِيثُ. وتَقَدَّمَ فِي عِشْرَةِ النِّسَاءِ

وعن حكيم بن معاوية القشيري, عن ابيه قال: قلت: يا رسول الله! ما حق زوجة احدنا عليه? قال: «ان تطعمها اذا طعمت, وتكسوها اذا اكتسيت, ولا تضرب الوجه, ولا تقبح…]». الحديث. وتقدم في عشرة النساء

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - স্বামীর উপর স্ত্রীর খরচাদি বহন ওয়াজিব

১১৪২। জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) হতে বর্ণিত; নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে হাজ্জ সংক্রান্ত দীর্ঘ হাদীসে মেয়েদের সম্পর্কে বর্ণিত হয়েছে, তোমাদের উপর তাঁদের আহার ও পোশাক ন্যায্যভাবে বহন করা ন্যস্ত রয়েছে।[1]

وَعَنْ جَابِر بْنِ عَبْدِ اللَّهِ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فِي حَدِيثِ الْحَجِّ بِطُولِهِ - قَالَ فِي ذِكْرِ النِّسَاءِ: «وَلَهُنَّ عَلَيْكُمْ رِزْقُهُنَّ وَكِسْوَتُهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ

وعن جابر بن عبد الله - رضي الله عنه - عن النبي - صلى الله عليه وسلم - في حديث الحج بطوله - قال في ذكر النساء: «ولهن عليكم رزقهن وكسوتهن بالمعروف». اخرجه مسلم

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - দায়িত্বশীলদের গুরু দায়িত্ব হচ্ছে অধীনস্থদের ব্যয়ভার বহন করা

১১৪৩। আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ মানুষ পাপী হওয়ার জন্য এটাই যথেষ্ট যে, সে তার পোষ্যকে ভরণ-পোষণ না দিয়ে তাকে নষ্ট করে।[1]

وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «كَفَى بِالْمَرْءِ إِثْمًا أَنْ يُضَيِّعَ مَنْ يَقُوتُ». رَوَاهُ النَّسَائِيُّ

وَهُوَ عِنْدَ مُسْلِمٍ بِلَفْظِ: «أَنْ يَحْبِسَ عَمَّنْ يَمْلِكُ قُوتَهُ

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ضعيف بهذا اللفظ. رواه النسائي في «عشرة النساء» (294 و 295)، وأيضا أبو داود (1692) من طريق أبي إسحاق، عن وهب بن جابر، عن عبد الله بن عمرو، به. وفي رواية النسائي الأولى: «يعول» بدل: «يقوت». قلت: ووهب هذا ليس له راو غير أبي إسحاق وقال النسائي: مجهول، وأبى ابن حبان إلا أن يدخله في «الثقات» (5/ 489)، وأما الذهبي فنقل تجهيل ابن المديني له، ثم قال في «الميزان» (4/ 350) لا يكاد يعرف

صحيح. رواه مسلم (996) من طريق خيثمة قال: كنا جلوسا مع عبد الله بن عمرو، إذ جاءه قهرمان له، فدخل. فقال: أعطيت الرقيق قوتهم؟ قال: لا. قال: فانطلق فأعطهم. قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «كفى بالمرء إثما ... » الحديث. قلت: هذا هو أصل الحديث، فمخالفة وهب لمثل خيثمة غير مقبولة، والله أعلم

وعن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «كفى بالمرء اثما ان يضيع من يقوت». رواه النساىي وهو عند مسلم بلفظ: «ان يحبس عمن يملك قوته - ضعيف بهذا اللفظ. رواه النساىي في «عشرة النساء» (294 و 295)، وايضا ابو داود (1692) من طريق ابي اسحاق، عن وهب بن جابر، عن عبد الله بن عمرو، به. وفي رواية النساىي الاولى: «يعول» بدل: «يقوت». قلت: ووهب هذا ليس له راو غير ابي اسحاق وقال النساىي: مجهول، وابى ابن حبان الا ان يدخله في «الثقات» (5/ 489)، واما الذهبي فنقل تجهيل ابن المديني له، ثم قال في «الميزان» (4/ 350) لا يكاد يعرف صحيح. رواه مسلم (996) من طريق خيثمة قال: كنا جلوسا مع عبد الله بن عمرو، اذ جاءه قهرمان له، فدخل. فقال: اعطيت الرقيق قوتهم؟ قال: لا. قال: فانطلق فاعطهم. قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «كفى بالمرء اثما ... » الحديث. قلت: هذا هو اصل الحديث، فمخالفة وهب لمثل خيثمة غير مقبولة، والله اعلم

হাদিসের মানঃ সহিহ/যঈফ [মিশ্রিত]
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - গৰ্ভবতী বিধবার ব্যয়ভার প্রসঙ্গ

১১৪৪। জাবির (রাঃ) হতে বর্ণিত; (মারফূ সূত্ৰে) গৰ্ভবতী বিধবা মেয়েদের প্রসঙ্গে বলেন: তাদের জন্য কোন খোর-পোষ হবে না। (কেননা এরূপ ক্ষেত্রে স্বামীর মালের ওয়ারিস হওয়ার সুযোগ বিধবা মেয়েদের জন্য রয়েছে)।[1]

وَعَنْ جَابِرٍ - يَرْفَعُهُ, فِي الْحَامِلِ الْمُتَوَفَّى عَنْهَا - قَالَ: «لَا نَفَقَةَ لَهَا». أَخْرَجَهُ الْبَيْهَقِيُّ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ, لَكِنْ قَالَ: الْمَحْفُوظُ وَقْفُهُ

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ضعيف. رواه البيهقي (7/ 431) من طريق حرب بن أبي العالية، عن أبي الزبير، عن جابر مرفوعا، به. قلت: وأبو الزبير مدلس وقد عنعنه

وعن جابر - يرفعه, في الحامل المتوفى عنها - قال: «لا نفقة لها». اخرجه البيهقي, ورجاله ثقات, لكن قال: المحفوظ وقفه - ضعيف. رواه البيهقي (7/ 431) من طريق حرب بن ابي العالية، عن ابي الزبير، عن جابر مرفوعا، به. قلت: وابو الزبير مدلس وقد عنعنه

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - গৰ্ভবতী বিধবার ব্যয়ভার প্রসঙ্গ

১১৪৫। খরচ না পাওয়ার ব্যবস্থা ফাতিমাহ বিনতু ক্বাইস এর হাদীস মূলে আগে সাব্যস্ত হয়েছে।[1]

وَثَبَتَ نَفْيُ النَّفَقَةِ فِي حَدِيثِ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ كَمَا تَقَدَّمَ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ

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صحيح. رواه مسلم (1480) وفيه: «ليس لك عليه نفقة». وتقدم برقم (1004)

وثبت نفي النفقة في حديث فاطمة بنت قيس كما تقدم. رواه مسلم - صحيح. رواه مسلم (1480) وفيه: «ليس لك عليه نفقة». وتقدم برقم (1004)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - সন্তান, দাস এবং স্ত্রীর উপর খরচ করার আবশ্যকীয়তা

১১৪৬। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ উপরের হাত (দাতার হাত) নিচের (গ্রহীতার) হাত হতে উত্তম, তোমাদের প্রত্যেকেই তার দান কার্য তার পোষ্যদের মধ্যে আরম্ভ করবে। এমন যেন না হয় যে, বিবি বলতে বাধ্য হবে আমাকে খেতে তাও, না হয় তালাক দাও’।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «الْيَدِ الْعُلْيَا خَيْرٌ مِنَ الْيَدِ السُّفْلَى, وَيَبْدَأُ أَحَدُكُمْ بِمَنْ يَعُولُ». تَقُولُ الْمَرْأَةُ: أَطْعِمْنِي, أَوْ طَلِّقْنِي. رَوَاهُ الدَّارَقُطْنِيُّ, وَإِسْنَادُهُ حَسَنٌ

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رواه الدارقطني (39791) من طريق عاصم بن بهدلة، عن أبي صالح، عن أبي هريرة، وزاد: «ويقول عبده: أطعمني واستعملني، ويقول ولده: إلى من تكلنا». ونعم هذا إسناد حسن كما قال الحافظ، ولكن قوله: «تقول المرأة ... » موقوف على أبي هريرة رضي الله عنه، ورفعه خطأ كما بينتْ ذلك رواية البخاري (5355) ففيه «قالوا: سمعت هذا من رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ قال: لا. هذا من كيس أبي هريرة». بل قال الحافظ نفسه -رحمه الله- على رواية الدارقطني وجعل هذه الزيادة مرفوعة قال (9/ 501): لا حجة فيه لأن في حفظ عاصم شيئا

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اليد العليا خير من اليد السفلى, ويبدا احدكم بمن يعول». تقول المراة: اطعمني, او طلقني. رواه الدارقطني, واسناده حسن - رواه الدارقطني (39791) من طريق عاصم بن بهدلة، عن ابي صالح، عن ابي هريرة، وزاد: «ويقول عبده: اطعمني واستعملني، ويقول ولده: الى من تكلنا». ونعم هذا اسناد حسن كما قال الحافظ، ولكن قوله: «تقول المراة ... » موقوف على ابي هريرة رضي الله عنه، ورفعه خطا كما بينت ذلك رواية البخاري (5355) ففيه «قالوا: سمعت هذا من رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ قال: لا. هذا من كيس ابي هريرة». بل قال الحافظ نفسه -رحمه الله- على رواية الدارقطني وجعل هذه الزيادة مرفوعة قال (9/ 501): لا حجة فيه لان في حفظ عاصم شيىا

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - ভরন-পোষণে অক্ষম ব্যক্তির বিবাহ বিচ্ছেদ প্রসঙ্গ

১১৪৭। সাঈদ ইবনু মুসাইয়্যাব হতে ঐ ব্যক্তি প্রসঙ্গে বর্ণিত; যে তার বিবিকে খেতে -পরতে দেয়ার সঙ্গতি রাখে না, তিনি বলেন, তাদের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটানো যাবে। সাঈদ ইবনু মানসুর সুফইয়ান হতে, তিনি আবূ যিনাদ হতে, তিনি বলেন, সাঈদকে বললাম (এ ব্যবস্থা কি রাসূলের) সুন্নাত মূলে। তিনি বললেনঃ সুন্নাত মূলে।[1]

وَعَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ - فِي الرَّجُلِ لَا يَجِدُ مَا يُنْفِقُ عَلَى أَهْلِهِ - قَالَ: يُفَرَّقُ بَيْنَهُمَا. أَخْرَجَهُ سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ: عَنْ سُفْيَانَ, عَنْ أَبِي الزِّنَادِ, عَنْهُ. قَالَ: فَقُلْتُ لِسَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ: سُنَّةٌ? فَقَالَ: سُنَّةٌ. وَهَذَا مُرْسَلٌ قَوِيَ

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ضعيف؛ لإرساله، وإن كان رجاله ثقات. رواه سعيد بن منصور (2/ 55/رقم 2022)

وعن سعيد بن المسيب - في الرجل لا يجد ما ينفق على اهله - قال: يفرق بينهما. اخرجه سعيد بن منصور: عن سفيان, عن ابي الزناد, عنه. قال: فقلت لسعيد بن المسيب: سنة? فقال: سنة. وهذا مرسل قوي - ضعيف؛ لارساله، وان كان رجاله ثقات. رواه سعيد بن منصور (2/ 55/رقم 2022)

হাদিসের মানঃ যঈফ (Dai'f)
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বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - যে স্বামী স্ত্রী থেকে দূরে থাকে এবং তাকে ভরনপোষন দেয় না

১১৪৮। উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি সৈন্যবাহিনীর পরিচালকবৃন্দের নিকট লিখেছিলেন, যেসব পুরুষ তাদের স্ত্রীদের থেকে দূরে থাকছে, তাদের ব্যাপারে যেন এ ব্যবস্থা গ্রহণ করা হয় যে, তারা তাদের স্ত্রীদের খোরপোষ আদায় করুক অথবা তালাক দিয়ে দিক যদি তালাকই দিয়ে দেয়। তবে তাদের আবদ্ধ রাখাকালীন খরচ বিবিদের নিকটে তারা পাঠিয়ে দিক।[1]

وَعَنْ عُمَرَ - رضي الله عنه - أَنَّهُ كَتَبَ إِلَى أُمَرَاءِ الْأَجْنَادِ فِي رِجَالٍ غَابُوا عَنْ نِسَائِهِمْ: أَنْ يَأْخُذُوهُمْ بِأَنَّ يُنْفِقُوا أَوْ يُطَلِّقُوا, فَإِنْ طَلَّقُوا بَعَثُوا بِنَفَقَةِ مَا حَبَسُوا. أَخْرَجَهُ الشَّافِعِيُّ. ثُمَّ الْبَيْهَقِيّ بِإِسْنَادِ حَسَنٌ


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رواه الشافعي (2/ 65/ رقم 213)، ومن طريقه البيهقي (7/ 469) أخبرنا مسلم بن خالد عن عبيد الله بن عمر، عن نافع، عن ابن عمر، عن عمر، به، قلت: ومسلم بن خالد: هو الزنجي، وهو كثير الأوهام

وعن عمر - رضي الله عنه - انه كتب الى امراء الاجناد في رجال غابوا عن نساىهم: ان ياخذوهم بان ينفقوا او يطلقوا, فان طلقوا بعثوا بنفقة ما حبسوا. اخرجه الشافعي. ثم البيهقي باسناد حسن - رواه الشافعي (2/ 65/ رقم 213)، ومن طريقه البيهقي (7/ 469) اخبرنا مسلم بن خالد عن عبيد الله بن عمر، عن نافع، عن ابن عمر، عن عمر، به، قلت: ومسلم بن خالد: هو الزنجي، وهو كثير الاوهام

হাদিসের মানঃ তাহকীক অপেক্ষমাণ
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - ভরনপোষনের স্তর এবং কে প্রথম পাওয়ার উপযুক্ত?

১১৪৯। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেনঃ কোন লোক নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর কাছে এসে বললো: আমার কাছে একটা দিনার (স্বর্ণমুদ্রা) রয়েছে। তিনি বললেন, তুমি ওটা তোমার জন্য ব্যবহার কর লোকটা বললো: আরো একটা আছে, তিনি বললেন, তুমি ওটা তোমার সন্তানের জন্য খরচ করা। লোকটি বললো, আমার কাছে আরো একটা আছে, তিনি বললেন, তুমি তা তোমার স্ত্রীর জন্য খরচ কর। লোকটি বললো: আমার নিকট আরো একটা আছে। তিনি বললেন, তুমি সেটা তোমাদের খাদিমের জন্য খরচ করো। লোকটি বললো, আমার নিকট আরো আছে। তিনি বললেন, সে প্রসঙ্গে তুমি বেশি জানো।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! عِنْدِي دِينَارٌ قَالَ: «أَنْفِقْهُ عَلَى نَفْسِكَ». قَالَ: عِنْدِي آخَرُ قَالَ: «أَنْفِقْهُ عَلَى وَلَدِكَ». قَالَ: عِنْدِي آخَرُ قَالَ: «أَنْفِقْهُ عَلَى أَهْلِكَ». قَالَ: عِنْدِي آخَرُ, قَالَ: «أَنْفِقُهُ عَلَى خَادِمِكَ». قَالَ عِنْدِي آخَرُ, قَالَ: «أَنْتَ أَعْلَمَ». أَخْرَجَهُ الشَّافِعِيُّ وَاللَّفْظُ لَهُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَأَخْرَجَهُ النَّسَائِيُّ وَالْحَاكِمُ بِتَقْدِيمِ الزَّوْجَةِ عَلَى الْوَلَدِ

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حسن. رواه الشافعي (2/ 63 - 64/ رقم 209)، وأبو داود (1691)، والنسائي (5/ 62)، والحاكم (1/ 415) من طريق محمد بن عجلان، عن المقبري، عن أبي هريرة، به. «تنبيه» هذا لفظ الشافعي. وزاد وحده أيضا: قال المقبري: ثم يقول أبو هريرة: إذا حدث بهذا الحديث: يقول ولدك: أنفق علي إلى من تكلني، تقول زوجتك: أنفق علي أو طلقني. يقول خادمك: أنفق علي أو بعني. وأما قول الحافظ في رواية النسائي والحاكم بتقديم الزوجة وعلى الولد فليس كذلك وإنما هذا للنسائي فقط، وأما الحاكم فهو كغيره بتقديم الولد على الزوجة

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: جاء رجل الى النبي - صلى الله عليه وسلم - فقال: يا رسول الله! عندي دينار قال: «انفقه على نفسك». قال: عندي اخر قال: «انفقه على ولدك». قال: عندي اخر قال: «انفقه على اهلك». قال: عندي اخر, قال: «انفقه على خادمك». قال عندي اخر, قال: «انت اعلم». اخرجه الشافعي واللفظ له, وابو داود, واخرجه النساىي والحاكم بتقديم الزوجة على الولد - حسن. رواه الشافعي (2/ 63 - 64/ رقم 209)، وابو داود (1691)، والنساىي (5/ 62)، والحاكم (1/ 415) من طريق محمد بن عجلان، عن المقبري، عن ابي هريرة، به. «تنبيه» هذا لفظ الشافعي. وزاد وحده ايضا: قال المقبري: ثم يقول ابو هريرة: اذا حدث بهذا الحديث: يقول ولدك: انفق علي الى من تكلني، تقول زوجتك: انفق علي او طلقني. يقول خادمك: انفق علي او بعني. واما قول الحافظ في رواية النساىي والحاكم بتقديم الزوجة وعلى الولد فليس كذلك وانما هذا للنساىي فقط، واما الحاكم فهو كغيره بتقديم الولد على الزوجة

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৩. ভরণপোষণের বিধান - মাতা-পিতার ভরণপোষণের দায়িত্ব নেওয়ার গুরুত্বারোপ

১১৫০। বাহয তার পিতা হাকীম হতে, তিনি তার দাদা (রাঃ) হতে, তিনি বলেছেন, আমি বললাম: হে আল্লাহর রাসূল! কল্যাণ সাধন করার ক্ষেত্রে কে উত্তম? তিনি বললেন, তোমার মা। তারপর কে? তিনি বলেন, তোমার মা। তারপর কে? বললেন: তোমার মা। তারপরে কে? বললেন তোমার পিতা। তারপর যে তোমার যত নিকটাত্মীয় সে তত তোমার কল্যাণের বেশি হক্বদার।[1]

وَعَنْ بَهْزِ بْنِ حَكِيمٍ, عَنْ أَبِيهِ, عَنْ جَدِّهِ قَالَ: قُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! مَنْ أَبَرُّ قَالَ: «أُمَّكَ». قُلْتُ: ثُمَّ مِنْ قَالَ: «أُمَّكَ». قُلْتُ: ثُمَّ مِنْ قَالَ: «أُمَّكَ». قُلْتُ: ثُمَّ مِنْ قَالَ: «أَبَاكَ, ثُمَّ الْأَقْرَبَ فَالْأَقْرَبَ». أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ وَحُسَّنَهُ

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حسن. رواه أبو داود (5139)، والترمذي، (1897)، وقال الثاني: حديث حسن

وعن بهز بن حكيم, عن ابيه, عن جده قال: قلت: يا رسول الله! من ابر قال: «امك». قلت: ثم من قال: «امك». قلت: ثم من قال: «امك». قلت: ثم من قال: «اباك, ثم الاقرب فالاقرب». اخرجه ابو داود, والترمذي وحسنه - حسن. رواه ابو داود (5139)، والترمذي، (1897)، وقال الثاني: حديث حسن

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - মা’ই সন্তান পালনের ব্যাপারে অধিক হাক্বদার যতক্ষণ সে অন্যত্র বিবাহ না করে

১১৫১। আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) হতে বর্ণিত; কোন এক রমণী এসে বললো: হে আল্লাহর রাসূল! আমার এ পুত্রের জন্য আমার পেট তার আধার, আমার স্তনদ্বয় তার জন্য মশক, আমার কোলই তাঁর আশ্রয় স্থল ছিল। তার পিতা আমাকে ত্বলাক (তালাক) দিয়েছে এবং আমার নিকট হতে তাকে ছিনিয়ে নেয়ার ইচ্ছা করছে। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ঐ মেয়েটিকে বললেন, তুমিই এ সন্তানের (পালনের) অধিক হাক্বদার যতক্ষণ তুমি অন্য স্বামী গ্ৰহণ না করবে।[1]

عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِوٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا; أَنَّ اِمْرَأَةً قَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ ابْنِي هَذَا كَانَ بَطْنِي لَهُ وِعَاءً, وَثَدْيِي لَهُ سِقَاءً, وَحِجْرِي لَهُ حِوَاءً, وَإِنَّ أَبَاهُ طَلَّقَنِي, وَأَرَادَ أَنْ يَنْتَزِعَهُ مِنِّي. فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَنْتِ أَحَقُّ بِهِ, مَا لَمْ تَنْكِحِي». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ الْحَاكِمُ

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حسن. رواه أحمد (282)، وأبو داود (2276)، والحاكم (207)، من طريق عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده. وقال الحاكم: «هذا حديث صحيح الإسناد». قلت: وحسبه التحسين للكلام المعروف في هذا السند

عن عبد الله بن عمرو رضي الله عنهما; ان امراة قالت: يا رسول الله! ان ابني هذا كان بطني له وعاء, وثديي له سقاء, وحجري له حواء, وان اباه طلقني, واراد ان ينتزعه مني. فقال لها رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «انت احق به, ما لم تنكحي». رواه احمد, وابو داود, وصححه الحاكم - حسن. رواه احمد (282)، وابو داود (2276)، والحاكم (207)، من طريق عمرو بن شعيب، عن ابيه، عن جده. وقال الحاكم: «هذا حديث صحيح الاسناد». قلت: وحسبه التحسين للكلام المعروف في هذا السند

হাদিসের মানঃ হাসান (Hasan)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - মাতা-পিতার বিচ্ছেদে সন্তানের যে কোন একজনকে বেছে নেওয়া

১১৫২। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত; কোন এক রমণী বলল: হে আল্লাহর রাসূল! আমার স্বামী আমার পুত্রকে নিয়ে যেতে চান আর ঐ পুত্র আমার উপকার করছে এবং ইনাবার কুয়া হতে আমাকে পানি এনে পান করাচ্ছে। তারপর তার স্বামী এসে গেল তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: হে বৎস! এটা তোমার পিতা আর এটা তোমার মাতা, তুমি তাদের যে কোন একজনের হাত ধরা বালকটি তার মা-এর হাত ধরলো। ফলে তার মা তাকে নিয়ে চলে গেল।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ امْرَأَةً قَالَتْ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنَّ زَوْجِي يُرِيدُ أَنْ يَذْهَبَ بِابْنِي, وَقَدْ نَفَعَنِي, وَسَقَانِي مِنْ بِئْرِ أَبِي عِنَبَةَ فَجَاءَ زَوْجُهَا, فَقَالَ النَّبِيُّ - صلى الله عليه وسلم: «يَا غُلَامُ! هَذَا أَبُوكَ، وَهَذِهِ أُمُّكَ, فَخُذْ بِيَدِ أَيُّهُمَا شِئْتَ». فَأَخَذَ بِيَدِ أُمِّهِ, فَانْطَلَقَتْ بِهِ. رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَالْأَرْبَعَةُ, وَصَحَّحَهُ التِّرْمِذِيُّ

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صحيح. رواه أحمد (246)، وأبو داود (2277)، والنسائي (685 - 186)، والترمذي (1357)، وابن ماجه (2351) ولفظ الترمذي: أن النبي صلى الله عليه وسلم خير غلاما بين أبيه وأمه. ولفظ ابن ماجه وأحمد، مثله، وزادا: «يا غلام هذا أبوك، وهذه أمك» وزاد أحمد: «اختر». وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». وفي الحديث قصة عند أبي داود: قال أبو ميمونة: بينما أنا جالس مع أبي هريرة جاءته امرأة فارسية معها ابن لها، فادعياه، وقد طلقها زوجها، فقالت: يا أبا هريرة! ورطنت له بالفارسية، زوجي يريد أن يذهب بابني، فقال أبو هريرة: استهما عليه، ورطن لها بذلك، فجاء زوجها، فقال: من يحاقني في ولدي؟ فقال أبو هريرة: اللهم إني لا أقول هذا إلا أني سمعت امرأة جاءت إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم وأنا قاعد عنده فقالت: يا رسول الله… الحديث. وفيه من قوله صلى الله عليه وسلم: «استهما عليه». قبل: تخيير الغلام

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - ان امراة قالت: يا رسول الله! ان زوجي يريد ان يذهب بابني, وقد نفعني, وسقاني من بىر ابي عنبة فجاء زوجها, فقال النبي - صلى الله عليه وسلم: «يا غلام! هذا ابوك، وهذه امك, فخذ بيد ايهما شىت». فاخذ بيد امه, فانطلقت به. رواه احمد, والاربعة, وصححه الترمذي - صحيح. رواه احمد (246)، وابو داود (2277)، والنساىي (685 - 186)، والترمذي (1357)، وابن ماجه (2351) ولفظ الترمذي: ان النبي صلى الله عليه وسلم خير غلاما بين ابيه وامه. ولفظ ابن ماجه واحمد، مثله، وزادا: «يا غلام هذا ابوك، وهذه امك» وزاد احمد: «اختر». وقال الترمذي: «حديث حسن صحيح». وفي الحديث قصة عند ابي داود: قال ابو ميمونة: بينما انا جالس مع ابي هريرة جاءته امراة فارسية معها ابن لها، فادعياه، وقد طلقها زوجها، فقالت: يا ابا هريرة! ورطنت له بالفارسية، زوجي يريد ان يذهب بابني، فقال ابو هريرة: استهما عليه، ورطن لها بذلك، فجاء زوجها، فقال: من يحاقني في ولدي؟ فقال ابو هريرة: اللهم اني لا اقول هذا الا اني سمعت امراة جاءت الى رسول الله صلى الله عليه وسلم وانا قاعد عنده فقالت: يا رسول الله… الحديث. وفيه من قوله صلى الله عليه وسلم: «استهما عليه». قبل: تخيير الغلام

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
বর্ণনাকারীঃ আবূ হুরায়রা (রাঃ)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - স্বামী/স্ত্রীর কেউ কাফির হলে সন্তান লালন-পালনের অধিকারী হওয়ার হুকুম

১১৫৩। রাফি’ ইবনু সিনান (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি ইসলাম ক্ববুল করলেন আর তার স্ত্রী ইসলাম ক্ববুল করতে অস্বীকার করে। এরূপ অবস্থায় নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (কাফিরা) মাকে এক প্রান্তে বসালেন এবং পিতাকে বসালেন এবং বালকটিকে দু’জনের মাঝে বসালেন। বালকটি তার মার দিকে ঝুঁকে পড়তে আরম্ভ করলে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এ বলে দু’য়া করলেন, হে আল্লাহ! তাকে সঠিক পথের সন্ধান দাও। তারপর সে তার পিতার দিকে অগ্রসর হলো, ফলে তার পিতা তাকে ধরে নিলো।[1]

وَعَنْ رَافِعِ بْنِ سِنَانٍ; أَنَّهُ أَسْلَمَ, وَأَبَتِ امْرَأَتُهُ أَنْ تُسْلِمَ. فَأَقْعَدَ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - الْأُمَّ نَاحِيَةً, وَالْأَبَ نَاحِيَةً, وَأَقْعَدَ الصَّبِيَّ بَيْنَهُمَا. فَمَالَ إِلَى أُمِّهِ, فَقَالَ: «اللَّهُمَّ اهْدِهِ». فَمَالَ إِلَى أَبِيهِ, فَأَخَذَهُ. أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالنَّسَائِيُّ, وَالْحَاكِمُ

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صحيح. رواه أبو داود (2244)، والنسائي (685)، والحاكم (206 - 213) وقال الحاكم: حديث صحيح الإسناد ولم يخرجاه

وعن رافع بن سنان; انه اسلم, وابت امراته ان تسلم. فاقعد النبي - صلى الله عليه وسلم - الام ناحية, والاب ناحية, واقعد الصبي بينهما. فمال الى امه, فقال: «اللهم اهده». فمال الى ابيه, فاخذه. اخرجه ابو داود, والنساىي, والحاكم - صحيح. رواه ابو داود (2244)، والنساىي (685)، والحاكم (206 - 213) وقال الحاكم: حديث صحيح الاسناد ولم يخرجاه

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - সন্তান লালন পালনের ব্যাপারে খালা মায়ের সমতুল্য

১১৫৪। বারা ইবনু আযিব (রাঃ) হতে বর্ণিত; নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হামযার কন্যা প্রসঙ্গে (দাবী উঠলে) খালার পক্ষে ফয়সালা দিলেন এবং বললেন, ’খালা মায়ের স্থান অধিকারিণী’।[1]

وَعَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَضَى فِي ابْنَةِ حَمْزَةَ لِخَالَتِهَا, وَقَالَ: «الْخَالَةُ بِمَنْزِلَةِ الْأُمِّ». أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

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صحيح. وهو قطعة من حديث رواه البخاري (2699)

وعن البراء بن عازب رضي الله عنهما; ان النبي - صلى الله عليه وسلم - قضى في ابنة حمزة لخالتها, وقال: «الخالة بمنزلة الام». اخرجه البخاري - صحيح. وهو قطعة من حديث رواه البخاري (2699)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - সন্তান লালন পালনের ব্যাপারে খালা মায়ের সমতুল্য

১১৫৫। ইমাম আহমাদ হাদীসটিকে আলি (রাঃ) হতে বর্ণনা করেছেন, তাতে আছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন: মেয়ে খালার নিকটে থাকবে, কেননা খালা মাতার সমতুল্য।[1]

وَأَخْرَجَهُ أَحْمَدُ: مِنْ حَدِيثِ عَلَيٍّ فَقَالَ: وَالْجَارِيَةُ عِنْدَ خَالَتِهَا, فَإِنَّ الْخَالَةَ وَالِدَةٌ

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صحيح. رواه أحمد (770)

واخرجه احمد: من حديث علي فقال: والجارية عند خالتها, فان الخالة والدة - صحيح. رواه احمد (770)

হাদিসের মানঃ সহিহ (Sahih)
পুনঃনিরীক্ষণঃ
বুলুগুল মারাম
পর্ব - ৮ঃ বিবাহ (كتاب النكاح) 8/ Marriage

পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - দাস, কর্মচারীর প্রতি দয়া প্ৰদৰ্শন করার ফযীলত

১১৫৬। আবূ হুরাইরা (রাঃ) হতে বর্ণিত; তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমাদের কারো খাদিম যখন তার খাবার নিয়ে আসে, তখন তাকে যদি সাথে না বসায় তাহলে সে যেন তাকে এক লুকমা বা দু’ লুকমা খাবার দেয়।[1]

وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِذَا أَتَى أَحَدَكُمْ خَادِمُهُ بِطَعَامِهِ, فَإِنْ لَمْ يُجْلِسْهُ مَعَهُ, فَلْيُنَاوِلْهُ لُقْمَةً أَوْ لُقْمَتَيْنِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِلْبُخَارِيِّ


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صحيح. رواه البخاري (5460)، ومسلم (1663)، ولمسلم: (أُكلة أو أُكلتين) وهي أيضا للبخاري، وفسرها أحد رواة مسلم بـ: «لقمة أو لقمتين». وزاد البخاري: «فإنه ولي حره وعلاجه» ولمسلم: حره ودخانه

وعن ابي هريرة - رضي الله عنه - قال: قال رسول الله - صلى الله عليه وسلم: «اذا اتى احدكم خادمه بطعامه, فان لم يجلسه معه, فليناوله لقمة او لقمتين». متفق عليه, واللفظ للبخاري - صحيح. رواه البخاري (5460)، ومسلم (1663)، ولمسلم: (اكلة او اكلتين) وهي ايضا للبخاري، وفسرها احد رواة مسلم بـ: «لقمة او لقمتين». وزاد البخاري: «فانه ولي حره وعلاجه» ولمسلم: حره ودخانه

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পরিচ্ছেদঃ ১৪. লালন-পালনের দায়িত্ব বহন - প্ৰাণীদের শাস্তি দেওয়া নিষেধ

১১৫৭। ইবনু উমার (রাঃ) হতে বর্ণিত; নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন: এক নারীকে একটি বিড়ালের কারণে আযাব দেয়া হয়েছিল। সে বিড়ালটিকে বেঁধে রেখেছিল। সে অবস্থায় বিড়ালটি মরে যায়। মহিলাটি ঐ কারণে জাহান্নামে গেল। কেননা সে বিড়ালটিকে খানা-পিনা কিছুই করাইনি এবং ছেড়েও দেয়নি যাতে সে যমীনের পোকা-মাকড় খেয়ে বেঁচে থাকত।[1]

وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا; عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «عُذِّبَتْ امْرَأَةٌ فِي هِرَّةٍ سَجَنَتْهَا حَتَّى مَاتَتْ, فَدَخَلْتِ النَّارَ فِيهَا, لَا هِيَ أَطْعَمَتْهَا وَسَقَتْهَا إِذْ هِيَ حَبَسَتْهَا, وَلَا هِيَ تَرَكَتْهَا, تَأْكُلُ مِنْ خَشَاشِ الْأَرْضِ». مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

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صحيح. رواه البخاري (3482)، ومسلم (2242)

وعن ابن عمر رضي الله عنهما; عن النبي - صلى الله عليه وسلم - قال: «عذبت امراة في هرة سجنتها حتى ماتت, فدخلت النار فيها, لا هي اطعمتها وسقتها اذ هي حبستها, ولا هي تركتها, تاكل من خشاش الارض». متفق عليه - صحيح. رواه البخاري (3482)، ومسلم (2242)

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